बख्तियारपुर का नाम बदले जाने पर भड़के भाई वीरेंद्र, कहा- भारत का नाम भी मोदी के नाम पर बदल दे, किया तीखा हमला

भाई वीरेंद्र

बख्तियारपुर का नाम बदलने की मांग पर भाई वीरेंद्र का तंज

निष्कर्ष भारत, संवाददाता (पटना)। बख्तियारपुर का नाम बदलकर ‘नीतीशपुर’ किए जाने की मांग को लेकर बिहार की सियासत में एक बार फिर बयानबाजी तेज हो गई है। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के वरिष्ठ विधायक और विधानसभा की एस्टीमेट कमिटी के अध्यक्ष भाई वीरेंद्र ने इस मांग पर तंज कसते हुए सरकार और भाजपा पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि बिहार में बेरोजगारी और पलायन जैसे गंभीर मुद्दे मौजूद हैं, लेकिन उन पर चर्चा करने के बजाय शहरों और स्थानों के नाम बदलने की बहस चल रही है।

भाई वीरेंद्र ने इसी मुद्दे पर कटाक्ष करते हुए कहा कि अगर नाम ही बदलना है तो भारत का नाम भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर रख दिया जाए और इसी तरह हर जगह के नाम बदल दिए जाएं। उन्होंने कहा कि बिहार में लोगों को रोजगार नहीं मिल रहा है और बड़ी संख्या में लोग काम की तलाश में दूसरे राज्यों का रुख कर रहे हैं। ऐसे समय में नाम बदलने की राजनीति को प्राथमिकता देना समझ से परे है।

बख्तियारपुर के नाम पर क्यों गरमाई सियासत?

बख्तियारपुर का नाम बदलकर ‘नीतीशपुर’ करने का सुझाव सामने आने के बाद यह मुद्दा बिहार की राजनीति में चर्चा का विषय बन गया है। बिहार सरकार में मंत्री और केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी के बेटे संतोष कुमार सुमन ने हाल में बख्तियारपुर का नाम बदलकर ‘नीतीशपुर’ किए जाने का सुझाव दिया था।

इसके बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया। इससे पहले मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी भी एक पॉडकास्ट में बख्तियारपुर के नाम को लेकर अपनी व्यक्तिगत राय जाहिर कर चुके हैं। उन्होंने कहा था कि उनके विचार से बख्तियारपुर का नाम बदला जाना चाहिए।

हालांकि, इन बयानों और सुझावों के बीच एक महत्वपूर्ण बात यह है कि बिहार सरकार की ओर से फिलहाल बख्तियारपुर का नाम बदलने को लेकर कोई आधिकारिक प्रस्ताव सामने नहीं आया है। ऐसे में यह मुद्दा अभी राजनीतिक बयानबाजी और सार्वजनिक बहस तक ही सीमित है।

भाई वीरेंद्र ने रोजगार और पलायन का उठाया मुद्दा

राजद विधायक भाई वीरेंद्र ने नाम बदलने की मांग को बिहार की मौजूदा समस्याओं से जोड़ते हुए सरकार से सवाल किया। उन्होंने कहा कि राज्य में बेरोजगारी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। रोजगार के पर्याप्त अवसर नहीं होने के कारण बिहार के लोग दूसरे राज्यों में जाने को मजबूर होते हैं।

उन्होंने कहा कि सरकार और राजनीतिक दलों को इस बात पर चर्चा करनी चाहिए कि बिहार के युवाओं को अपने ही राज्य में रोजगार कैसे मिले। पलायन को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाएं और राज्य की अर्थव्यवस्था को कैसे मजबूत किया जाए, इन मुद्दों पर चर्चा जरूरी है।

भाई वीरेंद्र के अनुसार, नाम बदलने से आम लोगों की रोजमर्रा की समस्याओं का समाधान नहीं होने वाला है। उन्होंने इसी संदर्भ में भारत का नाम बदलने को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम का जिक्र करते हुए सरकार पर राजनीतिक कटाक्ष किया।

शराबबंदी पर भी भाई वीरेंद्र ने सरकार को घेरा

नाम बदलने के मुद्दे के साथ भाई वीरेंद्र ने बिहार की शराबबंदी नीति को लेकर भी मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के बयान पर प्रतिक्रिया दी। शराबबंदी के कारण राज्य को होने वाले राजस्व नुकसान और कानून को जारी रखने को लेकर दिए गए मुख्यमंत्री के बयान पर उन्होंने अपनी बात रखी।

