रीतलाल यादव की मुश्किलें बढ़ी, पटना हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप करने से इनकार, जमानत ख़ारिज

रीतलाल यादव

रीतलाल यादव की जमानत पर सुप्रीम कोर्ट ने राहत नहीं दी

निष्कर्ष भारत संवाददाता पटना। रीतलाल यादव को संगठित अपराध और रंगदारी से जुड़े मामले में फिलहाल सुप्रीम कोर्ट से भी राहत नहीं मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने पटना हाईकोर्ट के उस फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया, जिसमें उनकी जमानत याचिका खारिज की गई थी। हालांकि, शीर्ष अदालत ने भविष्य में जमानत के लिए रास्ता पूरी तरह बंद नहीं किया है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि आरोप तय होने के बाद अगले एक साल के भीतर मुकदमे की सुनवाई में कोई ठोस प्रगति नहीं होती है और रीतलाल यादव ट्रायल में पूरा सहयोग करते हैं, तो वह दोबारा पटना हाईकोर्ट का रुख कर सकते हैं। इस दौरान ट्रायल कोर्ट को मुकदमे की कार्यवाही तेजी से आगे बढ़ाने और जल्द आरोप तय करने की दिशा में कदम उठाने को कहा गया है।

रीतलाल यादव की जमानत पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई

मामले की सुनवाई 3 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की पीठ ने की। रीतलाल यादव की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने अदालत के समक्ष पक्ष रखा।

सुनवाई के दौरान पीठ ने तत्काल जमानत देने से इनकार करते हुए कहा कि इस स्तर पर पटना हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने का कोई पर्याप्त आधार नहीं है। हालांकि, अदालत ने ट्रायल में अनावश्यक देरी न हो, इसे सुनिश्चित करने के लिए निचली अदालत को कार्यवाही जल्द आगे बढ़ाने का निर्देश दिया।

एक साल बाद फिर जमानत का रास्ता

सुप्रीम कोर्ट के आदेश का महत्वपूर्ण पहलू यह है कि रीतलाल यादव के लिए आगे जमानत की संभावना पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। अदालत ने कहा कि आरोप तय होने के बाद एक वर्ष के भीतर यदि मुकदमे में महत्वपूर्ण प्रगति नहीं होती है और याचिकाकर्ता सुनवाई में पूरा सहयोग करते हैं, तो वह फिर से पटना हाईकोर्ट में जमानत की अर्जी दाखिल कर सकते हैं।

इसका मतलब है कि फिलहाल उन्हें जमानत नहीं मिली है, लेकिन मुकदमे की प्रगति और ट्रायल में उनके आचरण के आधार पर भविष्य में जमानत की मांग करने का विकल्प खुला रहेगा।

पटना हाईकोर्ट भी खारिज कर चुका है याचिका

इससे पहले 26 फरवरी को पटना हाईकोर्ट ने रीतलाल यादव की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद मामले में राहत पाने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया था।

सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश में फिलहाल दखल देने से इनकार कर दिया। साथ ही ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया कि मुकदमे में आरोप तय करने और आगे की कार्यवाही को अनावश्यक रूप से लंबित न रखा जाए।

रीतलाल यादव पर किन आरोपों में मामला?

मामला भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 111(4), 111(6) और 111(7) के तहत दर्ज संगठित अपराध के आरोपों से जुड़ा है। जांच एजेंसियों की ओर से आरोप लगाया गया है कि रीतलाल यादव कथित तौर पर एक संगठित गिरोह का हिस्सा रहे हैं।

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जांच एजेंसियों के आरोप के मुताबिक, इस गिरोह द्वारा रियल एस्टेट कारोबारियों और व्यवसायियों से कथित तौर पर धमकी देकर रंगदारी मांगने की गतिविधियां की जाती थीं। इसके अलावा आरोपितों पर आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति अर्जित करने का आरोप भी लगाया गया है।

इन गंभीर आरोपों को देखते हुए निचली अदालत और पटना हाईकोर्ट के स्तर पर जमानत के मामले में राहत नहीं मिली। हालांकि, आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया और ट्रायल के दौरान होने वाले साक्ष्यों के परीक्षण के बाद ही होगी।

राजद के प्रमुख नेताओं में रहे हैं रीतलाल यादव

रीतलाल यादव बिहार की राजनीति में राष्ट्रीय जनता दल से जुड़े प्रमुख नेताओं में रहे हैं। वह पटना की दानापुर विधानसभा सीट से राजद विधायक भी रह चुके हैं। उनके राजनीतिक जीवन के साथ-साथ उनके खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों को लेकर भी समय-समय पर चर्चा होती रही है।

मौजूदा मामले में उन पर संगठित अपराध और रंगदारी से जुड़े गंभीर आरोप लगाए गए हैं। हालांकि, किसी भी आरोपी के खिलाफ लगे आरोपों को तब तक अंतिम अपराध सिद्ध नहीं माना जाता, जब तक अदालत में मुकदमे की प्रक्रिया पूरी होकर फैसला नहीं आ जाता।

अब ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही पर नजर

सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश के बाद अब मामले की अगली दिशा ट्रायल कोर्ट में होने वाली कार्यवाही से तय होगी। अदालत ने विशेष रूप से आरोप तय करने की प्रक्रिया को जल्द आगे बढ़ाने की बात कही है।

आरोप तय होने के बाद मुकदमे की सुनवाई किस गति से आगे बढ़ती है, यह रीतलाल यादव की आगे की जमानत याचिका के लिए भी महत्वपूर्ण होगा। यदि एक वर्ष के भीतर मुकदमे में महत्वपूर्ण प्रगति नहीं होती और वह सुनवाई में पूरा सहयोग करते हैं, तो सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार वह पटना हाईकोर्ट में फिर से जमानत की मांग कर सकते हैं।

फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद रीतलाल यादव को जमानत नहीं मिली है। अब इस मामले में ट्रायल कोर्ट की अगली कार्रवाई और आरोप तय होने की प्रक्रिया पर नजर बनी रहेगी।

Nishkarsh Bharat

अमन कुमार की रिपोर्ट

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