लाउडस्पीकर का तेज शोर अब नहीं सहना पड़ेगा, एक कॉल पर पहुंचेगी शिकायत

पटना हाईकोर्ट

पटना हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: शोर मचाने वालों की अब 112 पर होगी शिकायत

निष्कर्ष भारत संवाददाता-पटना: डीजे, लाउडस्पीकर और अन्य माध्यमों से होने वाले अत्यधिक शोर से परेशान लोगों के लिए पटना हाईकोर्ट से बड़ी राहत की खबर सामने आई है। अब बिहार में ध्वनि प्रदूषण की शिकायत सीधे डायल-112 पर की जा सकेगी। पुलिस प्रशासन ने डायल-112 आपातकालीन सेवा को ध्वनि प्रदूषण से जुड़ी शिकायतों के निस्तारण की व्यवस्था से जोड़ दिया है।

पटना हाईकोर्ट ने इस कदम की सराहना करते हुए स्पष्ट किया है कि ध्वनि प्रदूषण केवल सामान्य असुविधा का विषय नहीं है, बल्कि इसका असर लोगों के स्वास्थ्य और जीवन की गुणवत्ता पर भी पड़ता है। अदालत ने विशेष रूप से बुजुर्गों, बच्चों और गर्भवती महिलाओं को अत्यधिक शोर से होने वाली परेशानी का उल्लेख किया।

इस व्यवस्था के बाद अब तेज आवाज में बज रहे डीजे, लाउडस्पीकर या किसी अन्य स्रोत से होने वाले ध्वनि प्रदूषण की जानकारी नागरिक बिना किसी झिझक के 112 नंबर पर देकर कार्रवाई की मांग कर सकेंगे।

सुरेंद्र प्रसाद बनाम बिहार सरकार मामले में हुई सुनवाई

यह महत्वपूर्ण निर्देश न्यायाधीश राजीव राय की अदालत में सुरेंद्र प्रसाद बनाम बिहार सरकार मामले की सुनवाई के दौरान सामने आया।

पटना हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अदालत को ध्वनि प्रदूषण की शिकायतों से निपटने के लिए की गई व्यवस्था की जानकारी दी गई। सरकार की ओर से उपलब्ध कराई गई जानकारी को रिकॉर्ड पर लेने के बाद हाईकोर्ट ने आवश्यक दिशानिर्देशों के साथ मामले में दायर याचिका का निस्तारण कर दिया।

पटना हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी न्यायिक निर्देश या सरकारी व्यवस्था की सफलता केवल आदेश जारी होने से तय नहीं होती। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि संबंधित एजेंसियां उन आदेशों का वास्तविक और नियमित रूप से पालन करें।

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शिकायतकर्ता की पहचान गोपनीय रखने पर जोर

ध्वनि प्रदूषण की शिकायत करने वाले लोगों के सामने अक्सर एक बड़ी समस्या यह होती है कि उन्हें अपनी पहचान उजागर होने का डर रहता है। कई बार पड़ोस, मोहल्ले या स्थानीय विवाद के कारण लोग तेज आवाज और शोर की शिकायत करने से बचते हैं।

इसी मुद्दे को ध्यान में रखते हुए पटना हाईकोर्ट ने शिकायतकर्ता की पहचान गोपनीय रखने की व्यवस्था पर विशेष जोर दिया है।

इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी व्यक्ति बिना डर या दबाव के ध्वनि प्रदूषण की शिकायत कर सके। अदालत का मानना है कि यदि नागरिक खुलकर प्रशासन को सही जानकारी देंगे, तो कानून का पालन अधिक प्रभावी तरीके से कराया जा सकेगा।

सूचना मिलते ही संबंधित एजेंसियां करेंगी कार्रवाई

पटना हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से सरकारी अधिवक्ता प्रशांत प्रताप ने अदालत को बताया कि नागरिक तेज आवाज में बज रहे डीजे, लाउडस्पीकर और अन्य माध्यमों से होने वाले ध्वनि प्रदूषण की शिकायत अब डायल-112 पर दर्ज करा सकते हैं।

सरकार की ओर से अदालत को आश्वासन दिया गया कि सूचना मिलने के बाद संबंधित पुलिस और प्रवर्तन एजेंसियां मामले में आवश्यक कार्रवाई करेंगी।

इस नई व्यवस्था से खासतौर पर उन लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है, जो शादी समारोह, धार्मिक आयोजनों, पार्टियों, सार्वजनिक कार्यक्रमों या अन्य अवसरों पर देर रात तक होने वाले तेज शोर से परेशान रहते हैं।

