IIT बॉम्बे में छात्र की मौत, Chat GPT विवाद के बाद 400 छात्रों का प्रदर्शन, जांच और पारदर्शिता की मांग
IIT Bombay में छात्र की मौत के बाद 400 से ज्यादा छात्रों का प्रदर्शन
निष्कर्ष भारत, संवाददाता (मुंबई)। IIT Bombay में एक दूसरे वर्ष के छात्र की मौत के बाद कैंपस में तनाव की स्थिति बन गई। 18 सितंबर की शाम छात्र की मौत की खबर सामने आने के बाद 400 से अधिक छात्रों ने संस्थान परिसर में प्रदर्शन किया। मामला उस परीक्षा से जुड़ा है, जिसमें छात्र को मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते हुए पकड़े जाने की बात सामने आई है। IIT Bombay के अनुसार, छात्र ने परीक्षा के प्रश्नपत्र को ChatGPT पर अपलोड कर जवाब हासिल करने की कोशिश की थी। घटना के बाद छात्रों ने प्रशासन से पारदर्शिता, जवाबदेही और पूरे मामले की जांच की मांग की है।
निष्पक्ष ख़बर देखिये हमारे यूट्यूब चैनल पर: IIT Mumbai में छात्र की मौत से IIT पटना में जांच की मांग…
मृतक की पहचान साहिल वाकोड़े के रूप में हुई है। वह IIT Bombay के Department of Energy Science and Engineering में दूसरे वर्ष का छात्र था। संस्थान के अनुसार, परीक्षा के दौरान मोबाइल फोन के इस्तेमाल का मामला सामने आने के बाद विभागाध्यक्ष और संबंधित शिक्षक ने उससे बातचीत की और काउंसलिंग की थी। संस्थान का कहना है कि छात्र को भरोसा दिलाया गया था कि इस घटना का उसके अकादमिक करियर पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा। इसके बाद वह हॉस्टल लौट गया, जहां बाद में उसकी मौत की जानकारी मिली।
IIT Bombay में मौत के बाद कैंपस में प्रदर्शन
छात्र की मौत की खबर फैलने के बाद कैंपस में बड़ी संख्या में छात्र जुटे। प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने प्रशासन से पूरे घटनाक्रम की जानकारी सार्वजनिक करने और मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। रिपोर्टों के मुताबिक प्रदर्शन में 400 से अधिक छात्र शामिल हुए। छात्रों ने छात्र कल्याण, मानसिक स्वास्थ्य सहायता और प्रशासनिक प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए।
खबरें हमारे फेसबुक पर भी, लगातार खबरों के लिए फेसबुक से जुड़े
प्रदर्शन के बीच छात्रों ने संस्थान के निदेशक और डीन से लिखित रिपोर्ट जारी करने की मांग की। उनका कहना है कि ऐसी घटनाओं के पीछे की परिस्थितियों को समझना जरूरी है, ताकि भविष्य में किसी छात्र को इस तरह की स्थिति का सामना न करना पड़े।
ChatGPT और परीक्षा से कैसे जुड़ा पूरा मामला
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक घटना की शुरुआत परीक्षा के दौरान मोबाइल फोन के इस्तेमाल से हुई। IIT Bombay के आधिकारिक पक्ष के अनुसार, साहिल ने परीक्षा का प्रश्नपत्र मोबाइल से ChatGPT पर अपलोड कर उसके जवाब हासिल करने की कोशिश की थी। परीक्षा के दौरान यह सामने आने के बाद संबंधित शिक्षक और विभागाध्यक्ष ने छात्र से बातचीत की।
इसे भी पढ़ें: वित्त रहित शिक्षकों के लिए खुशखबरी, सम्राट सरकार ने खोला खजाना, 461 करोड़ रुपये जारी
यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि ChatGPT के इस्तेमाल और छात्र की मौत के बीच सीधा कारण स्थापित नहीं हुआ है। पुलिस मामले की परिस्थितियों की जांच कर रही है। इसलिए परीक्षा में हुई घटना, उसके बाद की बातचीत और छात्र की मौत के बीच संबंध को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच के बाद ही सामने आ सकेगा।
IIT ने कहा- कोई औपचारिक अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं हुई
IIT Bombay ने अपने बयान में कहा है कि छात्र के खिलाफ घटना के बाद कोई औपचारिक अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू नहीं की गई थी। संस्थान के मुताबिक, संबंधित शिक्षक और विभागाध्यक्ष ने छात्र की काउंसलिंग की और उसे आश्वस्त किया कि घटना का उसके अकादमिक करियर पर प्रतिकूल असर नहीं पड़ेगा।
संस्थान के इस पक्ष के बाद भी छात्रों के बीच कई सवाल उठे हैं। प्रदर्शनकारी छात्र प्रशासन से यह स्पष्ट करने की मांग कर रहे हैं कि परीक्षा कक्ष से छात्र के बाहर आने के बाद उसके साथ क्या बातचीत हुई और उसके बाद की घटनाओं का पूरा क्रम क्या था।
छात्रों ने लगाया एक साल सस्पेंशन की धमकी का आरोप
