मुजफ्फरपुर में मिड-डे मील में छिपकली, 31 बच्चे बीमार; मची अफरा-तफरी
मिड-डे मील में छिपकली मिलने से 31 बच्चों के परिजन परेशान हुए
निष्कर्ष भारत संवाददाता मुजफ्फरपुर। जिले में मिड-डे मील को लेकर मंगलवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब साहेबगंज प्रखंड के राजकीय प्राथमिक विद्यालय पिपरा असली में बच्चों को परोसे जा रहे भोजन में मरी हुई छिपकली मिली। छिपकली मिलने से पहले स्कूल के 31 बच्चे खाना खा चुके थे। जानकारी सामने आते ही स्कूल में अफरा-तफरी मच गई और बच्चों के परिजन उन्हें लेकर साहेबगंज पीएचसी पहुंचने लगे।
मामला राजेपुर ओपी थाना क्षेत्र का है। घटना के बाद भोजन वितरण तत्काल रोक दिया गया। अस्पताल में बच्चों की चिकित्सकीय जांच की गई। राहत की बात यह रही कि किसी भी बच्चे की हालत गंभीर नहीं मिली। कुछ बच्चों ने पेट दर्द की शिकायत की, जिसके बाद उन्हें आवश्यक दवा दी गई।
मिड-डे मील में छिपकली मिलने से मचा हड़कंप
स्कूल में रोज की तरह मंगलवार को भी बच्चों के लिए मिड-डे पहुंचा था। भोजन परोसने की प्रक्रिया चल रही थी। इसी दौरान एक बच्चे या स्कूल कर्मी की नजर खाने में पड़ी मरी हुई छिपकली पर गई। इसके बाद स्कूल प्रबंधन ने तुरंत भोजन बांटना बंद कर दिया।

हालांकि, तब तक कई बच्चे भोजन कर चुके थे। स्कूल प्रबंधन के मुताबिक 31 छात्र-छात्राओं ने खाना खा लिया था। घटना की जानकारी मिलते ही बच्चों के परिवारों तक खबर पहुंची और बड़ी संख्या में अभिभावक स्कूल पहुंच गए।
मिड-डे मील खाते ही परिवारों में बढ़ी चिंता
बच्चों के मिड-डे में छिपकली मिलने की जानकारी फैलते ही अभिभावकों में चिंता बढ़ गई। परिजन अपने बच्चों को लेकर साहेबगंज प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे। अचानक बड़ी संख्या में बच्चों के पहुंचने से अस्पताल परिसर में भी कुछ देर के लिए अफरा-तफरी की स्थिति बन गई।
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पीएचसी प्रभारी के अनुसार स्कूल प्रबंधन की ओर से 39 बच्चों को अस्पताल लाया गया। सभी की चिकित्सकीय जांच की गई। इनमें कुछ बच्चों ने पेट दर्द की शिकायत की, जिन्हें आवश्यक दवा दी गई। चिकित्सकों ने जांच के बाद किसी बच्चे की हालत गंभीर नहीं बताई।
सभी बच्चों की हालत सामान्य
अस्पताल में जांच के बाद बच्चों के सुरक्षित होने की जानकारी मिलने पर परिजनों ने राहत की सांस ली। किसी बच्चे को गंभीर स्थिति में भर्ती कराने की जरूरत नहीं पड़ी।
घटना के बाद स्कूल प्रबंधन की ओर से भी बच्चों की स्थिति पर नजर रखी गई। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार सभी बच्चे सुरक्षित हैं। हालांकि भोजन में मरी हुई छिपकली मिलने की घटना ने अभिभावकों की चिंता जरूर बढ़ा दी है।
प्रधान शिक्षक ने बनाया घटना का वीडियो
स्कूल के प्रधान शिक्षक ने बताया कि बच्चों के लिए रोज की तरह मिड-डे आया था। खाना परोसने के दौरान उसमें छिपकली दिखाई दी। इसके बाद भोजन का वितरण रोक दिया गया।

प्रधान शिक्षक के मुताबिक पूरे घटनाक्रम का वीडियो भी बनाया गया है। उन्होंने इसे घटना से संबंधित साक्ष्य के तौर पर सुरक्षित रखने की बात कही है। इसके बाद बच्चों को चिकित्सकीय जांच के लिए साहेबगंज पीएचसी ले जाया गया।
मिड-डे मील की गुणवत्ता पर उठे सवाल
स्कूल में भोजन के अंदर मरी हुई छिपकली मिलने की घटना ने सरकारी स्कूलों में बच्चों को दिए जाने वाले मिड-डे मील की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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अभिभावकों का कहना है कि स्कूलों में बच्चों को मिड-डे उपलब्ध कराने का उद्देश्य उन्हें पौष्टिक आहार देना है। ऐसे में भोजन में किसी जीव के पाए जाने जैसी घटना लापरवाही की ओर इशारा करती है। उनका कहना है कि भोजन बच्चों को परोसने से पहले उसकी गुणवत्ता और स्वच्छता की पर्याप्त जांच होनी चाहिए।
इस घटना में किसी बच्चे की हालत गंभीर नहीं हुई, लेकिन अभिभावकों में नाराजगी बनी हुई है। उनका सवाल है कि आखिर भोजन में छिपकली कैसे पहुंची और बच्चों को खाना परोसने से पहले भोजन की जांच किस स्तर पर की गई।
भोजन की जांच और निगरानी पर उठे सवाल
मिड-डे मील की आपूर्ति से लेकर बच्चों को भोजन परोसने तक कई स्तरों पर निगरानी की जरूरत होती है। भोजन तैयार होने, स्कूल तक पहुंचने और बच्चों को परोसे जाने के दौरान स्वच्छता का ध्यान रखना जरूरी है।
पिपरा असली स्कूल की घटना के बाद इसी व्यवस्था की जांच की मांग उठ रही है। यदि भोजन में छिपकली पहले ही दिखाई दे गई, तो यह भी जांच का विषय है कि उससे पहले भोजन की गुणवत्ता की जांच हुई थी या नहीं।
जांच के बाद तय होगी जिम्मेदारी
घटना के वास्तविक कारण और जिम्मेदारी को लेकर अभी तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है। यह पता लगाना जरूरी होगा कि भोजन तैयार करने से लेकर स्कूल पहुंचने तक किन परिस्थितियों में छिपकली उसमें पहुंची।
जांच में भोजन की आपूर्ति करने वाली व्यवस्था, स्कूल में भोजन के रखरखाव और वितरण से जुड़े पहलुओं को शामिल किया जा सकता है। इसके बाद ही यह तय हो सकेगा कि लापरवाही किस स्तर पर हुई।
फिलहाल सबसे बड़ी राहत यही है कि अस्पताल में जांच के दौरान किसी भी बच्चे की हालत गंभीर नहीं मिली। कुछ बच्चों को पेट दर्द की शिकायत हुई, लेकिन चिकित्सकीय देखरेख के बाद उनकी स्थिति सामान्य बताई गई।
मुजफ्फरपुर के पिपरा असली स्कूल की यह घटना बच्चों को दिए जाने वाले भोजन की सुरक्षा और गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल छोड़ गई है। अब अभिभावकों की नजर इस बात पर है कि मामले की जांच किस स्तर पर होती है और भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न हो, इसके लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।
राज कुमार की रिपोर्ट
