नागपुर में छात्राओं को इस्लाम अपनाने के मैसेज? प्रोफेसर पर गंभीर आरोप, छुट्टी पर भेजे गए
नागपुर लॉ स्कूल के प्रोफेसर पर छात्राओं को मैसेज भेजने का आरोप, जांच शुरू
निष्कर्ष भारत, संवाददाता ( नागपुर)। महाराष्ट्र के नागपुर स्थित सिम्बायोसिस लॉ स्कूल के एक प्रोफेसर पर छात्राओं को कथित तौर पर ऐसे संदेश भेजने का आरोप लगा है, जिनमें उन्हें इस्लाम धर्म अपनाने और कुरान पढ़ने के लिए कहा गया था। मामला सामने आने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने प्रोफेसर को छुट्टी पर भेज दिया है। जांच पूरी होने और कमेटी की रिपोर्ट आने तक उन्हें कैंपस में प्रवेश की अनुमति नहीं होगी।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने आरोपों की पड़ताल के लिए उच्चस्तरीय कमेटी गठित की है। जांच का दायरा केवल नागपुर तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि हैदराबाद स्थित सिम्बायोसिस लॉ स्कूल में प्रोफेसर के पिछले कार्यकाल से जुड़े आरोपों की भी जांच की जाएगी। रविवार तक इस मामले में प्राथमिकी (FIR) दर्ज नहीं हुई थी।
यह मामला एक छात्रा की ओर से अपने पिता को प्रोफेसर के कथित संदेश दिखाए जाने के बाद सामने आया। इसके बाद छात्रा के पिता ने विश्व हिंदू परिषद (VHP) के सदस्यों से संपर्क किया। संगठन के सदस्यों ने कॉलेज प्रशासन के सामने मामला उठाया और नागपुर के पुलिस कमिश्नर से भी मुलाकात की। फिलहाल आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
नागपुर में प्रोफेसर पर क्या हैं आरोप?
मामले के अनुसार, सिम्बायोसिस लॉ स्कूल के प्रोफेसर पर छात्राओं को अनुचित संदेश भेजने का आरोप है। शिकायत में कहा गया है कि संदेशों के जरिए छात्राओं को इस्लाम धर्म अपनाने और कुरान पढ़ने के लिए कहा जाता था। इन कथित संदेशों को लेकर सवाल उठने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन से कार्रवाई की मांग की गई।
मामले ने तब गंभीर रूप लिया, जब एक छात्रा ने अपने पिता को प्रोफेसर की ओर से भेजे गए संदेश दिखाए। इसके बाद परिवार ने संगठन के सदस्यों से संपर्क किया और मामला संस्थान के अधिकारियों तक पहुंचा। शिकायत सामने आने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने इसे गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू करने का फैसला किया।
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हालांकि, फिलहाल ये आरोप हैं और जांच में इनकी सत्यता की पुष्टि होनी बाकी है। प्रोफेसर का पक्ष और कथित संदेशों की पूरी पृष्ठभूमि सामने आने के बाद ही मामले की तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।
जांच पूरी होने तक नागपुर कैंपस में प्रवेश पर रोक
विश्वविद्यालय प्रशासन के एक अधिकारी के अनुसार, शिकायत मिलने के बाद मामले की जांच और आगे की कार्रवाई की सिफारिश करने के लिए उच्चस्तरीय कमेटी बनाई गई है। जांच पूरी होने और रिपोर्ट आने तक प्रोफेसर को छुट्टी पर भेजा गया है।
प्रशासन का कहना है कि आरोपों की जांच निर्धारित प्रक्रिया के तहत की जाएगी। कमेटी शिकायत से जुड़े तथ्यों की पड़ताल करेगी और उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की सिफारिश करेगी। फिलहाल प्रोफेसर को कैंपस से दूर रखने का फैसला जांच पूरी होने तक लागू रहेगा।
इस कार्रवाई का उद्देश्य मामले की जांच के दौरान संस्थान में सामान्य शैक्षणिक माहौल बनाए रखना और शिकायतों की पड़ताल करना है। हालांकि, छुट्टी पर भेजा जाना अपने आप में आरोपों की पुष्टि या अंतिम अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं है। अंतिम निर्णय जांच रिपोर्ट और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर लिया जाएगा।
हैदराबाद में प्रोफेसर के पुराने कार्यकाल की भी जांच
इस मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन ने जांच का दायरा बढ़ाते हुए प्रोफेसर के पिछले कार्यस्थल को भी शामिल किया है। हैदराबाद स्थित सिम्बायोसिस लॉ स्कूल में उनके कार्यकाल के दौरान आचरण से जुड़े आरोपों की भी पड़ताल की जाएगी।
