13 जिलों में बाढ़ का कहर, पटना में खतरे के करीब पहुंची गंगा
पटना में खतरे के करीब पहुंची गंगा
निष्कर्ष भारत संवाददाता-पटना: बिहार में बाढ़ की स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है। राज्य की 8 प्रमुख नदियां उफान पर हैं और पटना समेत करीब 13 जिलों में बाढ़ का संकट बना हुआ है। गंगा के साथ-साथ पुनपुन और दरधा जैसी नदियों के बढ़ते जलस्तर ने कई इलाकों में लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। निचले इलाकों में पानी फैलने के कारण बड़ी संख्या में लोग विस्थापित होकर सुरक्षित स्थानों, सामुदायिक भवनों, स्कूलों और सड़क किनारे शरण लेने को मजबूर हैं।
पटना के अलावा बक्सर, मुंगेर और भागलपुर में गंगा का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर चुका है। भोजपुर, बेतिया, बेगूसराय, खगड़िया, रोहतास और जहानाबाद समेत कई जिलों में भी बाढ़ का असर देखा जा रहा है। जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग लगातार हालात की निगरानी कर रहे हैं। प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्य तेज कर दिया गया है।
पटना में बढ़ा गंगा का दबाव, सुरक्षा दीवार के सभी 108 गेट बंद
राजधानी पटना में गंगा का बढ़ता जलस्तर प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चिंता बना हुआ है। गांधी घाट, दीघा और हाथीदह समेत कई स्थानों पर नदी का पानी लगातार ऊंचा बना हुआ है। संभावित खतरे को देखते हुए शहर में गंगा का पानी प्रवेश करने से रोकने के लिए शहरी सुरक्षा दीवार के सभी 108 गेट बंद कर दिए गए हैं।
जिलाधिकारी, नगर आयुक्त और अन्य प्रशासनिक अधिकारियों ने शहर के संवेदनशील इलाकों का निरीक्षण कर स्थिति का जायजा लिया। आपदा प्रबंधन विभाग ने भी लोगों को सतर्क रहने की अपील की है। नदी घाटों और तटबंधों के पास जाने से बचने की सलाह दी गई है।
जल संसाधन विभाग की रिपोर्ट के अनुसार पटना के मनेर में गंगा का जलस्तर करीब 53.46 मीटर तक पहुंच गया है। यहां उच्चतम बाढ़ स्तर 53.79 मीटर है, यानी जलस्तर रिकॉर्ड स्तर से करीब 33 सेंटीमीटर नीचे पहुंच चुका है। प्रशासन की चिंता इस बात को लेकर है कि अगर पानी बढ़ने की रफ्तार दोबारा तेज हुई तो पुराने रिकॉर्ड के करीब स्थिति पहुंच सकती है।
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गंगा के साथ पुनपुन और दरधा ने भी बढ़ाई मुश्किल
पटना जिले में सिर्फ गंगा ही नहीं, बल्कि पुनपुन और दरधा नदियों का उफान भी कई इलाकों के लिए खतरा बन गया है। दक्षिणी पटना में पुनपुन श्रीपालपुर में खतरे के निशान से करीब 2.29 मीटर ऊपर पहुंच चुकी है, जबकि दरधा नदी कोल्हाचक में खतरे के निशान से लगभग 3.07 मीटर ऊपर बह रही है।
दोनों नदियों के बढ़ते पानी ने जिले के कई गांवों को प्रभावित किया है। मोकामा का जंजीरा दियारा पूरी तरह बाढ़ की चपेट में बताया जा रहा है। कई लोगों को अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर जाना पड़ा है। कुछ परिवारों ने स्कूलों और ऊंचे स्थानों पर शरण ली है।
बख्तियारपुर के कई दियारा पंचायतों में निचले इलाकों के घरों तक पानी पहुंच गया है। वहीं पुनपुन और दरधा के बढ़ते जलस्तर के कारण गौरीचक बाजार समेत करीब तीन दर्जन गांव पानी से घिर गए हैं।
फुलवारी प्रखंड के चिहुंट, सकरैचा, मेहमानपुर, बकपुर और तारापुर समेत कई गांवों के लोग पूरी रात नदी और बांध की स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
पटना के कई इलाकों में खतरे के निशान से ऊपर गंगा
गंगा के जलस्तर में लगातार बदलाव प्रशासन के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार दीघा और गांधी घाट समेत कई स्थानों पर पानी खतरे के निशान से ऊपर बना हुआ है।
