128 साल बाद दिवाली पर बना दुर्लभ योग, 2 दिन का महासंयोग, सोना-चांदी खरीदने का शुभ मौका

दिवाली

दिवाली से पहले 1 और 2 नवंबर को पुष्य नक्षत्र का शुभ संयोग। जानिए रवि पुष्य योग, शुभ मुहूर्त और सोना-चांदी समेत क्या खरीदना माना जाता है शुभ।

निष्कर्ष भारत, संवाददाता (नई दिल्ली)। दिवाली से पहले इस बार खरीदारी करने वालों के लिए नवंबर की शुरुआत बेहद खास मानी जा रही है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, 1 और 2 नवंबर 2026 को पुष्य नक्षत्र का विशेष संयोग बना है। खास बात यह है कि रविवार को रवि पुष्य योग और सोमवार को पुष्य नक्षत्र के साथ कई अन्य शुभ योगों का मेल हो रहा है। ज्योतिषीय मान्यताओं में इसे करीब 128 साल बाद बनने वाला दुर्लभ संयोग बताया जा रहा है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पुष्य नक्षत्र में सोना-चांदी खरीदना, जमीन-मकान में निवेश करना, वाहन खरीदना और नया कारोबार शुरू करना शुभ माना जाता है। यही वजह है कि दिवाली से पहले इस संयोग को खरीदारी और निवेश के लिए विशेष अवसर के रूप में देखा जा रहा है। खासकर उन लोगों के लिए यह समय महत्वपूर्ण है, जो धनतेरस और दिवाली से पहले सोने-चांदी के आभूषण या अन्य कीमती सामान खरीदने की योजना बना रहे हैं।

ज्योतिष शास्त्र में पुष्य नक्षत्र को 27 नक्षत्रों में अत्यंत शुभ स्थान प्राप्त है। इसे नक्षत्रों का राजा भी कहा जाता है। मान्यता है कि इस नक्षत्र में शुरू किए गए कार्य लंबे समय तक शुभ परिणाम देते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। आइए जानते हैं नवंबर के इन दो दिनों में कौन-कौन से शुभ योग बन रहे हैं और पुष्य नक्षत्र में किन चीजों की खरीदारी करना शुभ माना जाता है।

दिवाली से पहले 1 नवंबर को बनेगा रवि पुष्य योग

रविवार, 1 नवंबर 2026 को पुष्य नक्षत्र का विशेष संयोग बना। ज्योतिषीय पंचांग के अनुसार, पुष्य नक्षत्र की शुरुआत सुबह 10 बजकर 16 मिनट से हुई और यह 2 नवंबर की सुबह 8 बजकर 50 मिनट तक रहेगा।

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रविवार के दिन पुष्य नक्षत्र पड़ने के कारण इसे रवि पुष्य योग कहा जाता है। ज्योतिष शास्त्र में रवि पुष्य योग को खरीदारी, निवेश, संपत्ति अर्जित करने और नए कार्यों की शुरुआत के लिए बेहद शुभ माना जाता है।

इस दिन रवि पुष्य योग के साथ शंख, लक्ष्मी, शश, हर्ष, सरल, साध्य, मित्र और गजकेसरी योग बनने की ज्योतिषीय गणना भी बताई गई है। इसके अलावा मंगल और चंद्रमा की युति को भी इस दिन का विशेष ज्योतिषीय संयोग माना जा रहा है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन योगों में सोना-चांदी खरीदना, नया वाहन लेना, जमीन या मकान की बुकिंग करना और कारोबार की शुरुआत करना शुभ होता है। यही कारण है कि दिवाली से पहले बाजारों में खरीदारी को लेकर उत्साह बढ़ने की उम्मीद है।

2 नवंबर को भी पुष्य नक्षत्र का शुभ संयोग

सोमवार, 2 नवंबर को भी सुबह 8 बजकर 50 मिनट तक पुष्य नक्षत्र रहेगा। इस दिन सोमवार और पुष्य नक्षत्र का संयोग होने के कारण खरीदारी के लिए इसे विशेष महत्व दिया जा रहा है।

ज्योतिषीय गणना के मुताबिक, इस दिन सर्वार्थसिद्धि, शुभ, श्रीवत्स, अमला, वाशि और सरल योग सहित कई शुभ योगों का मेल बताया गया है। इसके साथ अमृतसिद्धि और सर्वार्थसिद्धि योग को भी इस दिन का महत्वपूर्ण संयोग माना गया है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सर्वार्थसिद्धि योग में शुरू किए गए कार्यों में सफलता मिलने की संभावना मानी जाती है। वहीं, अमृतसिद्धि योग को भी शुभ कार्यों और खरीदारी के लिए अनुकूल माना जाता है।

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व्यापारियों के लिए भी यह दिन खास हो सकता है। इस दौरान नई दुकान शुरू करने, कारोबार के लिए मशीनरी खरीदने, नए बही-खाते तैयार करने और व्यापार विस्तार की योजनाओं पर काम करने को शुभ माना जाता है।

हालांकि, पुष्य नक्षत्र 2 नवंबर को सुबह 8:50 बजे तक ही है। इसलिए खरीदारी करने वाले लोगों को पंचांग में दिए गए नक्षत्र के समय का ध्यान रखना चाहिए।

पुष्य नक्षत्र को क्यों कहा जाता है नक्षत्रों का राजा?

