20 साल पुराने सरकारी आवास को खाली करने के नोटिस पर सियासी संग्राम, राबड़ी बोलीं- ‘किसी कीमत पर नहीं छोड़ेंगे बंगला’

राबड़ी

बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री और विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष राबड़ी देवी को पटना स्थित 10 सर्कुलर रोड के सरकारी आवास को खाली करने का तीसरा नोटिस जारी होने के बाद राज्य की राजनीति गरमा गई है।

बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री और विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष राबड़ी देवी को पटना स्थित 10 सर्कुलर रोड के सरकारी आवास को खाली करने का तीसरा नोटिस जारी होने के बाद राज्य की राजनीति गरमा गई है। भवन निर्माण विभाग की ओर से जारी इस नोटिस के बाद राबड़ी देवी ने साफ शब्दों में कहा है कि वे किसी भी कीमत पर यह आवास खाली नहीं करेंगी। वहीं सरकार का कहना है कि यह बंगला अब राज्य के मंत्री नंदकिशोर राम को आवंटित किया जा चुका है और नियमों के तहत इसे खाली कराना आवश्यक है।

इस विवाद ने बिहार की राजनीति में एक नया सियासी मोड़ ला दिया है। एक तरफ राष्ट्रीय जनता दल (RJD) इसे राजनीतिक प्रतिशोध बता रही है, तो दूसरी तरफ एनडीए सरकार इसे सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया करार दे रही है।

तीसरी बार मिला बंगला खाली करने का नोटिस

भवन निर्माण विभाग ने शुक्रवार को राबड़ी देवी को तीसरी बार नोटिस जारी करते हुए 10 सर्कुलर रोड स्थित सरकारी आवास खाली करने का निर्देश दिया। विभाग के अनुसार यह आवास अब डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन मंत्री नंदकिशोर राम को आवंटित किया जा चुका है।

विभाग का कहना है कि नवंबर 2025 में ही राबड़ी देवी को नेता प्रतिपक्ष के पद के अनुरूप 39 हार्डिंग रोड स्थित नया सरकारी आवास आवंटित कर दिया गया था। इसके बावजूद वे अब तक पुराने बंगले में रह रही हैं।

नोटिस जारी होने के बाद सचिवालय की एसडीपीओ अनु कुमारी पुलिस बल के साथ राबड़ी आवास पहुंचीं। हालांकि किसी तरह की कार्रवाई नहीं हुई और राबड़ी देवी ने अधिकारियों से बातचीत की।

राबड़ी देवी का सरकार को खुला चुनौतीपूर्ण जवाब

दिल्ली से पटना लौटने के बाद राबड़ी देवी ने मीडिया से बातचीत में कहा कि वे 10 सर्कुलर रोड का आवास किसी भी हालत में खाली नहीं करेंगी।

उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “सम्राट चौधरी नए-नए मुख्यमंत्री बने हैं। अगर उन्हें आवास खाली करवाना है तो फोर्स बुलाकर खाली करवा लें।”

राबड़ी देवी के इस बयान ने राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया है। राजद नेताओं का कहना है कि सरकार जानबूझकर लालू परिवार को निशाना बना रही है।

39 हार्डिंग रोड का बंगला पहले ही हो चुका है आवंटित

भवन निर्माण विभाग के अनुसार 25 नवंबर 2025 को जारी आदेश संख्या-122 के तहत राबड़ी देवी को पटना के 39 हार्डिंग रोड स्थित सरकारी आवास का आवंटन किया गया था।

विभाग का दावा है कि पिछले छह महीनों में कई बार उनसे अनुरोध किया गया कि वे नए आवास में स्थानांतरित हो जाएं। लेकिन अब तक उन्होंने 10 सर्कुलर रोड स्थित बंगला नहीं छोड़ा।

सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार नेता प्रतिपक्ष के तौर पर उन्हें नया आवास उपलब्ध कराया जा चुका है, इसलिए पुराने बंगले पर उनका अधिकार नहीं बनता।

20 साल से लालू परिवार का ठिकाना है 10 सर्कुलर रोड

पटना का 10 सर्कुलर रोड बंगला सिर्फ एक सरकारी आवास नहीं, बल्कि बिहार की राजनीति का एक अहम केंद्र माना जाता है। वर्ष 2005 में राबड़ी देवी को यह बंगला आवंटित किया गया था और तब से लालू यादव का परिवार यहीं रह रहा है।

राजद कार्यकर्ताओं और समर्थकों के लिए यह बंगला राजनीतिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र रहा है। कई बड़े राजनीतिक फैसले और चुनावी रणनीतियां इसी आवास से तय होती रही हैं।

यही कारण है कि बंगला खाली करने का मामला सिर्फ प्रशासनिक नहीं, बल्कि राजनीतिक और भावनात्मक मुद्दा भी बन गया है।

