गंगा का जलस्तर 32.16 मीटर पहुंचा, गांवों के मुहाने तक पानी; बाढ़ की आहट से सहमे ग्रामीण
भागलपुर में गंगा का जलस्तर 32.16 मीटर पहुंचा, गांवों के मुहाने तक पानी। खेत डूबने लगे, बाढ़ की आहट से ग्रामीण सहमे।
निष्कर्ष भारत संवाददाता भागलपुर। बिहार के भागलपुर में गंगा नदी के लगातार बढ़ते जलस्तर ने तटवर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ा दी है। नदी का पानी अब खेतों को डुबोते हुए कई गांवों के मुहाने तक पहुंचने लगा है। निचले इलाकों में पानी फैलने से सब्जी और मक्का की फसल प्रभावित होने लगी है। जलस्तर में लगातार वृद्धि के कारण ग्रामीणों को अब बाढ़ की आशंका सताने लगी है।
गुरुवार सुबह भागलपुर में गंगा का जलस्तर 32.16 मीटर दर्ज किया गया। बाढ़ आपदा प्रबंधन विभाग के कार्यपालक अभियंता आदित्य प्रकाश के अनुसार, बुधवार से नदी का जलस्तर करीब एक सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रहा है। विभाग की टीम लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है।
चेतावनी स्तर से महज 52 सेंटीमीटर नीचे गंगा
भागलपुर में गंगा का चेतावनी स्तर 32.68 मीटर निर्धारित है, जबकि खतरे का निशान 33.68 मीटर है। गुरुवार सुबह 32.16 मीटर जलस्तर दर्ज होने के बाद गंगा चेतावनी स्तर से सिर्फ 52 सेंटीमीटर नीचे रह गई है।
वहीं, नदी अभी खतरे के निशान से 1.52 मीटर नीचे बह रही है। भागलपुर में अब तक दर्ज उच्चतम बाढ़ स्तर (HFL) 34.86 मीटर रहा है।
जलस्तर जिस गति से बढ़ रहा है, अगर करीब एक सेंटीमीटर प्रति घंटे की वृद्धि लगातार बनी रही तो सैद्धांतिक रूप से चेतावनी स्तर तक पहुंचने में लगभग 52 घंटे लग सकते हैं। हालांकि, नदी का जलस्तर हर घंटे एक समान गति से बढ़े, यह जरूरी नहीं है। बारिश, ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों से आने वाले पानी और नदी की मौजूदा परिस्थितियों के कारण जलस्तर बढ़ने की रफ्तार में बदलाव हो सकता है।
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खेतों में घुसा गंगा का पानी
गंगा के बढ़ते जलस्तर का सबसे पहला असर निचले इलाकों के खेतों पर पड़ा है। बरारी, रजंदीपुर, फरका, बाबूपुर, घोषपुर, इंग्लिश, मासाढ़ू, ममलखा, शंकरपुर और अठगामा समेत कई गांवों के आसपास के निचले खेत पानी में डूबने लगे हैं।
कई खेतों में सब्जी और मक्का की फसल तैयार हो रही थी, लेकिन अचानक पानी फैलने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। किसानों को तैयार फसल के नुकसान की आशंका है। खेतों में पानी भरने से केवल तत्काल आर्थिक नुकसान ही नहीं, बल्कि आने वाले दिनों में खेती की गतिविधियां भी प्रभावित होने की संभावना है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि जलस्तर इसी तरह बढ़ता रहा तो खेतों के बाद गांवों के रिहायशी इलाकों पर भी इसका असर पड़ सकता है।

फसल के बाद अब पशुचारे का संकट
बाढ़ का असर केवल फसलों तक सीमित नहीं है। खेतों और आसपास के इलाकों में पानी भरने के कारण पशुओं के लिए हरे चारे की उपलब्धता भी प्रभावित होने लगी है।
ग्रामीणों को डर है कि यदि पानी और बढ़ा तो पशुओं को सुरक्षित स्थान पर रखने के साथ-साथ उनके लिए चारा जुटाना भी बड़ी चुनौती बन जाएगा। ऐसे में ग्रामीण परिवार अभी से पशुचारा और जरूरी सामान सुरक्षित स्थानों पर रखने की तैयारी कर रहे हैं।
निचले इलाकों में रहने वाले कुछ परिवारों ने घर छोड़कर ऊंचे स्थानों पर जाने की तैयारी भी शुरू कर दी है। हालांकि फिलहाल व्यापक स्तर पर विस्थापन की स्थिति नहीं बनी है।
गांवों के मुहाने तक पहुंचा पानी
गंगा का पानी बरारी, रजंदीपुर, फरका, बाबूपुर, घोषपुर, इंग्लिश, मासाढ़ू, ममलखा, शंकरपुर और अठगामा सहित कई गांवों के आसपास फैल रहा है। अभी पानी मुख्य रूप से निचले क्षेत्रों और खेतों में दिखाई दे रहा है, लेकिन गांवों के मुहाने तक पहुंचने के कारण ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है।
तटवर्ती इलाकों में रहने वाले लोग लगातार नदी के जलस्तर पर नजर रख रहे हैं। निचले स्थानों पर रहने वाले परिवार अनाज, जरूरी दस्तावेज, घरेलू सामान, पशुचारा और अन्य आवश्यक वस्तुओं को सुरक्षित जगहों पर रखने की तैयारी कर रहे हैं।
ग्रामीणों की सबसे बड़ी चिंता यह है कि अगर रात के समय जलस्तर तेजी से बढ़ा तो घरों से सुरक्षित स्थानों तक पहुंचने में परेशानी हो सकती है।
आपदा प्रबंधन विभाग अलर्ट
संभावित बाढ़ की स्थिति को देखते हुए आपदा प्रबंधन विभाग भी सतर्क है। अधिकारियों की नजर गंगा के जलस्तर और तटवर्ती इलाकों की स्थिति पर बनी हुई है।
जरूरत पड़ने पर प्रभावित क्षेत्रों में नाव, राहत सामग्री और अन्य आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने की तैयारी रखी जा रही है। प्रशासन जलस्तर की वृद्धि और प्रभावित इलाकों की स्थिति के आधार पर आगे के कदम उठाएगा।
अधिकारियों के अनुसार, फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है और लगातार निगरानी की जा रही है। लोगों को घबराने के बजाय सतर्क रहने और प्रशासन की ओर से जारी निर्देशों का पालन करने की जरूरत है।
अभी खतरे के निशान से नीचे, लेकिन बढ़ रही चिंता
भागलपुर में गंगा फिलहाल खतरे के निशान से नीचे बह रही है, लेकिन चेतावनी स्तर से महज 52 सेंटीमीटर की दूरी ने तटवर्ती इलाकों में चिंता बढ़ा दी है। लगातार बढ़ता जलस्तर, खेतों में घुसता पानी और गांवों के करीब पहुंचती नदी ग्रामीणों के लिए संभावित बाढ़ का संकेत बन रही है।
आने वाले घंटों में गंगा का जलस्तर किस गति से बढ़ता है, यह स्थिति के लिए सबसे महत्वपूर्ण होगा। बारिश और ऊपरी क्षेत्रों से आने वाले पानी के प्रवाह पर भी प्रशासन की नजर है।
फिलहाल किसानों की चिंता डूबती फसल को लेकर है, जबकि पशुपालकों के सामने चारे का संकट खड़ा होने लगा है। वहीं निचले इलाकों में रहने वाले परिवार अब घर और पशुधन की सुरक्षा को लेकर तैयारियां कर रहे हैं।
पटना से किट्टू सिंह का रिपोर्ट