हिंदू ज्योतिष में कुल 27 नक्षत्रों का उल्लेख मिलता है। इनमें पुष्य नक्षत्र को विशेष रूप से शुभ और कल्याणकारी माना गया है। धार्मिक मान्यताओं में इसका संबंध समृद्धि, पोषण, उन्नति और शुभ कार्यों से जोड़ा जाता है।

पुष्य नक्षत्र के स्वामी शनि माने जाते हैं, जबकि इसके अधिष्ठाता देवता बृहस्पति हैं। बृहस्पति को ज्ञान, धर्म, समृद्धि और शुभता का प्रतीक माना जाता है।

यही वजह है कि इस नक्षत्र में सोना, चांदी, आभूषण, वाहन और संपत्ति खरीदने की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है। लोगों का विश्वास है कि इस दिन खरीदी गई वस्तुएं घर में सुख-समृद्धि लेकर आती हैं।

खास बात यह है कि पुष्य नक्षत्र में खरीदारी करने के लिए हमेशा धनतेरस या दिवाली का इंतजार करना जरूरी नहीं माना जाता। साल में कई बार पुष्य नक्षत्र आता है और लोग अपनी सुविधानुसार इस दिन खरीदारी करते हैं।

दिवाली पर पुष्य नक्षत्र में क्या-क्या खरीदना माना जाता है शुभ?

पुष्य नक्षत्र का महत्व केवल सोने और चांदी की खरीदारी तक सीमित नहीं है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, इस दौरान कई अन्य वस्तुओं की खरीदारी भी शुभ मानी जाती है।

सोना और चांदी: पुष्य नक्षत्र में सोने और चांदी के आभूषण खरीदने की परंपरा काफी पुरानी है। मान्यता है कि इस दिन खरीदी गई कीमती धातुएं घर में धन और समृद्धि बढ़ाती हैं।

जमीन और मकान: जो लोग लंबे समय से जमीन, फ्लैट या मकान खरीदने की योजना बना रहे हैं, उनके लिए यह समय शुभ माना जाता है। इस दौरान संपत्ति की बुकिंग और नए निर्माण की शुरुआत भी की जा सकती है।

वाहन: नई कार, बाइक या अन्य वाहन खरीदने के लिए भी पुष्य नक्षत्र को शुभ माना जाता है। दिवाली से पहले वाहन खरीदने की योजना बना रहे लोग इस संयोग को महत्व दे सकते हैं।

दुकान और मशीनरी: कारोबारियों के लिए नई दुकान शुरू करना, व्यापारिक उपकरण खरीदना और मशीनरी में निवेश करना शुभ माना जाता है।

बही-खाते: व्यापारी वर्ग इस अवसर पर नए बही-खाते शुरू कर सकता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इससे कारोबार में उन्नति और आर्थिक स्थिरता आती है।

पूजा सामग्री: चांदी, तांबे और स्फटिक से बनी पूजा सामग्री खरीदना भी शुभ माना जाता है। इसके अलावा लक्ष्मी-गणेश की प्रतिमा और अन्य धार्मिक वस्तुओं की खरीदारी भी की जाती है।

क्या 128 साल बाद बन रहा है ऐसा दुर्लभ संयोग?

इस बार पुष्य नक्षत्र के साथ कई शुभ योगों के मेल को ज्योतिषीय गणना में करीब 128 साल बाद बनने वाला दुर्लभ संयोग बताया जा रहा है। हालांकि, इस दावे को लेकर यह समझना जरूरी है कि अलग-अलग पंचांग और ज्योतिषीय गणनाओं में योगों की व्याख्या अलग हो सकती है।

इस संयोग की खासियत रविवार को रवि पुष्य योग और सोमवार को पुष्य नक्षत्र का लगातार दो दिनों तक रहना है। इसके साथ कई अन्य शुभ योगों का मेल इसे ज्योतिषीय दृष्टि से महत्वपूर्ण बना रहा है।

दिवाली से पहले आने वाले इस अवसर पर बाजारों में सोना-चांदी, वाहन और अन्य कीमती वस्तुओं की खरीदारी को लेकर लोगों की दिलचस्पी बढ़ सकती है। हालांकि, खरीदारी का निर्णय अपनी आर्थिक क्षमता और जरूरत के अनुसार लेना चाहिए। ज्योतिषीय शुभ मुहूर्त धार्मिक आस्था का विषय है, इसे निवेश में निश्चित लाभ की गारंटी नहीं माना जाना चाहिए।

1 और 2 नवंबर का पुष्य नक्षत्र दिवाली से पहले खरीदारी और शुभ कार्यों के लिए विशेष धार्मिक महत्व रखता है। अब देखना होगा कि इस शुभ संयोग के दौरान सर्राफा बाजार और अन्य व्यापारिक क्षेत्रों में खरीदारी को कितना प्रोत्साहन मिलता है।

Nishkarsh Bharat

राजकुमार सिंह की रिपोर्ट

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