प्रदेश में अब बिजली कटने पर कंपनियों पर लगेगा जुर्माना, सरकार सख्त, नई नियमावली की तैयारी
बिजली कटौती पर कंपनियों पर जुर्माने की तैयारी, उपभोक्ताओं को राहत
निष्कर्ष भारत, संवाददाता (पटना)। बिहार बिजली व्यवस्था को लेकर राज्य में नई नियामकीय व्यवस्था तैयार की जा रही है। बिहार विद्युत विनियामक आयोग यानी BERC ने बिजली संसाधन पर्याप्तता से जुड़े मौजूदा नियमों में संशोधन की प्रक्रिया शुरू की है। इसका मुख्य उद्देश्य राज्य में बिजली की उपलब्धता और भविष्य की मांग के बीच बेहतर तालमेल बनाना है।
जरूरत के समय बिजली की कमी का सामना न करना पड़े। प्रस्तावित व्यवस्था में बिजली वितरण कंपनियों की जिम्मेदारी तय करने और स्वीकृत लक्ष्य के अनुरूप बिजली की व्यवस्था नहीं होने पर गैर-अनुपालन शुल्क लगाने का प्रावधान चर्चा में है। आयोग की वेबसाइट पर Framework for Resource Adequacy के पहले संशोधन का ड्राफ्ट दर्ज है और इस पर 6 अक्टूबर को सुनवाई निर्धारित है।
बिजली आपूर्ति को लेकर क्यों हो रहा बदलाव?
बिहार में विद्युत की मांग लगातार बदल रही है। गर्मी के मौसम में पंखे, कूलर और एसी के बढ़ते इस्तेमाल से मांग बढ़ती है, जबकि कृषि, उद्योग और व्यावसायिक गतिविधियों के कारण भी अलग-अलग समय पर विद्युत की जरूरत बदलती रहती है।
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ऐसे में केवल मौजूदा खपत को देखकर विद्युत खरीद की योजना बनाना पर्याप्त नहीं माना जाता। प्रस्तावित संसाधन पर्याप्तता व्यवस्था का उद्देश्य भविष्य की मांग का अनुमान लगाकर पहले से विद्युत उपलब्ध कराने की योजना तैयार करना है।
बिहार बिजली कंपनियों की जिम्मेदारी होगी अहम
नई व्यवस्था में विद्युत वितरण कंपनियों यानी नॉर्थ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड और साउथ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। कंपनियों को अनुमानित मांग के अनुसार विद्युत की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए पहले से योजना बनानी होगी।
इसका उद्देश्य यह है कि अचानक मांग बढ़ने पर विद्युत खरीद या उपलब्धता को लेकर संकट की स्थिति न बने। लंबी अवधि की योजना के साथ विद्युत की खरीद और उपलब्धता का आकलन किया जा सकेगा।
बिजली कटौती पर जुर्माने का प्रस्ताव
प्रस्तावित व्यवस्था का सबसे अहम पहलू वितरण कंपनियों की जवाबदेही से जुड़ा है। यदि किसी कंपनी की ओर से स्वीकृत संसाधन पर्याप्तता लक्ष्य के मुताबिक विद्युत का इंतजाम नहीं किया जाता या निर्धारित व्यवस्था के बावजूद अनावश्यक कटौती होती है, तो गैर-अनुपालन शुल्क लगाए जाने की व्यवस्था हो सकती है।
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हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि प्रस्तावित नियम अभी प्रक्रिया में हैं। अंतिम नियम जारी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि जुर्माने की गणना किस आधार पर होगी, किन परिस्थितियों में इसे लागू किया जाएगा और इसकी राशि कितनी होगी।
उपभोक्ताओं को मिल सकता है मुआवजा
प्रस्तावित व्यवस्था में जुर्माने की राशि को प्रभावित उपभोक्ताओं तक राहत के रूप में पहुंचाने की बात भी सामने आई है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अगर निर्धारित मानकों के विपरीत विद्युत आपूर्ति में कमी होती है तो उसका असर सिर्फ कंपनी पर आर्थिक दंड तक सीमित न रहे।

मुआवजे की वास्तविक प्रक्रिया, पात्रता और भुगतान का तरीका अंतिम नियमों में स्पष्ट किया जाएगा। इसलिए फिलहाल इसे प्रस्तावित उपभोक्ता राहत व्यवस्था के रूप में समझना उचित होगा।
बिहार बिजली के लिए बनेगा लंबी अवधि का रोडमैप
नई संसाधन पर्याप्तता व्यवस्था में भविष्य की विद्युत मांग का आकलन महत्वपूर्ण हिस्सा है। वितरण कंपनियों को केवल तत्काल जरूरत के आधार पर नहीं, बल्कि आगे की अवधि को ध्यान में रखकर बिजली की योजना तैयार करनी होगी।
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इससे विद्युत खरीद के लिए समय रहते अनुबंध करने, उपलब्ध संसाधनों का आकलन करने और संभावित कमी को पहले से पहचानने में मदद मिल सकती है। मांग और उपलब्धता के बीच अंतर कम करना इस व्यवस्था का प्रमुख उद्देश्य है।
पीक आवर में बिजली कटौती पर खास नजर
विद्युत की मांग पूरे दिन एक जैसी नहीं रहती। सुबह और शाम के समय कई इलाकों में खपत बढ़ सकती है। गर्मी में शाम और रात के समय भी घरेलू बिजली की मांग अधिक हो सकती है।
