वोट बचाओ रैली में तेजस्वी समेत बिहार के नेता शामिल, मुकेश सहनी को नहीं मिला न्योता

बिहार

दिल्ली के रामलीला मैदान में INDIA गठबंधन की वोट बचाओ रैली में तेजस्वी और राजेश राम शामिल हुए। मुकेश सहनी को न्योता नहीं मिलने पर चर्चा तेज।

निष्कर्ष भारत, संवाददाता (पटना)। नई दिल्ली के रामलीला मैदान में 1 नवंबर को INDIA गठबंधन की ओर से ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ राष्ट्रीय रैली आयोजित की गई। इस रैली में बिहार से तेजस्वी यादव, बिहार प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम, अखिलेश सिंह समेत कई नेता और कार्यकर्ता शामिल हुए। विपक्षी दलों ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और वोटरों के नाम काटे जाने में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ आवाज उठाई। इसके साथ ही मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी प्रदर्शन के केंद्र में रही।

हालांकि, बिहार की राजनीति में इस रैली को लेकर एक अलग चर्चा भी शुरू हो गई। विकासशील इंसान पार्टी (VIP) के प्रमुख मुकेश सहनी को INDIA ब्लॉक की ओर से औपचारिक निमंत्रण नहीं मिलने की बात सामने आई। सहनी ने इस पर अपनी नाराजगी और राजनीतिक रुख दोनों जाहिर किए। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी के कई कार्यकर्ता रैली में शामिल हो रहे हैं और बिहार से कई बड़े नेता दिल्ली पहुंचे हैं। साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी केवल मंच पर कुर्सी के पीछे बैठने के लिए नहीं है, बल्कि बिहार में नेतृत्व की भूमिका निभाएगी।

दिल्ली की रैली में बिहार के नेताओं की मौजूदगी

‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ रैली को लेकर बिहार के विपक्षी दलों के नेताओं और कार्यकर्ताओं में सक्रियता देखने को मिली। तेजस्वी यादव, राजेश राम और अखिलेश सिंह सहित कई नेताओं के दिल्ली पहुंचने की बात कही गई। बिहार प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम ने रैली को लेकर पार्टी कार्यकर्ताओं में उत्साह और जोश का दावा किया।

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राजेश राम के मुताबिक, यह आयोजन देश के लोकतंत्र, संविधान और मताधिकार की रक्षा के संकल्प को मजबूत करने का अवसर है। कांग्रेस का कहना है कि निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया और लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती के लिए जनता की आवाज को एकजुट होकर उठाना जरूरी है।

विपक्षी दलों का आरोप है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया में कई मतदाताओं के नाम हटाए जाने और गड़बड़ियों को लेकर गंभीर सवाल हैं। इसी मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने के लिए दिल्ली में रैली और जनसभा आयोजित की गई।

मुकेश सहनी को न्योता नहीं मिलने पर सियासी चर्चा

रैली से पहले VIP प्रमुख मुकेश सहनी को निमंत्रण नहीं मिलने का मामला चर्चा में आ गया। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता देव ज्योति ने कहा कि मुकेश सहनी दिल्ली पहुंच चुके हैं, लेकिन INDIA ब्लॉक की ओर से उन्हें रैली में शामिल होने का कोई औपचारिक निमंत्रण नहीं दिया गया है।

वहीं, मुकेश सहनी ने कहा कि उनकी पार्टी के कार्यकर्ता रैली में शामिल हो रहे हैं। उन्होंने बिहार से कई बड़े नेताओं के दिल्ली पहुंचने की बात भी कही। हालांकि, उनका बयान केवल निमंत्रण तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने राजनीतिक भूमिका को लेकर कहा कि वे लोग मंच पर कुर्सी के पीछे बैठने के लिए नहीं हैं और बिहार में नेतृत्व करेंगे।

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सहनी के इस बयान को बिहार में अपनी राजनीतिक हिस्सेदारी और प्रभाव को लेकर दिए गए संदेश के तौर पर देखा जा रहा है। INDIA गठबंधन में शामिल दलों के बीच सीटों, नेतृत्व और राजनीतिक महत्व को लेकर पहले भी चर्चा होती रही है। ऐसे में रैली के निमंत्रण को लेकर उठा सवाल गठबंधन के भीतर आपसी तालमेल की बहस को भी हवा दे सकता है।

बिहार में SIR के खिलाफ पहले भी प्रदर्शन कर चुका है विपक्ष

मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर बिहार में भी विपक्ष लगातार सवाल उठाता रहा है। विपक्षी दलों का आरोप है कि इस प्रक्रिया में मतदाताओं के नाम हटाने या सूची में गड़बड़ी होने की आशंका है। इसी मुद्दे पर 8 अक्टूबर को महागठबंधन ने पटना में चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन किया था।

