फरक्का जल संधि पर विजय चौधरी का दो टूक, कहा- बिहार को बड़ा नुकसान, केंद्र करें समाधान
फरक्का संधि पर विजय चौधरी ने बिहार के हित में केंद्र से समाधान मांगा
निष्कर्ष भारत, संवाददाता (पटना)। फरक्का जल संधि पर विजय चौधरी ने दो टूक कहा है कि मौजूदा व्यवस्था से बिहार को नुकसान हो रहा है और इसके समाधान के लिए केंद्र सरकार को राज्य के हितों को प्राथमिकता देनी चाहिए। बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने मंगलवार को पटना स्थित जनता दल यूनाइटेड (जदयू) कार्यालय में जनसुनवाई के बाद पत्रकारों से बातचीत में फरक्का जल संधि को लेकर राज्य की चिंताएं सामने रखीं। उन्होंने कहा कि संधि में बिहार की उपेक्षा की गई है और इसके कारण राज्य के सामने कई तरह की परेशानियां पैदा हो रही हैं।
उपमुख्यमंत्री विजय चौधरी ने कहा कि संधि के नवीनीकरण से पहले बिहार सरकार केंद्र के सामने अपनी चिंताएं रख चुकी है। राज्य ने केंद्र से आग्रह किया है कि किसी भी निर्णय में बिहार के हितों और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखा जाए। विजय चौधरी के मुताबिक, केंद्र सरकार ने बिहार को इस मामले में आश्वस्त किया है।
फरक्का संधि को लेकर बिहार की चिंता क्या है?
फरक्का जल संधि भारत और बांग्लादेश के बीच वर्ष 1996 में हुई थी। जदयू की ओर से हाल के दिनों में इस संधि को लेकर बिहार के हितों का मुद्दा प्रमुखता से उठाया जा रहा है। पार्टी का तर्क है कि गंगा के जल बंटवारे की मौजूदा व्यवस्था का असर बिहार की सिंचाई, पेयजल, उद्योग और जल प्रबंधन पर पड़ रहा है।
जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष और राज्यसभा सदस्य संजय कुमार झा ने भी फरक्का जल संधि के नवीनीकरण पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा है कि अगर भविष्य में नई संधि होती है तो उसमें वर्ष 2050 तक बिहार की जल आवश्यकताओं को ध्यान में रखा जाना चाहिए।
विजय चौधरी ने गाद और बाढ़ का मुद्दा उठाया
फरक्का जल संधि की चर्चा के बीच विजय चौधरी ने बिहार में बाढ़ की स्थिति का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि राज्य के करीब 13 जिलों में अभी बाढ़ की स्थिति बनी हुई है। हालांकि नदियों का जलस्तर धीरे-धीरे कम हो रहा है, लेकिन खतरा पूरी तरह टला नहीं है।
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विजय चौधरी ने बताया कि तटबंधों की लगातार निगरानी की जा रही है। उपमुख्यमंत्री विजय चौधरीने बिहार में बाढ़ की समस्या को गाद से भी जोड़ते हुए कहा कि नदियों में लगातार जमा हो रही गाद के कारण उनकी जल वहन क्षमता कम होती जा रही है। इससे पानी का दबाव तटबंधों पर बढ़ रहा है और बाढ़ का खतरा गंभीर बना हुआ है। विजय चौधरी ने खास तौर पर गंगा नदी में गाद की समस्या को गंभीर बताया। उनके मुताबिक, नदी की क्षमता कम होने के कारण अधिक पानी आने पर उसका दबाव सीधे तटबंधों पर पड़ता है।

भागलपुर में तटबंध बचाने के लिए जुटी टीम
