14 दिनों के बाद वापस आश्रम लौटे प्रेमानंद महाराज, भक्तों की भीड़, फलाहारी बाबा ने मांगी माफी
प्रेमानंद महाराज 14 दिन बाद आश्रम लौटे, फलाहारी बाबा ने मांगी माफी
निष्कर्ष भारत, संवाददाता ( वृंदावन)। संत प्रेमानंद महाराज अपने शिष्य रसिक दुलारी शरण की मौत के बाद करीब 14 दिनों के अंतराल पर गुरुवार को एक बार फिर राधा केली कुंज आश्रम पहुंचे। उनके आगमन की खबर फैलते ही दर्शन के लिए भक्तों की भीड़ जुट गई। महाराज ने आश्रम में श्रीजी के दर्शन और पूजा-अर्चना की। इसके बाद वह अपने गुरु के आश्रम पहुंचे और आशीर्वाद लेने के बाद यमुनापार स्थित यमुना विहार कुंज आश्रम के लिए रवाना हो गए।
इस बीच प्रेमानंद महाराज और क्रिकेटर विराट कोहली को लेकर विवादित बयान देने वाले फलाहारी महाराज यानी दिनेश शर्मा भी चर्चा में आ गए हैं। विराट कोहली को प्रेमानंद महाराज के आश्रम में लाने के लिए पांच करोड़ रुपये खर्च किए जाने का दावा करने के बाद उन्होंने अपने बयान को लेकर माफी मांगी है। इस विवाद ने संत समाज से लेकर सोशल मीडिया तक बहस छेड़ दी थी।
प्रेमानंद महाराज की वापसी पर आश्रम में जुटे भक्त
प्रेमानंद महाराज गुरुवार सुबह करीब पांच बजे वृंदावन स्थित राधा केली कुंज आश्रम पहुंचे। उनके आने की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में भक्त आश्रम के आसपास जुटने लगे। लंबे अंतराल के बाद महाराज को आश्रम में देखकर उनके अनुयायियों में उत्साह दिखाई दिया।
रिपोर्टों के अनुसार, महाराज ने आश्रम में श्रीजी के दर्शन किए और पूजा-अर्चना की। इसके बाद वह वराह घाट स्थित अपने गुरु के आश्रम पहुंचे। वहां एकांत में समय बिताने और गुरु का आशीर्वाद लेने के बाद वह वापस यमुना विहार कुंज आश्रम के लिए रवाना हो गए। उनकी इस संक्षिप्त यात्रा के दौरान भक्तों की भीड़ को संभालने में आश्रम के शिष्यों को काफी मशक्कत करनी पड़ी।
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प्रेमानंद महाराज की वापसी ऐसे समय हुई है, जब उनके आश्रम में शिष्य रसिक दुलारी की मौत को लेकर चर्चाएं जारी हैं। इस घटना के बाद आश्रम और उससे जुड़े घटनाक्रम पर लोगों की नजर बनी हुई है।
प्रेमानंद महाराज के शिष्य की मौत से क्यों मचा हड़कंप?
रसिक दुलारी शरण, जिन्हें दीपक लोढ़ी के नाम से भी जाना जाता था, की मौत ने कई सवाल खड़े किए हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, वह आश्रम की इमारत से नीचे गिर गए थे। घटना के बाद पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू की। मामले में सामने आए सीसीटीवी फुटेज और घटनास्थल से मिले साक्ष्यों को भी जांच का हिस्सा बनाया गया है।
घटना को लेकर सोशल मीडिया पर तरह-तरह के दावे किए गए। कुछ रिपोर्टों में शरीर पर चोटों और घटनास्थल से मिले उपकरणों का जिक्र भी सामने आया। हालांकि, किसी भी दावे को अंतिम निष्कर्ष मानना उचित नहीं होगा। मौत की परिस्थितियों, उपलब्ध साक्ष्यों और पोस्टमार्टम से संबंधित तथ्यों की जांच के आधार पर ही पूरी स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
रसिक दुलारी की मौत के बाद प्रेमानंद महाराज के आश्रम को लेकर लोगों की उत्सुकता बढ़ गई। इसी बीच आश्रम से जुड़े कई दावे और आरोप सामने आने लगे। ऐसे में पुलिस जांच की आधिकारिक जानकारी और सोशल मीडिया पर चल रही चर्चाओं के बीच अंतर करना जरूरी है।
फलाहारी बाबा ने विराट कोहली को लेकर क्या दावा किया था?
