कल मनेगा दिवाली का त्योहार, ऐसे करें लक्ष्मी पूजा, जानें शुभ मुहूर्त
दिवाली पर मां लक्ष्मी और गणेश की पूजा की तैयारी
निष्कर्ष भारत, संवाददाता (पटना)। रोशनी, खुशियों और उमंग का महापर्व दिवाली रविवार, 8 नवंबर को देशभर में पारंपरिक उत्साह के साथ मनाया जाएगा। दीपावली को लेकर घरों से लेकर बाजारों तक रौनक बढ़ गई है। लोग घरों की साफ-सफाई, रंगोली, सजावट और पूजा की तैयारियों में जुटे हैं। बाजारों में मिट्टी के दीये, रंग-बिरंगी लाइटें, मिठाइयां, फूल-मालाएं और पूजन सामग्री की खरीदारी तेज हो गई है। इस त्योहार का धार्मिक और सामाजिक महत्व भी बेहद खास है। मान्यता है कि दिवाली की रात मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा करने से घर में सुख, शांति, समृद्धि और खुशहाली आती है।
इस बार दिवाली पर पूजा को लेकर लोगों के बीच शुभ मुहूर्त और सही पूजा विधि जानने की उत्सुकता है। खासकर मां लक्ष्मी की आराधना किस समय करनी चाहिए, पूजा में किन सामग्रियों की आवश्यकता होगी और घर में दीपक कहां जलाने चाहिए, इसे लेकर लोग जानकारी जुटा रहे हैं।
दिवाली 2026: कब है लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त?
पंचांग के अनुसार, पटना में 8 नवंबर को मां लक्ष्मी की पूजा के लिए शाम 5:28 बजे से 7:25 बजे तक का समय शुभ बताया गया है। यह अवधि प्रदोष काल और वृषभ लग्न के अंतर्गत आती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, प्रदोष काल में मां लक्ष्मी की पूजा करना विशेष फलदायी माना जाता है।
वहीं, अमावस्या तिथि 8 नवंबर को सुबह 11:27 बजे शुरू होकर 9 नवंबर को दोपहर 12:31 बजे तक रहेगी। इसी अमावस्या तिथि में दीपावली का त्योहार मनाया जाएगा।
| पूजा और तिथि | समय |
|---|---|
| लक्ष्मी पूजा शुभ मुहूर्त | शाम 5:28 से 7:25 बजे |
| अमावस्या प्रारंभ | 8 नवंबर, सुबह 11:27 बजे |
| अमावस्या समाप्त | 9 नवंबर, दोपहर 12:31 बजे |
हालांकि, अलग-अलग पंचांग और स्थान के अनुसार मुहूर्त में अंतर हो सकता है। इसलिए स्थानीय पंचांग से भी समय की पुष्टि करना उचित रहेगा।
दिवाली पर कैसे करें मां लक्ष्मी और गणेश की पूजा?
दीपावली की शाम घर में पूजा की तैयारियां पूरी कर लेनी चाहिए। सबसे पहले पूजा स्थल को साफ करें और वहां एक चौकी स्थापित करें। चौकी पर लाल या पीले रंग का स्वच्छ कपड़ा बिछाकर मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करें।
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परंपरा के अनुसार, किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत भगवान गणेश की पूजा से की जाती है। इसलिए सबसे पहले गणेश जी को रोली, अक्षत, फूल और दूर्वा अर्पित करें। इसके बाद मां लक्ष्मी की पूजा करें। उन्हें कमल का फूल, माला, फल, मिठाई और सुगंधित सामग्री अर्पित की जाती है।
पूजा के दौरान घी का दीपक जलाएं और धूप-अगरबत्ती दिखाएं। इसके बाद मां लक्ष्मी के मंत्रों का जाप करें और परिवार के सभी सदस्य मिलकर लक्ष्मी-गणेश की आरती करें। धार्मिक परंपराओं में इस दिन भगवान कुबेर की पूजा का भी विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि कुबेर की आराधना से धन और समृद्धि की कामना की जाती है।
दिवाली पूजा सामग्री: पहले से तैयार रखें ये जरूरी चीजें
दीपावली के दिन पूजा के दौरान किसी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए पूजन सामग्री पहले से जुटा लेना बेहतर होता है। मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा में सामान्य रूप से इन सामग्रियों का इस्तेमाल किया जाता है।
- मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की प्रतिमा या तस्वीर
- पूजा की चौकी और लाल या पीला कपड़ा
- रोली, कुमकुम, हल्दी और अक्षत
- फूल, माला और दूर्वा
- पान, सुपारी, लौंग और इलायची
- धूप, अगरबत्ती और कपूर
- घी, तेल, रुई की बाती और मिट्टी के दीपक
- कलश, गंगाजल और आम के पत्ते
- फल, मिठाई, नारियल और खील-बताशे
- चांदी या अन्य धातु के सिक्के
- बही-खाता और कलम
पूजा सामग्री की संख्या और प्रकार परिवार की परंपरा के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं। पूजा में सबसे अधिक महत्व स्वच्छता, श्रद्धा और भक्ति का माना जाता है।
दिवाली पर घर के मुख्य द्वार पर दीपक जलाने की क्या है परंपरा?
