दारोगा बहाली में बड़ा एक्शन, रिजल्ट देने वाले 20 सेंटर EOU के रडार पर, BPSC से मांगी गई लिस्ट

दारोगा बहाली

दारोगा बहाली के टॉप 20 परीक्षा केंद्र EOU के रडार पर

निष्कर्ष भारत, संवाददाता (पटना)। दारोगा बहाली परीक्षा में कथित गड़बड़ियों की जांच अब और तेज हो गई है। आर्थिक अपराध इकाई (EOU) की विशेष जांच टीम यानी SIT ने बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग (BPSSC) से परीक्षा केंद्रों से जुड़ी कई अहम जानकारियां मांगी हैं। जांच एजेंसी ने ऐसे टॉप 20 परीक्षा केंद्रों की सूची तलब की है, जहां परीक्षार्थियों की संख्या के अनुपात में सबसे ज्यादा अभ्यर्थी सफल हुए हैं।

EOU की नजर दारोगा बहाली में सिर्फ अधिक सफल अभ्यर्थियों वाले केंद्रों पर ही नहीं है। जांच टीम ने उन 20 केंद्रों का भी ब्योरा मांगा है, जहां क्रमवार रोल नंबर वाले अपेक्षाकृत अधिक अभ्यर्थी सफल हुए हैं। इस जानकारी के जरिए जांच एजेंसी यह समझने की कोशिश कर रही है कि परीक्षा परिणाम में किसी केंद्र पर असामान्य पैटर्न तो नहीं दिख रहा है।

EOU ने BPSSC से मांगी दो स्तर की जानकारी

दारोगा बहाली परीक्षा की जांच के सिलसिले में EOU की SIT ने BPSSC को 3 और 8 सितंबर को दो अलग-अलग पत्र भेजे हैं। इन पत्रों के जरिए परीक्षा केंद्रों के परिणाम और अभ्यर्थियों की सफलता से संबंधित विस्तृत जानकारी मांगी गई है।

आयोग की ओर से फिलहाल दारोगा बहाली में इन सवालों के जवाब तैयार किए जा रहे हैं। EOU इस जानकारी का विश्लेषण कर यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि जिन केंद्रों पर असामान्य रूप से ज्यादा अभ्यर्थी सफल हुए हैं, वहां किसी तरह की गड़बड़ी की संभावना बनती है या नहीं।

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हालांकि, दारोगा बहाली में किसी केंद्र से ज्यादा अभ्यर्थियों के सफल होने को अपने आप में अनियमितता का प्रमाण नहीं माना जा सकता। जांच एजेंसी उपलब्ध आंकड़ों और दूसरे साक्ष्यों को मिलाकर ही किसी निष्कर्ष तक पहुंचेगी।

दारोगा बहाली के केंद्रों के वीडियो फुटेज भी मांगे

दारोगा बहाली में EOU की SIT ने शिकायतों से जुड़े परीक्षा केंद्रों के वीडियो फुटेज भी मांगे हैं। इनमें वे केंद्र शामिल हैं, जिनसे संबंधित मामले में पूर्णिया के साइबर थाना और गया के रामपुर थाना में FIR दर्ज हुई है। इसके अलावा अभ्यर्थियों की ओर से आपत्ति जताए गए परीक्षा केंद्रों के फुटेज भी जांच के दायरे में लिए जा रहे हैं।

वीडियो फुटेज के जरिए परीक्षा के दौरान केंद्र के अंदर और बाहर की गतिविधियों की जांच की जा सकती है। खास तौर पर यह देखा जा सकता है कि परीक्षा संचालन के दौरान निर्धारित नियमों का पालन हुआ था या नहीं और किसी संदिग्ध गतिविधि के संकेत मिले थे या नहीं। जांच टीम परीक्षा केंद्रों पर तैनात कर्मचारियों की भूमिका को भी समझने की कोशिश कर रही है।

केंद्राधीक्षक से लेकर जैमर कर्मियों तक की जानकारी

EOU ने संबंधित परीक्षा केंद्रों के तत्कालीन केंद्राधीक्षक, वीक्षक, बायोमेट्रिक कर्मियों और जैमर कर्मियों की सूची भी मांगी है। इन कर्मचारियों की भूमिका की जांच के साथ उनके बैकग्राउंड की भी पड़ताल की जा सकती है।

दारोगा बहाली में जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि परीक्षा से पहले या परीक्षा के दौरान किसी कर्मचारी का संदिग्ध व्यक्ति या समूह से संपर्क तो नहीं था। हालांकि, इस संबंध में अभी किसी कर्मचारी के खिलाफ आरोप साबित होने की जानकारी सामने नहीं आई है। जांच का उद्देश्य संभावित कड़ियों को जोड़ना और यह पता लगाना है कि यदि परीक्षा में कोई अनियमितता हुई थी तो उसके पीछे किस स्तर पर लापरवाही या साजिश की भूमिका रही।

पूर्णिया और गया केस का कनेक्शन तलाश रही SIT

पूर्णिया और गया में दर्ज FIR को जांच में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। EOU इन मामलों के आधार पर दूसरे परीक्षा केंद्रों से संभावित लिंक की तलाश कर रही है। जांच एजेंसी यह देखना चाहती है कि अलग-अलग स्थानों पर सामने आए संदिग्ध घटनाक्रम के बीच कोई साझा कड़ी मौजूद है या नहीं। EOU सूत्रों के अनुसार, दारोगा बहाली में अब तक की जांच में परीक्षा शुरू होने से पहले प्रश्नपत्र लीक होने का कोई प्रमाण नहीं मिला है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि जांच समाप्त हो गई है। उपलब्ध डिजिटल और अन्य साक्ष्यों की पड़ताल अभी जारी है।

