मुजफ्फरपुर में जीविका दीदियों के नाम पर करोड़ों का लोन, कंपनी पर ठगी के आरोप
मुजफ्फरपुर में जीविका दीदियों के नाम पर करोड़ों का लोन
निष्कर्ष भारत संवाददाता, मुजफ्फरपुर। जिले में जीविका समूह से जुड़ी महिलाओं के नाम पर बैंक से करोड़ों रुपये का लोन स्वीकृत होने और राशि उन्हें नहीं मिलने का मामला सामने आया है। आरोप है कि महिलाओं से सादे कागज पर दस्तखत और अंगूठे के निशान लिए गए और बाद में उनके नाम पर बैंक लोन की प्रक्रिया पूरी कराई गई। बैंक से स्वीकृत राशि कथित तौर पर महिलाओं के बजाय एक कंपनी के खाते में भेज दी गई।
मामला जक्ष ग्रेविटी एग्रो एनर्जी कंपनी से जुड़ा बताया जा रहा है। कंपनी को मुशहरी और बोचहां इलाके में मशरूम हट तैयार करने से संबंधित काम दिए जाने की बात सामने आई है। आरोप है कि जीविका दीदियों के नाम पर करीब साढ़े तीन करोड़ रुपये का लोन कराया गया, लेकिन जिस काम के लिए राशि ली गई, उसका अपेक्षित काम जमीन पर दिखाई नहीं दिया।
मामले के सामने आने के बाद जीविका समूह से जुड़ी महिलाओं में नाराजगी है। महिलाएं पूरे मामले की जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रही हैं।
सादे कागज पर लिए गए दस्तखत और अंगूठे
निष्पक्ष ख़बर देखिये हमारे यूट्यूब चैनल पर: IIT Mumbai में छात्र की मौत से IIT पटना में जांच की मांग…
आरोप है कि कंपनी के निदेशक आशुतोष मंगलम ने जीविका समूह से जुड़ी महिलाओं से सादे कागज पर दस्तखत और अंगूठे के निशान लिए थे। महिलाओं का कहना है कि उन्हें रोजगार शुरू करने और मशरूम उत्पादन से जुड़ा काम करने की उम्मीद दिखाई गई थी।
इसके बाद उनके नाम पर बैंक लोन की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। बैंक की ओर से जरूरी कागजातों का मिलान और प्रक्रिया पूरी होने के बाद लोन स्वीकृत होने की बात सामने आई। हालांकि, आरोप है कि लोन की रकम संबंधित महिलाओं को नहीं मिली और राशि कंपनी के खाते में चली गई।
इस तरह महिलाएं उस राशि का लाभ नहीं उठा सकीं, लेकिन उनके नाम पर बैंक का कर्ज दर्ज हो गया।
करीब साढ़े तीन करोड़ रुपये के लोन का मामला
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, जीविका दीदियों के नाम पर करीब 3.5 करोड़ रुपये का लोन स्वीकृत कराया गया। महिलाओं का आरोप है कि उन्हें लोन की रकम या उसके अनुरूप रोजगार का लाभ नहीं मिला।
मशरूम हट तैयार करने के लिए जिस परियोजना की बात कही गई थी, उसके जमीन पर अपेक्षित रूप से शुरू नहीं होने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। अब प्रशासनिक स्तर पर यह जांच का विषय बन गया है कि लोन की राशि किस प्रक्रिया के तहत स्वीकृत हुई और उसे कंपनी के खाते में भेजने का आधार क्या था।
कंपनी को मौखिक निर्देश पर काम देने का आरोप
मामले में एक अहम बिंदु यह भी सामने आया है कि जीविका से जुड़े अधिकारियों की ओर से एसडीओ पूर्वी को दिए गए जवाब में कंपनी को तकनीकी सहयोग देने के लिए मौखिक निर्देश दिए जाने की बात कही गई है।
खबरें हमारे फेसबुक पर भी, लगातार खबरों के लिए फेसबुक से जुड़े
यही मामला अब प्रशासनिक जांच के केंद्र में है। सवाल उठ रहा है कि यदि किसी कंपनी को परियोजना से संबंधित काम देने के लिए लिखित आदेश नहीं था, तो उसके आधार पर जीविका समूह की महिलाओं के नाम पर बैंक ऋण की प्रक्रिया किस तरह आगे बढ़ी।