इस कदम से संकेत मिलता है कि कमेटी केवल मौजूदा शिकायत तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि संबंधित पुराने आरोपों और उपलब्ध तथ्यों को भी देखेगी। जांच के दौरान यह पता लगाने की कोशिश होगी कि क्या पहले भी इस तरह की शिकायतें सामने आई थीं और यदि आई थीं, तो उन पर क्या कार्रवाई हुई थी।
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हालांकि, पुराने कार्यकाल से जुड़े आरोपों की प्रकृति और उनकी पुष्टि के बारे में फिलहाल विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है। इसलिए जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।
नागपुर कैंपस में प्रदर्शन, पुलिस ने कराई बातचीत
नागपुर पुलिस के जोन-5 के पुलिस कमिश्नर नित्यानंद झा के अनुसार, शनिवार सुबह करीब 11:30 बजे अलग-अलग संगठनों के 15 से 17 लोग विश्वविद्यालय परिसर पहुंचे थे। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों और प्रशासन के बीच बातचीत कराई। इसके बाद प्रोफेसर को छुट्टी पर भेजने का फैसला लिया गया।
इसी दिन शाम करीब 6:45 बजे शिकायतकर्ता छात्रा और उसके पिता के साथ 15 से 20 लोगों का एक अन्य समूह कैंपस पहुंचा। उस समय जांच कमेटी करीब 100 से 120 छात्रों के साथ खुली चर्चा कर रही थी।
इसके बाद पुलिस ने विश्वविद्यालय प्रशासन और छह से सात लोगों के प्रतिनिधिमंडल के बीच बैठक कराई। इस प्रतिनिधिमंडल में शिकायतकर्ता भी शामिल थीं। बैठक के दौरान कमेटी ने शिकायतकर्ताओं को भरोसा दिलाया कि आरोपों की जांच की जाएगी और तय समय के भीतर उचित कार्रवाई की जाएगी।
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बाद में विश्वविद्यालय प्रशासन और पुलिस ने छात्रों को मामले में हुई प्रगति की जानकारी दी। पुलिस कमिश्नर के मुताबिक, पूरे घटनाक्रम के दौरान कानून-व्यवस्था से जुड़ी कोई समस्या सामने नहीं आई।
शिकायतकर्ताओं को कार्रवाई का भरोसा
मामले को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन ने शिकायतकर्ताओं को भरोसा दिया है कि सभी आरोपों की जांच की जाएगी। कमेटी को तथ्यों की पड़ताल कर आगे की कार्रवाई के संबंध में सिफारिश करनी है। इस प्रक्रिया में शिकायत, उपलब्ध संदेशों और संबंधित लोगों से मिली जानकारी की जांच महत्वपूर्ण होगी।
किसी शैक्षणिक संस्थान में शिक्षक और छात्र के बीच संवाद को लेकर शिकायत सामने आने पर निष्पक्ष जांच जरूरी होती है। इससे शिकायतकर्ता की बात सुनी जा सकती है और आरोपित व्यक्ति को भी अपना पक्ष रखने का अवसर मिलता है। जांच के निष्कर्ष के आधार पर ही यह तय किया जा सकेगा कि नियमों का उल्लंघन हुआ है या नहीं।

फिलहाल पुलिस ने बताया है कि घटनाक्रम के दौरान कानून-व्यवस्था की कोई समस्या नहीं हुई और विश्वविद्यालय की कमेटी जांच कर रही है। रविवार तक प्राथमिकी दर्ज नहीं होने की जानकारी सामने आई थी। इसके बाद की स्थिति के बारे में उपलब्ध विवरण में कोई पुष्टि नहीं है।
नागपुर मामले में अब जांच रिपोर्ट पर नजर
सिम्बायोसिस लॉ स्कूल का यह मामला अब विश्वविद्यालय की उच्चस्तरीय कमेटी की जांच पर निर्भर है। कमेटी को नागपुर की शिकायत के साथ हैदराबाद स्थित संस्थान में प्रोफेसर के पिछले कार्यकाल से जुड़े आरोपों की भी पड़ताल करनी है।
जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि शिकायत में लगाए गए आरोप कितने सही हैं और प्रोफेसर के खिलाफ आगे किस तरह की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल प्रशासन ने उन्हें छुट्टी पर भेज दिया है और जांच पूरी होने तक कैंपस में प्रवेश पर रोक लगाई है।
इस मामले में आगे की कार्रवाई के लिए जांच रिपोर्ट अहम होगी। तब तक आरोपों को अपुष्ट मानना और आधिकारिक निष्कर्ष का इंतजार करना जरूरी है।
राजकुमार सिंह की रिपोर्ट
