MLC चुनाव: आज प्रचार का आखिरी दिन, शाम को थमेगा शोर, दलों ने झोंकी ताकत

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MLC चुनाव के आखिरी दिन दलों ने झोंकी ताकत, 23 अक्टूबर को मतदान

निष्कर्ष भारत, संवाददाता ( पटना)। बिहार विधान परिषद की आठ सीटों पर होने वाले MLC चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मी चरम पर पहुंच गई है। मंगलवार, 21 अक्टूबर को चुनाव प्रचार का आखिरी दिन है। शाम पांच बजे प्रचार अभियान थम जाएगा। ऐसे में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू), राष्ट्रीय जनता दल (राजद), कांग्रेस और जन सुराज समेत विभिन्न दलों के उम्मीदवारों ने मतदाताओं को अपने पक्ष में करने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है। आखिरी दिन जनसंपर्क, व्यक्तिगत मुलाकातों और फोन कॉल के जरिए मतदाताओं तक पहुंचने की कोशिश तेज हो गई है।

इस बार का MLC चुनाव केवल आठ सीटों पर प्रतिनिधि चुनने तक सीमित नहीं है। इसके परिणाम से एनडीए की एकजुटता, महागठबंधन के भीतर तालमेल, जन सुराज की राजनीतिक स्वीकार्यता और बागी नेताओं के प्रभाव का भी अंदाजा लगेगा। खासकर पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में जेडीयू के नीरज कुमार और जन सुराज के अनुज सिंह के बीच मुकाबले ने चुनाव को अधिक चर्चित बना दिया है।

MLC चुनाव के आखिरी दिन सभी दलों ने झोंकी ताकत

MLC चुनाव में चुनाव प्रचार के अंतिम चरण में उम्मीदवार मतदाताओं से सीधे संपर्क साधने पर जोर दे रहे हैं। कोई व्यक्तिगत मुलाकात के जरिए समर्थन मांग रहा है, तो कोई फोन और वॉयस मैसेज के माध्यम से अपनी बात मतदाताओं तक पहुंचा रहा है। MLC चुनावी अभियान में तकनीक का इस्तेमाल भी बढ़ा है।

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जेडीयू प्रत्याशी नीरज कुमार, भाजपा प्रत्याशी नवल किशोर यादव और राजद प्रत्याशी डॉ. संजीव कुमार सिंह समेत कई उम्मीदवारों के वॉयस मैसेज मतदाताओं के मोबाइल तक पहुंच रहे हैं। उम्मीदवार अपने अनुभव, राजनीतिक उपलब्धियों और भविष्य की प्राथमिकताओं को सामने रखकर समर्थन जुटाने की कोशिश कर रहे हैं।

MLC चुनाव में आखिरी दिन की रणनीति इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि अब प्रचार के लिए समय सीमित रह गया है। उम्मीदवारों की कोशिश है कि मतदान से पहले अधिक से अधिक मतदाताओं तक पहुंच बनाई जाए और अपने समर्थकों को मतदान के लिए तैयार रखा जाए।

MLC चुनाव में आठ सीटों पर 164 उम्मीदवार

MLC की चार स्नातक और चार शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों की आठ सीटों पर इस बार कुल 164 उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल किया है। इनमें स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों से 98 और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों से 66 उम्मीदवार शामिल हैं।

भाजपा और जेडीयू ने आपसी तालमेल के तहत चार-चार सीटों पर प्रत्याशी उतारे हैं। दूसरी ओर, राजद ने छह सीटों पर उम्मीदवार दिए हैं, जबकि कांग्रेस और वाम दलों के प्रत्याशी भी चुनाव मैदान में हैं। जन सुराज ने सभी आठ सीटों पर उम्मीदवार उतारकर मुकाबले को बहुकोणीय बना दिया है।

