‘भारत रत्न’ प्रोफेसर CNR Rao को चुनाव आयोग का नोटिस, मतदाता सूची में नाम गड़बड़ी से जुड़ा मामला

CNR Rao

CNR Rao को नाम में एक ‘F’ पर SIR नोटिस

निष्कर्ष भारत, संवाददाता (बेंगलुरु)। कर्नाटक CNR Rao SIR नोटिस को लेकर एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने मतदाता सूची में दर्ज छोटी सी विसंगति की ओर ध्यान खींचा है। देश के प्रसिद्ध वैज्ञानिक और भारत रत्न से सम्मानित प्रोफेसर सीएनआर राव का नाम भी मतदाता सूची के SIR यानी विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान जांच के दायरे में आया है। 92 वर्षीय वैज्ञानिक को चुनाव आयोग की ओर से अपनी पहचान स्थापित करने के लिए सुनवाई में उपस्थित होने का नोटिस जारी किया गया है।

मामला किसी बड़े अंतर के बजाय उनके नाम की स्पेलिंग में मामूली बदलाव से जुड़ा बताया जा रहा है। पुरानी मतदाता सूची में उनका नाम “CNR Rao” दर्ज है, जबकि मौजूदा रिकॉर्ड में इसे “Proff CNR Rao” लिखा गया है। यानी नाम में एक अतिरिक्त ‘f’ जुड़ गया है। चुनावी रिकॉर्ड में इस अंतर को “self-name mismatch” यानी स्वयं के नाम में विसंगति के तौर पर दर्ज किया गया है।

CNR Rao के नाम में एक अक्षर का अंतर

मतदाता सूची के SIR के दौरान पुराने और मौजूदा रिकॉर्ड का मिलान किया जा रहा है। इसी प्रक्रिया में ऐसे मामलों को चिन्हित किया जा रहा है, जहां मतदाता के पुराने विवरण और वर्तमान रिकॉर्ड में अंतर मिलता है।

सीएनआर राव के मामले में सामने आई विसंगति नाम की स्पेलिंग से संबंधित है। पुराने रिकॉर्ड में जहां “Prof” लिखा गया है, वहीं मौजूदा सूची में “Proff CNR Rao” दर्ज है। अतिरिक्त ‘f’ के कारण रिकॉर्ड में नाम का यह अंतर जांच के लिए दर्ज किया गया।

हालांकि, यह अंतर बेहद मामूली है, लेकिन SIR प्रक्रिया में रिकॉर्ड के मिलान के दौरान ऐसे बदलाव भी जांच के दायरे में आ रहे हैं। इसी क्रम में वैज्ञानिक सीएनआर राव को भी सुनवाई के लिए बुलाया गया है।

क्या है Self-Name Mismatch?

SIR प्रक्रिया में मतदाता सूची के पुराने और नए रिकॉर्ड का मिलान किया जा रहा है। इस दौरान नाम, माता-पिता के नाम, उम्र और अन्य विवरणों में अंतर पाए जाने पर उसे विसंगति के तौर पर दर्ज किया जा सकता है।

इन्हीं में “self-name mismatch” भी शामिल है। इसका मतलब ऐसे मामले से है, जहां किसी मतदाता के अपने नाम में पुराने और मौजूदा रिकॉर्ड के बीच अंतर पाया जाता है।

सीएनआर राव को बेंगलुरु के मल्लेश्वरम इलाके में सुनवाई के लिए बुलाया गया है। यह क्षेत्र भारतीय विज्ञान संस्थान यानी IISc के आसपास स्थित है। नियमों के अनुसार, जिस व्यक्ति के नाम पर नोटिस जारी किया गया है, उसे सुनवाई के दौरान अपनी पहचान और संबंधित रिकॉर्ड स्थापित करना होता है।

CNR Rao कौन हैं?

