शरजील इमाम को मीडिया से बातचीत पड़ी भारी! कोर्ट ने रद्द की अंतरिम जमानत

शरजील इमाम

शरजील इमाम की अंतरिम जमानत रद्द

निष्कर्ष भारत संवाददाता- दिल्ली दंगों की कथित साजिश से जुड़े मामले में आरोपी शरजील इमाम की मुश्किलें बढ़ गई हैं। कड़कड़डूमा कोर्ट ने अंतरिम जमानत की शर्तों का उल्लंघन करने के मामले में उनकी जमानत रद्द कर दी। अदालत ने पाया कि शरजील इमाम उस समय कमरे में मौजूद थे, जब एक मीडियाकर्मी उनके भाई का इंटरव्यू ले रहा था। अदालत ने इसे मीडिया से दूरी बनाए रखने की शर्त का उल्लंघन माना। यह कार्रवाई दिल्ली पुलिस की उस याचिका पर हुई, जिसमें शरजील की अंतरिम जमानत रद्द करने की मांग की गई थी।

चचेरे भाइयों की शादी के लिए मिली थी सात दिन की जमानत

शरजील इमाम को अपने चचेरे भाइयों के विवाह समारोह में शामिल होने के लिए 4 अक्टूबर से 10 अक्टूबर 2026 तक सात दिन की अंतरिम जमानत दी गई थी। कड़कड़डूमा कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश समीर बाजपेयी ने यह राहत कुछ शर्तों के साथ दी थी।

जमानत की शर्तों के मुताबिक, शरजील इमाम सोशल मीडिया का इस्तेमाल नहीं कर सकते थे और न ही किसी मीडियाकर्मी के संपर्क में आ सकते थे। इसके अलावा, उन्हें परिवार, रिश्तेदारों और दोस्तों के अलावा अन्य लोगों से मिलने पर भी प्रतिबंध था। जमानत की अवधि पूरी होने पर उन्हें 10 अक्टूबर की शाम तक जेल अधिकारियों के सामने आत्मसमर्पण करना था।

दिल्ली पुलिस ने वीडियो को बनाया आधार

दिल्ली पुलिस ने अदालत में याचिका दाखिल कर आरोप लगाया कि शरजील इमाम ने अंतरिम जमानत की शर्तों का उल्लंघन किया है। पुलिस ने सोशल मीडिया और वीडियो प्लेटफॉर्म पर सामने आए कुछ वीडियो का हवाला दिया।

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पुलिस के मुताबिक, वीडियो में शरजील इमाम एक मीडियाकर्मी के सामने दिखाई दे रहे थे। इसके आधार पर अभियोजन पक्ष ने दलील दी कि जमानत के दौरान मीडिया से संपर्क नहीं करने की स्पष्ट शर्त का पालन नहीं किया गया।

मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने वीडियो के अलग-अलग हिस्सों की जांच की। रिपोर्ट के मुताबिक, अदालत ने पाया कि शरजील इमाम उसी कमरे में मौजूद थे, जहां उनके भाई का इंटरव्यू लिया जा रहा था। वीडियो के अलग-अलग हिस्सों में एक ही कमरे और लगभग एक ही समय की स्थिति दिखाई देने की बात भी सामने आई।

बचाव पक्ष ने क्या दलील दी?

शरजील इमाम की ओर से पेश वकीलों ने पुलिस के आरोपों का विरोध किया। बचाव पक्ष का कहना था कि शरजील ने खुद कोई इंटरव्यू नहीं दिया और न ही किसी मीडिया संस्थान या पत्रकार से बातचीत की।

वकीलों ने यह भी दलील दी कि पुलिस जिस वीडियो का हवाला दे रही है, उसमें अलग-अलग स्रोतों के क्लिप शामिल हैं। उनका कहना था कि इंटरव्यू शरजील के भाई ने दिया था, जबकि मीडिया से संपर्क नहीं करने की शर्त शरजील पर लागू थी।

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हालांकि, अदालत ने वीडियो की जांच के बाद बचाव पक्ष की इस दलील को स्वीकार नहीं किया कि शरजील इंटरव्यू के दौरान वहां मौजूद नहीं थे। अदालत ने माना कि उनकी मौजूदगी जमानत की शर्तों के उल्लंघन से जुड़ी थी। इसके बाद उनकी अंतरिम जमानत रद्द किए जाने की रिपोर्ट सामने आई।

जनवरी 2020 से जेल में बंद हैं शरजील इमाम

शरजील इमाम जनवरी 2020 से जेल में बंद हैं। वह फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुई सांप्रदायिक हिंसा से जुड़े बड़े षड्यंत्र के मामले में आरोपी हैं। इस मामले में दिल्ली पुलिस ने गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम यानी यूएपीए समेत अन्य कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की है।

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यह मामला नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) के विरोध में हुए प्रदर्शनों की पृष्ठभूमि से जुड़ा है। पुलिस का आरोप है कि हिंसा के पीछे बड़ी साजिश थी। हालांकि, आरोपों का अंतिम फैसला न्यायिक प्रक्रिया के तहत होना है; आरोप लगना अपने आप में दोष साबित होना नहीं है।

नियमित जमानत पर भी जारी है कानूनी लड़ाई

शरजील इमाम को इस मामले में नियमित जमानत नहीं मिली है। सितंबर 2026 में भी उनकी जमानत से जुड़ी याचिकाओं पर कानूनी कार्यवाही हुई थी। दिल्ली दंगों की कथित साजिश का मामला अदालत में विचाराधीन है और शरजील की हिरासत को लेकर कानूनी लड़ाई जारी है।

अंतरिम जमानत सीमित अवधि और निर्धारित शर्तों के साथ दी जाती है। इस मामले में अदालत ने मीडिया से संपर्क नहीं करने की शर्त को महत्वपूर्ण माना। वीडियो में शरजील की मौजूदगी को लेकर पुलिस की याचिका पर हुई कार्रवाई ने उनके मामले को फिर चर्चा में ला दिया है।

Nishkarsh Bharat

भूमि आर्या की रिपोर्ट