भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले की न्यायिक जांच तेज, परिवार समेत छह गवाहों को समन
भोजपुर के बिलौटी गांव निवासी भरत भूषण तिवारी के कथित पुलिस एनकाउंटर मामले में न्यायिक जांच तेज हो गई है। आयोग ने परिवार के चार सदस्यों और दो प्रत्यक्षदर्शियों को गवाही के लिए समन जारी किया है।
भोजपुर जिले के बिलौटी गांव निवासी भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। 17 जून को हुए कथित पुलिस एनकाउंटर की न्यायिक जांच अब निर्णायक चरण में प्रवेश करती दिखाई दे रही है। राज्य सरकार द्वारा गठित न्यायिक जांच आयोग ने मामले में गवाहों के बयान दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके तहत मृतक के परिवार के चार सदस्यों और दो प्रत्यक्षदर्शियों को आयोग के समक्ष उपस्थित होने के लिए समन जारी किया गया है।
न्यायिक जांच आयोग का उद्देश्य घटना से जुड़े सभी पक्षों की बात सुनना, उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करना और तथ्यों के आधार पर निष्पक्ष रिपोर्ट तैयार करना है। आयोग की कार्रवाई से इस बहुचर्चित मामले में नए तथ्य सामने आने की उम्मीद जताई जा रही है।
परिवार के चार सदस्य और दो प्रत्यक्षदर्शी होंगे पेश
जगदीशपुर के एसडीपीओ पंकज कुमार मिश्रा ने आयोग के निर्देश पर छह प्रमुख गवाहों को समन जारी किया है। इनमें भरत भूषण तिवारी की मां आशा देवी, पिता काशीनाथ तिवारी, भाई चंदन तिवारी और भाभी सुमन देवी शामिल हैं। इन सभी को 11 जुलाई को आरा स्थित न्यायिक जांच आयोग के कार्यालय में उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया गया है।
इसके अलावा जवइनिया गांव के दो प्रत्यक्षदर्शियों को 13 जुलाई को आयोग के समक्ष उपस्थित होने के लिए कहा गया है। बताया गया है कि दोनों गवाह वर्तमान में पुनर्वास टाउनशिप में रह रहे हैं। आयोग ने सभी गवाहों से घटना से संबंधित तथ्य, घटनाक्रम और अपने-अपने अनुभव विस्तार से साझा करने को कहा है।
आरा में शुरू हुआ न्यायिक जांच आयोग का काम
मामले की जांच के लिए गठित न्यायिक जांच आयोग ने आरा में अपना कामकाज औपचारिक रूप से शुरू कर दिया है। जिला शिक्षा कार्यालय परिसर स्थित डीपीआरसी भवन में आयोग का कार्यालय संचालित किया जा रहा है।
हाल ही में आयोग के अध्यक्ष एवं पटना हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश विनोद कुमार सिन्हा स्वयं आरा पहुंचे थे। उन्होंने कार्यालय का निरीक्षण किया और जांच से जुड़ी तैयारियों की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष, पारदर्शी और साक्ष्यों पर आधारित होनी चाहिए।
निरीक्षण के बाद आयोग की ओर से गवाहों को समन जारी करने की प्रक्रिया तेज कर दी गई, जिससे स्पष्ट संकेत मिला कि अब जांच सक्रिय चरण में पहुंच चुकी है।
क्या है भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामला?
17 जून को भोजपुर जिले के बिलौटी गांव निवासी भरत भूषण तिवारी शाहपुर थाना क्षेत्र में पुलिस और अपराधियों के बीच हुई कथित मुठभेड़ के दौरान गोली लगने से गंभीर रूप से घायल हो गए थे। उन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई।
घटना के बाद पुलिस ने दावा किया कि भरत तिवारी पुलिस मुठभेड़ में घायल हुए थे और पूरी कार्रवाई कानून के तहत की गई थी। वहीं दूसरी ओर मृतक के परिजनों ने पुलिस के इस दावे को पूरी तरह खारिज करते हुए इसे फर्जी एनकाउंटर बताया। परिवार का आरोप है कि भरत तिवारी की हत्या को मुठभेड़ का रूप दिया गया और निष्पक्ष जांच के बिना सच्चाई सामने नहीं आएगी।
यही कारण था कि मामले ने जल्द ही राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर व्यापक चर्चा का रूप ले लिया।
राज्य सरकार ने गठित किया न्यायिक जांच आयोग
मामले की गंभीरता और बढ़ते विवाद को देखते हुए बिहार सरकार ने इस पूरे घटनाक्रम की न्यायिक जांच कराने का निर्णय लिया। सरकार ने पटना हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश विनोद कुमार सिन्हा की अध्यक्षता में एक सदस्यीय न्यायिक जांच आयोग का गठन किया।
आयोग को घटना से जुड़े सभी तथ्यों, पुलिस कार्रवाई, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान, दस्तावेजी साक्ष्य और अन्य उपलब्ध प्रमाणों का परीक्षण कर रिपोर्ट सौंपने की जिम्मेदारी दी गई है।
सरकार का उद्देश्य इस जांच के माध्यम से यह स्पष्ट करना है कि घटना के दौरान पुलिस की कार्रवाई निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप थी या नहीं तथा परिजनों द्वारा लगाए गए आरोपों में कितना तथ्य है।
गवाहों के बयान होंगे जांच का अहम आधार
किसी भी न्यायिक जांच में प्रत्यक्षदर्शियों और संबंधित पक्षों के बयान बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं। ऐसे में भरत तिवारी के परिवार और घटनास्थल से जुड़े गवाहों की गवाही आयोग के लिए अहम साबित हो सकती है।
आयोग इन बयानों की तुलना उपलब्ध दस्तावेजों, पुलिस रिकॉर्ड, मेडिकल रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों से करेगा। यदि आवश्यक हुआ तो आगे और लोगों को भी गवाही के लिए बुलाया जा सकता है।
कानूनी जानकारों का मानना है कि न्यायिक आयोग की रिपोर्ट भविष्य में इस मामले की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
निष्पक्ष जांच पर टिकी सबकी नजर
भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामला केवल एक पुलिस कार्रवाई का मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह कानून व्यवस्था, पुलिस जवाबदेही और न्यायिक प्रक्रिया से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा बन चुका है। ऐसे मामलों में न्यायिक जांच का उद्देश्य किसी पक्ष को दोषी या निर्दोष घोषित करना नहीं, बल्कि उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर तथ्यों का निष्पक्ष परीक्षण करना होता है।
आयोग की ओर से गवाहों के बयान दर्ज किए जाने की शुरुआत इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। आने वाले दिनों में अन्य गवाहों, संबंधित अधिकारियों और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच के बाद आयोग अपनी रिपोर्ट तैयार करेगा। इस रिपोर्ट के आधार पर आगे की प्रशासनिक या कानूनी कार्रवाई का रास्ता तय हो सकता है।
फिलहाल, पूरे मामले पर पीड़ित परिवार, प्रशासन, राजनीतिक दलों और आम लोगों की नजर बनी हुई है। सभी को उम्मीद है कि न्यायिक जांच के जरिए घटना से जुड़े सभी तथ्यों का निष्पक्ष खुलासा होगा और सच्चाई सामने आएगी।
पटना से भूमि आर्या की रिपोर्ट
