गैस हादसे ने बुझाए दो घरों के चिराग: दिल्ली में बिहार के जीजा-साले की मौत, गयाजी में मचा हाहाकर ; पिता बोले- यहां काम मिलता तो बाहर नहीं भेजते

दिल्ली

दिल्ली में गैस रिसाव और सिलेंडर विस्फोट की दर्दनाक घटना में गया के इमामगंज निवासी जीजा-साले की मौत के बाद अलीनगर गांव में पसरा मातम।

निष्कर्ष भारत संवाददाता गया/नई दिल्ली: दिल्ली में गैस रिसाव और सिलेंडर विस्फोट की दर्दनाक घटना ने बिहार के गया जिले के दो परिवारों की खुशियां छीन लीं। दिल्ली में मजदूरी कर रहे गया के इमामगंज क्षेत्र के अलीनगर गांव निवासी जीजा-साले की इलाज के दौरान मौत हो गई। दोनों कई दिनों तक जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष करते रहे, लेकिन गंभीर रूप से झुलसने के कारण उन्हें बचाया नहीं जा सका।

मृतकों की पहचान पंकज कुमार और उनके जीजा राजेंद्र राम के रूप में हुई है। दोनों दिल्ली में रहकर स्लीपर का काम करते थे और अपने परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियां संभालने के लिए घर से सैकड़ों किलोमीटर दूर मजदूरी कर रहे थे।

बताया जा रहा है कि हादसा 3 सितंबर को हुआ था, जबकि इलाज के दौरान दोनों ने 6 सितंबर को दम तोड़ दिया। सोमवार को जब दोनों के शव उनके गांव अलीनगर पहुंचे तो पूरे इलाके में मातम पसर गया। गांव की गलियों में लोगों की भीड़ जुट गई और मृतकों के परिवारों की चीख-पुकार से माहौल गमगीन हो गया।

दिल्ली में काम करने गए थे जीजा-साले

परिवार और स्थानीय लोगों के अनुसार, पंकज कुमार और राजेंद्र राम रोजगार की तलाश में दिल्ली गए थे। बिहार में स्थानीय स्तर पर पर्याप्त रोजगार नहीं मिलने के कारण दोनों बाहर रहकर काम कर रहे थे।

दोनों दिल्ली में स्लीपर का काम करते थे और रोज की तरह घटना वाले दिन भी ड्यूटी से लौटकर अपने कमरे पर पहुंचे थे। काम खत्म करने के बाद दोनों ने कमरे में खाना बनाया और भोजन करने के बाद आराम करने के लिए सो गए।

लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि रात उनके जीवन की आखिरी रात साबित होगी।

बताया जा रहा है कि इसी दौरान कमरे में गैस का रिसाव होने लगा। कुछ ही समय बाद गैस ने आग पकड़ ली और देखते ही देखते स्थिति भयावह हो गई। आग फैलने के बाद गैस सिलेंडर में जोरदार विस्फोट हुआ।

धमाके और आग की चपेट में आने से दोनों गंभीर रूप से झुलस गए।

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गैस रिसाव के बाद लगी आग, फिर हुआ सिलेंडर विस्फो

हादसे के बाद आसपास मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई। आग और विस्फोट की आवाज सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे। लोगों ने किसी तरह दोनों को कमरे से बाहर निकाला और तत्काल इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था की।

दोनों की हालत बेहद गंभीर थी। गंभीर रूप से झुलसने के कारण उन्हें दिल्ली स्थित एम्स में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों की टीम उनका इलाज कर रही थी।

परिवार के सदस्य भी लगातार उनके स्वस्थ होने की उम्मीद लगाए बैठे थे। लेकिन कई दिनों तक चले इलाज के बावजूद उनकी हालत में अपेक्षित सुधार नहीं हो सका।

आखिरकार 6 सितंबर को पंकज कुमार और राजेंद्र राम दोनों ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया।

एक ही हादसे में जीजा और साले की मौत की खबर ने गया जिले के अलीनगर गांव को स्तब्ध कर दिया।

शव गांव पहुंचते ही पसरा मातम

सोमवार को दोनों के पार्थिव शरीर गांव पहुंचे तो माहौल पूरी तरह गमगीन हो गया। अपने परिवार के दो सदस्यों को खोने वाले परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था।

गांव के लोग भी बड़ी संख्या में मृतकों के घर पहुंचे। हर कोई इस दर्दनाक घटना को लेकर दुखी नजर आया।