प्रदर्शन कर रहे कुछ छात्रों ने दावा किया कि साहिल को एक साल के सस्पेंशन की धमकी दी गई थी और उसे हॉस्टल खाली कर कैंपस से बाहर जाने के लिए कहा गया था। छात्रों के मुताबिक, अगर ऐसा होता तो उसके बीटेक पाठ्यक्रम की अवधि प्रभावित हो सकती थी।
हालांकि, यह दावा संस्थान के आधिकारिक पक्ष से मेल नहीं खाता। IIT Bombay ने कहा है कि छात्र के खिलाफ कोई औपचारिक अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू नहीं की गई थी और उसे उसके अकादमिक करियर पर नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ने का भरोसा दिया गया था। इस विरोधाभास को देखते हुए पूरे घटनाक्रम की स्वतंत्र और तथ्यात्मक जांच महत्वपूर्ण हो गई है।
IIT Bombay में पहले भी सामने आ चुकी हैं ऐसी घटनाएं
साहिल की मौत ने IIT Bombay के Powai कैंपस में छात्र सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य को लेकर चिंता बढ़ा दी है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, यह इस कैंपस में करीब सात महीनों के भीतर छात्र की तीसरी आत्महत्या की घटना बताई जा रही है।
इससे पहले भी कैंपस में छात्रों की मौत की घटनाएं सामने आई थीं। लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं के बीच छात्रों ने प्रशासन से यह जानने की मांग की है कि संस्थान में छात्रों के मानसिक दबाव की पहचान और समय पर सहायता के लिए क्या व्यवस्था है।
मिड-सेमेस्टर परीक्षा भी स्थगित
छात्रों के विरोध के बीच IIT Bombay की चल रही मिड-सेमेस्टर परीक्षाओं को स्थगित किए जाने की जानकारी सामने आई है। प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने संस्थान की परीक्षा व्यवस्था और छात्र सहायता प्रणाली को लेकर सवाल उठाए।
परीक्षा जैसी महत्वपूर्ण शैक्षणिक प्रक्रिया के बीच हुई यह घटना संस्थान के सामने एक साथ कई चुनौतियां लेकर आई है। एक तरफ परीक्षा में अनुशासन और नियमों का पालन सुनिश्चित करना जरूरी है, वहीं दूसरी ओर किसी भी अनुशासनात्मक परिस्थिति में छात्र के मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य को भी ध्यान में रखना महत्वपूर्ण है।
जांच में जुटी पुलिस, जुटाए जा रहे साक्ष्य
छात्र की मौत के मामले में स्थानीय पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। हॉस्टल के कमरे और घटनास्थल से संबंधित साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि परीक्षा के दौरान हुई घटना के बाद छात्र के साथ क्या-क्या हुआ और उसके बाद घटनाओं का क्रम किस तरह आगे बढ़ा। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि छात्र की मौत से पहले की परिस्थितियां क्या थीं। फिलहाल किसी एक कारण को मौत की वजह मानना जल्दबाजी होगी।
छात्रों की मांग- पारदर्शिता और जवाबदेही
प्रदर्शनकारी छात्रों की प्रमुख मांग पूरे घटनाक्रम की पारदर्शी जांच है। छात्र चाहते हैं कि संस्थान प्रशासन लिखित रूप में घटना से संबंधित जानकारी साझा करे और यह बताया जाए कि परीक्षा में मोबाइल इस्तेमाल का मामला सामने आने के बाद छात्र के साथ क्या प्रक्रिया अपनाई गई।

छात्रों ने भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए मानसिक स्वास्थ्य सहायता को मजबूत करने और जरूरतमंद छात्रों तक काउंसलिंग की पहुंच आसान बनाने की मांग भी उठाई है। उनका कहना है कि छात्र केवल अकादमिक प्रदर्शन का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि संस्थान की जिम्मेदारी उनके समग्र कल्याण से भी जुड़ी है।
अब जांच रिपोर्ट पर टिकी नजर
IIT Bombay में साहिल वाकोड़े की मौत के बाद उठे सवालों का जवाब फिलहाल जांच और उपलब्ध तथ्यों से ही सामने आएगा। संस्थान ने अपनी ओर से कहा है कि कोई औपचारिक अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू नहीं की गई थी, जबकि कुछ प्रदर्शनकारी छात्र इसके विपरीत आरोप लगा रहे हैं।
ऐसे में घटना के हर पहलू की जांच जरूरी है। परीक्षा में ChatGPT के इस्तेमाल से शुरू हुआ विवाद छात्र की मौत के बाद एक बड़े संस्थागत सवाल में बदल गया है। अब छात्रों की मांग, प्रशासन का पक्ष और पुलिस की जांच—इन तीनों के आधार पर यह स्पष्ट होना बाकी है कि घटना से पहले और बाद में वास्तव में क्या हुआ था।
राजकुमार सिंह की रिपोर्ट