दीपावली पर घर के मुख्य द्वार, आंगन, बालकनी और पूजा स्थल पर दीपक जलाने की विशेष परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दीपक का प्रकाश सकारात्मकता और शुभता का प्रतीक है। यही वजह है कि इस दिन लोग अपने घरों को मिट्टी के दीयों और रंग-बिरंगी रोशनी से सजाते हैं।
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कई परिवारों में मुख्य द्वार पर रंगोली बनाई जाती है और मां लक्ष्मी के स्वागत के लिए घर के प्रवेश द्वार को फूलों से सजाया जाता है। मान्यता है कि स्वच्छ और रोशनी से जगमगाता घर मां लक्ष्मी के स्वागत का प्रतीक होता है।
दीपक जलाते समय उनकी स्थिति सुरक्षित स्थान पर रखें। विशेषकर बच्चों और बुजुर्गों के आसपास जलते दीपकों को लेकर सावधानी बरतनी चाहिए।
आखिर क्यों मनाई जाती है दिवाली? जानें धार्मिक मान्यता
दीपावली मनाने के पीछे कई धार्मिक और सांस्कृतिक मान्यताएं प्रचलित हैं। सबसे लोकप्रिय मान्यता भगवान श्रीराम से जुड़ी है। कहा जाता है कि भगवान श्रीराम ने 14 वर्षों का वनवास पूरा करने और रावण पर विजय प्राप्त करने के बाद माता सीता और लक्ष्मण के साथ अयोध्या वापसी की थी।

उनके आगमन की खुशी में अयोध्यावासियों ने पूरे नगर में दीप जलाकर उनका स्वागत किया था। तभी से दीपावली को प्रकाश और खुशियों के पर्व के रूप में मनाने की परंपरा जुड़ी हुई मानी जाती है।
वहीं, एक अन्य धार्मिक मान्यता के अनुसार, कार्तिक अमावस्या की रात मां लक्ष्मी का प्राकट्य हुआ था। इसी वजह से इस दिन मां लक्ष्मी की विशेष पूजा की जाती है। व्यापारी वर्ग के लिए भी दीपावली का विशेष महत्व है। इस अवसर पर नए बही-खाते की शुरुआत और कारोबार में सुख-समृद्धि की कामना की जाती है।
दिवाली का संदेश: सिर्फ रोशनी नहीं, नई शुरुआत का त्योहार
दीपावली का महत्व केवल पूजा-पाठ और धन की कामना तक सीमित नहीं है। यह पर्व जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने और पुरानी नकारात्मकताओं को पीछे छोड़कर नई शुरुआत करने का संदेश देता है।
आज के समय में दिवाली परिवार और समाज को एक साथ जोड़ने का भी अवसर बन गई है। लोग एक-दूसरे के घर जाकर शुभकामनाएं देते हैं, मिठाइयां बांटते हैं और आपसी मतभेद भुलाकर रिश्तों में मिठास घोलने का प्रयास करते हैं।
हालांकि, त्योहार की खुशियों के बीच पर्यावरण और स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी जरूरी है। पटाखों का सीमित इस्तेमाल करें और ध्वनि एवं वायु प्रदूषण से बचने का प्रयास करें।
इस दिवाली घर को रोशन करने के साथ अपने आसपास जरूरतमंद लोगों के जीवन में भी खुशियों का उजाला लाने की कोशिश करें। आखिर दीपावली का असली संदेश यही है कि अंधकार कितना भी गहरा क्यों न हो, एक छोटा-सा दीपक भी रोशनी फैलाने की ताकत रखता है।
पटना से संवाददाता की रिपोर्ट