विवाद उस समय बढ़ा, जब श्रीकृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास से जुड़े दिनेश शर्मा उर्फ फलाहारी महाराज ने दावा किया कि विराट कोहली को प्रेमानंद महाराज के आश्रम तक लाने के लिए पांच करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। उन्होंने कथित तौर पर राजस्थान की एक निजी कंपनी और प्रॉपर्टी से जुड़े लोगों का नाम भी इस मामले में लिया था।
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इस बयान के सामने आने के बाद विराट कोहली और प्रेमानंद महाराज के अनुयायियों के बीच चर्चा तेज हो गई। आरोप को लेकर सवाल उठने लगे कि क्या क्रिकेटर की आश्रम यात्रा के पीछे कोई आर्थिक व्यवस्था थी या यह उनकी निजी आस्था से जुड़ा मामला था।

विराट कोहली की ओर से इस दावे को खारिज किया गया। उनके प्रवक्ता ने कहा कि प्रेमानंद महाराज से मिलने जाना उनकी श्रद्धा और व्यक्तिगत आस्था से जुड़ा है। पांच करोड़ रुपये मिलने का दावा पूरी तरह निराधार और तथ्यहीन बताया गया।
फलाहारी बाबा ने मांगी माफी, बताया बयान गलत तरीके से पेश हुआ
विवाद बढ़ने के बाद फलाहारी महाराज ने अपने बयान को लेकर माफी मांगी। उन्होंने कहा कि वह प्रेमानंद महाराज का सम्मान करते हैं और उनके प्रति उनके मन में कोई दुर्भावना नहीं है। उन्होंने यह भी दावा किया कि उनके बयान को मीडिया में गलत तरीके से पेश किया गया।
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फलाहारी महाराज ने कथित तौर पर जान से मारने की धमकियां मिलने की बात भी कही। उनके इस रुख के बाद विवाद को लेकर एक नया घटनाक्रम सामने आया है। हालांकि, माफी और बयान से पीछे हटने के उनके दावे के बावजूद पांच करोड़ रुपये से संबंधित आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है। इस मामले में विराट कोहली की ओर से पहले ही आरोपों का खंडन किया जा चुका है। इसलिए फलाहारी महाराज के शुरुआती दावे को प्रमाणित तथ्य के रूप में पेश नहीं किया जा सकता।
संत समाज की नाराजगी के बाद बढ़ा विवाद
फलाहारी महाराज के बयान के बाद वृंदावन के संत समाज में नाराजगी की खबरें सामने आई थीं। रिपोर्टों के अनुसार, संतों की एक बैठक में उनके बयान पर आपत्ति जताई गई और सामाजिक तथा धार्मिक कार्यक्रमों से उन्हें अलग रखने की बात कही गई।
संत समाज के कुछ लोगों ने इस तरह के आरोपों को धार्मिक संस्थाओं की प्रतिष्ठा से जोड़कर देखा। उनका कहना था कि किसी संत या आध्यात्मिक गुरु के बारे में सार्वजनिक रूप से गंभीर आरोप लगाने से पहले तथ्यों की पुष्टि होनी चाहिए।
इसी विवाद के बीच फलाहारी महाराज की माफी को घटनाक्रम में महत्वपूर्ण बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, उनके माफी मांगने के पीछे संत समाज के विरोध की भूमिका कितनी रही, इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
प्रेमानंद महाराज का आश्रम फिर चर्चा में क्यों?
प्रेमानंद महाराज देशभर में अपने प्रवचनों और भक्ति संबंधी संदेशों के कारण लोकप्रिय हैं। उनके आश्रम में कई चर्चित लोग भी दर्शन के लिए पहुंचते रहे हैं। विराट कोहली और उनकी पत्नी अनुष्का शर्मा की आश्रम यात्राएं भी पहले सुर्खियों में रही हैं।
रसिक दुलारी की मौत के बाद आश्रम से जुड़े घटनाक्रम पर लोगों की दिलचस्पी बढ़ी। इसके बाद विराट कोहली की यात्रा को लेकर किए गए दावे ने मामले को एक अलग दिशा दे दी। अब प्रेमानंद महाराज की आश्रम वापसी और फलाहारी महाराज की माफी, दोनों घटनाएं चर्चा का विषय बनी हुई हैं।
हालांकि, किसी आश्रम में किसी चर्चित व्यक्ति का जाना या किसी संत से मिलना अपने आप में किसी आर्थिक लेन-देन का प्रमाण नहीं है। इसी तरह, किसी शिष्य की मौत से जुड़े सवालों का जवाब भी अटकलों के बजाय जांच और साक्ष्यों से ही मिल सकता है।
अब आगे क्या?
फिलहाल प्रेमानंद महाराज अपने आश्रम लौट चुके हैं और फलाहारी महाराज ने विवादित बयान को लेकर माफी मांगी है। दूसरी ओर, रसिक दुलारी की मौत से जुड़े सवालों पर पुलिस जांच के निष्कर्ष महत्वपूर्ण होंगे।
विराट कोहली की टीम पहले ही पांच करोड़ रुपये वाले दावे को खारिज कर चुकी है। ऐसे में इस विवाद में आगे किसी नए तथ्य या आधिकारिक बयान के सामने आने पर ही स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।
इस पूरे घटनाक्रम में तीन बातें सबसे महत्वपूर्ण हैं—प्रेमानंद महाराज की 14 दिन बाद आश्रम वापसी, फलाहारी महाराज की माफी और रसिक दुलारी की मौत की जांच। इन तीनों पहलुओं पर नजर बनी हुई है।
राज कुमार की रिपोर्ट