नोटिस पर राजद का हमला

राजद प्रवक्ता एजाज अहमद ने आरोप लगाया कि सरकार राजनीतिक द्वेष की भावना से काम कर रही है। उन्होंने कहा कि लालू यादव स्वास्थ्य जांच के लिए विदेश गए हुए हैं और ऐसे समय में नोटिस जारी करना सरकार की असंवेदनशीलता को दर्शाता है।

वहीं राजद के मुख्य प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव ने कहा कि दो-दो पूर्व मुख्यमंत्री इस आवास में रह रहे हैं। सरकार जानबूझकर राबड़ी देवी और राजद को अपमानित करने की कोशिश कर रही है।

राजद का आरोप है कि जनता के वास्तविक मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए इस विवाद को हवा दी जा रही है।

भाजपा और जदयू का पलटवार

भाजपा नेताओं ने इस मामले में राजद पर नियमों की अनदेखी करने का आरोप लगाया है।

भाजपा प्रवक्ता कुंतल कृष्ण ने कहा कि किसी भी सरकारी आवास पर किसी व्यक्ति का स्थायी अधिकार नहीं होता। सरकार कई बार अनुरोध कर चुकी है, लेकिन राबड़ी देवी ने नियमों का पालन नहीं किया।

एमएलसी प्रोफेसर नवल किशोर यादव ने भी कहा कि सरकारी आवास किसी की निजी संपत्ति नहीं होता। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद नीतीश कुमार ने भी निर्धारित समय में सरकारी आवास खाली कर दिया था।

एक महीने पहले भी मिला था नोटिस

यह पहला मौका नहीं है जब राबड़ी देवी को बंगला खाली करने के लिए कहा गया हो। करीब एक महीने पहले भी भवन निर्माण विभाग ने उन्हें नोटिस जारी किया था।

उस समय भी विभाग ने स्पष्ट किया था कि नेता प्रतिपक्ष के लिए 39 हार्डिंग रोड का आवास पहले ही आवंटित किया जा चुका है। सूत्रों के मुताबिक पिछले कुछ समय से बंगले को खाली करने की प्रक्रिया भी चल रही है और कुछ सामान दूसरे आवासों में शिफ्ट किया जा चुका है।

हालांकि आधिकारिक तौर पर लालू परिवार ने अभी तक बंगला छोड़ने के संकेत नहीं दिए हैं।

तेज प्रताप और रोहिणी के बयान भी चर्चा में

बंगला विवाद के बीच लालू परिवार के भीतर के घटनाक्रम भी चर्चा में रहे हैं। नोटिस मिलने के बाद तेज प्रताप यादव ने सोशल मीडिया पर भावुक पोस्ट लिखते हुए कहा था कि 28 वर्षों से जुड़े एक राजनीतिक और भावनात्मक अध्याय का अंत किया जा रहा है।

वहीं, लालू यादव को किडनी दान करने वाली बेटी रोहिणी आचार्य भी नवंबर 2025 में राबड़ी आवास छोड़कर चली गई थीं। उस दौरान उनके बयान ने भी राजनीतिक और पारिवारिक चर्चाओं को जन्म दिया था।

कैसे बना था ‘राबड़ी आवास’ बिहार की राजनीति का केंद्र?

राबड़ी देवी का राजनीतिक सफर 1997 में शुरू हुआ था, जब चारा घोटाला मामले में लालू यादव के खिलाफ कार्रवाई तेज हुई। गिरफ्तारी की आशंका के बीच लालू यादव ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देकर राबड़ी देवी को मुख्यमंत्री बनाया था।

इसके बाद राबड़ी देवी बिहार की राजनीति का प्रमुख चेहरा बन गईं। वर्ष 2005 में सत्ता से बाहर होने के बाद उन्हें 10 सर्कुलर रोड स्थित सरकारी आवास आवंटित किया गया था।

पिछले दो दशकों में यह बंगला लालू परिवार और राजद की राजनीतिक पहचान का हिस्सा बन गया। यही वजह है कि अब इस आवास को खाली कराने का मामला केवल सरकारी प्रक्रिया नहीं, बल्कि बिहार की राजनीति के बड़े प्रतीकों में से एक बन चुका है।

अब सबकी नजर सरकार की अगली कार्रवाई पर टिकी है। यदि राबड़ी देवी बंगला खाली नहीं करती हैं तो प्रशासन कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे कदम बढ़ा सकता है। दूसरी ओर राजद इस मुद्दे को राजनीतिक संघर्ष के रूप में पेश कर रही है।

बिहार विधानसभा चुनावों से पहले यह विवाद राज्य की राजनीति में बड़ा मुद्दा बन सकता है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह मामला प्रशासनिक कार्रवाई तक सीमित रहता है या फिर एक बड़े राजनीतिक टकराव का रूप लेता है।

Nishkarsh Bharat

पटना से भूमि आर्या की रिपोर्ट

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