तेजस्वी के निशाने पर सम्राट सरकार, ₹22,500 करोड़ के परमाणु निवेश MoU पर उठाया सवाल

MOU

MoU को लेकर तेजस्वी यादव ने सम्राट चौधरी सरकार पर सवाल उठाए हैं।

बिहार में निवेश को लेकर राज्य सरकार की ओर से किए जा रहे दावों पर विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए बिहार सरकार और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर निशाना साधते हुए 22,500 करोड़ रुपये के कथित परमाणु क्षेत्र के निवेश MoU को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। तेजस्वी ने दावा किया कि जिस कंपनी के साथ यह समझौता हुआ है, उसकी स्थापना कुछ महीने पहले ही हुई और उसके पास महज 11 लाख रुपये की कुल पूंजी है।

तेजस्वी यादव ने सवाल उठाया कि इतनी कम पूंजी वाली कंपनी बिहार में हजारों करोड़ रुपये का निवेश कैसे करेगी। उन्होंने सरकार से इस MoU की वास्तविकता और निवेश के स्रोत को लेकर स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की।

‘जिस कंपनी के पास 11 लाख की पूंजी, वह 22,500 करोड़ कैसे लगाएगी?’

तेजस्वी यादव ने अपने पोस्ट में लिखा कि जिस कंपनी के बारे में बिहार सरकार दावा कर रही है कि वह परमाणु क्षेत्र में 22,500 करोड़ रुपये का निवेश करने जा रही है, उसकी स्थापना कथित तौर पर 25 फरवरी 2026 को हुई थी।

उन्होंने दावा किया कि कंपनी की कुल पूंजी सिर्फ 11 लाख रुपये है। इसी आधार पर तेजस्वी ने सरकार के निवेश दावों पर सवाल खड़ा करते हुए पूछा कि इतनी कम पूंजी वाली कंपनी के पास अचानक ऐसा कौन सा संसाधन आ गया कि वह बिहार में हजारों करोड़ रुपये का निवेश कर सकेगी।

हालांकि, तेजस्वी यादव के इन दावों और कंपनी की वित्तीय स्थिति से जुड़े आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि इस पोस्ट के आधार पर नहीं हुई है। इसलिए इन आरोपों को फिलहाल विपक्ष के नेता द्वारा लगाए गए दावों के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।

यह खबर भी देखे: बिहारियों के बच्चों के दवाई के पैसे से खरीदी गई डस्टबिन ,1500 की डस्टबिन 15 हजार में क्यों!

51,500 करोड़ के MoU पर भी सवाल

तेजस्वी यादव ने सिर्फ 22,500 करोड़ रुपये के निवेश समझौते को लेकर ही सवाल नहीं उठाया। उन्होंने बिहार सरकार के उद्योग विभाग और विभिन्न औद्योगिक समूहों के बीच कथित तौर पर 51,500 करोड़ रुपये के निवेश के लिए हुए MoU को लेकर भी सरकार से जवाब मांगा।

उन्होंने पूछा कि सरकार नए निवेश समझौतों का प्रचार कर रही है, लेकिन 2024, 2025 और उससे पहले हुए दो लाख करोड़ रुपये से अधिक के समझौतों की प्रगति रिपोर्ट क्यों सार्वजनिक नहीं की जा रही है।

तेजस्वी ने सरकार से जानना चाहा कि पहले किए गए MoU में से कितने धरातल पर उतरे, कितने निवेश वास्तव में आए और कितने रोजगार पैदा हुए।

‘MoU के बाद निवेश जमीन पर कब उतरेगा?’

