IIT Bombay Student Suicide: कांग्रेस प्रवक्ता शमा मोहम्मद ने प्रोफेसर का किया समर्थन, कहा- हमारी पीढ़ी मानसिक रूप से ज्यादा मजबूत थी
IIT बॉम्बे छात्र आत्महत्या मामले में शमा मोहम्मद ने प्रोफेसर का समर्थन किया
निष्कर्ष भारत संवाददाता- मुंबई: IIT Bombay में बीटेक छात्र की कथित आत्महत्या के बाद शुरू हुआ विवाद अब राजनीतिक बयानबाजी और कैंपस में छात्रों के विरोध प्रदर्शन तक पहुंच गया है। कांग्रेस प्रवक्ता शमा मोहम्मद ने इस मामले में प्रोफेसर सूर्यनारायण डूला के समर्थन में अपनी बात रखी है। उन्होंने कहा कि अगर कोई छात्र नकल करते हुए पकड़ा जाता है, तो उसे डांटना या परीक्षा कक्ष से बाहर जाने के लिए कहना सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है। साथ ही, उन्होंने अपनी पीढ़ी के छात्रों को मानसिक रूप से अधिक मजबूत बताया।
यह मामला छात्र की मौत, परीक्षा में कथित नकल, प्रोफेसर पर लगाए गए जातिसूचक टिप्पणी के आरोप और संस्थान की कार्रवाई को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। दूसरी ओर, IIT Bombay का कहना है कि छात्र के खिलाफ कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू नहीं की गई थी और उसे काउंसलिंग के दौरान आश्वासन दिया गया था कि इस घटना का उसके शैक्षणिक करियर पर नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा।
क्या है पूरा मामला?
यह घटना 18 सितंबर 2026 को सामने आई, जब IIT Bombay के ऊर्जा विज्ञान एवं इंजीनियरिंग विभाग के दूसरे वर्ष के छात्र साहिल वाकोड़े की हॉस्टल के कमरे में मौत हो गई। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, उसी दिन मिड-सेमेस्टर परीक्षा के दौरान छात्र को मोबाइल फोन के इस्तेमाल के आरोप में पकड़ा गया था। संस्थान के अनुसार, छात्र ने प्रश्नपत्र को ChatGPT पर अपलोड कर उत्तर तलाशने की कोशिश की थी।
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IIT Bombay ने अपने शुरुआती बयान में कहा था कि छात्र के खिलाफ कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू नहीं की गई थी। संस्थान के मुताबिक, संबंधित प्रोफेसर और विभागाध्यक्ष ने छात्र से बातचीत की और उसे बताया कि इस घटना का उसके शैक्षणिक भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा। इसके बाद छात्र हॉस्टल लौट गया, जहां बाद में वह मृत पाया गया।
हालांकि, इस मामले में संस्थान के शुरुआती स्पष्टीकरण और बाद में सामने आए आरोपों के बीच विवाद बना हुआ है। बाद की रिपोर्टों में IIT Bombay की ओर से यह भी कहा गया कि घटना की परिस्थितियों की जांच जारी है और इस संबंध में पहले सार्वजनिक रूप से निष्कर्षात्मक बयान देना उचित नहीं था।
शमा मोहम्मद ने प्रोफेसर के समर्थन में क्या कहा?
