विक्रमशिला सेतु 1 अक्टूबर से बंद, जानें कैसे चलेंगे वाहन…जलमार्ग पर जोड़
विक्रमशिला सेतु बंद होने पर गंगा जलमार्ग से होगा भागलपुर-नवगछिया आवागमन।
निष्कर्ष भारत, संवाददाता (भागलपुर)। विक्रमशिला सेतु पर 1 अक्टूबर से करीब तीन महीने तक सभी प्रकार के वाहनों की आवाजाही बंद किए जाने की तैयारी है। उत्तर और दक्षिण बिहार को जोड़ने वाले इस महत्वपूर्ण पुल के क्षतिग्रस्त हिस्से के स्थायी पुनर्निर्माण के लिए काम शुरू होना है। सेतु बंद रहने की स्थिति में भागलपुर और नवगछिया के बीच आवागमन प्रभावित होगा। इसे देखते हुए जिला प्रशासन ने अभी से वैकल्पिक परिवहन व्यवस्था तैयार करने की कवायद तेज कर दी है।
प्रशासन की योजना के मुताबिक, सेतु बंद रहने के दौरान गंगा जलमार्ग को वैकल्पिक परिवहन के तौर पर इस्तेमाल किया जाएगा। यात्रियों के साथ खाद्यान्न, जरूरी सामान और अन्य माल की ढुलाई के लिए बड़े यात्री और मालवाहक जलयानों के परिचालन की तैयारी की जा रही है। मकसद यह है कि पुल बंद होने के बाद सड़क मार्ग पर बढ़ने वाले दबाव को कम किया जा सके और भागलपुर-नवगछिया के बीच जरूरी आवाजाही जारी रहे।
विक्रमशिला सेतु बंद होने से पहले जलमार्ग की तैयारी
जिला पदाधिकारी के निर्देश पर जिला आपदा प्रबंधन शाखा ने जलमार्ग से परिवहन की व्यवस्था को लेकर काम तेज कर दिया है। प्रशासन की कोशिश है कि सेतु बंद होने से पहले जलयानों की उपलब्धता, परिचालन का समय, किराया, घाटों की व्यवस्था और यात्रियों की सुरक्षा से जुड़े सभी जरूरी इंतजाम पूरे कर लिए जाएं।
इसके लिए सक्षम जलयान संचालकों से आवेदन भी आमंत्रित किए गए हैं। प्रशासन ऐसे जलयानों की व्यवस्था करना चाहता है, जिनमें बड़ी संख्या में यात्रियों को सुरक्षित तरीके से गंगा पार कराया जा सके। इसके साथ ही आवश्यक वस्तुओं और माल की ढुलाई के लिए अलग व्यवस्था तैयार करने पर भी काम किया जा रहा है।
भागलपुर और नवगछिया के बीच बनेंगे ट्रांजिट प्वाइंट
विक्रमशिला सेतु के बंद रहने के दौरान बरारी/भागलपुर और नवगछिया की ओर गंगा के दोनों छोर महत्वपूर्ण ट्रांजिट प्वाइंट बन सकते हैं। प्रशासन इन स्थानों पर यात्रियों की सुविधा से जुड़ी व्यवस्थाओं की समीक्षा कर रहा है।
घाटों तक पहुंचने वाली सड़कों, रोशनी, पार्किंग और बैरिकेडिंग जैसी सुविधाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। प्रशासन की कोशिश है कि यात्रियों को सड़क से घाट और फिर जलयान तक पहुंचने में परेशानी नहीं हो। इसी तरह गंगा पार करने के बाद नवगछिया की ओर आगे जाने के लिए भी परिवहन व्यवस्था को व्यवस्थित करने की योजना है।
जलमार्ग व्यवस्था में सुरक्षा पर जोर
विक्रमशिला सेतु बंद होने से तीन महीने तक बड़ी संख्या में यात्रियों के जलमार्ग से आवागमन की संभावना को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था को भी अहम माना जा रहा है। प्रशासन जलयानों की क्षमता और सुरक्षा मानकों की जांच के साथ यात्रियों के लिए घाटों पर जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने की तैयारी कर रहा है।

घाटों पर भीड़ को नियंत्रित करने, यात्रियों के आवागमन को व्यवस्थित रखने और रात के समय पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था करने पर भी जोर दिया जा रहा है। पार्किंग और बैरिकेडिंग की व्यवस्था से भीड़भाड़ को नियंत्रित करने की योजना है।
विक्रमशिला सेतु का बेली ब्रिज भी हटेगा
विक्रमशिला सेतु के क्षतिग्रस्त हिस्से पर फिलहाल हल्के वाहनों की आवाजाही के लिए बनाए गए अस्थायी बेली ब्रिज को भी हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। बेली ब्रिज का निर्माण करने वाली एजेंसी की तकनीकी टीम को भागलपुर बुलाया गया है।