बिहार में निवेश और औद्योगिकीकरण लंबे समय से राजनीतिक बहस का मुद्दा रहा है। राज्य सरकारें निवेश आकर्षित करने के लिए समय-समय पर उद्योगपतियों और कंपनियों के साथ समझौते करती रही हैं।

तेजस्वी यादव का ताजा हमला इसी मुद्दे पर केंद्रित है। उनका कहना है कि सिर्फ MoU पर हस्ताक्षर कर देने से निवेश नहीं आता। सरकार को यह बताना चाहिए कि समझौते के बाद कंपनी ने जमीन कब ली, परियोजना का निर्माण कब शुरू हुआ और उसमें कितनी वास्तविक पूंजी लगाई गई।

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी स्तर पर निवेश के आंकड़ों का प्रचार तो किया जा रहा है, लेकिन पुराने MoU की वास्तविक स्थिति पर सरकार चुप है।

‘कागजी कंपनियों को फायदा पहुंचाने की कोशिश’

तेजस्वी यादव ने अपने पोस्ट में सरकार पर और भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने आशंका जताई कि कहीं भविष्य में ऐसी कंपनियों को सरकारी स्तर पर जमीन और सब्सिडी उपलब्ध कराने के नाम पर राज्य के संसाधनों का दुरुपयोग तो नहीं होगा।

उन्होंने कहा कि अगर बड़ी और सक्षम कंपनियां अपनी पूंजी से बिहार में उद्योग लगाती हैं तो उनका स्वागत होना चाहिए और सरकार को हर संभव मदद करनी चाहिए। लेकिन यदि कमजोर वित्तीय क्षमता वाली कंपनियों के नाम पर बड़े निवेश के दावे किए जाते हैं और बाद में उन्हें सस्ती जमीन या सरकारी अनुदान दिया जाता है तो इसे बिहार के हित में नहीं माना जा सकता।

हालांकि, तेजस्वी यादव ने अपने पोस्ट में जिन संभावित अनियमितताओं की आशंका जताई है, उनके समर्थन में कोई दस्तावेज या जांच रिपोर्ट सार्वजनिक रूप से पेश नहीं की।

NDA सरकार के लंबे कार्यकाल पर भी निशाना

तेजस्वी यादव ने बिहार में NDA सरकार के लंबे कार्यकाल को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि दो दशक से अधिक समय तक NDA की सरकार रहने के बावजूद राज्य में ऐसा औद्योगिक माहौल तैयार नहीं किया जा सका, जिससे बड़े निवेशकों का भरोसा मजबूत हो।

उन्होंने सवाल किया कि आखिर बड़ी कंपनियां बिहार में बड़े पैमाने पर निवेश करने से क्यों हिचक रही हैं।

तेजस्वी ने सरकार की नीतियों और बुनियादी ढांचे पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि केवल सरकारी प्रचार के जरिए निवेश की तस्वीर बदली नहीं जा सकती। उनके मुताबिक, वास्तविक बदलाव के लिए उद्योगों के अनुकूल माहौल, बेहतर आधारभूत संरचना और निवेशकों का भरोसा जरूरी है।

सरकार से मांगा जवाब

तेजस्वी यादव के इस बयान के बाद बिहार में निवेश और MoU की वास्तविक प्रगति को लेकर राजनीतिक बहस तेज होने की संभावना है। विपक्ष जहां सरकार से पुराने MoU की स्थिति और नए निवेश प्रस्तावों की वित्तीय क्षमता स्पष्ट करने की मांग कर रहा है, वहीं सरकार की ओर से इन आरोपों पर आधिकारिक जवाब आने के बाद तस्वीर और साफ हो सकती है।

सबसे बड़ा सवाल यही है कि 22,500 करोड़ रुपये के प्रस्तावित निवेश वाली कंपनी की वास्तविक वित्तीय क्षमता क्या है, परियोजना के लिए धन कहां से आएगा और MoU के बाद जमीन पर काम कब शुरू होगा?

बिहार में उद्योग और रोजगार की जरूरत को देखते हुए इन सवालों का स्पष्ट जवाब जनता के लिए महत्वपूर्ण है। निवेश समझौतों का अंतिम मूल्यांकन तभी संभव होगा, जब MoU से आगे बढ़कर वास्तविक निवेश, परियोजना निर्माण और रोजगार के आंकड़े सामने आएं।

Nishkarsh Bharat

पटना से भूमि आर्या की रिपोर्ट

You may have missed