चुनाव आयोग पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, TMC के नाम-चुनाव चिह्न विवाद पर जल्द फैसला लेने को कहा
चुनाव आयोग पर सुप्रीम कोर्ट सख्त
निष्कर्ष भारत संवाददाता: तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर चल रहे विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को चुनाव आयोग से जल्द फैसला लेने की समयसीमा बताने को कहा। मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने चुनाव आयोग से पूछा कि वह ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (AITC) के दो प्रतिद्वंद्वी गुटों के बीच चल रहे विवाद का अंतिम निपटारा कब तक कर सकता है। कोर्ट ने आयोग से सोमवार तक अपनी समयसीमा बताने को कहा है।
मामला पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और TMC प्रमुख ममता बनर्जी की ओर से दायर याचिका से जुड़ा है। ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग के उस अंतरिम फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, जिसमें पार्टी के मूल नाम ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ और उसके ‘फूल और घास’ वाले चुनाव चिह्न के इस्तेमाल पर रोक लगा दी गई थी।
TMC के नाम और चुनाव चिह्न पर विवाद क्या है?
दरअसल, TMC के भीतर संगठनात्मक नियंत्रण और पार्टी की पहचान को लेकर दो गुट आमने-सामने हैं। दोनों पक्ष पार्टी के नाम, संगठन और चुनाव चिह्न पर अपना दावा कर रहे हैं। चुनाव आयोग ने दोनों पक्षों की ओर से पेश किए गए दस्तावेजों और दावों पर सुनवाई की है।
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17 सितंबर को चुनाव आयोग ने अंतरिम आदेश जारी करते हुए कहा था कि पार्टी के भीतर दो प्रतिद्वंद्वी गुट हैं और दोनों खुद को असली ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस बता रहे हैं। आयोग ने कहा कि इस विवाद पर चुनाव चिह्न आवंटन से जुड़े नियमों के तहत विस्तृत फैसला जरूरी है।
दोनों गुटों को मिले अलग-अलग नाम और चिह्न
विवाद के अंतिम समाधान तक चुनाव आयोग ने दोनों गुटों को अलग-अलग नाम और चुनाव चिह्न आवंटित किए हैं। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ चुनाव चिह्न दिया गया है।
वहीं, दूसरे गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘लिफाफा’ चुनाव चिह्न आवंटित किया गया है। यह व्यवस्था फिलहाल आगामी पश्चिम बंगाल विधानसभा उपचुनावों के लिए लागू है।
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चुनाव आयोग के मुताबिक, दोनों पक्षों को मूल पार्टी के नाम और ‘फूल और घास’ वाले आरक्षित चुनाव चिह्न का इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं है, जब तक कि विवाद पर अंतिम फैसला नहीं हो जाता।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
ममता बनर्जी की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से विवाद को अनिश्चित समय तक लंबित नहीं रखने को कहा। कोर्ट ने आयोग से यह बताने को कहा कि दोनों पक्षों को अपना पक्ष और सबूत पेश करने का उचित अवसर देते हुए अंतिम फैसला लेने में कितना समय लगेगा।
बार एंड बेंच के मुताबिक, CJI सूर्यकांत ने आयोग से एक ऐसा समय-सीमा बताने को कहा जो दोनों पक्षों को निष्पक्ष अवसर देने के साथ-साथ मामले को अनावश्यक रूप से लंबा न खींचे। मामले की अगली सुनवाई सोमवार को होगी।
सुप्रीम कोर्ट ने इस दौरान शिवसेना के गुटीय विवाद का भी संदर्भ दिया और TMC के दोनों गुटों के बीच चल रहे विवाद को जल्द निपटाने की जरूरत बताई।
उपचुनाव से पहले बढ़ी अहमियत
TMC के नाम और चुनाव चिह्न का विवाद ऐसे समय सामने आया है, जब पश्चिम बंगाल में 6 अक्टूबर को नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होने हैं। चुनाव आयोग ने दोनों गुटों के लिए अलग-अलग नाम और चिह्न की व्यवस्था इन्हीं उपचुनावों को देखते हुए की है।
ऐसे में आयोग के अंतिम फैसले की समयसीमा पर सुप्रीम कोर्ट की पूछताछ को आगामी चुनावी प्रक्रिया के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, अभी आयोग ने यह अंतिम रूप से तय नहीं किया है कि मूल पार्टी का नाम और चुनाव चिह्न किस गुट को मिलेगा।
ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग के फैसले को दी चुनौती
ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग के अंतरिम फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। उनकी ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने जल्द सुनवाई की मांग की थी। इससे पहले 22 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने मामले को प्राथमिकता के आधार पर सुनने पर सहमति जताई थी। उस समय CJI सूर्यकांत ने कहा था कि मामले में दूसरे पक्ष को भी अपनी बात रखने का अवसर मिलेगा।
ममता बनर्जी का पक्ष है कि चुनाव आयोग ने पार्टी के नाम और चिह्न को लेकर अंतरिम व्यवस्था ऐसे समय में की, जब विवाद पर कार्यवाही पहले से चल रही थी। दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने अपने आदेश में कहा है कि दोनों पक्ष पार्टी पर नियंत्रण का दावा कर रहे हैं और विवाद पर विस्तृत निर्णय जरूरी है।
मतदाता सूची को लेकर भी ममता का आयोग पर हमला
TMC के नाम और चुनाव चिह्न विवाद के बीच ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग पर मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने आयोग के कामकाज पर सार्वजनिक रूप से कई आरोप लगाए हैं।
इस बीच इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने मतदाता सूची के पुनरीक्षण से जुड़े कुछ फैसलों पर आपत्तियां दर्ज कराई थीं। यह रिपोर्ट सामने आने के बाद राजनीतिक बहस तेज हुई। हालांकि, इन दावों और उनके राजनीतिक निष्कर्षों को अलग-अलग देखना जरूरी है।
अब सोमवार पर नजर
अब इस मामले में अगली महत्वपूर्ण तारीख सोमवार है। सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से तब तक यह बताने को कहा है कि वह TMC के नाम और चुनाव चिह्न से जुड़े विवाद पर अंतिम निर्णय लेने के लिए कितनी समयसीमा तय कर रहा है।
फिलहाल दोनों गुटों के लिए अलग-अलग नाम और चुनाव चिह्न की अंतरिम व्यवस्था जारी है। अंतिम फैसला चुनाव आयोग की विस्तृत कार्यवाही के बाद सामने आएगा। सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई में आयोग की ओर से बताई जाने वाली समयसीमा पर भी चर्चा होगी।
भूमि आर्या की रिपोर्ट