दारोगा बहाली में WhatsApp और डिजिटल साक्ष्य पर नजर

जांच के दौरान पूर्णिया में एक शिक्षक की ओर से WhatsApp के माध्यम से प्रश्नपत्र की कॉपी पटना भेजे जाने की जानकारी भी सामने आई है। वहीं गया में परीक्षा के दौरान मिले डिजिटल प्रमाणों की भी जांच की जा रही है।

इन दोनों घटनाओं को जोड़कर EOU संभावित परीक्षा माफिया या अन्य संदिग्ध लोगों के बीच संबंध तलाश रही है। जांच टीम यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि डिजिटल माध्यम से साझा की गई सामग्री का स्रोत क्या था और उसका परीक्षा की कथित गड़बड़ी से कोई संबंध था या नहीं। फिलहाल इन घटनाओं से जुड़ी सभी संभावित कड़ियों की जांच की जा रही है। एजेंसी किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले उपलब्ध साक्ष्यों का सत्यापन कर रही है।

अब परीक्षा केंद्रों के आंकड़ों का होगा मिलान

EOU की जांच में परीक्षा केंद्रों के आंकड़े अहम भूमिका निभा सकते हैं। किसी केंद्र से कितने अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल हुए, उनमें कितने सफल हुए और सफल अभ्यर्थियों के रोल नंबर का पैटर्न कैसा रहा, इन सभी पहलुओं का मिलान किया जा सकता है।

अगर किसी केंद्र के आंकड़ों में सामान्य पैटर्न से अलग स्थिति दिखाई देती है तो जांच एजेंसी वहां उपलब्ध दूसरे साक्ष्यों की पड़ताल कर सकती है। इसके बाद जरूरत पड़ने पर संबंधित लोगों से पूछताछ भी हो सकती है। इस तरह दारोगा बहाली परीक्षा की जांच अब केवल शिकायतों तक सीमित नहीं है, बल्कि परिणाम के आंकड़ों, वीडियो फुटेज, डिजिटल साक्ष्य और परीक्षा कर्मियों की भूमिका तक पहुंच गई है।

EOU की एक और बड़ी जांच, 457 करोड़ रुपये का मामला

इसी बीच EOU की SIT को एक अन्य गंभीर आर्थिक मामले की जांच की जिम्मेदारी भी दी गई है। पटना के एक चार्टर्ड अकाउंटेंट के खिलाफ करीब 457 करोड़ रुपये की धनराशि कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर विदेश भेजने के मामले में दर्ज FIR की जांच अब EOU की विशेष टीम करेगी।

EOU के ADG अमित कुमार जैन ने इस मामले में SIT गठित करने का आदेश दिया है। प्रस्तावित SIT की अध्यक्षता DIG स्तर के अधिकारी करेंगे, जबकि इसमें DSP और इंस्पेक्टर रैंक के अधिकारी शामिल होंगे।

इस मामले में आयकर विभाग की ओर से FIR दर्ज कराई गई है। आरोपों में लोकसेवक को गलत जानकारी देना, कथित तौर पर फर्जी दस्तावेज तैयार या जारी करना, आपराधिक षड्यंत्र के जरिए धोखाधड़ी करना और देश से बाहर धन भेजना शामिल है।

मुंबई और बेंगलुरु की कंपनियों से संबंधों की जांच

EOU की SIT चार्टर्ड अकाउंटेंट पर लगाए गए आरोपों का सत्यापन करेगी। जांच के दौरान मुंबई और बेंगलुरु की कुछ कंपनियों के साथ उनके कथित संबंधों की भी पड़ताल की जाएगी।

इसके अलावा चार्टर्ड अकाउंटेंट की ओर से जारी किए गए प्रमाण पत्रों की विस्तृत जांच की जाएगी। जांच टीम दस्तावेजों की वास्तविकता और उनके आधार पर किए गए वित्तीय लेन-देन की कड़ियों को समझने का प्रयास करेगी।

फिलहाल दोनों मामलों में जांच अलग-अलग स्तर पर आगे बढ़ रही है। एक ओर दारोगा बहाली परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर EOU परीक्षा केंद्रों और डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रही है, वहीं दूसरी ओर 457 करोड़ रुपये से जुड़े आर्थिक मामले में दस्तावेजों और कंपनियों के नेटवर्क की पड़ताल की जा रही है।

दारोगा बहाली मामले में अब सबसे अहम यह होगा कि BPSSC से मांगी गई जानकारी मिलने के बाद EOU को क्या नए तथ्य सामने आते हैं। टॉप 20 केंद्रों के आंकड़े, वीडियो फुटेज और परीक्षा कर्मियों की जानकारी के विश्लेषण से जांच को नई दिशा मिल सकती है। हालांकि, जांच पूरी होने से पहले किसी भी परीक्षा केंद्र, कर्मचारी या अभ्यर्थी को दोषी मानना उचित नहीं होगा।

Nishkarsh Bharat

राजकुमार सिंह की रिपोर्ट

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