पटना में 15 हजार घूस लेते इनकम टैक्स ऑफिसर गिरफ्तार, NGO प्रमाणपत्र के लिए मांगी गई रिश्वत

इनकम टैक्स

पटना में 12A-80G के बदले रिश्वत लेते इनकम टैक्स अफसर गिरफ्तार

निष्कर्ष भारत, संवाददाता (पटना)। पटना में इनकम टैक्स विभाग की असिस्टेंट कमिश्नर सुनंदा कुमार को CBI ने 15 हजार रुपये की रिश्वत लेते गिरफ्तार किया है। आरोप है कि एक NGO को 12A और 80G प्रमाणपत्र जारी करने के बदले अधिकारी ने 75 हजार रुपये की रिश्वत मांगी थी। कार्रवाई के दौरान CBI ने विभाग की एक महिला क्लर्क को भी गिरफ्तार किया है। आरोप है कि क्लर्क ने रिश्वत की रकम लेने में अधिकारी की मदद की।

CBI की भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो टीम ने यह कार्रवाई NGO की शिकायत के बाद की। अधिकारियों के मुताबिक, शिकायत की जांच के बाद आरोप सही पाए गए, जिसके बाद रिश्वत लेते दोनों आरोपियों को पकड़ने की योजना बनाई गई। कार्रवाई के दौरान रिश्वत की रकम भी बरामद की गई। गिरफ्तारी के बाद CBI दोनों को पूछताछ के लिए अपने साथ ले गई। शुक्रवार को दोनों आरोपियों को अदालत में पेश किए जाने की बात कही गई है।

12A और 80G प्रमाणपत्र के लिए मांगी गई रिश्वत

मामला ‘श्रवण ज्योति विवेकानंद संस्थान’ नाम के NGO से जुड़ा बताया जा रहा है। संस्थान के प्रतिनिधि के अनुसार, उन्होंने फरवरी में आयकर विभाग में 12A और 80G प्रमाणपत्र के लिए आवेदन किया था। इसके बाद मामले की सुनवाई की प्रक्रिया शुरू हुई।

NGO प्रतिनिधि का दावा है कि 9 जून को हुई सुनवाई के दौरान असिस्टेंट कमिश्नर ने उन्हें CA के पास भेजने की बात कही थी। इसके बाद 1 सितंबर को दूसरी सुनवाई की तारीख तय हुई। प्रतिनिधि के अनुसार, 1 सितंबर को सुनवाई के दौरान उनसे सीधे पैसों की मांग की गई।

आरोप है कि इनकम टैक्स अधिकारी ने 75 हजार रुपये खुद के लिए और 10 हजार रुपये स्टाफ के नाम पर देने की बात कही। इसके बाद NGO प्रतिनिधि ने मामले की जानकारी CBI को दी।

इनकम टैक्स कार्यालय में CBI ने बिछाया जाल

शिकायत मिलने के बाद CBI की पटना ACB टीम ने मामले की जांच शुरू की। शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुष्टि के बाद टीम ने इनकम टैक्स अधिकारी रिश्वत लेते आरोपियों को पकड़ने के लिए ट्रैप की योजना तैयार की।

NGO प्रतिनिधि के मुताबिक, कार्रवाई से पहले CBI ने उनका बयान और फोन पर हुई बातचीत से संबंधित जानकारी दर्ज की। इसके बाद प्रतिनिधि ने अधिकारी से समय मांगा और बताया कि वह बैंक खाते से पैसे निकालकर आ रहे हैं।

योजना के अनुसार NGO प्रतिनिधि CBI टीम के साथ आयकर गोलंबर स्थित इनकम टैक्स कार्यालय पहुंचे। वहां तय तरीके से रिश्वत की रकम दी गई। इसी दौरान पहले से मौजूद CBI टीम ने कार्रवाई करते हुए अधिकारी और क्लर्क को पकड़ लिया।

क्लर्क के जरिए ली गई रिश्वत की रकम

मामले में सामने आया है कि महिला अधिकारी ने कथित तौर पर रिश्वत की पूरी रकम सीधे अपने हाथ में नहीं ली। आरोप है कि विभागीय क्लर्क के माध्यम से पैसे लिए गए।

