SIR विवाद पर तेजस्वी का वार, CEC ज्ञानेश कुमार घिरे, लगाए गंभीर आरोप
तेजस्वी यादव ने SIR को लेकर CEC ज्ञानेश कुमार पर सवाल उठाए
निष्कर्ष भारत, संवाददाता (पटना)। बिहार के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने SIR यानी Special Intensive Revision को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। इंडियन एक्सप्रेस की एक जांच रिपोर्ट का हवाला देते हुए तेजस्वी यादव ने दावा किया कि चुनाव आयोग के भीतर ही SIR और मतदाता सूची से जुड़े फैसलों को लेकर असहमति सामने आई है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष ने बिहार में SIR की प्रक्रिया को लेकर जो सवाल उठाए थे, अब सामने आई रिपोर्ट ने उन आशंकाओं को और गंभीर बना दिया है।
तेजस्वी यादव ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर कई सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि बिहार विधानसभा चुनाव से पहले ही विपक्ष ने SIR को लेकर चिंता जताई थी और मतदाता अधिकारों से जुड़े मुद्दे उठाए थे। तेजस्वी ने अपने पुराने बयानों, विपक्षी प्रतिनिधिमंडलों और चुनाव आयोग को दिए गए ज्ञापनों का भी जिक्र किया।
तेजस्वी यादव ने SIR पर क्या आरोप लगाए?
तेजस्वी यादव का कहना है कि विपक्ष ने बिहार में SIR शुरू होने के समय ही इसके तौर-तरीकों पर सवाल उठाए थे। उन्होंने दावा किया कि इस मुद्दे को लेकर विपक्ष की ओर से कई बार तथ्य और दस्तावेज चुनाव आयोग के सामने रखे गए।
तेजस्वी ने कहा कि विपक्ष ने मतदाता सूची से नाम हटाए जाने, मृत बताए गए मतदाताओं और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े दूसरे मुद्दों को लेकर भी आयोग का ध्यान खींचा था। उनका आरोप है कि इन आपत्तियों पर अपेक्षित सुनवाई नहीं हुई।
हालांकि, तेजस्वी के ये आरोप राजनीतिक बयान हैं और इन्हें स्थापित तथ्य के रूप में नहीं देखा जा सकता। चुनाव आयोग की ओर से इन आरोपों पर अलग-अलग मौकों पर अपनी स्थिति स्पष्ट की गई है।
SIR को लेकर तेजस्वी ने इंडियन एक्सप्रेस रिपोर्ट का दिया हवाला
तेजस्वी यादव ने 23 सितंबर को सामने आई इंडियन एक्सप्रेस की जांच रिपोर्ट का हवाला दिया। रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार आयोग के कुछ फैसलों और प्रक्रियाओं पर लिखित आपत्ति दर्ज की थी।
रिपोर्ट में Form 6 में बदलाव, मतदाता सूची से जुड़े सॉफ्टवेयर के नियंत्रण, कुछ मतदाताओं के नाम जोड़ने और हटाने तथा चुनावी डेटा तक पहुंच जैसे मुद्दों का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों चुनाव आयुक्तों ने कुछ कदमों को लेकर अपनी आपत्तियां दर्ज की थीं।
तेजस्वी ने ज्ञानेश कुमार पर लगाए गंभीर आरोप
तेजस्वी यादव ने अपनी पोस्ट में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि बहुमत की प्रक्रिया को दरकिनार कर कुछ फैसले लिए गए और इससे विपक्ष की ओर से पहले उठाए गए सवाल सही साबित होते हैं।
उन्होंने यह भी दावा किया कि चुनाव आयोग के भीतर दो चुनाव आयुक्तों की ओर से लगातार आपत्तियां दर्ज की गईं। तेजस्वी ने इन घटनाओं को लोकतांत्रिक संस्थाओं और चुनाव प्रक्रिया से जोड़ते हुए कई गंभीर आरोप लगाए।
इन आरोपों के संबंध में यह महत्वपूर्ण है कि तेजस्वी यादव की ओर से लगाए गए राजनीतिक आरोप और चुनाव आयोग की आधिकारिक स्थिति अलग-अलग हैं। किसी भी आरोप की अंतिम पुष्टि के लिए संबंधित दस्तावेज, जांच या न्यायिक निष्कर्ष को आधार बनाना होगा।
चुनाव आयोग के भीतर 14 आपत्तियों की रिपोर्ट क्या कहती है?
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार कुछ निर्णयों पर आपत्ति दर्ज की। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि एक दिन में चार आपत्तियां दर्ज की गई थीं।
इन आपत्तियों में नए मतदाताओं के लिए Form 6 में किए गए बदलाव और मतदाता सूची के डिजिटल सिस्टम से जुड़े विषय शामिल बताए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, दोनों आयुक्तों ने कुछ बदलावों को लेकर कानूनी अधिकार और प्रक्रिया से जुड़े सवाल उठाए थे।
Form 6 को लेकर क्या विवाद है?
