पटना में डेंगू के 445 मरीज, मौसम बदलते ही वायरल बुखार का खतरा भी बढ़ा, जानें लक्षण और बचाव के उपाय
पटना में डेंगू के मरीज
निष्कर्ष भारत संवाददाता- पटना: बिहार की राजधानी पटना में मौसम में बदलाव के साथ डेंगू और वायरल बुखार को लेकर सतर्कता बढ़ाने की जरूरत है। दिन में गर्मी और रात के तापमान में गिरावट के बीच लोगों में बुखार, सिरदर्द, बदन दर्द और थकान जैसी शिकायतें सामने आ सकती हैं। ऐसे में इन लक्षणों को सामान्य मौसमी बीमारी समझकर नजरअंदाज करना परेशानी बढ़ा सकता है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, शनिवार को पटना में डेंगू के तीन नए मरीज मिले। इसके साथ ही इस साल अब तक जिले में डेंगू संक्रमितों की संख्या बढ़कर 445 हो गई है।
लगातार सामने आ रहे मामलों के बीच स्वास्थ्य संबंधी सावधानियां बरतना जरूरी है। खासकर बच्चों, बुजुर्गों और पहले से किसी बीमारी से जूझ रहे लोगों को बुखार होने पर विशेष ध्यान देना चाहिए। समय पर चिकित्सकीय परामर्श और जरूरत के अनुसार जांच से बीमारी की पहचान करने में मदद मिल सकती है।
पटना में डेंगू के मामले 445 तक पहुंचे
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, पटना में जनवरी से जून तक डेंगू के 44 मरीज मिले थे। इसके बाद जुलाई में 26 और अगस्त में 97 मरीजों की पहचान हुई। सितंबर में डेंगू के मामलों में सबसे अधिक बढ़ोतरी दर्ज की गई और इस महीने 170 लोग संक्रमित पाए गए। अक्टूबर में भी नए मामले सामने आ रहे हैं।
शनिवार को तीन नए मरीज मिलने के बाद इस वर्ष संक्रमितों की कुल संख्या 445 हो गई। आंकड़े बताते हैं कि सितंबर में डेंगू के मामलों में तेजी आई थी। ऐसे में मच्छरों से बचाव के साथ बुखार के लक्षणों पर नजर रखना जरूरी है।
डेंगू संक्रमित एडीज मच्छर के काटने से फैलता है। यह मच्छर साफ पानी में पनप सकता है और दिन के समय भी सक्रिय रहता है। इसलिए केवल रात में मच्छरों से बचाव करना पर्याप्त नहीं है।
डेंगू और वायरल बुखार में क्या है अंतर?
मौसम बदलने के दौरान डेंगू और वायरल बुखार के लक्षणों में समानता होने के कारण लोगों को परेशानी हो सकती है। दोनों स्थितियों में बुखार, सिरदर्द, थकान और शरीर में दर्द की शिकायत हो सकती है।
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पीएमसीएच के अधीक्षक डॉ. राजीव कुमार सिंह के अनुसार, डेंगू में तेज बुखार के साथ आंखों के पीछे दर्द, मांसपेशियों और जोड़ों में तेज दर्द तथा त्वचा पर चकत्ते जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं।
वहीं, वायरल संक्रमण में बुखार के साथ सर्दी, खांसी, छींक और गले में खराश की शिकायत हो सकती है। हालांकि, हर वायरल संक्रमण में ये लक्षण दिखाई दें, यह जरूरी नहीं है।
सिर्फ लक्षणों के आधार पर डेंगू और वायरल बुखार में अंतर करना संभव नहीं है। इसलिए बुखार होने पर डॉक्टर से सलाह लें। चिकित्सक की सलाह पर आवश्यक जांच कराना बीमारी की सही पहचान और उपचार के लिए महत्वपूर्ण है।
बुखार उतरने के बाद भी रहें सावधान
डेंगू को लेकर सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि बुखार कम होने का मतलब हमेशा मरीज का खतरे से बाहर होना नहीं होता। पीएमसीएच के डॉ. राजन कुमार ने बताया कि डेंगू में बुखार उतरने के बाद भी मरीज की स्थिति गंभीर हो सकती है।
ऐसे में कुछ लक्षण दिखाई देने पर तुरंत अस्पताल पहुंचना चाहिए। इनमें पेट में तेज दर्द, लगातार उल्टी, नाक या मसूड़ों से खून आना, अत्यधिक कमजोरी और सांस लेने में परेशानी शामिल हैं।
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इन संकेतों को नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है। खासकर मरीज की हालत बिगड़ रही हो, तो घर पर उपचार करने के बजाय तत्काल चिकित्सकीय सहायता लें।
डेंगू की आशंका होने पर एस्पिरिन और आइबुप्रोफेन जैसी दवाएं बिना डॉक्टर की सलाह के नहीं लेनी चाहिए, क्योंकि इनसे रक्तस्राव का खतरा बढ़ सकता है। बुखार के लिए दवा लेने से पहले चिकित्सकीय परामर्श जरूरी है।
डेंगू से बचने के लिए क्या करें?
डेंगू से बचाव के लिए मच्छरों को पनपने से रोकना सबसे जरूरी है। इसके लिए घर और आसपास पानी जमा नहीं होने दें। कूलर का पानी नियमित रूप से बदलें और उसकी सफाई करें। गमलों की प्लेट, पुराने टायर, खुले बर्तन और पानी जमा करने वाले अन्य सामान की नियमित जांच करें।
दिन में भी मच्छरों से बचाव के लिए पूरी बांह के कपड़े पहनें और जरूरत के अनुसार मच्छर भगाने वाले उत्पादों का इस्तेमाल करें। घर की खिड़कियों पर जाली लगाना भी मददगार हो सकता है।
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वायरल संक्रमण से बचने के लिए हाथों को साबुन से नियमित धोएं। खांसते या छींकते समय मुंह और नाक ढकें। बीमार होने पर दूसरों के निकट संपर्क से बचें और पर्याप्त आराम करें।
लापरवाही पड़ सकती है भारी
पटना में डेंगू के 445 मरीज सामने आने के बीच बदलते मौसम में बुखार को लेकर सतर्क रहना जरूरी है। हालांकि, हर बुखार डेंगू नहीं होता, लेकिन बिना जांच इसे सामान्य वायरल संक्रमण मान लेना भी सही नहीं है।
बुखार लगातार बना रहे, लक्षण बढ़ें या शरीर में गंभीर परेशानी महसूस हो, तो डॉक्टर से संपर्क करें। वहीं, पेट में तेज दर्द, लगातार उल्टी, रक्तस्राव या सांस लेने में परेशानी होने पर तत्काल अस्पताल जाएं।
समय पर जांच, उचित उपचार और मच्छरों से बचाव के उपाय अपनाकर डेंगू के जोखिम को कम किया जा सकता है।
भूमि आर्या की रिपोर्ट