स्थानीय लोगों का कहना है कि दोनों परिवार मेहनतकश थे और दिल्ली जाकर काम करने का फैसला केवल परिवार की आर्थिक स्थिति बेहतर बनाने के लिए किया गया था। लेकिन रोजगार की तलाश में घर से दूर गए दोनों लोगों की मौत ने परिवारों के सामने गहरा संकट खड़ा कर दिया है।

एक साथ दो युवकों की मौत से गांव में शोक का माहौल है।

बेटे की मौत से टूट गए पिता

पंकज कुमार की मौत से उनके पिता परमेश्वर दास पूरी तरह टूट चुके हैं। बेटे के निधन के बाद उन्होंने स्थानीय स्तर पर रोजगार की कमी को लेकर अपना दर्द भी व्यक्त किया।

उन्होंने कहा कि अगर गांव और आसपास के इलाके में रोजगार के पर्याप्त अवसर होते तो उनका बेटा दिल्ली जाकर काम करने के लिए मजबूर नहीं होता।

पिता के दर्द भरे शब्दों ने गांव के लोगों को भी भावुक कर दिया। उन्होंने कहा कि बाहर जाकर काम करना कई परिवारों की मजबूरी है। लोग अपने घर और परिवार से दूर रहकर केवल इसलिए काम करते हैं ताकि परिवार का खर्च चल सके और बच्चों का भविष्य बेहतर हो सके।

परमेश्वर दास के मुताबिक, उनका बेटा परिवार के लिए काम करने दिल्ली गया था, लेकिन अब वह कभी वापस नहीं आएगा।

मां पहले से बीमार, जवान बेटे की मौत ने बढ़ाया परिवार का दर्द

पंकज कुमार की मां पहले से ही गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रही हैं। बताया गया है कि उन्हें लकवे की बीमारी है और वह बोलने में भी असमर्थ हैं।

ऐसे में जवान बेटे की अचानक मौत ने परिवार के दुख को और गहरा कर दिया है।

परिवार के सामने अब केवल भावनात्मक संकट ही नहीं, बल्कि आर्थिक चुनौतियां भी खड़ी हो गई हैं। जिस बेटे के सहारे परिवार भविष्य की उम्मीद देख रहा था, उसकी मौत के बाद घर में गहरा सन्नाटा छा गया है।

स्थानीय लोग परिवार को सांत्वना देने पहुंच रहे हैं, लेकिन एक जवान बेटे की मौत का दर्द शब्दों में कम करना आसान नहीं है।

रोजगार के लिए पलायन का दर्द फिर आया सामने

दिल्ली में हुए इस हादसे ने बिहार से रोजगार के लिए दूसरे राज्यों में जाने वाले लोगों की मजबूरी पर एक बार फिर चर्चा शुरू कर दी है।

गया और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग रोजगार की तलाश में दिल्ली, मुंबई, पंजाब, हरियाणा और देश के अन्य हिस्सों में जाते हैं। कई परिवारों के लिए बाहर जाकर मजदूरी करना ही आय का प्रमुख साधन है।

पंकज और राजेंद्र भी अपने परिवारों की बेहतर जिंदगी के लिए दिल्ली गए थे। लेकिन गैस रिसाव और सिलेंडर विस्फोट की एक घटना ने दो परिवारों के सहारे छीन लिए।

परिजनों का कहना है कि अगर स्थानीय स्तर पर रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध होते तो शायद उन्हें घर छोड़कर इतनी दूर नहीं जाना पड़ता।

गांव में हर आंख नम, दो परिवारों पर टूटा दुखों का पहाड़

अलीनगर गांव में दोनों मृतकों के घरों पर लोगों का आना-जाना जारी है। रिश्तेदार और ग्रामीण शोक संतप्त परिवारों को ढांढस बंधाने की कोशिश कर रहे हैं।

एक ही हादसे में जीजा-साले की मौत ने पूरे गांव को झकझोर दिया है। दोनों परिवारों के सामने अब अपनों को खोने का गम है और भविष्य को लेकर अनिश्चितता भी।

दिल्ली का यह दर्दनाक गैस हादसा केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि उन हजारों परिवारों की मजबूरी की तस्वीर भी सामने लाता है, जिनके सदस्य रोजगार की तलाश में अपने घरों से दूर दूसरे राज्यों में काम करने जाते हैं।

Nishkarsh Bharat

पटना से कीमती कुमारी का रिपोर्ट