अनंत सिंह को मनाने में ललन सिंह कामयाब, कहा- कोई मुंह में उंगली करेगा…फिर भी नहीं बोलेंगे, घमासान जारी
अनंत सिंह नीरज के समर्थन से पीछे, बयानबाजी पर लगाई रोक
निष्कर्ष भारत, संवाददाता ( पटना)। अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच चल रहा विवाद फिलहाल खत्म नहीं हुआ है, लेकिन जनता दल यूनाइटेड (JDU) ने इस टकराव को संभालने की दिशा में एक रास्ता जरूर निकाला है। पार्टी की ओर से विवाद सुलझाने की जिम्मेदारी संभाल रहे केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने मोकामा विधायक अनंत सिंह से मुलाकात की। बातचीत के बाद अनंत सिंह ने नीरज कुमार के पक्ष में प्रचार करने से इनकार बरकरार रखा, लेकिन आगे उनके खिलाफ सार्वजनिक बयान नहीं देने पर सहमति जताई है।
यानी पटना स्नातक सीट के MLC चुनाव में JDU के लिए सबसे बड़ी परेशानी फिलहाल पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। अनंत सिंह नीरज कुमार के लिए वोट मांगने को तैयार नहीं हैं, लेकिन उनकी ओर से लगातार होने वाली सार्वजनिक बयानबाजी पर अब रोक लग सकती है। पार्टी के लिहाज से इसे विवाद को नियंत्रित करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
अनंत सिंह ने नीरज के समर्थन से किया इनकार
पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से JDU ने नीरज कुमार को अपना उम्मीदवार बनाया है। दूसरी ओर अनंत सिंह जन सुराज के प्रत्याशी डॉ. अनुज कुमार के समर्थन में खड़े हैं। इसी को लेकर दोनों नेताओं के बीच राजनीतिक टकराव खुलकर सामने आया।
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ललन सिंह ने बातचीत के बाद साफ किया कि अनंत सिंह नीरज कुमार के लिए वोट नहीं मांगेंगे। हालांकि, उन्होंने यह भी बताया कि अनंत सिंह अब इस मामले को लेकर सार्वजनिक मंच या मीडिया में बयान देने से बचेंगे। यही वह बिंदु है जिसे JDU के लिए फिलहाल राहत के तौर पर देखा जा रहा है।
अनंत सिंह के तेवर नरम, लेकिन समर्थन नहीं बदला
पूरे विवाद में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अनंत सिंह ने अपना राजनीतिक समर्थन नहीं बदला है। वह नीरज कुमार के पक्ष में प्रचार करने के लिए तैयार नहीं हुए हैं। यानी चुनावी स्तर पर उनका रुख पहले जैसा ही है।
फर्क सिर्फ इतना आया है कि अब नीरज के खिलाफ सार्वजनिक बयानबाजी नहीं करने की बात सामने आई है। रिपोर्टों के मुताबिक अनंत सिंह ने ललन सिंह को भरोसा दिया कि मीडिया के सवालों के बावजूद वह इस मुद्दे पर कुछ नहीं कहेंगे। यही वजह है कि ललन सिंह की पहल को पूरी सफलता के बजाय आंशिक सफलता माना जा रहा है।
अनंत सिंह की नाराजगी की वजह क्या है?
ललन सिंह ने बातचीत के बाद अनंत सिंह की नाराजगी का कारण भी बताया। उनके मुताबिक अनंत सिंह का आरोप है कि विधानसभा चुनाव के दौरान उनके खिलाफ प्रचार किया गया था। अनंत का कहना है कि उस समय नीरज कुमार उनके विरोध में सक्रिय थे और विरोधियों के साथ मिलकर अभियान चलाया गया।
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अनंत सिंह ने कथित तौर पर यह सवाल भी उठाया कि जब विधानसभा चुनाव के दौरान उनके खिलाफ गतिविधियां चल रही थीं, तब पार्टी का अनुशासन कहां था। उनका कहना है कि उस समय पार्टी की ओर से समय रहते कार्रवाई की जानी चाहिए थी।
ललन सिंह ने भी माना कि उस समय पार्टी की प्रदेश इकाई से चूक हुई थी और उसी का असर अब दिखाई दे रहा है। उन्होंने इसे पुरानी नाराजगी की प्रतिक्रिया के तौर पर बताया है।
अनंत सिंह और नीरज का विवाद कहां से बढ़ा?
