नालंदा में हॉस्टल से गायब छात्र की मौत, स्कूल में हंगामा; 6 थानों की पुलिस पहुंची

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नालंदा में हॉस्टल से लापता छात्र का शव मिला, स्कूल के बाहर प्रदर्शन

निष्कर्ष भारत, संवाददाता (नालंदा)। बिहार के नालंदा जिले में हॉस्टल से लापता 15 वर्षीय छात्र आनंद कुमार की मौत के बाद तनाव का माहौल बन गया। छात्र का शव पंचाने नदी से बरामद होने की सूचना मिलते ही परिजनों और ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। आक्रोशित लोगों ने स्कूल के गेट के सामने शव रखकर प्रदर्शन किया और बिहारशरीफ-राजगीर मुख्य मार्ग को करीब साढ़े तीन घंटे तक जाम रखा। परिजनों ने स्कूल के शिक्षकों पर छात्र की पिटाई कर हत्या करने का आरोप लगाया और स्कूल के डायरेक्टर की गिरफ्तारी की मांग की। हालांकि, मौत की असली वजह अभी स्पष्ट नहीं है और पुलिस मामले की जांच कर रही है।

मृतक की पहचान पटना जिले के बुढ़रा गांव निवासी आलोक राज के बेटे आनंद कुमार के रूप में हुई है। वह आठवीं कक्षा का छात्र था और नालंदा के एक निजी स्कूल के हॉस्टल में रहकर पढ़ाई कर रहा था। घटना के बाद स्कूल में पढ़ रहे अन्य बच्चों के अभिभावकों में भी चिंता फैल गई। कई परिजन अपने बच्चों को हॉस्टल से घर ले जाने पहुंचे। इलाके में तनाव को देखते हुए छह थानों की पुलिस तैनात करनी पड़ी।

नालंदा में हॉस्टल से गायब होने के बाद नदी में मिला शव

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, आनंद कुमार 23 अक्टूबर को स्कूल के हॉस्टल से लापता हो गया था। बताया गया कि दोपहर करीब 3:10 बजे के आसपास छात्रों को पता चला कि आनंद हॉस्टल में मौजूद नहीं है। इसके बाद उसकी तलाश शुरू हुई। शुक्रवार को पंचाने नदी में डूबने से एक छात्र की मौत की सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और खोजबीन कराई गई, लेकिन उस समय शव नहीं मिल सका।

शनिवार को तलाशी के दौरान छात्र का शव बरामद हुआ। शव मिलने की खबर गांव और परिवार तक पहुंची तो परिजन घटनास्थल पर पहुंचे। इसके बाद मामले ने गंभीर रूप ले लिया। परिवार ने छात्र की मौत को सामान्य हादसा मानने से इनकार करते हुए स्कूल प्रबंधन पर सवाल उठाए।

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फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि छात्र नदी तक कैसे पहुंचा और उसकी मौत किन परिस्थितियों में हुई। पुलिस को इन सवालों के जवाब तलाशने हैं। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और जांच के दौरान सामने आने वाले साक्ष्य इस मामले में अहम हो सकते हैं।

पिता ने शिक्षकों पर लगाया हत्या का आरोप

आनंद के पिता ने आरोप लगाया कि स्कूल के शिक्षकों ने उनके बेटे की पिटाई की, जिससे उसकी मौत हो गई। कुछ प्रदर्शनकारियों ने भी स्कूल के प्रिंसिपल और शिक्षकों पर मारपीट करने तथा शव को नदी में फेंकने का आरोप लगाया। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और इन्हें जांच के आधार पर ही सही या गलत ठहराया जा सकता है।

घटना के बाद स्कूल के शिक्षक और अन्य कर्मचारियों के परिसर में नहीं मिलने की बात भी सामने आई। इससे परिजनों और ग्रामीणों का आक्रोश और बढ़ गया। प्रदर्शनकारी स्कूल के डायरेक्टर को गिरफ्तार करने और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग पर अड़े रहे।

आरोपों की गंभीरता को देखते हुए पुलिस के सामने घटना की समय-रेखा तैयार करना, स्कूल परिसर में मौजूद लोगों से पूछताछ करना और छात्र के लापता होने से लेकर शव मिलने तक की परिस्थितियों की जांच करना महत्वपूर्ण है। फिलहाल किसी व्यक्ति की जिम्मेदारी को अंतिम रूप से तय करने के लिए जांच और कानूनी प्रक्रिया पूरी होना जरूरी है।

दोस्त ने बताया, लड़की से जुड़े विवाद का किया था जिक्र

मामले में आनंद के दोस्त संजीत कुमार का बयान भी सामने आया है। संजीत के अनुसार, आनंद हॉस्टल लौटने के बाद शुरुआत में सामान्य और खुश दिखाई दे रहा था। बाद में वह परेशान नजर आया और बातचीत के दौरान उसने किसी लड़की से जुड़े विवाद का जिक्र किया था।