विक्रमशिला सेतु के क्षतिग्रस्त स्पैन की स्थायी मरम्मत के लिए निर्माण एजेंसी एसपी सिंगला की ओर से आधुनिक स्टील ब्रिज और नए कंक्रीट स्लैब लगाने का काम किया जाना है। अधिकारियों के मुताबिक, यह तकनीकी रूप से जटिल कार्य है और इसे पूरा करने में करीब तीन महीने का समय लग सकता है।
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इसी वजह से मरम्मत कार्य के दौरान पुल पर वाहनों की आवाजाही पूरी तरह रोकने की तैयारी है। स्थायी पुनर्निर्माण का काम पूरा होने के बाद ही सेतु पर सामान्य यातायात बहाल किए जाने की स्थिति बनेगी।
लाखों लोगों के आवागमन पर पड़ेगा असर
विक्रमशिला सेतु केवल भागलपुर और नवगछिया को जोड़ने वाला पुल नहीं है। यह उत्तर और दक्षिण बिहार के बीच आवागमन की महत्वपूर्ण कड़ी है। नवगछिया के अलावा पूर्णिया, कटिहार और सीमांचल के अन्य इलाकों की ओर जाने वाले बड़ी संख्या में लोग इस मार्ग का इस्तेमाल करते हैं।
ऐसे में तीन महीने तक पुल बंद रहने से यात्रियों के साथ कारोबारियों और माल ढुलाई से जुड़े लोगों पर भी असर पड़ सकता है। रोजाना आने-जाने वाले लोगों के लिए वैकल्पिक मार्ग और जल परिवहन की व्यवस्था महत्वपूर्ण होगी।
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प्रशासन की कोशिश है कि वैकल्पिक व्यवस्था केवल आपातकालीन विकल्प तक सीमित न रहे, बल्कि पुल बंद रहने की पूरी अवधि में नियमित परिवहन व्यवस्था के रूप में काम करे। इसके लिए जलयानों के समय, किराए और उनकी क्षमता से जुड़ी जानकारी पहले से तय करने की तैयारी की जा रही है।
सड़क के साथ गंगा जलमार्ग पर भी रहेगा फोकस
विक्रमशिला सेतु बंद होने के बाद सड़क मार्गों पर यातायात का दबाव बढ़ने की संभावना है। ऐसे में प्रशासन सड़क के साथ गंगा जलमार्ग को भी परिवहन नेटवर्क का हिस्सा बनाने की तैयारी कर रहा है। यात्रियों और जरूरी सामान की आवाजाही को बनाए रखना प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती होगी।
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इसके लिए जिला प्रशासन, आपदा प्रबंधन शाखा, परिवहन विभाग और अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण के बीच समन्वय किया जा रहा है। अधिकारियों की बैठकों में इस बात पर चर्चा हो रही है कि सेतु बंद होने के बाद यात्रियों को वैकल्पिक मार्ग तक पहुंचने में किसी तरह की परेशानी न हो।
विक्रमशिला सेतु की मरम्मत के साथ वैकल्पिक व्यवस्था
विक्रमशिला सेतु के क्षतिग्रस्त हिस्से का स्थायी पुनर्निर्माण जरूरी होने के कारण करीब तीन महीने तक यातायात रोकने की तैयारी की जा रही है। इस दौरान प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती भागलपुर और नवगछिया के बीच सामान्य जनजीवन, यात्रियों की आवाजाही और जरूरी सामान की आपूर्ति को बनाए रखना है।
गंगा जलमार्ग के जरिए यात्री और माल परिवहन की व्यवस्था इसी चुनौती को कम करने की कोशिश का हिस्सा है। यदि जलयानों की उपलब्धता, घाटों की सुविधाएं, सुरक्षा व्यवस्था और परिचालन समय से पहले तैयार कर लिए जाते हैं, तो पुल बंद रहने के दौरान लोगों को वैकल्पिक परिवहन का एक व्यवस्थित विकल्प मिल सकता है।
फिलहाल प्रशासन की तैयारियां जारी हैं। सेतु के स्थायी पुनर्निर्माण के लिए तकनीकी काम के साथ वैकल्पिक आवागमन की व्यवस्था को अंतिम रूप देने पर जोर दिया जा रहा है। आने वाले दिनों में जलयानों के परिचालन, घाटों और यात्रियों की सुविधाओं को लेकर स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है।
अमन कुमार की रिपोर्ट
