सम्पतचक में बनेगा 108 फीट ऊंचा महाकालेश्वर मंदिर पंडाल, शिवलिंग और नंदी महाराज की भी होगी स्थापना
सम्पतचक में महाकालेश्वर मंदिर जैसा 108 फीट ऊंचा पंडाल बनेगा
निष्कर्ष भारत, संवाददाता (पटना)। सम्पतचक में महाकालेश्वर पंडाल इस बार दुर्गा पूजा के दौरान श्रद्धालुओं के लिए खास आकर्षण का केंद्र बनने जा रहा है। सम्पतचक में उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर की तर्ज पर भव्य पंडाल तैयार किया जा रहा है। इसकी चौड़ाई करीब 108 फीट और ऊंचाई भी 108 फीट होगी। पंडाल के भीतर 18 फीट ऊंची मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित की जाएगी। इसके साथ ही महाकालेश्वर मंदिर की झलक, बाबा का शिवलिंग और नंदी महाराज की प्रतिमा भी बनाई जाएगी।
पूजा समिति की ओर से इस बार पंडाल और पूजा आयोजन को भव्य रूप देने की तैयारी की जा रही है। आयोजन से जुड़े लोगों के अनुसार, पंडाल में धार्मिक आस्था के साथ कलात्मकता का भी विशेष ध्यान रखा जाएगा। श्रद्धालुओं को पंडाल में प्रवेश करने के बाद महाकालेश्वर मंदिर के स्वरूप का अनुभव कराने की कोशिश की जाएगी।
सम्पतचक में 108 फीट ऊंचा होगा पंडाल
इस बार तैयार होने वाले पंडाल का आकार ही इसकी सबसे बड़ी खासियत होगी। करीब 108 फीट चौड़े और 108 फीट ऊंचे पंडाल में महाकालेश्वर मंदिर की स्थापत्य शैली को उकेरने की तैयारी है। पंडाल के अंदर भगवान शिव से जुड़े प्रतीकों को भी प्रमुखता दी जाएगी।
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बाबा का शिवलिंग और नंदी महाराज की प्रतिमा श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र होगी। वहीं, 18 फीट ऊंची मां दुर्गा की प्रतिमा को पंडाल के मुख्य हिस्से में स्थापित किया जाएगा। समिति का कहना है कि निर्माण में धार्मिक स्वरूप के साथ सजावट और रोशनी की व्यवस्था पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
पटना सिटी के कलाकार संभालेंगे डिजाइन
पंडाल की डिजाइनिंग की जिम्मेदारी पटना सिटी निवासी कलाकार इशू भाई को दी गई है। पंडाल की बनावट और उसकी सजावट को लेकर डिजाइन तैयार किया जा रहा है। आयोजन समिति की योजना है कि अंतिम रूप में पंडाल महाकालेश्वर मंदिर की पहचान से जुड़ी प्रमुख विशेषताओं को सामने रखे।
पंडाल और लाइटिंग का काम सतेंद्र टेंट हाउस संभालेगा। वहीं, साउंड की व्यवस्था राजगुरु टेंट हाउस की ओर से की जाएगी। पूजा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए प्रकाश और ध्वनि व्यवस्था को भी व्यापक स्तर पर तैयार किया जा रहा है।
सम्पतचक में 57 साल से हो रही दुर्गा पूजा
सम्पतचक में दुर्गा पूजा के आयोजन का पुराना इतिहास है। पूजा समिति के अनुसार, यहां करीब 57 वर्षों से लगातार दुर्गा पूजा का आयोजन होता आ रहा है। हर साल पंडाल की थीम को अलग रखने की कोशिश की जाती है। इसी क्रम में पिछले वर्ष वृंदावन के प्रेम मंदिर की तर्ज पर पंडाल तैयार किया गया था।
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पिछले साल की थीम के बाद इस बार महाकालेश्वर मंदिर को आधार बनाया गया है। समिति का मानना है कि धार्मिक स्थल की तर्ज पर तैयार किया जा रहा पंडाल श्रद्धालुओं को अलग अनुभव देगा। आयोजन की तैयारियों में स्थानीय लोगों और दुकानदारों से भी सहयोग लिया जा रहा है।
पूजा पर खर्च होंगे 40 से 45 लाख रुपये