ऐसे पीक आवर में विद्युत की उपलब्धता बनाए रखना वितरण व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण होता है। प्रस्तावित व्यवस्था में संसाधनों की उपलब्धता और मांग के अनुरूप योजना पर जोर दिया जा रहा है। निर्धारित संसाधन होने के बावजूद अनुचित कटौती होने पर जवाबदेही तय करने का प्रावधान भी चर्चा में है।
आयोग ने मांगे आम लोगों से सुझाव
बिहार विद्युत विनियामक आयोग ने प्रस्तावित संशोधन पर आम लोगों और संबंधित पक्षों से सुझाव और आपत्तियां आमंत्रित की हैं। आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर Framework for Resource Adequacy के पहले संशोधन से जुड़ा ड्राफ्ट उपलब्ध है।
इस प्रक्रिया में उपभोक्ता, विद्युत कंपनियां और अन्य हितधारक अपने सुझाव दे सकते हैं। प्राप्त सुझावों और आपत्तियों पर विचार करने के बाद आयोग आगे की प्रक्रिया तय करेगा।
6 अक्टूबर को होगी सुनवाई
आयोग के शेड्यूल के अनुसार Framework for Resource Adequacy के First Amendment Regulations, 2026 पर 6 अक्टूबर 2026 को सुनवाई निर्धारित है। सुनवाई में प्रस्तावित नियमों पर प्राप्त सुझाव और आपत्तियों पर विचार किया जाएगा।
इस सुनवाई के बाद नियमों के अंतिम स्वरूप को लेकर स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकती है। फिलहाल आयोग की वेबसाइट पर इसे ड्राफ्ट और सुनवाई प्रक्रिया के रूप में दर्ज किया गया है।
बिजली खरीद में पहले से तैयारी पर जोर
संसाधन पर्याप्तता नियमों का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य बिजली की जरूरत और उपलब्धता के बीच संतुलन बनाना है। यदि आने वाले महीनों या वर्षों में मांग बढ़ने का अनुमान है तो उसके अनुरूप बिजली खरीद की योजना पहले से तैयार करनी होगी।
इससे अचानक बिजली संकट के समय महंगी या तत्काल खरीद पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है। साथ ही बिजली उत्पादन, खरीद और वितरण के बीच बेहतर समन्वय की व्यवस्था बनाने की कोशिश होगी।
रेलवे के बकाये का मामला भी आयोग के सामने
इसी बीच बिजली क्षेत्र से जुड़ा एक अलग मामला भी आयोग के समक्ष है। पूर्व मध्य रेलवे और बिजली कंपनियों के बीच बकाया शुल्क को लेकर विवाद सामने आया है। इसमें लॉन्ग टर्म ओपन एक्सेस शुल्क, क्रॉस-सब्सिडी सरचार्ज और ब्याज की वसूली जैसे मुद्दे शामिल हैं।
आयोग ने दोनों पक्षों को बैठक कर विवाद सुलझाने का निर्देश दिया है। यह मामला संसाधन पर्याप्तता नियमों से अलग है, लेकिन बिजली क्षेत्र की वित्तीय व्यवस्था और बकाया वसूली के लिहाज से महत्वपूर्ण है।
टैरिफ पर भी पड़ सकता है असर
बिजली कंपनियों की वित्तीय स्थिति और बकाया राशि की वसूली का असर भविष्य के टैरिफ पर भी पड़ सकता है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार यदि संबंधित बकाया राशि टैरिफ याचिका की प्रक्रिया से पहले प्राप्त हो जाती है तो वित्तीय वर्ष 2027-28 के टैरिफ पर इसका प्रभाव पड़ सकता है।
हालांकि, बिजली दरों में वास्तविक बदलाव कई कारकों पर निर्भर करेगा। इसलिए फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि अगले वित्त वर्ष में उपभोक्ताओं के लिए बिजली सस्ती ही होगी।
उपभोक्ताओं के लिए क्या मायने रखता है?
प्रस्तावित बदलाव का सीधा संबंध बिजली की उपलब्धता और आपूर्ति की विश्वसनीयता से है। यदि नई व्यवस्था प्रभावी रूप से लागू होती है तो कंपनियों को भविष्य की मांग का अधिक व्यवस्थित आकलन करना होगा और बिजली की उपलब्धता के लिए पहले से तैयारी करनी होगी।
उपभोक्ताओं के लिए सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह होगा कि बिजली आपूर्ति में कमी होने पर कंपनियों की जवाबदेही किस तरह तय होती है। जुर्माना और मुआवजे से संबंधित प्रावधान अंतिम नियमों में किस रूप में आते हैं, यह 6 अक्टूबर की सुनवाई और आगे की नियामकीय प्रक्रिया के बाद स्पष्ट होगा।
अभी अंतिम नियम का इंतजार
फिलहाल बिहार में बिजली कटौती पर जुर्माने की व्यवस्था को अंतिम रूप से लागू नहीं माना जा सकता। BERC ने Resource Adequacy के पहले संशोधन का ड्राफ्ट जारी कर प्रक्रिया आगे बढ़ाई है और 6 अक्टूबर को सुनवाई निर्धारित है।
नई नियमावली का अंतिम स्वरूप सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि बिजली वितरण कंपनियों पर किस स्थिति में जुर्माना लगेगा, उपभोक्ताओं को मुआवजा किस तरह मिलेगा और बिजली की भविष्य की मांग के लिए कंपनियों को कितनी अवधि की योजना बनानी होगी। फिलहाल पूरी प्रक्रिया का केंद्र 24 घंटे अधिक विश्वसनीय बिजली आपूर्ति के लिए संसाधनों की समयबद्ध योजना और कंपनियों की जवाबदेही तय करना है।
राजकुमार सिंह की रिपोर्ट
