पटना में रिटायर्ड शिक्षक से साइबर ठगी, गिरफ्तारी का डर दिखाया, 12 दिन डिजिटल अरेस्ट रख 30 लाख ठगे

पटना

पटना में साइबर ठगों ने गिरफ्तारी का डर दिखाकर रिटायर्ड शिक्षक को 12 दिन डिजिटल अरेस्ट रखा और 30 लाख रुपये ठग लिए। पुलिस ने केस दर्ज किया।

निष्कर्ष भारत, संवाददाता (पटना)। पटना में साइबर ठगी का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां साइबर अपराधियों ने गिरफ्तारी का डर दिखाकर जवाहर नवोदय विद्यालय के एक सेवानिवृत्त शिक्षक से 30 लाख रुपये ठग लिए। ठगों ने शिक्षक को दिल्ली में 6.80 करोड़ रुपये की कथित मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले में फंसाने की धमकी दी और करीब 12 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट के नाम पर मानसिक दबाव में रखा। इस दौरान आरोपितों ने खुद को दिल्ली पुलिस, केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) का अधिकारी बताकर उनसे पूछताछ की।

पीड़ित पटना दानापुर के आरके पुरम में अपने परिवार के साथ रहते हैं और मुरादाबाद स्थित अटल आवासीय विद्यालय में पढ़ाते हैं। ठगी का एहसास होने के बाद उन्होंने साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामले में प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। इससे पहले भी पटना में एक सेवानिवृत्त सहायक अभियंता से 33.83 लाख रुपये की साइबर ठगी का मामला सामने आया था।

पटना साइबर ठगी: फोन कॉल से शुरू हुआ पूरा खेल

पटना के पीड़ित के मुताबिक, 20 सितंबर को उनके मोबाइल पर एक व्यक्ति का फोन आया। उसने खुद को टेलीकॉम अधिकारी बताते हुए कहा कि उनके मोबाइल नंबर का इस्तेमाल मनी लॉन्ड्रिंग में किया गया है। इसके बाद ठग ने दावा किया कि दिल्ली के चांदनी चौक में उनके नाम पर एक बैंक खाता है, जिसमें विदेश से मनी लॉन्ड्रिंग के 6.80 करोड़ रुपये आए हैं।

फोन करने वाले ने यह भी कहा कि इस मामले में दिल्ली के बाराखंभा थाने में केस दर्ज है और उनकी गिरफ्तारी हो सकती है। अचानक गंभीर आपराधिक मामले में फंसाए जाने की बात सुनकर शिक्षक घबरा गए। ठगों ने इसी डर का फायदा उठाते हुए उन्हें अपने निर्देशों का पालन करने के लिए मजबूर करना शुरू कर दिया।

पटना में डिजिटल अरेस्ट के नाम पर पुलिस का स्वांग

पहली कॉल के बाद साइबर अपराधियों ने शिक्षक को व्हाट्सएप पर वीडियो कॉल के जरिए कथित तौर पर बाराखंभा थाने से जोड़ा। इस दौरान एस. कुमार गौतम नाम के व्यक्ति ने खुद को आईपीएस अधिकारी बताते हुए उनसे पूछताछ की।

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अगले दिन कथित सीबीआई अधिकारियों ने वीडियो कॉल किया। उन्होंने दावा किया कि मामले की जांच में रिजर्व बैंक और अदालत के प्रतिनिधि भी शामिल हैं। आरोपितों ने शिक्षक से उनके बैंक खाते और कथित मनी लॉन्ड्रिंग से संबंधित सवाल पूछे, ताकि पूरी प्रक्रिया वास्तविक जांच जैसी लगे।

इसके बाद पटना सीबीआई टीम के लीडर के रूप में प्रदीप कुमार सिंह का नाम इस्तेमाल करते हुए शिक्षक से एक आवेदन देने को कहा गया। आरोपितों ने दावा किया कि इस आवेदन के माध्यम से ऑनलाइन जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। लगातार अलग-अलग अधिकारियों के नाम और सरकारी संस्थाओं का हवाला देकर पीड़ित पर दबाव बनाया गया।

6.80 करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग का डर दिखाकर फंसाया

ठगों ने शिक्षक को बताया कि इस मामले में सुदीप कुमार नाम के एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया है। कथित तौर पर उसके पास से 180 पासबुक बरामद हुई हैं। आरोपितों ने दावा किया कि इसी व्यक्ति के माध्यम से शिक्षक के खाते में मनी लॉन्ड्रिंग के 68 लाख रुपये कमीशन के रूप में आए हैं।

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इन दावों के जरिए शिक्षक को यह विश्वास दिलाने की कोशिश की गई कि वह एक बड़े आर्थिक अपराध में शामिल हैं। गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई का डर बढ़ने के साथ ही पीड़ित आरोपितों के निर्देशों पर निर्भर होते चले गए।