भाई वीरेंद्र ने कहा कि वह खुद भी शराबबंदी के समर्थन में रहे हैं, लेकिन वर्तमान स्थिति को लेकर सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर शराबबंदी कानून को प्रभावी तरीके से लागू करना है तो इसके उल्लंघन पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।

उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार में खाकी और खादी दोनों मिलकर शराबबंदी कानून को कमजोर कर रहे हैं। उनके इस बयान के जरिए उन्होंने प्रशासन और राजनीतिक व्यवस्था दोनों पर सवाल उठाने की कोशिश की।

बख्तियारपुर विवाद के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज

बख्तियारपुर के नाम को लेकर सामने आए अलग-अलग बयानों ने बिहार की सियासत में एक नया राजनीतिक मुद्दा खड़ा कर दिया है। एक ओर नाम बदलकर ‘नीतीशपुर’ करने का सुझाव दिया गया है, वहीं दूसरी ओर विपक्ष इसे सरकार की प्राथमिकताओं से जोड़कर सवाल उठा रहा है।

निष्पक्ष ख़बर देखिये हमारे यूट्यूब चैनल पर: IIT Patna में पुलिस और दिग्गजों की मौजूदगी .. शराब और शबाब’ वाली महफिल का सच क्या ?

भाई वीरेंद्र ने अपने बयान के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की कि सरकार को नाम बदलने जैसे मुद्दों के बजाय रोजगार, पलायन और आर्थिक विकास जैसे विषयों पर ध्यान देना चाहिए। उनका कहना है कि आम लोगों से जुड़े सवालों का समाधान राजनीतिक बहस का केंद्र होना चाहिए।

दूसरी तरफ, बख्तियारपुर के नाम को लेकर नाम बदलने की मांग करने वाले नेताओं की अपनी दलील है। उनका तर्क है कि ऐतिहासिक और राजनीतिक कारणों से किसी स्थान का नाम बदला जा सकता है। इसी बहस के बीच ‘नीतीशपुर’ नाम का सुझाव सामने आया है।

‘भाजपा ने बनाया मुख्यमंत्री’ बयान पर क्या बोले भाई वीरेंद्र?

भाई वीरेंद्र ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के उस बयान पर भी प्रतिक्रिया दी, जिसमें उन्होंने कहा था कि उन्हें नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री नहीं बनाया, बल्कि उनकी पार्टी भाजपा ने मुख्यमंत्री बनाया है।

इस पर राजद विधायक ने कहा कि मुख्यमंत्री का चयन संबंधित राजनीतिक दल के बड़े नेता करते हैं। उन्होंने कहा कि सम्राट चौधरी ने इस संबंध में जो बात कही है, उसमें उन्हें कोई गलत बात नजर नहीं आती।

उन्होंने साफ किया कि किसी भी राजनीतिक दल में मुख्यमंत्री पद के लिए नेता का चयन पार्टी के शीर्ष नेतृत्व और संबंधित दल की राजनीतिक प्रक्रिया के तहत होता है। इस बयान के जरिए भाई वीरेंद्र ने मुख्यमंत्री के बयान को लेकर सीधे विरोध दर्ज कराने के बजाय राजनीतिक प्रक्रिया की ओर इशारा किया।

फिलहाल आधिकारिक प्रस्ताव का इंतजार

बख्तियारपुर को ‘नीतीशपुर’ नाम देने की मांग पर फिलहाल बिहार सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रस्ताव नहीं है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की व्यक्तिगत राय और संतोष कुमार सुमन के सुझाव के बाद यह मुद्दा राजनीतिक चर्चा में जरूर आया है, लेकिन नाम बदलने की कोई औपचारिक प्रक्रिया शुरू होने की जानकारी सामने नहीं आई है।

ऐसे में आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार इस मांग को लेकर क्या रुख अपनाती है। फिलहाल विपक्ष इसे बेरोजगारी और पलायन जैसे मुद्दों से जोड़कर सरकार पर निशाना साध रहा है, जबकि नाम बदलने के समर्थक इसे अलग नजरिए से देख रहे हैं। इस पूरे विवाद ने बख्तियारपुर को एक बार फिर बिहार की राजनीतिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

Nishkarsh Bharat

अमन कुमार की रिपोर्ट

You may have missed