MLC चुनाव में कई निर्वाचन क्षेत्रों में विपक्षी दलों के उम्मीदवार एक-दूसरे के सामने हैं। इससे महागठबंधन के भीतर मतों के बंटवारे की आशंका बनी हुई है। वहीं, एनडीए के सामने अपने मतदाताओं को एकजुट रखने और सहयोगी दलों के बीच तालमेल बनाए रखने की चुनौती है।

मतदान 23 अक्टूबर को निर्धारित है, जबकि मतगणना 27 अक्टूबर को होगी। ऐसे में प्रचार समाप्त होने के बाद उम्मीदवारों का जोर मतदाताओं से संपर्क बनाए रखने और मतदान के दिन अधिकतम समर्थन हासिल करने पर रहेगा।

पटना स्नातक सीट पर नीरज कुमार बनाम अनुज सिंह

पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र इस बार के MLC चुनाव का सबसे चर्चित मुकाबला बन गया है। जेडीयू ने अपने मौजूदा विधान पार्षद नीरज कुमार पर फिर भरोसा जताया है। वह इस सीट से लगातार तीन बार जीत दर्ज कर चुके हैं और चौथी बार जीतने की कोशिश में हैं।

उनके सामने जन सुराज के अनुज सिंह चुनौती पेश कर रहे हैं। राजद ने दिलीप कुमार और कांग्रेस ने असदुल्लाह खान को मैदान में उतारा है। इससे मुकाबला कई उम्मीदवारों के बीच बंट गया है।

इस सीट की चर्चा की एक वजह नीरज कुमार और अनंत सिंह के बीच चल रहा राजनीतिक विवाद भी है। अनंत सिंह जन सुराज उम्मीदवार अनुज सिंह के समर्थन में प्रचार कर रहे हैं। ऐसे में जेडीयू के लिए चुनावी मुकाबला केवल विपक्षी उम्मीदवारों से नहीं, बल्कि अपने ही राजनीतिक खेमे से उठ रही चुनौती से भी जुड़ गया है।

नीरज कुमार की हाल में तबीयत बिगड़ने और अस्पताल में भर्ती होने की खबर ने भी चुनावी माहौल में चर्चा बढ़ाई है। हालांकि, इसका मतदान पर कितना असर पड़ेगा, यह फिलहाल स्पष्ट नहीं है।

पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में नवल किशोर यादव की चुनौती

MLC चुनाव में पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा ने अपने मौजूदा विधान पार्षद नवल किशोर यादव को फिर से उम्मीदवार बनाया है। लंबे समय से इस सीट का प्रतिनिधित्व कर रहे नवल किशोर यादव के सामने राजद के पूर्व विधायक संजीव कुमार सिंह, कांग्रेस के संजय यादव और जन सुराज की दिव्या ज्योति चुनाव मैदान में हैं।

इस सीट पर शिक्षकों से जुड़े मुद्दे चुनाव प्रचार के केंद्र में हैं। वेतन, सेवा शर्तें, अनुदानित शिक्षण संस्थानों की समस्याएं और शिक्षा व्यवस्था में सुधार जैसे विषय मतदाताओं के लिए महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

भाजपा अपने अनुभवी उम्मीदवार के आधार पर जीत दोहराने की कोशिश कर रही है। वहीं, विपक्षी दलों के उम्मीदवार शिक्षक मतदाताओं के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने में जुटे हैं। जन सुराज ने दिव्या ज्योति को मैदान में उतारकर पारंपरिक राजनीतिक दलों के सामने एक नया विकल्प पेश करने की कोशिश की है।

आखिरी दिन उम्मीदवारों के सामने चुनौती है कि वे अपने पक्ष में अधिक से अधिक शिक्षक मतदाताओं का समर्थन सुनिश्चित करें।