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में Form 6 को लेकर भी एक महत्वपूर्ण मुद्दा सामने रखा गया है। यह फॉर्म नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल किया जाता है। रिपोर्ट के मुताबिक, इसमें SIR से जुड़ा एक नया सवाल शामिल किया गया था, जिसमें आवेदक से पिछले SIR की मतदाता सूची में अपने या माता-पिता अथवा दादा-दादी के नाम से संबंधित जानकारी मांगी गई थी।
रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयुक्त विवेक जोशी और सुखबीर सिंह संधू ने इस बदलाव को लेकर आपत्ति दर्ज की थी। उनका कहना था कि इस तरह का बदलाव निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप होना चाहिए।
EC ने तेजस्वी के आरोपों पर क्या कहा?
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट सामने आने के बाद चुनाव आयोग के सूत्रों ने इन दावों का अलग पक्ष रखा है। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, आयोग के सूत्रों ने कहा कि SIR समेत सभी फैसलों को तीनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी थी।
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यानी जहां इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में दो चुनाव आयुक्तों की ओर से कम से कम 14 आपत्तियों का उल्लेख किया गया है, वहीं आयोग के सूत्रों ने कहा कि चुनाव आयोग के फैसले सर्वसम्मति से लिए गए थे। दोनों पक्षों के इस अंतर के कारण यह मामला अब राजनीतिक और संस्थागत बहस का विषय बन गया है।
तेजस्वी ने बिहार चुनाव को लेकर भी उठाए सवाल
तेजस्वी यादव ने अपने बयान में केवल SIR तक बात सीमित नहीं रखी। उन्होंने बिहार विधानसभा चुनाव की पूरी प्रक्रिया को लेकर भी कई आरोप लगाए। उनका दावा है कि विपक्ष ने चुनाव से पहले चुनाव आयोग के सामने कई शिकायतें और दस्तावेज रखे थे।
तेजस्वी ने चुनावी पर्यवेक्षकों, पुलिस की तैनाती, आचार संहिता और कथित रूप से मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए धन वितरण जैसे मुद्दों का भी जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि इन शिकायतों पर कार्रवाई नहीं हुई।

इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट में स्थापित तथ्य के रूप में नहीं की जा रही है। चुनाव प्रक्रिया से संबंधित किसी भी शिकायत का अंतिम आकलन संबंधित आधिकारिक रिकॉर्ड और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही किया जा सकता है।
‘हमें चुनाव हराया गया’, तेजस्वी का दावा
तेजस्वी यादव ने अपने बयान में बिहार समेत दूसरे राज्यों के चुनावों का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि विपक्ष चुनाव में केवल पराजित नहीं हुआ, बल्कि चुनावी तंत्र और तकनीक के जरिए उसे हराया गया।
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उन्होंने बिहार के साथ महाराष्ट्र, हरियाणा और पश्चिम बंगाल का उदाहरण देते हुए चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाए। तेजस्वी ने कहा कि आने वाले समय में इस संबंध में और खुलासे हो सकते हैं।
यह बयान तेजस्वी यादव की राजनीतिक स्थिति और चुनाव प्रक्रिया को लेकर उनके आरोपों को दर्शाता है। इन दावों की सत्यता पर अंतिम निष्कर्ष के लिए आधिकारिक जांच या न्यायिक प्रक्रिया आवश्यक होगी।
SIR विवाद आगे क्यों बढ़ सकता है?
SIR का सीधा संबंध मतदाता सूची के सत्यापन और संशोधन से है। ऐसे में मतदाताओं के नाम जोड़ने, हटाने या उनकी पात्रता की जांच से जुड़े किसी भी विवाद का राजनीतिक महत्व बढ़ जाता है।
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रिपोर्ट में चुनाव आयोग के भीतर मतदाता सूची और उसके डिजिटल प्रबंधन को लेकर दर्ज आपत्तियों का उल्लेख सामने आने के बाद इस विषय पर चर्चा और तेज हुई है। दूसरी ओर, चुनाव आयोग के सूत्रों ने सभी फैसलों को तीनों आयुक्तों की मंजूरी मिलने की बात कही है।
अब नजर इस बात पर रहेगी कि आयोग इन रिपोर्टों और विपक्ष के आरोपों पर आगे कोई विस्तृत स्पष्टीकरण जारी करता है या नहीं। साथ ही, जिन प्रक्रियाओं पर सवाल उठाए गए हैं, उनके आधिकारिक रिकॉर्ड और कानूनी स्थिति भी इस विवाद को समझने में महत्वपूर्ण होंगे।
फिलहाल SIR को लेकर राजनीतिक बहस जारी है। तेजस्वी यादव ने इसे बिहार में मतदाता अधिकारों से जोड़कर चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए हैं, जबकि आयोग के सूत्रों ने निर्णयों में तीनों चुनाव आयुक्तों की सहमति होने की बात कही है। ऐसे में इस पूरे विवाद की तस्वीर आरोपों के साथ-साथ आधिकारिक जवाब और उपलब्ध दस्तावेजों से ही स्पष्ट होगी।
राज कुमार की रिपोर्ट