NGO प्रतिनिधि के अनुसार, ट्रैप के दौरान असिस्टेंट कमिश्नर ने 15 हजार रुपये खुद लिए, जबकि 2500 रुपये स्टाफ के नाम पर लिए गए। बाकी रकम बाद में देने की बात कही गई थी।

CBI ने लेन-देन के दौरान दोनों आरोपियों को पकड़ लिया। कार्रवाई के बाद टीम ने संबंधित रकम को भी अपने कब्जे में लिया। अब जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि रिश्वत की मांग और लेन-देन का दायरा केवल इस मामले तक सीमित था या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क काम कर रहा था।

बिहार के अन्य NGO से भी रिश्वत मांगने का आरोप

इस मामले में NGO प्रतिनिधि ने असिस्टेंट कमिश्नर पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि बिहार के अलग-अलग जिलों में काम करने वाले कई NGO को प्रमाणपत्र जारी करने के नाम पर परेशान किया जाता था।

प्रतिनिधि ने आरोप लगाया कि 12A और 80G से जुड़े प्रमाणपत्रों के लिए पैसे की मांग की जाती थी और बिना भुगतान के प्रक्रिया आगे बढ़ाने में अड़चनें पैदा की जाती थीं। हालांकि, बिहार के सभी जिलों के NGO से रिश्वत मांगने के इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है।

CBI की जांच में अब यह महत्वपूर्ण होगा कि क्या इस तरह की शिकायतें पहले भी सामने आई थीं और क्या अन्य NGO से भी इसी तरह पैसों की मांग की गई थी।

इनकम टैक्स रिकॉर्ड की भी होगी जांच

गिरफ्तारी के बाद CBI अब पूरे मामले के दस्तावेज और विभागीय रिकॉर्ड खंगाल सकती है। जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि संबंधित अधिकारी के पास कितने NGO के आवेदन लंबित थे और उनमें से किन मामलों में प्रक्रिया के दौरान कोई अनियमितता हुई।

12A और 80G से जुड़े आवेदनों की जांच के साथ इनकम टैक्स अधिकारी और क्लर्क के बीच भूमिका को भी जांच के दायरे में रखा जा सकता है। CBI यह भी देखेगी कि क्या किसी अन्य व्यक्ति की इस कथित रिश्वत व्यवस्था में भूमिका थी।

जांच के दौरान फोन कॉल, बातचीत, आवेदन से जुड़े दस्तावेज और अन्य रिकॉर्ड अहम साक्ष्य हो सकते हैं। हालांकि, पूरे मामले की तस्वीर CBI की आगे की जांच और अदालत में पेश किए जाने वाले साक्ष्यों के बाद ही स्पष्ट होगी।

NGO के लिए क्यों महत्वपूर्ण हैं 12A और 80G

12A और 80G का प्रमाणन NGO और चैरिटेबल संस्थाओं के लिए महत्वपूर्ण होता है। 12A के तहत पात्र संस्थाओं को आयकर कानून के तहत उनकी निर्धारित शर्तों के अनुसार आय पर कर संबंधी छूट का लाभ मिल सकता है। वहीं, 80G की मान्यता होने पर संस्था को दिए गए पात्र दान पर दानदाता को आयकर कानून के तहत निर्धारित शर्तों के अनुसार टैक्स डिडक्शन का लाभ मिल सकता है।

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इसी वजह से NGO के लिए इन प्रमाणपत्रों की प्रक्रिया काफी महत्वपूर्ण मानी जाती है। आवेदन, दस्तावेजों की जांच और विभागीय मंजूरी के बाद पात्र संस्था को संबंधित लाभ मिलते हैं।

अब CBI जांच पर टिकी नजर

पटना में इनकम टैक्स विभाग के अधिकारी और क्लर्क की गिरफ्तारी के बाद अब मामले की आगे की जांच पर नजर है। CBI यह पता लगाने में जुटी है कि कथित रिश्वत की मांग किस स्तर पर हुई और क्या इससे जुड़े अन्य लोग भी जांच के दायरे में आ सकते हैं।

फिलहाल दोनों आरोपियों को CBI ने गिरफ्तार कर पूछताछ शुरू कर दी है। अदालत में पेशी के बाद आगे की कानूनी प्रक्रिया तय होगी। आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।

Nishkarsh Bharat

अमन कुमार की रिपोर्ट

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