IRCTC होटल केस में लालू परिवार की मुश्किलें बढ़ीं, तेजस्वी समेत 9 के खिलाफ आरोप तय, कोर्ट में दिया आदेश

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IRCTC केस में लालू, राबड़ी और तेजस्वी समेत 9 पर आरोप तय

निष्कर्ष भारत, संवाददाता (नई दिल्ली)। IRCTC होटल मामले में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) प्रमुख लालू प्रसाद यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी और बेटे तेजस्वी यादव समेत नौ आरोपियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। दिल्ली की विशेष अदालत ने कथित मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े इस मामले में नौ आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश दिया है। विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने की अदालत में गुरुवार को हुई सुनवाई के दौरान मामले को लेकर कई अहम टिप्पणियां की गईं। अदालत ने राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव के खिलाफ पद के कथित दुरुपयोग और अपराध से अर्जित धन के इस्तेमाल की मजबूत आशंका का उल्लेख किया।

अदालत के इस आदेश के बाद अब मामले की कानूनी प्रक्रिया अगले चरण में पहुंचेगी। आरोपों की औपचारिक फ्रेमिंग 3 अक्टूबर को की जाएगी। हालांकि, अदालत की ओर से की गई टिप्पणियां आरोप तय करने के स्तर की हैं। इन्हें आरोपियों को दोषी ठहराए जाने का अंतिम फैसला नहीं माना जा सकता। मामले में आरोपी पक्ष को अपने बचाव का पूरा कानूनी अधिकार है।

IRCTC होटल मामले में क्या हुआ?

IRCTC का पूरा मामला उस समय का है जब लालू प्रसाद यादव केंद्र सरकार में रेल मंत्री थे। जांच एजेंसियों के मुताबिक, रेलवे से जुड़े दो होटलों के संचालन के लिए जारी टेंडर प्रक्रिया में कथित अनियमितताएं की गईं। मामला रांची और पुरी स्थित IRCTC के होटलों के संचालन के ठेके से जुड़ा है।

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आरोप है कि निजी होटल संचालकों को इन होटलों के संचालन का ठेका दिलाने में नियमों को कथित तौर पर प्रभावित किया गया। इसके बदले पटना की एक जमीन से जुड़े लेनदेन को जांच एजेंसियों ने कथित लाभ के रूप में देखा। यही लेनदेन आगे चलकर मनी लॉन्ड्रिंग की जांच का हिस्सा बना।

IRCTC होटल मामले में सीबीआई की मूल जांच के बाद प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कथित मनी लॉन्ड्रिंग के पहलू की जांच की। अदालत में इसी मामले से जुड़े आरोपों पर सुनवाई चल रही है।

IRCTC टेंडर और पटना की जमीन का कनेक्शन

जांच एजेंसियों का आरोप है कि लालू प्रसाद यादव के रेल मंत्री रहने के दौरान रांची और पुरी स्थित IRCTC होटलों के संचालन के लिए टेंडर जारी किया गया था। आरोप है कि इस प्रक्रिया में कथित तौर पर हेरफेर कर निजी होटल संचालकों को फायदा पहुंचाया गया।

इसके बाद पटना की एक जमीन के कथित हस्तांतरण को इस पूरे मामले से जोड़ा गया। जांच के मुताबिक, होटल संचालन का ठेका हासिल करने वाले निजी पक्षों से जुड़ी जमीन बाद में सरला गुप्ता नाम की महिला के पास पहुंची। उन्हें लालू प्रसाद यादव का करीबी बताया गया है।

आरोप है कि बाद में जमीन से संबंधित शेयर बेहद कम कीमत पर राबड़ी देवी को हस्तांतरित किए गए। जांच एजेंसियों ने इसी कथित लेनदेन को अपराध से अर्जित संपत्ति और मनी लॉन्ड्रिंग के पहलू से जोड़कर देखा है।

अदालत ने राबड़ी और तेजस्वी पर क्या कहा?