महागठबंधन की फ्रेंडली फाइट से बढ़ी चुनौती

आठ सीटों पर हो रहे चुनाव में महागठबंधन के भीतर तालमेल की कमी एक बड़ा मुद्दा बनकर सामने आई है। राजद ने छह सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं, जबकि कांग्रेस ने भी पांच सीटों पर दावेदारी की है। कुछ निर्वाचन क्षेत्रों में दोनों दलों के प्रत्याशी आमने-सामने हैं।

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ऐसी स्थिति में विपक्षी मतों का बंटवारा चुनावी नतीजों को प्रभावित कर सकता है। जिन सीटों पर मुकाबला कड़ा है, वहां सहयोगी दलों के बीच मतों का विभाजन किसी तीसरे उम्मीदवार को लाभ पहुंचा सकता है।

वाम दलों के उम्मीदवार भी कुछ सीटों पर चुनाव लड़ रहे हैं। ऐसे में विपक्षी खेमे के सामने अपने समर्थकों को एकजुट रखने की चुनौती है। हालांकि, वास्तविक प्रभाव का पता मतदान और मतगणना के बाद ही चलेगा।

NDA के सामने भीतरघात और एकजुटता की परीक्षा

एनडीए के लिए भी यह चुनाव आसान नहीं माना जा रहा है। भाजपा और जेडीयू ने सीटों का बंटवारा कर अपने-अपने उम्मीदवार उतारे हैं, लेकिन कुछ सीटों पर स्थानीय समीकरण और नेताओं के आपसी मतभेद चुनौती पैदा कर सकते हैं।

पटना स्नातक सीट पर नीरज कुमार और अनंत सिंह के बीच विवाद ने इस चिंता को और बढ़ाया है। अनंत सिंह का जन सुराज उम्मीदवार के समर्थन में प्रचार करना जेडीयू के लिए असहज स्थिति पैदा करता है। पार्टी के लिए जरूरी होगा कि उसके समर्थक और स्थानीय कार्यकर्ता आधिकारिक उम्मीदवार के पक्ष में एकजुट रहें।

दूसरी ओर, जन सुराज सभी आठ सीटों पर प्रत्याशी उतारकर अपनी राजनीतिक ताकत दिखाने की कोशिश कर रही है। पार्टी के लिए यह चुनाव पारंपरिक दलों के बीच अपनी जगह बनाने का अवसर है। उसके प्रदर्शन से यह संकेत मिल सकता है कि स्नातक और शिक्षक मतदाताओं के बीच उसे कितना समर्थन हासिल है।

आज शाम पांच बजे थमेगा प्रचार, 23 अक्टूबर को मतदान

MLC चुनाव के लिए मंगलवार शाम पांच बजे प्रचार अभियान समाप्त हो जाएगा। इसके बाद उम्मीदवार सार्वजनिक चुनाव प्रचार नहीं कर सकेंगे और चुनावी गतिविधियां निर्धारित नियमों के अनुसार संचालित होंगी। मतदान 23 अक्टूबर को होगा, जबकि मतगणना 27 अक्टूबर को निर्धारित है।

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MLC चुनाव प्रचार के आखिरी दिन सभी दल अपने-अपने उम्मीदवारों के पक्ष में समर्थन जुटाने में लगे हैं। अब देखना होगा कि व्यक्तिगत संपर्क, वॉयस मैसेज और अंतिम दौर की चुनावी रणनीति कितनी प्रभावी साबित होती है।

आठ सीटों का यह मुकाबला एनडीए, महागठबंधन और जन सुराज के लिए अहम राजनीतिक परीक्षा है। नीरज कुमार, नवल किशोर यादव और डॉ. संजीव कुमार सिंह जैसे चर्चित उम्मीदवारों के प्रदर्शन पर भी नजर रहेगी। मतदान के बाद ही साफ होगा कि मतदाताओं ने अनुभव, पार्टी संगठन, स्थानीय मुद्दों और नए राजनीतिक विकल्पों में से किसे प्राथमिकता दी है।

Nishkarsh Bharat

राजकुमार सिंह की रिपोर्ट

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