प्रोफेसर CNR Rao देश के शीर्ष वैज्ञानिकों में गिने जाते हैं। ठोस अवस्था और संरचनात्मक रसायन विज्ञान के क्षेत्र में उनके योगदान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है। विज्ञान के क्षेत्र में उनके लंबे योगदान को देखते हुए उन्हें वर्ष 2014 में देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया था।

सीएनआर राव भारत रत्न पाने वाले देश के तीसरे वैज्ञानिक थे। विज्ञान और शोध के क्षेत्र में उनके योगदान के साथ-साथ भारत में वैज्ञानिक संस्थानों और शोध के विकास में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

उन्होंने भारतीय विज्ञान संस्थान से जुड़े कई महत्वपूर्ण दायित्व संभाले। इसके अलावा बेंगलुरु स्थित जवाहरलाल नेहरू सेंटर फॉर एडवांस्ड साइंटिफिक रिसर्च की स्थापना में भी उनकी अहम भूमिका रही।

CNR Rao ने विज्ञान नीति में भी निभाई भूमिका

CNR Rao केवल प्रयोगशाला और शोध तक सीमित नहीं रहे। उन्होंने देश की विज्ञान नीति को आकार देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वे अलग-अलग प्रधानमंत्रियों की वैज्ञानिक सलाहकार परिषद से जुड़े रहे और सरकार को विज्ञान एवं शोध से जुड़े विषयों पर सलाह देते रहे।

यही वजह है कि उनका नाम देश के प्रमुख वैज्ञानिकों CNR Rao में लिया जाता है। ऐसे में मतदाता सूची में नाम की स्पेलिंग से जुड़ी छोटी सी विसंगति के कारण नोटिस जारी होने का मामला चर्चा में आया है।

हालांकि, नोटिस जारी होने का मतलब यह नहीं है कि उनकी नागरिकता या पहचान पर कोई निष्कर्ष निकल गया है। यह SIR के दौरान रिकॉर्ड में सामने आई विसंगति की जांच की प्रक्रिया का हिस्सा है।

कर्नाटक में SIR के दौरान बड़ी संख्या में नाम हटे

कर्नाटक में SIR के दौरान मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर बदलाव की प्रक्रिया चल रही है। 24 अगस्त को जारी ड्राफ्ट मतदाता सूची से एक करोड़ से अधिक नाम हटाए जाने की बात सामने आई है। यह संख्या राज्य के कुल मतदाताओं का करीब 19.4 प्रतिशत बताई गई है।

चुनाव आयोग के अनुसार, करीब 43 लाख लोगों को नोटिस भेजे जाने हैं। इनमें ऐसे मतदाता शामिल हैं, जिनके Enumeration Forms में विसंगतियां पाई गई हैं या जिनका पुराने रिकॉर्ड से मिलान नहीं हो सका है।

SIR की प्रक्रिया में मतदाताओं को अपने नाम और विवरण से संबंधित दावे और आपत्तियां दर्ज कराने का अवसर भी दिया गया है। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, मतदाता 24 अगस्त से 23 सितंबर तक अपने नाम हटाए जाने के खिलाफ दावा या आपत्ति दाखिल कर सकते हैं।

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इन दावों और आपत्तियों पर 22 अक्टूबर तक सुनवाई होनी है। इसके बाद 27 अक्टूबर को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित किए जाने की निर्धारित तिथि है।

एक ‘F’ से शुरू हुआ मामला अब सुनवाई तक पहुंचा

CNR Rao का मामला इस बात का उदाहरण है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान रिकॉर्ड में मामूली अंतर भी जांच की प्रक्रिया तक पहुंच सकता है। उनके नाम में सिर्फ एक अतिरिक्त ‘f’ का अंतर सामने आया है, लेकिन SIR के नियमों के तहत इसे रिकॉर्ड विसंगति के तौर पर दर्ज किया गया।

अब सुनवाई के दौरान संबंधित दस्तावेजों और पहचान के आधार पर स्थिति स्पष्ट की जाएगी। इसके बाद मतदाता सूची में नाम और विवरण को लेकर आवश्यक सुधार या पुष्टि की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

कर्नाटक में SIR की प्रक्रिया आगे बढ़ने के साथ ऐसे कई मामलों पर सुनवाई होनी है। सीएनआर राव जैसे प्रतिष्ठित वैज्ञानिक का नाम इस प्रक्रिया में सामने आने के बाद मतदाता सूची के रिकॉर्ड और उसमें छोटी-छोटी विसंगतियों की जांच की प्रक्रिया एक बार फिर चर्चा में आ गई है।

Nishkarsh Bharat

अमन कुमार की रिपोर्ट

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