मामले में दस्तावेजों, बैंक रिकॉर्ड और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

गिरफ्तारी के बाद सामने आईं नई जानकारियां
कंपनी के निदेशक आशुतोष मंगलम की गिरफ्तारी के बाद मामले से जुड़ी कुछ और जानकारियां सामने आने की बात कही जा रही है। बताया गया है कि अलग-अलग स्थानों पर अलग-अलग कंपनियों के नाम से मशरूम हट परियोजना के नाम पर राशि लेने का प्रयास किया गया।
अब तक ऐसी पांच कंपनियों के बारे में जानकारी सामने आने की बात कही गई है। हालांकि, इन कंपनियों के जरिए जमीन पर वास्तव में कितना काम हुआ, इसकी स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
पुलिस और प्रशासनिक स्तर पर मामले से जुड़े दस्तावेजों और लेनदेन की जानकारी जुटाई जा रही है।
तीन साल तक चलता रहा मामला
मामले को लेकर यह भी बताया जा रहा है कि कंपनी के खिलाफ काम नहीं करने और राशि से संबंधित शिकायतों को लेकर दो प्राथमिकी दर्ज होने के बाद भी कंपनी के निदेशक अधिकारियों के साथ बैठकों में शामिल होते रहे।
इसे भी पढ़ें: वित्त रहित शिक्षकों के लिए खुशखबरी, सम्राट सरकार ने खोला खजाना, 461 करोड़ रुपये जारी
इसके बावजूद लंबे समय तक प्रभावी कार्रवाई नहीं होने को लेकर अब सवाल उठ रहे हैं। करीब तीन साल से चले आ रहे इस पूरे मामले में अब प्रशासनिक स्तर पर जिम्मेदारी तय करने की मांग उठ रही है।
हालांकि, किस स्तर पर किस अधिकारी की क्या भूमिका रही, यह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
कर्ज के बोझ में दब गईं जीविका दीदियां
सबसे बड़ी परेशानी उन महिलाओं की है जिनके नाम पर बैंक से लोन लिया गया, लेकिन उन्हें कथित तौर पर राशि का लाभ नहीं मिला। महिलाओं के नाम पर कर्ज दर्ज होने के कारण उन्हें बैंक की देनदारी का सामना करना पड़ रहा है।
आरोप है कि कर्ज का बोझ बढ़ने से कई परिवार आर्थिक परेशानी में आ गए हैं। कुछ महिलाओं का कहना है कि आर्थिक संकट के कारण परिवार के जरूरी खर्च प्रभावित हुए और बेटियों की शादी तक टालने की स्थिति बनी।
महिलाएं अब चाहती हैं कि उनके नाम पर लिए गए कर्ज की वास्तविक स्थिति सामने आए और यदि उनके साथ धोखाधड़ी हुई है तो उन्हें बैंक की देनदारी से राहत दिलाने के लिए उचित कार्रवाई की जाए।

जांच और कार्रवाई की मांग तेज
मामला सामने आने के बाद जीविका समूह से जुड़ी महिलाएं पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग कर रही हैं। उनका कहना है कि यदि उन्हें लोन की राशि नहीं मिली, तो उनके नाम पर बैंक से पैसा किस आधार पर लिया गया और कंपनी के खाते में राशि क्यों भेजी गई, इसकी जांच होनी चाहिए।
साथ ही कंपनी को काम देने की प्रक्रिया, बैंक में जमा दस्तावेज, महिलाओं के हस्ताक्षर और अंगूठे के निशान, लोन स्वीकृति तथा कंपनी के खाते में भेजी गई रकम की भी जांच की मांग की जा रही है।
फिलहाल इस मामले में कंपनी के निदेशक की गिरफ्तारी के बाद जांच आगे बढ़ रही है। प्रशासनिक और बैंकिंग दस्तावेजों की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि पूरे मामले में कितनी राशि शामिल है, कितनी महिलाओं के नाम पर लोन लिया गया और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही।
पटना से कीमती कुमारी का रिपोर्