हालांकि, ये सभी बातें साइबर अपराधियों की ओर से किए गए दावे थे। उपलब्ध जानकारी में शिक्षक के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

हथकड़ी पहने लोगों को दिखाकर डराया

पीड़ित को अपने नियंत्रण में रखने के लिए ठगों ने वीडियो कॉल पर हथकड़ी पहने पांच लोगों को दिखाया। इससे शिक्षक को लगा कि मामला गंभीर है और निर्देश नहीं मानने पर उनके साथ भी ऐसी कार्रवाई हो सकती है।

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आरोपितों ने उन्हें परिवार और परिचितों को मामले की जानकारी देने से भी दूर रखा। लगातार निगरानी और पूछताछ के दबाव में शिक्षक ने किसी से इस बारे में चर्चा नहीं की। यही डिजिटल अरेस्ट की ठगी का अहम तरीका है, जिसमें अपराधी पीड़ित को वीडियो कॉल पर व्यस्त रखकर उसे बाहरी मदद लेने से रोकने की कोशिश करते हैं।

ठगों ने यह भी कहा कि उनकी फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) की आरबीआई जांच करेगा और पुलिस छानबीन के लिए पटना पहुंच सकती है। उन्हें आश्वासन दिया गया कि सब कुछ ठीक पाए जाने पर 24 घंटे में कार्रवाई रोक दी जाएगी।

पटना आकर एफडी तुड़वाई, खाते में भेजे 30 लाख

आरोपितों के दबाव में शिक्षक मुरादाबाद से पटना आए। दो अक्टूबर को उन्होंने अपनी एफडी तुड़वाई और ठगों की ओर से बताए गए बैंक खाते में 30 लाख रुपये भेज दिए। इस तरह कथित जांच और गिरफ्तारी के डर ने उनकी बड़ी बचत को ठगी का शिकार बना दिया।

रकम मिलने के बाद भी अपराधियों ने उन्हें राहत नहीं दी। उन्होंने शिक्षक को एक व्हाट्सएप नंबर पर हर घंटे अपनी रिपोर्ट देने का निर्देश दिया। इसके बाद ठगों ने सोना बैंक में जमा कर उसके बदले कर्ज लेने या सोने को गलाकर उससे संबंधित प्रमाण भेजने की बात कही।

इस नई मांग से शिक्षक को संदेह हुआ। उन्हें महसूस हुआ कि जांच के नाम पर लगातार पैसों और संपत्ति से जुड़ी मांग की जा रही है। इसके बाद उन्होंने एसबीआई में कार्यरत अपने भतीजे को पूरी घटना बताई।

साइबर थाने में शिकायत, पुलिस ने शुरू की जांच

भतीजे से बातचीत के बाद शिक्षक को ठगी का एहसास हुआ। तीन अक्टूबर को उन्होंने साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अब जांच के दौरान आरोपितों की पहचान, रकम भेजे गए बैंक खाते और डिजिटल साक्ष्यों की पड़ताल महत्वपूर्ण होगी।

यह घटना बताती है कि साइबर अपराधी सरकारी एजेंसियों के नाम का इस्तेमाल कर लोगों को किस तरह मानसिक दबाव में लेते हैं। वीडियो कॉल, फर्जी पहचान और गिरफ्तारी की धमकी के जरिए वे पीड़ित को परिवार से अलग रखने की कोशिश करते हैं।

डिजिटल अरेस्ट से बचने के लिए क्या करें?

ध्यान रखें कि फोन या वीडियो कॉल पर कोई व्यक्ति खुद को पुलिस, सीबीआई या आरबीआई अधिकारी बताकर गिरफ्तारी का डर दिखाए और पैसे ट्रांसफर करने को कहे, तो सतर्क हो जाएं। किसी कथित जांच के नाम पर अपनी एफडी न तुड़वाएं और न ही बैंक खाते में रकम भेजें।

अनजान कॉल पर बैंक खाते, ओटीपी और वित्तीय जानकारी साझा न करें।

वीडियो कॉल पर दिखाए गए पहचान पत्र या वर्दी को असली होने का प्रमाण न मानें।

परिवार या भरोसेमंद व्यक्ति से तुरंत संपर्क करें।

ठगी होने पर तुरंत बैंक को सूचित करें और 1930 साइबर क्राइम हेल्पलाइन पर संपर्क करें। ऑनलाइन शिकायत राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर भी की जा सकती है।

पटना के इस मामले में 30 लाख रुपये की ठगी के साथ सबसे बड़ा सबक यही है कि डिजिटल अरेस्ट के नाम पर बनाया गया डर अपराधियों का हथियार है। किसी भी संदिग्ध कॉल पर घबराने के बजाय स्वतंत्र रूप से सत्यापन करना और समय रहते मदद लेना बेहद जरूरी है।

Nishkarsh Bharat

राज कुमार की रिपोर्ट