इस प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए बैरिकेडिंग की थी। इसी बीच तेजस्वी यादव बैरिकेडिंग पर चढ़ गए थे। उनके इस कदम की तस्वीरें और वीडियो राजनीतिक चर्चा का विषय बने थे।

प्रदर्शन के बाद तेजस्वी यादव ने राज्यपाल से मुलाकात की थी। इसके बाद उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर तीखी टिप्पणी की थी। तेजस्वी ने चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाते हुए केंद्र सरकार और गृह मंत्री अमित शाह को लेकर भी बयान दिया था।

राजेश राम हथकड़ी पहनकर प्रदर्शन में हुए थे शामिल

पटना में हुए प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम भी अलग अंदाज में नजर आए थे। वह हाथों में हथकड़ी लगाकर और संविधान की प्रति लेकर प्रदर्शन में शामिल हुए थे। उनके इस प्रतीकात्मक विरोध को कांग्रेस ने लोकतांत्रिक अधिकारों और संविधान की रक्षा से जुड़े संदेश के रूप में पेश किया था।

कांग्रेस का कहना है कि मतदाता सूची में पारदर्शिता और निष्पक्ष चुनाव लोकतंत्र की बुनियादी जरूरत हैं। पार्टी के नेताओं ने इसी मुद्दे को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर आवाज उठाने की बात कही है।

अब दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित रैली के जरिए बिहार के कांग्रेस और महागठबंधन के नेता इस मुद्दे को बड़े मंच पर उठा रहे हैं। बिहार में पहले हुए विरोध-प्रदर्शनों के बाद राष्ट्रीय रैली को विपक्षी रणनीति के अगले कदम के तौर पर देखा जा रहा है।

SIR और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग पर विपक्ष एकजुट

INDIA गठबंधन के नेता SIR और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर लगातार बैठकें और प्रदर्शन करते रहे हैं। दिए गए विवरण के अनुसार, 6 से 13 अक्टूबर के बीच इस मुद्दे पर कई बार विरोध कार्यक्रम आयोजित किए गए। विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूची से जुड़े सवालों पर चुनाव आयोग को जवाब देना चाहिए।

इसी मुद्दे पर 10 अक्टूबर को कॉकरोच जनता पार्टी और वामपंथी दलों की ओर से भी प्रदर्शन बुलाए जाने की जानकारी दी गई थी। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने उस प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी थी। उस दौरान राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी किए जाने, बैरिकेडिंग और मेट्रो सेवाओं पर असर पड़ने की भी खबरें सामने आई थीं। प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने का दावा भी किया गया था।

इन घटनाओं के बाद 1 नवंबर की रैली को विपक्ष ने एक बड़े राजनीतिक प्रदर्शन के रूप में आयोजित किया। इसका उद्देश्य मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों को राष्ट्रीय बहस के केंद्र में लाना और चुनाव आयोग पर जवाबदेही का दबाव बनाना बताया गया है।

बिहार की राजनीति पर भी पड़ सकता है रैली का असर

दिल्ली की इस रैली का महत्व केवल राष्ट्रीय राजनीति तक सीमित नहीं है। बिहार के कई प्रमुख नेताओं की मौजूदगी और मुकेश सहनी को निमंत्रण नहीं मिलने का मुद्दा राज्य की राजनीति में भी चर्चा बढ़ा सकता है। सहनी का यह कहना कि उनकी पार्टी बिहार में नेतृत्व करेगी, गठबंधन के भीतर उनकी राजनीतिक महत्वाकांक्षा का संकेत देता है।

दूसरी ओर, कांग्रेस और राजद के नेता SIR के मुद्दे पर एक साथ प्रदर्शन कर रहे हैं। ऐसे में गठबंधन के सामने एक तरफ चुनावी प्रक्रिया से जुड़े सवाल उठाने की चुनौती है, तो दूसरी तरफ सहयोगी दलों के बीच बेहतर समन्वय बनाए रखने की जिम्मेदारी भी है।

फिलहाल ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ रैली के जरिए विपक्ष ने मतदाता सूची और चुनावी पारदर्शिता का मुद्दा फिर से उठाया है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि इस प्रदर्शन का राजनीतिक असर कितना व्यापक होता है और बिहार में INDIA गठबंधन के सहयोगी दल अपनी साझा रणनीति को किस तरह आगे बढ़ाते हैं।

Nishkarsh Bharat

राजकुमार सिंह की रिपोर्ट

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