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दोस्त का कहना है कि आनंद ने बताया था कि उसका मन नहीं लग रहा है, लेकिन उसने कथित विवाद के बारे में विस्तार से कुछ नहीं बताया। संजीत के मुताबिक, इसके बाद स्कूल की घंटी बजी और छात्र नीचे चले गए। बाद में आनंद दोबारा ऊपर आया। कुछ समय बाद पता चला कि वह हॉस्टल में नहीं है।

यह बयान जांच का एक संभावित पहलू हो सकता है, लेकिन फिलहाल इससे छात्र की मौत की वजह साबित नहीं होती। पुलिस को यह पता लगाना होगा कि कथित विवाद का घटना से कोई संबंध था या नहीं। किसी लड़की या अन्य व्यक्ति को लेकर अपुष्ट आरोप लगाना उचित नहीं होगा।

नालंदा में सड़क जाम, छह थानों की पुलिस पहुंची

शव बरामद होने के बाद परिजन और ग्रामीण स्कूल के सामने जमा हो गए। प्रदर्शनकारियों ने शव को गेट के पास रखकर कार्रवाई की मांग की। इसके बाद बिहारशरीफ-राजगीर मुख्य मार्ग पर जाम लगा दिया गया। सड़क पर आगजनी किए जाने की भी जानकारी सामने आई। करीब साढ़े तीन घंटे तक यातायात प्रभावित रहा।

स्थिति बिगड़ने की आशंका को देखते हुए दीपनगर, लहेरी, सोहसराय, पावापुरी, बिहार और नालंदा थाने की पुलिस को मौके पर बुलाया गया। भीड़ के कुछ लोगों ने स्कूल परिसर में घुसने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक दिया। प्रशासनिक अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत कर स्थिति संभालने का प्रयास किया।

हंगामे के कारण हॉस्टल में रह रहे अन्य बच्चों के अभिभावक भी चिंतित हो गए। कई लोग अपने बच्चों को लेने स्कूल पहुंचे। चार मंजिला इमारत के ऊपरी हिस्से में स्थित हॉस्टल में 40 से अधिक बच्चों के रहने की जानकारी दी गई थी। घटना के बाद कई अभिभावक बच्चों को अपने साथ घर ले गए।

स्कूल सील करने और मुआवजे की मांग पर बनी सहमति

प्रदर्शन के दौरान लोगों ने तीन प्रमुख मांगें रखीं—स्कूल को सील करना, डायरेक्टर की गिरफ्तारी और मृत छात्र के परिवार को मुआवजा देना। उपलब्ध अपडेट के मुताबिक, करीब साढ़े तीन घंटे बाद जाम हटाया गया। बताया गया कि इन मांगों को लेकर सहमति बनने के बाद प्रदर्शनकारियों ने शव उठाने दिया।

नालंदा सदर के अंचल अधिकारी लखेंद्र कुमार ने बताया कि छात्र की मौत की सूचना मिलने के बाद प्रशासन ने खोजबीन कराई थी और शनिवार को शव बरामद हुआ। उन्होंने कहा कि परिजनों की ओर से सड़क जाम किया गया था, जिसे बाद में हटा दिया गया।

सीओ के मुताबिक, प्रशासन को एक आवेदन भी मिला है, जिसमें स्कूल की जमीन श्मशान की जमीन पर होने और उसके गैरमजरुआ जमीन होने का आरोप लगाया गया है। इस शिकायत की जांच के लिए संबंधित कर्मचारी को कहा गया है। रिपोर्ट मिलने के बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। जमीन से जुड़ी शिकायत की पुष्टि अभी जांच के अधीन है।

पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से खुलेगा मौत का राज

हंगामा शांत होने के बाद छात्र के शव को पोस्टमॉर्टम के लिए बिहारशरीफ सदर अस्पताल भेजा गया। अब जांच में यह पता लगाना अहम होगा कि छात्र की मौत डूबने से हुई या किसी अन्य कारण से। साथ ही यह भी स्पष्ट करना होगा कि वह हॉस्टल से कब और किन परिस्थितियों में निकला था।

स्कूल प्रबंधन पर लगाए गए आरोप, दोस्त का बयान, हॉस्टल में मौजूद छात्रों की जानकारी और घटनास्थल से मिलने वाले साक्ष्य जांच का हिस्सा बन सकते हैं। पुलिस और प्रशासन की जांच पूरी होने के बाद ही घटना की वास्तविक परिस्थितियां सामने आएंगी।

फिलहाल नालंदा में छात्र की संदिग्ध मौत ने स्कूलों और हॉस्टलों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। परिजन न्याय और जवाबदेही की मांग कर रहे हैं। वहीं, मामले में निष्कर्ष तक पहुंचने के लिए निष्पक्ष जांच और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का इंतजार है

Nishkarsh Bharat

राजकुमार सिंह की रिपोर्ट