JDU का ओरिएंटेशन आज, नीतीश करेंगे शुभारंभ; उठे कई सवाल, ये बीजेपी के लिए क्यों नही?

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JDU के ओरिएंटेशन कार्यक्रम में नीतीश कुमार करेंगे शुभारंभ

निष्कर्ष भारत, संवाददाता (पटना)। JDU ओरिएंटेशन कार्यक्रम आज पटना में होने जा रहा है। पार्टी के विधायक और विधान पार्षद इस एक दिवसीय कार्यक्रम में संसदीय और विधायी कामकाज से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी लेंगे। पार्टी कार्यालय स्थित कर्पूरी सभागार में होने वाले कार्यक्रम का उद्घाटन JDU के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार करेंगे। कार्यक्रम में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ विधायी कार्यप्रणाली के विशेषज्ञ भी मौजूद रहेंगे।

उपलब्ध जानकारी के मुताबिक प्रशिक्षण में विधायकों और विधान पार्षदों को सदन की कार्यवाही, समितियों की भूमिका, कानून बनाने की प्रक्रिया, राज्य बजट और बिहार की अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर जानकारी दी जाएगी। ऐसे में कार्यक्रम को औपचारिक रूप से विधायी प्रशिक्षण पर केंद्रित बताया गया है।

JDU ओरिएंटेशन में कौन-कौन होंगे शामिल?

कार्यक्रम में नीतीश कुमार के अलावा केंद्रीय मंत्री ललन सिंह, राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा और प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा सहित पार्टी के विधायक और विधान पार्षद शामिल होंगे। कार्यक्रम के लिए बाहर से संसदीय कार्यप्रणाली के विशेषज्ञों को बुलाया गया है।

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पार्टी की ओर से बताया गया है कि इसका उद्देश्य निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की विधायी समझ को मजबूत करना है। खास तौर पर सदन में सवाल पूछने, कानून निर्माण की प्रक्रिया को समझने और अपने क्षेत्र से जुड़े मुद्दों को प्रभावी ढंग से उठाने पर प्रशिक्षण दिया जाएगा।

विधायी जिम्मेदारियों पर होगा फोकस

JDU के इस कार्यक्रम के लिए पांच प्रमुख विषय बताए गए हैं। इनमें विधायी जिम्मेदारियां और समितियां, कानून बनाने की प्रक्रिया, देश में हाल के विधायी घटनाक्रम, राज्य के बजट को समझना तथा बिहार की अर्थव्यवस्था और वित्त शामिल हैं।

इसका मतलब यह है कि कार्यक्रम का एक बड़ा हिस्सा सदन के तकनीकी और प्रक्रियात्मक कामकाज को समझने पर केंद्रित रहेगा। नए निर्वाचित सदस्यों के लिए यह प्रशिक्षण सदन में उनकी भूमिका को समझने का माध्यम बन सकता है।

JDU के सामने राजनीतिक सवाल भी

हालांकि कार्यक्रम को विधायी प्रशिक्षण के तौर पर घोषित किया गया है, लेकिन इसके समय ने राजनीतिक चर्चाओं को भी जन्म दिया है। हाल के दिनों में JDU से जुड़े कई मुद्दे राष्ट्रीय और बिहार की राजनीति में चर्चा में रहे हैं।

इनमें समान नागरिक संहिता यानी UCC, फरक्का बैराज और पार्टी के नाम में नीतीश कुमार का नाम जोड़ने का सुझाव प्रमुख हैं। उपलब्ध रिपोर्टों में भी इन मुद्दों को आगामी बैठक के संदर्भ में चर्चा का हिस्सा बताया गया है, लेकिन इन्हें आधिकारिक प्रशिक्षण एजेंडे में शामिल किए जाने की पुष्टि नहीं हुई है।

फरक्का मुद्दे पर JDU की सक्रियता

फरक्का बैराज और 1996 की भारत-बांग्लादेश गंगा जल संधि को लेकर JDU पिछले दिनों सक्रिय रहा है। पार्टी ने बिहार में बाढ़ और गाद से जुड़े मुद्दों के संदर्भ में इस विषय को उठाया है। संजय झा की ओर से भी फरक्का समझौते और बिहार के हितों से संबंधित मुद्दों पर बयान सामने आए हैं।

ऐसे में यह सवाल राजनीतिक रूप से उठ रहा है कि क्या पार्टी के विधायक और विधान पार्षद भविष्य में सदन में इस मुद्दे को उठाएंगे। हालांकि, आज के ओरिएंटेशन कार्यक्रम में फरक्का मुद्दे पर अलग से राजनीतिक ब्रीफिंग होगी, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

UCC पर JDU की स्थिति पर नजर

समान नागरिक संहिता यानी UCC भी मौजूदा राजनीतिक बहस का एक महत्वपूर्ण विषय है। हाल में केंद्र की ओर से UCC को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज हुई है। ऐसे में NDA के घटक दल JDU की स्थिति पर भी नजर बनी हुई है।

JDU की ओर से इस विषय पर अलग-अलग मौकों पर अपनी चिंताएं और विचार सामने रखे गए हैं। लेकिन आज के ओरिएंटेशन कार्यक्रम में UCC पर कोई विशेष राजनीतिक रणनीति तय होगी, ऐसा पार्टी की ओर से आधिकारिक तौर पर नहीं बताया गया है।इसलिए प्रशिक्षण के घोषित एजेंडे और संभावित राजनीतिक चर्चाओं के बीच अंतर रखना जरूरी है।

