सोना खरीदने वालों को झटका? आयात पर 3% IGST को लेकर बड़ा अपडेट, बढ़ेंगे दाम
सोना आयात पर 3% IGST, जानें गोल्ड की कीमतों पर क्या होगा असर
निष्कर्ष भारत, संवाददाता (नई दिल्ली)। त्योहारों के मौसम में सोना खरीदने की योजना बना रहे लोगों के लिए आयात से जुड़े टैक्स का मुद्दा अहम हो गया है। सरकार ने सोना, चांदी और प्लेटिनम के आयात पर बैंकों और नामित एजेंसियों को मिलने वाली IGST छूट आगे नहीं बढ़ाई है। इसके बाद इन आयातों पर 3 प्रतिशत इंटीग्रेटेड गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (IGST) लागू है। हालांकि, यह बदलाव अप्रैल 2027 से शुरू होने वाला नया नियम नहीं है। राजस्व सचिव अरविंद श्रीवास्तव के अनुसार, बैंकों को 1 अप्रैल 2026 से ही आयात के समय यह टैक्स देना पड़ रहा है।
इस फैसले के बाद सोने की कीमतों पर संभावित असर को लेकर चर्चा तेज है। लेकिन ग्राहकों के लिए यह समझना जरूरी है कि आयात पर टैक्स लगने और बाजार में सोने का खुदरा भाव बढ़ने के बीच सीधा और निश्चित संबंध नहीं होता। कीमतों पर अंतरराष्ट्रीय बाजार, रुपये की विनिमय दर, आयात लागत, घरेलू मांग और अन्य शुल्कों का भी असर पड़ता है।
सोना आयात पर 3% IGST का नियम क्या है?
सरकार ने पहले कुछ बैंकों और नामित एजेंसियों को सोना, चांदी और प्लेटिनम आयात करने पर IGST से छूट दी थी। यह व्यवस्था वर्ष 2017 में शुरू हुई थी। बाद में बुलियन कारोबार के लिए नए औपचारिक माध्यम विकसित हुए, जिनमें इंडिया इंटरनेशनल बुलियन एक्सचेंज भी शामिल है। इन माध्यमों से आयात करने वालों को आयात के समय 3 प्रतिशत IGST देना पड़ता था।
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ऐसे में अलग-अलग आयात माध्यमों के बीच टैक्स व्यवस्था में अंतर पैदा हो रहा था। सरकार ने बैंकों को मिलने वाली छूट आगे नहीं बढ़ाई, जिससे उनके आयात पर भी 3 प्रतिशत IGST लागू हो गया। राजस्व सचिव ने 8 अक्टूबर 2026 को बताया कि यह व्यवस्था अलग-अलग आयात माध्यमों के बीच टैक्स समानता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लागू की गई है
क्या सोना और महंगा हो जाएगा?
आयात के समय IGST का भुगतान करने से कारोबारियों के लिए शुरुआती स्तर पर नकदी की जरूरत बढ़ सकती है। लेकिन पात्र कारोबारी घरेलू आपूर्ति के दौरान इस टैक्स का इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) ले सकते हैं। इसलिए आयात पर चुकाए गए 3 प्रतिशत IGST को सीधे सोने की कीमत में 3 प्रतिशत बढ़ोतरी के बराबर मानना सही नहीं है।
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खुदरा बाजार में सोने का भाव कई कारकों से तय होता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में तेजी, डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति, आयात शुल्क, परिवहन लागत और स्थानीय मांग का असर भी कीमतों पर पड़ सकता है। इसलिए इस टैक्स बदलाव के आधार पर यह कहना जल्दबाजी होगी कि ग्राहकों को सोना निश्चित रूप से महंगा मिलेगा।
सोने के आयात शुल्क में भी हुआ था बदलाव
सोने की कीमतों पर असर डालने वाला एक अन्य बड़ा बदलाव मई 2026 में हुआ था। उस समय सरकार ने सोने और चांदी पर आयात शुल्क 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया था। प्लेटिनम पर भी आयात शुल्क बढ़ाया गया था। इस फैसले का उद्देश्य कीमती धातुओं के आयात पर अंकुश लगाने से जुड़ा था।
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आयात शुल्क और IGST दो अलग-अलग कर हैं। आयात शुल्क सीमा शुल्क व्यवस्था का हिस्सा है, जबकि IGST वस्तु एवं सेवा कर से जुड़ा है। दोनों को एक ही टैक्स समझना सही नहीं होगा। सोने की अंतिम कीमत पर इनके प्रभाव को समझने के लिए पूरी कर व्यवस्था और बाजार की परिस्थितियों को देखना जरूरी है।
कौन कर सकता है सोने का आयात?
भारत में सोने का आयात नियंत्रित व्यवस्था के तहत होता है। अधिकृत बैंक, नामित एजेंसियां और निर्धारित नियमों के तहत पात्र कारोबारी ही सोने के आयात की प्रक्रिया में हिस्सा ले सकते हैं। इंडिया इंटरनेशनल बुलियन एक्सचेंज के जरिए भी पात्र संस्थाएं निर्धारित शर्तों के अनुसार कारोबार करती हैं।

भारत दुनिया के सबसे बड़े सोना उपभोक्ता बाजारों में शामिल है और घरेलू मांग का बड़ा हिस्सा आयात से पूरा होता है। इसी कारण आयात नीति, टैक्स और अंतरराष्ट्रीय बाजार में होने वाले बदलाव भारतीय बाजार के लिए महत्वपूर्ण होते हैं।
ग्राहकों को सोना खरीदने से पहले क्या ध्यान रखना चाहिए?
त्योहारों या शादी के मौसम में सोना खरीदने से पहले केवल टैक्स से जुड़ी खबरों के आधार पर जल्दबाजी में फैसला नहीं करना चाहिए। खरीदारी से पहले स्थानीय बाजार में 24 कैरेट और 22 कैरेट सोने का ताजा भाव जांचें। इसके अलावा मेकिंग चार्ज, लागू GST और ज्वेलरी की अंतिम कीमत भी समझें। यदि निवेश के लिए सोना खरीद रहे हैं, तो अपनी जरूरत, बजट और निवेश की अवधि पर विचार करें। केवल इस आशंका में खरीदारी करना कि कीमतें तुरंत बढ़ जाएंगी, सही रणनीति नहीं हो सकती।
3 प्रतिशत IGST से जुड़ा बदलाव आयात की टैक्स व्यवस्था में समानता लाने के लिए किया गया है। इसका खुदरा कीमतों पर कितना असर होगा, यह बाजार की परिस्थितियों पर निर्भर करेगा। इसलिए सोना खरीदने वालों के लिए सबसे जरूरी है कि वे वास्तविक बाजार भाव और खरीदारी की कुल लागत की तुलना करने के बाद ही फैसला लें।
राज कुमार की रिपोर्ट