सुनवाई के दौरान अदालत ने राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव की भूमिका को लेकर भी गंभीर टिप्पणियां कीं। अदालत के मुताबिक, प्रथमदृष्टया पद के कथित दुरुपयोग और अपराध से अर्जित धन के इस्तेमाल की मजबूत आशंका दिखाई देती है।

हालांकि, यहां यह समझना जरूरी है कि अदालत की ऐसी टिप्पणी आरोप तय करने के चरण में सामने आती है। इसका मतलब यह नहीं है कि अदालत ने आरोपियों को अपराध का दोषी घोषित कर दिया है। मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष को अपने आरोपों को साक्ष्यों के आधार पर साबित करना होगा और आरोपियों को अपना बचाव प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा।

9 आरोपियों पर आरोप, 7 को राहत

इस मामले में अदालत ने कुल नौ आरोपियों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े आरोप तय करने का आदेश दिया है। वहीं सात अन्य आरोपियों को आरोपों से मुक्त कर दिया गया है।

यह घटनाक्रम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि मामले में कई साल से जांच और कानूनी कार्रवाई चल रही है। सितंबर 2026 में अदालत के इस आदेश के बाद अब उन नौ आरोपियों के खिलाफ मुकदमे की प्रक्रिया आगे बढ़ने की स्थिति में है।

अदालत ने आरोपों की औपचारिक फ्रेमिंग के लिए 3 अक्टूबर की तारीख तय की है। इससे पहले सितंबर 2025 में इसी कथित IRCTC घोटाले से जुड़े CBI मामले में लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और भ्रष्टाचार निरोधक कानून से जुड़े आरोप तय किए जा चुके थे।

IRCTC केस में पहले भी हो चुकी है कार्रवाई

IRCTC होटल मामले की जांच काफी पुरानी है। सीबीआई ने 2017 में इस मामले में एफआईआर दर्ज की थी। जांच का केंद्र रेलवे के दो होटलों के संचालन के लिए ठेका देने की प्रक्रिया में कथित अनियमितताएं और उसके बदले जमीन के कथित लेनदेन पर रहा है।

अक्टूबर 2025 में दिल्ली की अदालत ने CBI मामले में लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव समेत आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए थे। उस समय भी सभी आरोपियों ने आरोपों से इनकार किया था और मुकदमे का सामना करने की बात कही थी।

अब ED से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में नौ आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश इस कानूनी प्रक्रिया को एक और महत्वपूर्ण चरण में ले गया है।

लालू परिवार के लिए क्यों अहम है यह मामला?

लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार से जुड़े कई मामलों के बीच IRCTC होटल मामला राजनीतिक और कानूनी दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। मामले में लालू परिवार की भूमिका को लेकर जांच एजेंसियां लंबे समय से आरोप लगाती रही हैं, जबकि परिवार की ओर से आरोपों को राजनीतिक प्रतिशोध से जोड़कर खारिज किया जाता रहा है।

मामले में अदालत की मौजूदा कार्रवाई के बाद अब सबकी नजर 3 अक्टूबर की सुनवाई पर होगी। उस दिन आरोपों की औपचारिक फ्रेमिंग की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। इसके बाद मुकदमे में साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर आगे की कानूनी कार्यवाही होगी।

आरोप तय होना दोषसिद्धि नहीं

IRCTC होटल मामले में अदालत के मौजूदा आदेश को समझने के लिए यह अंतर महत्वपूर्ण है कि आरोप तय होना और दोषी साबित होना दो अलग-अलग कानूनी चरण हैं। आरोप तय करने के स्तर पर अदालत यह देखती है कि मामले को आगे बढ़ाने के लिए प्रथमदृष्टया पर्याप्त आधार मौजूद हैं या नहीं।

अंतिम दोषसिद्धि तभी मानी जाएगी जब मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष अपने आरोपों को कानूनी साक्ष्यों के आधार पर साबित कर दे और अदालत अपना अंतिम फैसला सुनाए।

इसलिए फिलहाल अदालत का आदेश लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव और अन्य आरोपियों के खिलाफ चल रही कानूनी प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण कदम है, अंतिम फैसला नहीं। मामले की अगली बड़ी तारीख 3 अक्टूबर है, जब आरोपों की औपचारिक फ्रेमिंग की जाएगी।

Nishkarsh Bharat

राजकुमार सिंह की रिपोर्ट

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