‘जनता दल नीतीश’ नाम का सुझाव भी चर्चा में

JDU के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने हाल ही में पार्टी के नाम में नीतीश कुमार का नाम शामिल करने का सुझाव दिया था। उन्होंने ‘जनता दल नीतीश’ नाम का विचार सामने रखा। इसके बाद पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं ने भी इस सुझाव का समर्थन किया। हालांकि, पार्टी के नाम में बदलाव पर अभी कोई औपचारिक निर्णय नहीं हुआ है।

ऐसे में आज पार्टी के निर्वाचित प्रतिनिधियों की मौजूदगी के कारण यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या इस विषय पर अनौपचारिक चर्चा होगी। लेकिन इसे कार्यक्रम का आधिकारिक एजेंडा मानना फिलहाल सही नहीं होगा।

क्या JDU के विधायकों से लिया जाएगा फीडबैक?

एक और सवाल यह है कि क्या कार्यक्रम केवल विशेषज्ञों के प्रशिक्षण तक सीमित रहेगा या विधायकों और विधान पार्षदों से उनके क्षेत्र और विधानसभा से जुड़े मुद्दों पर फीडबैक भी लिया जाएगा।

बड़ी संख्या में निर्वाचित प्रतिनिधियों के एक साथ मौजूद रहने के कारण पार्टी के भीतर संवाद की संभावना स्वाभाविक है। हालांकि, किसी विशेष राजनीतिक चर्चा या निर्णय की जानकारी कार्यक्रम शुरू होने से पहले सार्वजनिक नहीं की गई है।

BJP के लिए अलग कार्यक्रम क्यों नहीं?

JDU का यह कार्यक्रम पार्टी स्तर पर आयोजित किया जा रहा है। इसलिए इसकी तुलना सीधे BJP के किसी कार्यक्रम से करना तभी संभव होगा, जब BJP की ओर से समान प्रकृति का कोई आधिकारिक कार्यक्रम, उसका उद्देश्य और उसकी समय-सारणी सामने हो।

वर्तमान में उपलब्ध जानकारी यह बताती है कि JDU ने अपने विधायकों और विधान पार्षदों के लिए यह प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया है। इससे अपने आप यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि दूसरे NDA दलों में ऐसा प्रशिक्षण नहीं होता या भविष्य में नहीं होगा।

JDU ओरिएंटेशन में आज किन बातों पर नजर?

कार्यक्रम के दौरान मुख्य रूप से यह देखा जाएगा कि विशेषज्ञ विधायकों को विधायी प्रक्रिया किस तरह समझाते हैं और पार्टी नेतृत्व जनप्रतिनिधियों के साथ किस तरह संवाद करता है।

साथ ही राजनीतिक नजरिए से इन सवालों पर भी ध्यान रहेगा कि क्या फरक्का, UCC या पार्टी के नाम में बदलाव जैसे हालिया मुद्दों पर कोई चर्चा होती है। यदि ऐसा होता है तो उसका स्वरूप और आधिकारिक स्थिति कार्यक्रम के बाद ही स्पष्ट होगी।

नीतीश कुमार का संबोधन भी महत्वपूर्ण

कार्यक्रम का उद्घाटन नीतीश कुमार करेंगे। इसलिए उनके संबोधन पर भी राजनीतिक और संगठनात्मक नजर रहेगी। हालांकि, उनके संबोधन के विषय पहले से सार्वजनिक रूप से तय किए गए हैं या नहीं, इसकी विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं है।

यदि वे विधायी कार्यप्रणाली, जनप्रतिनिधियों की भूमिका और सदन में प्रभावी भागीदारी पर बात करते हैं, तो यह कार्यक्रम के घोषित उद्देश्य के अनुरूप होगा। वहीं, यदि हालिया राजनीतिक मुद्दों का उल्लेख होता है तो वह कार्यक्रम के व्यापक राजनीतिक संदर्भ को सामने ला सकता है।

फिलहाल आधिकारिक एजेंडा ही आधार

JDU का आज का ओरिएंटेशन कार्यक्रम आधिकारिक तौर पर विधायी प्रशिक्षण के लिए आयोजित किया गया है। इसमें सदन की प्रक्रिया, कानून निर्माण, समितियों, बजट और बिहार की अर्थव्यवस्था जैसे विषय शामिल हैं।

वहीं, फरक्का, UCC और ‘जनता दल नीतीश’ जैसे विषय हाल के राजनीतिक विमर्श में जरूर हैं, लेकिन इनके आज के कार्यक्रम के आधिकारिक एजेंडे में शामिल होने की पुष्टि नहीं है। इसलिए कार्यक्रम के दौरान सामने आने वाली वास्तविक चर्चा और नेताओं के बयानों से ही यह स्पष्ट होगा कि दिनभर का कार्यक्रम केवल प्रशिक्षण तक सीमित रहता है या इसके साथ अन्य राजनीतिक विषयों पर भी संवाद होता है।

Nishkarsh Bharat

राजकुमार सिंह की रिपोर्ट

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