विवाद की जड़ विधानसभा चुनाव के दौरान दोनों पक्षों के बीच पैदा हुई राजनीतिक दूरी में बताई जा रही है। अनंत सिंह का आरोप है कि नीरज कुमार उनके खिलाफ प्रचार अभियान में शामिल थे। इसी वजह से अब वह नीरज के लिए वोट मांगने को तैयार नहीं हैं।

ललन सिंह ने भी कहा कि अनंत सिंह के खिलाफ चलाए गए अभियान में नीरज कुमार की भूमिका थी। हालांकि, इस विवाद के अलग-अलग पक्षों के राजनीतिक दावों को उनके संबंधित नेताओं के बयान के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
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अब MLC चुनाव के दौरान यह पुराना विवाद दोबारा सामने आने से JDU नेतृत्व के लिए स्थिति को संभालना जरूरी हो गया है।
JDU ने ललन सिंह को क्यों सौंपी थी जिम्मेदारी?
अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच विवाद सामने आने के बाद JDU के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने ललन सिंह को दोनों नेताओं से बात कर समाधान निकालने की जिम्मेदारी दी थी। पार्टी की ओर से बताया गया था कि मामला ललन सिंह के क्षेत्र से भी जुड़ा है और इसलिए उन्हें दोनों पक्षों से बातचीत के लिए अधिकृत किया गया।
ललन सिंह की भूमिका इसलिए भी महत्वपूर्ण हो गई थी क्योंकि विवाद अब केवल दो नेताओं के बीच व्यक्तिगत मतभेद तक सीमित नहीं रहा था। इसका असर पटना स्नातक MLC चुनाव में JDU के उम्मीदवार के समर्थन पर भी दिखाई दे रहा था।
संजय झा ने ललन सिंह की पहल पर क्या कहा?
ललन सिंह की बातचीत के बाद पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने संतोष जताया। उनका कहना था कि पार्टी ने ललन सिंह से जो अपेक्षा की थी, उन्होंने पार्टी हित में अपनी तरफ से वह करने की कोशिश की है।
इसका संकेत यही है कि JDU नेतृत्व फिलहाल विवाद को और सार्वजनिक होने से रोकना चाहता है। अनंत सिंह का नीरज के लिए प्रचार नहीं करना पार्टी के लिए चुनौती बना रहेगा, लेकिन यदि वह सार्वजनिक रूप से लगातार नीरज पर हमले नहीं करते हैं तो चुनाव के दौरान विवाद की तीव्रता कुछ कम हो सकती है।
नीरज कुमार को निशांत कुमार का समर्थन
इस पूरे विवाद के बीच मुख्यमंत्री और JDU नेतृत्व से जुड़े निशांत कुमार नीरज कुमार के समर्थन में प्रचार कर रहे हैं। वह नीरज के लिए समर्थन जुटाने की कोशिश में सक्रिय बताए जा रहे हैं।
एक तरफ निशांत कुमार का नीरज के समर्थन में सामने आना और दूसरी तरफ अनंत सिंह का उनके खिलाफ रहना JDU के अंदर इस चुनाव को लेकर अलग-अलग राजनीतिक रुख को सामने ला रहा है।
अनंत सिंह विवाद से JDU के सामने क्या चुनौती?
पटना स्नातक MLC चुनाव में अनंत सिंह का रुख इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि वह मोकामा से JDU विधायक हैं और पार्टी के उम्मीदवार के खिलाफ खुलकर समर्थन की घोषणा कर चुके हैं। इससे पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवार और स्थानीय राजनीतिक समीकरण के बीच टकराव की स्थिति बनी है।
अब ललन सिंह की पहल के बाद विवाद का अगला चरण सार्वजनिक बयानबाजी से हटकर चुनावी गतिविधियों पर केंद्रित हो सकता है। अनंत सिंह नीरज के लिए वोट मांगेंगे या नहीं, इस पर उनका रुख फिलहाल साफ है। वह समर्थन देने से इनकार कर चुके हैं।
ऐसे में JDU के सामने चुनौती यही है कि पार्टी उम्मीदवार के समर्थन में संगठन को एकजुट रखा जाए और अनंत सिंह-नीरज विवाद को और ज्यादा तूल लेने से रोका जाए।
क्या खत्म हुआ अनंत सिंह-नीरज का घमासान?
फिलहाल ऐसा कहना सही नहीं होगा कि अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच विवाद खत्म हो गया है। उपलब्ध बयानों के मुताबिक अनंत सिंह ने नीरज का समर्थन करने से इनकार किया है। हां, उन्होंने सार्वजनिक बयानबाजी से दूरी बनाने का भरोसा जरूर दिया है।
इस लिहाज से ललन सिंह की कोशिश को पूर्ण समझौते के बजाय विवाद को नियंत्रित करने की पहल कहा जा सकता है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि चुनावी मैदान में अनंत सिंह का रुख कितना कायम रहता है और JDU अपने उम्मीदवार नीरज कुमार के समर्थन में पार्टी के भीतर कितना समन्वय बना पाती है।
राज कुमार की रिपोर्ट
