पटना में डेंगू का बढ़ा कहर, 23 दिन में 140 नए मरीज, PMCH में 20 बेड रिजर्व
पटना में डेंगू के 307 केस, 23 दिन में 140 नए मरीज मिले
निष्कर्ष भारत, संवाददाता (पटना)। पटना में डेंगू के मामले एक बार फिर तेजी से बढ़ने लगे हैं। सितंबर के शुरुआती 23 दिनों में ही जिले में करीब 140 नए मरीज सामने आए हैं। बुधवार को 9 नए संक्रमित मिले, जिसके बाद इस सीजन में पटना में मरीजों की कुल संख्या 307 पहुंच गई है। लगातार बढ़ते मामलों को देखते हुए अस्पतालों में डेंगू मरीजों के लिए बेड, जांच और निगरानी की व्यवस्था बढ़ाई जा रही है।
कुछ मरीजों में तेज बुखार और प्लेटलेट्स में तेजी से गिरावट के कारण अस्पताल में भर्ती करने की जरूरत पड़ रही है। पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (PMCH) में मरीजों के लिए अलग वार्ड बनाया गया है, जबकि इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (IGIMS) में भी संक्रमित मरीजों का इलाज किया जा रहा है। शहर के कई इलाकों में बढ़ते मामलों ने मच्छर नियंत्रण को लेकर भी चिंता बढ़ा दी है।
सितंबर में 140 नए डेंगू मरीज मिले
पटना में इस सीजन डेंगू के मामलों की संख्या लगातार बढ़ रही है। सितंबर के केवल 23 दिनों में करीब 140 नए मरीज मिलना संक्रमण की बढ़ती रफ्तार को दिखाता है। बुधवार को सामने आए 9 नए मामलों के बाद जिले में इस सीजन के कुल संक्रमितों की संख्या 307 हो गई है।
मौसम में बदलाव के साथ मच्छरों का प्रकोप बढ़ने से डेंगू के मामले बढ़ने की आशंका बनी रहती है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग और अस्पताल प्रशासन के सामने मरीजों की जांच, इलाज और निगरानी के साथ-साथ मच्छर नियंत्रण की चुनौती भी है।
डेंगू मरीजों के लिए PMCH में 20 बेड का वार्ड
PMCH के अधीक्षक डॉ. राजीव कुमार सिंह के अनुसार, इस सीजन में अब तक 52 डेंगू मरीजों को अस्पताल में भर्ती किया गया है। मरीजों की जरूरत को देखते हुए अस्पताल में डेंगू के लिए 20 बेड का अलग वार्ड बनाया गया है।
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अस्पताल में भर्ती मरीजों को मच्छरों से बचाने के लिए मच्छरदानी की व्यवस्था की गई है। मरीज की स्थिति के अनुसार प्लेटलेट्स, ब्लड काउंट और दूसरी जरूरी जांच कराई जा रही है। अस्पताल प्रशासन के मुताबिक अब तक भर्ती हुए सभी मरीज इलाज के बाद ठीक होकर घर जा चुके हैं।
डेंगू में कई बार प्लेटलेट्स तेजी से गिरने की स्थिति सामने आती है। ऐसे मरीजों को चिकित्सकीय निगरानी में रखना जरूरी होता है। यही वजह है कि अस्पतालों में जांच और बेड की उपलब्धता पर लगातार नजर रखी जा रही है।
IGIMS में 79 मरीजों का इलाज
डेंगू मरीजों के इलाज के मामले में IGIMS में भी बड़ी संख्या सामने आई है। यहां अब तक 79 डेंगू मरीजों को भर्ती कर इलाज किया गया है। PMCH और IGIMS को मिलाकर 134 मरीजों को अस्पताल में भर्ती करने की जरूरत पड़ी है।
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IGIMS में डेंगू मरीजों के लिए 5 बेड निर्धारित किए गए हैं। हालांकि, इन बेड पर भर्ती मरीजों को मच्छरों से बचाने के लिए मच्छरदानी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने की बात सामने आई है। डेंगू संक्रमित व्यक्ति को मच्छर काटने के बाद दूसरे व्यक्ति तक संक्रमण पहुंचा सकता है। इसलिए अस्पताल में इलाज के साथ मच्छरों से बचाव भी महत्वपूर्ण माना जाता है।
डेंगू के ये इलाके बने हॉट स्पॉट
पटना शहर में डेंगू के मामले कई इलाकों में सामने आ रहे हैं। कंकड़बाग अंचल में कंकड़बाग, हनुमान नगर, भागवत नगर, पोस्टल पार्क, योगीपुर, जक्कनपुर और भूतनाथ रोड को प्रभावित इलाकों में शामिल किया गया है।
बांकीपुर अंचल में बाजार समिति, मुसल्लहपुर घाट, सुलतानगंज, संदलपुर, कदमकुआं, महेंद्रू और भिखनापहाड़ी में भी डेंगू के मामले सामने आए हैं।
पाटलिपुत्र अंचल में पाटलिपुत्र, बोरिंग रोड, राजाबाजार, इंद्रपुरी, आशियाना, दीघा, एजी कॉलोनी और एसकेपुरी इलाके पर निगरानी है। वहीं नूतन राजधानी अंचल के तारामंडल, सिपारा, मीठापुर और अनीसाबाद में भी मामले सामने आए हैं।
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अजीमाबाद अंचल में अगमकुआं, बजरंगपुरी, गुलजारबाग और आलमगंज तथा पटना सिटी में खाजेकलां और मालसलामी को भी प्रभावित क्षेत्रों में रखा गया है।
डेंगू से बचाव के लिए सावधानी जरूरी
डेंगू के बढ़ते मामलों को देखते हुए लोगों को घर और आसपास पानी जमा नहीं होने देना चाहिए। कूलर, गमले, पुराने टायर, डिब्बे और ऐसी जगहों की नियमित सफाई जरूरी है, जहां पानी ठहर सकता है। मच्छरों से बचने के लिए पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनने और मच्छरदानी का इस्तेमाल करने की सलाह दी जाती है।

तेज बुखार, शरीर में तेज दर्द, लगातार उल्टी, पेट दर्द, खून आने, अत्यधिक कमजोरी या प्लेटलेट्स गिरने जैसे लक्षण दिखाई देने पर लापरवाही नहीं करनी चाहिए। ऐसे लक्षणों में डॉक्टर से संपर्क कर जांच और जरूरी निगरानी कराना महत्वपूर्ण है।
पटना में डेंगू के बढ़ते मामलों के बीच अस्पतालों में बेड, प्लेटलेट्स, जांच किट और जरूरी दवाओं की उपलब्धता पर लगातार नजर रखने की जरूरत है। इसके साथ ही मच्छर नियंत्रण अभियान को प्रभावी बनाना भी जरूरी है, ताकि आने वाले दिनों में संक्रमण की रफ्तार को नियंत्रित किया जा सके।
राज कुमार की रिपोर्ट