अब लोगों के पास शिकायत दर्ज कराने के लिए एक स्पष्ट माध्यम उपलब्ध होगा।

बुजुर्गों, बच्चों और गर्भवती महिलाओं को विशेष परेशानी

पटना हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि अत्यधिक ध्वनि प्रदूषण का असर समाज के सभी वर्गों पर पड़ता है, लेकिन कुछ लोगों को इससे विशेष परेशानी हो सकती है।

अदालत ने कहा कि बुजुर्ग, छोटे बच्चे और गर्भवती महिलाएं अत्यधिक शोर से अधिक प्रभावित हो सकती हैं। ऐसे लोगों को अनावश्यक और तेज आवाज से बचाना पुलिस तथा संबंधित प्रवर्तन एजेंसियों की जिम्मेदारी है।

तेज आवाज केवल नींद और मानसिक शांति को प्रभावित नहीं करती, बल्कि लंबे समय तक लगातार शोर लोगों के दैनिक जीवन को भी प्रभावित कर सकता है। यही वजह है कि अदालत ने ध्वनि प्रदूषण के नियमों के प्रभावी अनुपालन की जरूरत पर जोर दिया।

डायल-112 को ध्वनि प्रदूषण से जोड़ने के कदम की सराहना

पटना हाईकोर्ट ने बिहार पुलिस प्रशासन द्वारा डायल-112 सेवा को ध्वनि प्रदूषण की शिकायतों से जोड़ने के फैसले की सराहना की।

अदालत ने कहा कि प्रशासनिक व्यवस्था तभी प्रभावी होगी, जब उसे नियमित कार्यप्रणाली का हिस्सा बनाकर जमीन पर लागू किया जाए। कोर्ट ने नागरिकों से भी अपील की कि वे ध्वनि प्रदूषण जैसी समस्याओं की शिकायत करने में संकोच न करें।

सुनवाई के दौरान एक रिपोर्ट का भी उल्लेख किया गया, जिसमें प्रशासन को न्यायालय के निर्देशों को अपनी नियमित कार्यप्रणाली में शामिल कर सख्ती से लागू करने की जरूरत बताई गई थी।

कोर्ट का संदेश साफ था कि केवल नियम और आदेश बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनका प्रभावी क्रियान्वयन भी जरूरी है।

नागरिकों की सूचना से होगा कानून का बेहतर पालन

हाईकोर्ट ने कहा कि प्रशासन को कानून लागू करने में नागरिकों की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। सही समय पर मिलने वाली सूचना से पुलिस और अन्य एजेंसियां तेजी से कार्रवाई कर सकती हैं।

अदालत ने लोगों से अपील की कि यदि कहीं डीजे, लाउडस्पीकर या अन्य माध्यमों से अत्यधिक शोर हो रहा है और इससे आम लोगों को परेशानी हो रही है, तो वे इसकी जानकारी संबंधित व्यवस्था के माध्यम से दें।

नागरिकों की शिकायतों के आधार पर ही प्रशासन ध्वनि प्रदूषण से जुड़े नियमों का प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित कर सकता है।

बिहार में ध्वनि प्रदूषण के खिलाफ कार्रवाई की नई व्यवस्था

पटना हाईकोर्ट के इस फैसले और राज्य सरकार की ओर से दी गई जानकारी के बाद बिहार में ध्वनि प्रदूषण से परेशान लोगों के लिए एक नई और आसान व्यवस्था सामने आई है।

अब किसी इलाके में तेज आवाज में डीजे बजने, लाउडस्पीकर के अत्यधिक उपयोग या अन्य किसी स्रोत से असहनीय शोर होने पर लोग डायल-112 के माध्यम से शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

शिकायतकर्ता की पहचान गोपनीय रखने पर जोर दिए जाने से लोगों को बिना किसी डर के आगे आने में मदद मिल सकती है।

पटना हाईकोर्ट ने सरकार के आश्वासन और प्रशासनिक व्यवस्था को रिकॉर्ड पर लेने के बाद याचिका का निस्तारण कर दिया। हालांकि, पटना हाईकोर्ट ने यह भी साफ कर दिया कि इस व्यवस्था की असली सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि पुलिस और प्रवर्तन एजेंसियां शिकायत मिलने के बाद कितनी गंभीरता और नियमितता से कार्रवाई करती हैं।

अब तेज डीजे और लाउडस्पीकर से परेशान लोगों के लिए संदेश साफ है—शोर से परेशानी हो तो चुप न रहें, डायल-112 पर शिकायत करें।

Nishkarsh Bharat

भूमि आर्या की रिपोर्ट

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