उपमुख्यमंत्री विजय चौधरी ने भागलपुर में तटबंध की स्थिति का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि करीब 50 अभियंताओं और अधिकारियों की टीम ने लगातार प्रयास कर तटबंध को बचाने में सफलता हासिल की। इसके लिए बाहर से स्टीमर भी मंगाया गया। उन्होंने कहा कि बिहार में बाढ़ से निपटने के लिए प्रशासन और जल संसाधन विभाग लगातार निगरानी कर रहे हैं। नदियों के जलस्तर में कमी आने के बावजूद संवेदनशील इलाकों में सतर्कता बरती जा रही है।
संजय झा ने फरक्का संधि पर उठाए थे सवाल
फरक्का जल संधि को लेकर जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने रविवार को भोजपुर जिले में आयोजित ‘फरक्का जल संधि पर नीतीश संवाद’ कार्यक्रम में पार्टी का पक्ष स्पष्ट किया था। उन्होंने कहा था कि वर्ष 1996 में हुई संधि बिहार के हित में नहीं है और इसका नवीनीकरण नहीं किया जाना चाहिए।
संजय झा ने दावा किया था कि संधि के कारण बिहार का जल प्रबंधन प्रभावित हुआ है। उन्होंने शुष्क मौसम के दौरान गंगा के जल प्रवाह का उदाहरण देते हुए कहा था कि एक जनवरी से 31 मई के बीच बक्सर के पास गंगा का प्रवाह घटकर करीब 400 क्यूमेक रह जाने के बावजूद फरक्का से बांग्लादेश के लिए 1500 क्यूमेक पानी छोड़ा जाता है।
उनका कहना था कि ऐसी स्थिति में बिहार की जल जरूरतों पर गंभीर असर पड़ता है। उन्होंने सिंचाई, पेयजल, उद्योग, आजीविका और राज्य के भविष्य को इससे जोड़ते हुए नई व्यवस्था में बिहार के हितों को प्रमुखता देने की मांग की थी।
केंद्र ने बिहार की चिंताओं पर दिया भरोसा
फरक्का जल संधि को लेकर केंद्र और बिहार के बीच बातचीत भी हो चुकी है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने संजय झा को 28 अगस्त की तारीख वाला पत्र भेजकर कहा था कि सरकार गंगा जल संधि से जुड़ी बिहार की चिंताओं को समझती है।
विदेश मंत्री के अनुसार, जल शक्ति मंत्रालय के नेतृत्व में विभिन्न हितधारकों के साथ अंतर-मंत्रालयी स्तर पर चर्चा की गई है। इन बैठकों में संधि के कार्यान्वयन और भविष्य से जुड़े पहलुओं पर विचार किया गया।
जयशंकर ने बताया था कि बिहार सरकार के अधिकृत प्रतिनिधि ने 22 अगस्त 2023, 30 अक्टूबर 2023, 15 मार्च 2024 और 31 मई 2024 को हुई चर्चाओं में हिस्सा लिया था। इन बैठकों में बिहार के पेयजल और औद्योगिक जल की जरूरतों समेत विभिन्न पक्षों की चिंताओं पर विचार किया गया।

अब समाधान की उम्मीद बिहार की नजर केंद्र पर
फरक्का जल संधि को लेकर बिहार में राजनीतिक बहस तेज होने के बीच राज्य सरकार की नजर अब केंद्र के अगले कदम पर है। विजय चौधरी ने स्पष्ट किया है कि बिहार चाहता है कि संधि से जुड़े किसी भी भविष्य के फैसले में राज्य की मौजूदा और आने वाली जल जरूरतों को नजरअंदाज न किया जाए।
एक तरफ राज्य बाढ़ और गाद की समस्या से जूझ रहा है, वहीं दूसरी ओर जल प्रबंधन और गंगा के पानी के बंटवारे का मुद्दा राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होता जा रहा है। ऐसे में फरक्का जल संधि के भविष्य को लेकर बिहार की मांग आने वाले दिनों में केंद्र के सामने एक अहम मुद्दा बन सकती है।
पटना से राजकुमार सिंह की रिपोर्ट