पूजा समिति के मुताबिक, इस बार पूरे आयोजन पर करीब 40 से 45 लाख रुपये खर्च होने का अनुमान है। इसके लिए बाजार के दुकानदारों और आसपास के समाजसेवियों से सहयोग राशि ली जा रही है। इसी सहयोग के माध्यम से पंडाल, लाइटिंग, साउंड, प्रतिमा और अन्य व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है।
आयोजन समिति की ओर से पूजा के दौरान आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा का भी ध्यान रखा जा रहा है। साफ-सफाई की व्यवस्था सम्पतचक नगर परिषद की ओर से कराई जाएगी। समिति के अनुसार नगर परिषद के अध्यक्ष अमित कुमार और अध्यक्ष प्रतिनिधि ऋषभ राज उर्फ बंटू की ओर से सफाई व्यवस्था सुनिश्चित कराने की तैयारी है।
तीन किलोमीटर में होगी आकर्षक रोशनी
सम्पतचक बाजार को इस बार रोशनी से सजाने की भी तैयारी है। बाजार के करीब तीन किलोमीटर क्षेत्र में आकर्षक लाइटिंग की व्यवस्था की जाएगी। सतेंद्र टेंट हाउस की ओर से लाइटिंग का काम कराया जाएगा।
पूजा के दौरान शाम होते ही बाजार और आसपास का इलाका रोशनी से जगमगाने की योजना है। पंडाल की सजावट के साथ मुख्य बाजार और जुलूस के मार्ग को भी सजाने की तैयारी की जा रही है। इससे पूजा के दौरान आने वाले श्रद्धालुओं को पूरे इलाके में उत्सवी माहौल देखने को मिलेगा।
50 गांवों से पहुंच सकते हैं श्रद्धालु
सप्तमी से दशमी के बीच सम्पतचक में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है। समिति के अनुसार आसपास के करीब 50 गांवों के अलावा दूर-दराज के इलाकों से भी लोग पूजा देखने पहुंच सकते हैं। पिछले वर्षों की तरह इस बार भी लाखों श्रद्धालुओं के आने की संभावना जताई जा रही है।
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श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए पंडाल और आसपास के क्षेत्र में व्यवस्था बनाए रखना आयोजन समिति के लिए महत्वपूर्ण होगा। पूजा के दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। इनमें मगही और भोजपुरी भाषा के कलाकार प्रस्तुति देंगे। इससे धार्मिक आयोजन के साथ स्थानीय लोक संस्कृति को भी मंच मिलेगा।
सम्पतचक से निकलेगा भव्य विसर्जन जुलूस
दुर्गा पूजा के बाद 11वीं को भव्य विसर्जन जुलूस निकालने की तैयारी है। समिति के अनुसार जुलूस में हाथी, घोड़े और ऊंट के साथ मंडरा तथा झारखंड से बुलाए गए बैंड शामिल होंगे। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के जुलूस में शामिल होने की संभावना है।

विसर्जन जुलूस सम्पतचक बाजार से शुरू होकर अब्दुल्लाहचक होते हुए बैरिया पहुंचेगा। यहां मां दुर्गा का मिलन कराया जाएगा। इसके बाद जुलूस वापस सम्पतचक बाजार की ओर आएगा और सोहगी, फतेहपुर तथा गौरीचक होते हुए पुनपुन नदी की ओर जाएगा।
पुनपुन नदी में होगा प्रतिमा विसर्जन
विसर्जन जुलूस के अंतिम चरण में मां दुर्गा की प्रतिमा को पुनपुन नदी ले जाया जाएगा। यहीं प्रतिमा का विसर्जन किया जाएगा। समिति की ओर से जुलूस को लेकर तैयारियां की जा रही हैं और मार्ग से जुड़े स्थानों पर व्यवस्था को ध्यान में रखा जा रहा है।
इस बार सम्पतचक की दुर्गा पूजा में महाकालेश्वर मंदिर की तर्ज पर बनने वाला 108 फीट ऊंचा पंडाल सबसे बड़ा आकर्षण रहने वाला है। 18 फीट ऊंची मां दुर्गा की प्रतिमा, शिवलिंग और नंदी महाराज की स्थापना के साथ पूजा समिति धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन को भव्य रूप देने की तैयारी में जुटी है।
राज कुमार की रिपोर्ट