कांग्रेस प्रवक्ता शमा मोहम्मद ने सोशल मीडिया पर इस मामले को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि वह प्रोफेसर सूर्यनारायण डूला के साथ खड़ी हैं। उनके अनुसार, परीक्षा के दौरान नकल करते हुए पकड़े गए छात्र को डांटना या उसे परीक्षा कक्ष से बाहर जाने के लिए कहना सामान्य कार्रवाई हो सकती है।
शमा मोहम्मद ने यह भी कहा कि यदि छात्र के साथ उसकी जाति के आधार पर उत्पीड़न हुआ था, तो उसे SC/ST विभाग में शिकायत करनी चाहिए थी। उन्होंने अपने बचपन और अपनी पीढ़ी का उदाहरण देते हुए कहा कि उस समय शिक्षक और माता-पिता गलतियों पर डांटते थे और उनकी पीढ़ी मानसिक रूप से अधिक मजबूत थी। यह बयान ऐसे समय में आया है जब छात्र की मौत के पीछे कथित मानसिक दबाव और जातिगत भेदभाव के आरोपों की जांच की मांग हो रही है।
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हालांकि, उन्होंने छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर सहायता व्यवस्था मजबूत करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कॉलेजों में छात्रों की भलाई के लिए मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों की नियुक्ति की अपील की।
छात्र के पिता ने लगाए गंभीर आरोप
छात्र के पिता की शिकायत के आधार पर प्रोफेसर सूर्यनारायण डूला के खिलाफ पुलिस मामला दर्ज किया गया है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि प्रोफेसर ने पिछले तीन महीनों के दौरान छात्र के खिलाफ जातिसूचक टिप्पणियां कीं और उसे परेशान किया। मामले में आत्महत्या के लिए उकसाने तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण कानून के तहत आरोपों की रिपोर्टिंग की गई है।
मुंबई पुलिस ने मामले की जांच क्राइम ब्रांच को सौंप दी है। आरोपों की सत्यता, घटना से जुड़े लोगों की भूमिका और छात्र की मौत के कारणों का निर्धारण जांच तथा कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से किया जाना है। किसी आरोपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज होना अपने आप में आरोप सिद्ध होने का प्रमाण नहीं है।
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आईआईटी बॉम्बे फैकल्टी फोरम ने भी किया समर्थन
इस विवाद के बीच IIT Bombay फैकल्टी फोरम ने प्रोफेसर सूर्यनारायण डूला के समर्थन में बयान जारी किया। फोरम के अनुसार, प्रोफेसर परीक्षा के दौरान मोबाइल फोन के अनधिकृत इस्तेमाल का पता चलने पर संस्थान की स्वीकृत शैक्षणिक नीतियों के तहत अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे।
फोरम ने कहा कि प्रोफेसर ने कथित शैक्षणिक अनियमितता की जानकारी आगे की कार्रवाई के लिए संस्थान के अधिकारियों को दी थी। साथ ही, उसने छात्र के परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की।
दूसरी ओर, छात्र की मौत के बाद कैंपस में छात्रों का विरोध प्रदर्शन हुआ। प्रदर्शनकारी प्रशासन से मामले में जवाबदेही, पारदर्शिता और छात्रों की सुरक्षा से जुड़े सवालों पर स्पष्ट कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
मानसिक स्वास्थ्य और संस्थागत जवाबदेही पर बहस
IIT Bombay की घटना ने उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य, परीक्षा के दबाव, शैक्षणिक अनुशासन और शिकायत निवारण व्यवस्था पर चर्चा तेज कर दी है। एक ओर, शैक्षणिक संस्थानों में परीक्षा की निष्पक्षता और नियमों का पालन सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है। दूसरी ओर, छात्रों की शिकायतों, मानसिक तनाव और किसी भी प्रकार के भेदभाव के आरोपों को संवेदनशीलता के साथ संबोधित करना भी आवश्यक है।
इस मामले में प्रोफेसर के खिलाफ लगाए गए आरोपों और संस्थान के स्पष्टीकरण के बीच वास्तविक तथ्यों को स्थापित करने की जिम्मेदारी जांच एजेंसियों की है। छात्र की मौत से जुड़े सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच और पारदर्शी जानकारी से ही विवाद से जुड़े सवालों का समाधान संभव होगा।
IIT Bombay छात्र आत्महत्या मामले में शमा मोहम्मद का बयान, प्रोफेसर का समर्थन, छात्र के पिता के आरोप और कैंपस में जारी विरोध प्रदर्शन ने इस घटना को राष्ट्रीय चर्चा का विषय बना दिया है। मामले की जांच जारी है और आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
भूमि आर्या की रिपोर्ट
