पटना में कांग्रेस का हल्लाबोल, CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग; पुलिस ने चलाया वाटर कैनन
पटना में कांग्रेस का हल्लाबोल, CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे
निष्कर्ष भारत संवाददाता पटना। बिहार की राजधानी पटना में शुक्रवार को मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने चुनाव आयोग कार्यालय की ओर मार्च किया। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए बैरिकेडिंग की। इसके बाद पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच स्थिति तनावपूर्ण हो गई और पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया।
कांग्रेस का यह प्रदर्शन देशभर में चल रहे उस विरोध अभियान का हिस्सा है, जिसमें पार्टी चुनाव आयोग के कामकाज और मतदाता सूची के Special Intensive Revision (SIR) को लेकर सवाल उठा रही है। कांग्रेस ने CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे के साथ-साथ चुनाव आयोग से जुड़े फैसलों और मतदाता सूची में हुए बदलावों की स्वतंत्र समीक्षा की मांग भी उठाई है।
पटना में चुनाव आयोग कार्यालय की ओर निकला मार्च
शुक्रवार को पटना में कांग्रेस कार्यकर्ता बड़ी संख्या में एकत्र हुए और चुनाव आयोग कार्यालय की ओर मार्च शुरू किया। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर नारेबाजी की।
PTI के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों को चुनाव आयोग के कार्यालय तक पहुंचने से रोकने के लिए पुलिस की तैनाती की गई थी। करीब आधा किलोमीटर के मार्च के दौरान पुलिस ने बैरिकेडिंग के जरिए प्रदर्शनकारियों को रोकने की कोशिश की। जब प्रदर्शनकारी आगे बढ़ने का प्रयास करने लगे तो पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया।
बैरिकेडिंग के बाद बढ़ा तनाव, वाटर कैनन का इस्तेमाल
प्रदर्शन के दौरान पुलिस और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच तनाव की स्थिति बनी। पुलिस का कहना था कि प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए वाटर कैनन का इस्तेमाल किया गया। दूसरी ओर, कांग्रेस कार्यकर्ता अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन पर डटे रहे।
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पटना में विरोध प्रदर्शन के दौरान वाटर कैनन का इस्तेमाल कोई पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी विभिन्न मुद्दों को लेकर प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए वाटर कैनन का इस्तेमाल किया है।
क्यों हो रहा है CEC ज्ञानेश कुमार का विरोध?
कांग्रेस का मौजूदा विरोध The Indian Express की 23 सितंबर को प्रकाशित एक रिपोर्ट के बाद और तेज हुआ। रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयोग के दो सदस्य—चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी—ने पिछले 10 महीनों के दौरान कम से कम 14 बार आयोग के फैसलों और आदेशों पर औपचारिक आपत्तियां दर्ज की थीं। रिपोर्ट के अनुसार, कुछ मामलों में दोनों चुनाव आयुक्तों ने दावा किया कि उन्हें फैसलों के बारे में पहले जानकारी नहीं दी गई थी। एक दिन में चार आपत्तियां दर्ज किए जाने की बात भी रिपोर्ट में कही गई।
The Indian Express की रिपोर्ट में ये आपत्तियां मतदाता सूची में नए मतदाताओं को जोड़ने, नाम हटाने, चुनावी डेटा तक पहुंच और SIR से जुड़े कई मामलों से संबंधित बताई गई हैं। रिपोर्ट के अनुसार, दोनों चुनाव आयुक्तों ने कुछ प्रक्रियाओं और फैसलों पर सवाल उठाए थे।
हालांकि, इन रिपोर्टों के बीच यह भी महत्वपूर्ण है कि चुनाव आयोग ने आंतरिक स्तर पर अलग-अलग अधिकारियों या आयुक्तों के मत और सुझावों को अपनी निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा बताया है और आयोग के अंतिम फैसलों को सर्वसम्मति से लिए जाने की बात कही है। इसलिए रिपोर्ट में सामने आई आपत्तियों को आयोग के अंतिम निर्णयों से अलग समझना जरूरी है।
SIR को लेकर पहले से जारी है राजनीतिक विवाद
CEC ज्ञानेश कुमार को लेकर विवाद का एक बड़ा केंद्र Special Intensive Revision यानी SIR है। यह प्रक्रिया मतदाता सूची के पुनरीक्षण से जुड़ी है। बिहार में SIR की शुरुआत 2025 में हुई थी और बाद में यह प्रक्रिया अन्य राज्यों तक भी पहुंची।
The Indian Express की रिपोर्ट के मुताबिक, SIR से संबंधित मुद्दों को लेकर चुनाव आयोग के भीतर भी सवाल उठे। रिपोर्ट में बताया गया कि दोनों चुनाव आयुक्तों ने मतदाता सूची के डेटा के प्रबंधन, नए मतदाताओं के पंजीकरण और कुछ नामों को जोड़ने या हटाने की प्रक्रियाओं पर आपत्तियां दर्ज की थीं।
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वहीं चुनाव आयोग की ओर से इन घटनाक्रमों को अपनी आंतरिक विचार-विमर्श प्रक्रिया का हिस्सा बताया गया है। यही वजह है कि पूरे मामले में कांग्रेस के आरोपों और चुनाव आयोग के पक्ष को अलग-अलग देखना महत्वपूर्ण है।
कांग्रेस ने देशभर में प्रदर्शन का किया ऐलान
कांग्रेस ने 25 सितंबर को देशभर में राज्य चुनाव आयोग कार्यालयों तक मार्च का कार्यक्रम घोषित किया था। पार्टी ने CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे के अलावा उनके कार्यकाल के दौरान लिए गए फैसलों और मतदाता सूची में हुए बदलावों की स्वतंत्र समीक्षा की मांग की है।
पार्टी ने आगे 28 सितंबर को जिला कांग्रेस समितियों की ओर से जिला मुख्यालयों और कलेक्टरेट तक प्रदर्शन मार्च करने का भी कार्यक्रम बताया है।
शुक्रवार को पटना के अलावा देश के कई अन्य हिस्सों में भी कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने CEC के खिलाफ प्रदर्शन किया। अलग-अलग जगहों पर पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई और कुछ स्थानों पर प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए वाटर कैनन का इस्तेमाल भी किया गया।
अब आगे क्या?
पटना में हुए प्रदर्शन के बाद इस पूरे विवाद पर राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना है। कांग्रेस लगातार चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और SIR से जुड़े फैसलों पर सवाल उठा रही है, जबकि चुनाव आयोग ने आंतरिक मतभेदों को अपनी सामान्य निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा बताया है।
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फिलहाल इस मामले में आगे की तस्वीर चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया, SIR से जुड़े कानूनी मामलों और राजनीतिक दलों की आगामी गतिविधियों से स्पष्ट होगी।
पटना से कीमती कुमारी का रिपोर्ट