तीन सितंबर की सुबह से शाम तक मनेर, दीघा और गांधी घाट में जलस्तर में वृद्धि दर्ज की गई। गांधी घाट में पानी करीब 51.63 मीटर तक पहुंच गया। प्रशासन लगातार जलस्तर की निगरानी कर रहा है और संभावित रूप से प्रभावित इलाकों में राहत व्यवस्था तैयार रखी गई है।
वाल्मीकिनगर स्थित गंडक बराज से भी बड़ी मात्रा में पानी छोड़े जाने के बाद निचले इलाकों में सतर्कता बढ़ा दी गई है। जल संसाधन विभाग और जिला प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
बक्सर में हर घंटे बढ़ रहा गंगा का पानी
बक्सर जिले में भी बाढ़ का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। यहां गंगा का जलस्तर लगातार ऊपर जा रहा है और बीते 24 घंटे में करीब 16 सेंटीमीटर की वृद्धि दर्ज की गई है।

ब्रह्मपुर प्रखंड की नैनीजोर पंचायत के कई गांवों में हालात खराब होते जा रहे हैं। ढाबी और गजाधर डेरा में गंगा का पानी प्रवेश कर गया है, जबकि सजीवन डेरा चारों तरफ से पानी से घिर गया है।
आधा दर्जन से अधिक गांवों के संपर्क मार्ग जलमग्न होने के कारण लोगों की आवाजाही प्रभावित हुई है। ग्रामीणों को रोजमर्रा की जरूरतों और सुरक्षित स्थानों तक पहुंचने में परेशानी हो रही है।
भोजपुर में 3 लाख लोगों पर बाढ़ का असर
भोजपुर जिले में बाढ़ का दायरा लगातार बढ़ रहा है। पहले जहां तीन प्रखंड प्रभावित थे, अब बाढ़ का असर बढ़कर छह प्रखंडों तक पहुंच गया है। जिले में करीब 3 लाख की आबादी प्रभावित होने की बात सामने आ रही है।
आरा-बक्सर पुराने हाईवे पर चौकीपुर के पास पानी पहुंचने से आवागमन प्रभावित होने लगा है। वहीं मझउआ हवाई अड्डा मार्ग पर भी पानी चढ़ने की सूचना है।
बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए जिले में 62 स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्र बंद किए गए हैं। प्रशासन प्रभावित क्षेत्रों में लगातार निगरानी कर रहा है।
मुंगेर और भागलपुर में भी हालात गंभीर
मुंगेर जिले में दियारा क्षेत्रों में बाढ़ का पानी फैलने से कई परिवारों को घर छोड़ना पड़ा है। टेटिया बंबर क्षेत्र में महाने नदी पर बरसंडा इलाके में बना डायवर्सन बह गया, जिससे स्थानीय संपर्क व्यवस्था प्रभावित हुई है।
वहीं भागलपुर में गंगा और कोसी के बढ़ते जलस्तर ने संकट को और गहरा कर दिया है। राघोपुर-काजीकोरैया बांध में लगातार हो रही क्षति के बाद प्रशासन ने राहत और बचाव अभियान तेज कर दिया है।

बांध में कटाव और अंडरमाइनिंग के कारण पहले करीब 30 मीटर हिस्से में नुकसान हुआ था, लेकिन बाद में क्षति बढ़ते-बढ़ते करीब 400 मीटर तक पहुंच गई। इससे आसपास के इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है।
भागलपुर प्रशासन के अनुसार अब तक 62,698 से अधिक आपदा पीड़ितों को भोजन उपलब्ध कराया जा चुका है। प्रभावित क्षेत्रों में एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीमें तैनात हैं। नावों, राहत सामग्री और अन्य आवश्यक संसाधनों की व्यवस्था की गई है।
प्रशासन की अपील- नदी घाट और तटबंधों से रहें दूर
बाढ़ की गंभीर स्थिति को देखते हुए आपदा प्रबंधन विभाग ने लोगों के लिए एडवाइजरी जारी की है। नागरिकों से नदी घाटों, तेज बहाव वाले क्षेत्रों और कमजोर तटबंधों से दूर रहने की अपील की गई है।
प्रशासन का कहना है कि लोग अफवाहों पर ध्यान न दें और किसी भी आपात स्थिति में स्थानीय प्रशासन को तुरंत सूचना दें। राहत और बचाव टीमें प्रभावित इलाकों में लगातार काम कर रही हैं।
बिहार में गंगा समेत कई नदियों के उफान ने फिलहाल स्थिति को बेहद चुनौतीपूर्ण बना दिया है। आने वाले दिनों में जलस्तर और मौसम की स्थिति पर प्रशासन की नजर रहेगी। सबसे बड़ी प्राथमिकता प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाना और उन्हें भोजन, स्वास्थ्य तथा अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराना है।
पटना से भूमि आर्या की रिपोर्ट
