UCC पर राजद-NDA आमने-सामने, मनोज झा बोले, ‘एकता के लिए एकरूपता जरूरी नहीं’

UCC पर मनोज झा का बड़ा बयान

UCC पर मनोज झा ने केंद्र को घेरा, मोहन भागवत का दिया हवाला

निष्कर्ष भारत, संवाददाता (पटना)। UCC यानी समान नागरिक संहिता को लेकर बिहार की राजनीति में एक बार फिर बहस तेज हो गई है। राष्ट्रीय जनता दल के राज्यसभा सांसद और पार्टी के मुख्य राष्ट्रीय प्रवक्ता मनोज झा ने UCC के मुद्दे पर केंद्र सरकार और भाजपा पर निशाना साधा है। उन्होंने इसे ‘Dog Whistle Politics’ बताते हुए कहा कि देश की विविधता और एकता को समझने की जरूरत है। मनोज झा ने अपने बयान में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ RSS प्रमुख मोहन भागवत के विदेश में दिए गए बयानों का भी हवाला दिया।

UCC पर मनोज झा ने केंद्र को घेरा

मनोज झा ने बुधवार को UCC को लेकर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इस मुद्दे पर एकरूपता की बात की जा रही है, जबकि भारत जैसे विविधतापूर्ण देश में एकता को समझना ज्यादा जरूरी है। उन्होंने कहा कि वह संसद के अंदर भी इस विषय पर अपनी बात रख चुके हैं।

मनोज झा ने मोहन भागवत के विदेश में दिए गए बयानों का उल्लेख करते हुए कहा कि अमेरिका और इंग्लैंड में भागवत ने ‘यूनिफॉर्म’ की जगह ‘यूनिटी’ यानी एकता की जरूरत पर बात की थी। झा के मुताबिक, एकता के लिए हर चीज में एकरूपता जरूरी नहीं है।

मोहन भागवत के बयान का दिया हवाला

RJD सांसद ने UCC पर अपनी बात रखते हुए RSS प्रमुख मोहन भागवत के पुराने सार्वजनिक बयानों को भी चर्चा में ला दिया। उनका कहना था कि देश की सामाजिक और सांस्कृतिक विविधता को ध्यान में रखते हुए एकता का रास्ता तलाशना चाहिए।

मनोज झा ने इसी संदर्भ में केंद्र सरकार की UCC नीति पर सवाल उठाया। उन्होंने तर्क दिया कि भारत में अलग-अलग समुदायों, परंपराओं और सामाजिक व्यवस्थाओं की मौजूदगी को देखते हुए केवल एकरूपता को आधार बनाकर नीति तैयार करने पर व्यापक चर्चा जरूरी है।

दरअसल, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हाल में कहा है कि 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा और NDA शासित सभी 21 राज्यों में UCC लागू किया जाएगा। शाह ने कहा कि कई राज्यों में इसे लागू करने की दिशा में पहले ही कदम उठाए जा चुके हैं और NDA शासित अन्य राज्यों में भी इसे आगे बढ़ाया जाएगा।

बिहार में UCC को लेकर अलग-अलग राय

केंद्र की इस घोषणा के बाद बिहार में भी UCC को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है। बिहार में सत्तारूढ़ NDA के भीतर भी इस विषय पर अलग-अलग रुख सामने आए हैं। गठबंधन के कुछ दलों ने कानून के प्रावधानों को समझने और विस्तृत चर्चा के बाद अपना रुख तय करने की बात कही है।

दूसरी ओर, RJD समेत विपक्षी दलों की ओर से UCC को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। ऐसे में बिहार की राजनीति में यह मुद्दा आने वाले दिनों में और चर्चा में रहने की संभावना है।

UCC का मुद्दा क्या है?

समान नागरिक संहिता का विचार देश के सभी नागरिकों के लिए विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और गोद लेने जैसे व्यक्तिगत मामलों में समान कानूनी व्यवस्था से जुड़ा है। वर्तमान में इन विषयों से संबंधित कई व्यक्तिगत कानून धर्म और समुदाय के आधार पर अलग-अलग व्यवस्था प्रदान करते हैं।

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UCC के समर्थक इसे समान नागरिक अधिकारों और समान कानूनी व्यवस्था से जोड़ते हैं, जबकि विरोध करने वाले दल और समूह देश की धार्मिक-सामाजिक विविधता तथा व्यक्तिगत कानूनों से जुड़े अधिकारों को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। इसी वजह से UCC लंबे समय से देश की राजनीति में बहस का विषय रहा है।

UCC पर बिहार में बढ़ी राजनीतिक हलचल

अमित शाह के हालिया बयान के बाद बिहार में UCC को लेकर राजनीतिक बयानबाजी और तेज हुई है। केंद्र सरकार की ओर से 21 NDA-शासित राज्यों में 2029 से पहले UCC लागू करने का लक्ष्य बताए जाने के बाद गठबंधन के भीतर सहयोगी दलों की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो गई है।

मनोज झा ने इसी राजनीतिक बहस के बीच केंद्र सरकार को घेरते हुए मोहन भागवत के बयानों का संदर्भ दिया है। उनके बयान के बाद बिहार की राजनीति में UCC को लेकर पक्ष और विपक्ष के बीच बहस और तेज होने के संकेत हैं।

बाढ़ को लेकर भी केंद्र पर निशाना

UCC के अलावा मनोज झा ने बिहार में बाढ़ की स्थिति को लेकर भी केंद्र सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने बिहार में बाढ़ से हुए नुकसान का जायजा लेने के लिए केंद्रीय टीम के आने और केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के दौरे को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी।

बिहार सरकार के अनुसार, बाढ़ से हुए नुकसान का आकलन करने के लिए केंद्रीय टीम 16 सितंबर को राज्य पहुंचने वाली थी। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में टीम द्वारा प्रभावित इलाकों का जायजा लेने की जानकारी भी सामने आई है।

मनोज झा ने कहा कि केंद्र को बिहार आने में देर हुई है। उन्होंने अपने बयान में केंद्र सरकार पर राजनीतिक तंज भी कसा। उनका कहना था कि यदि बिहार में चुनाव होता तो बड़ी संख्या में नेता और मंत्री यहां मौजूद होते।

बाढ़ राहत को लेकर सरकार से सवाल

मनोज झा ने बाढ़ प्रभावित लोगों को तत्काल राहत और सहायता देने को प्राथमिकता देने की बात कही। उन्होंने सवाल उठाया कि जब बिहार बाढ़ की समस्या से जूझ रहा था, तब केंद्र की ओर से राज्य में पर्याप्त सक्रियता क्यों नहीं दिखाई गई।

उन्होंने केंद्रीय टीम के आने के तरीके को लेकर भी टिप्पणी की और कहा कि आपदा की स्थिति में उपलब्ध संसाधनों का इस्तेमाल प्रभावित लोगों की मदद के लिए होना चाहिए।

केंद्र व राज्य के बीच राहत पर नजर

बिहार में बाढ़ से हुए नुकसान के आकलन के लिए केंद्रीय टीम के दौरे को अब राहत और मुआवजे के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। टीम प्रभावित इलाकों में नुकसान का आकलन करेगी और उसकी रिपोर्ट के आधार पर आगे की प्रक्रिया बढ़ सकती है।

इस बीच UCC और बाढ़, दोनों मुद्दों पर बिहार में राजनीतिक बयानबाजी जारी है। एक तरफ समान नागरिक संहिता को लेकर केंद्र की योजना पर विपक्ष सवाल उठा रहा है, वहीं दूसरी तरफ बाढ़ राहत और केंद्रीय सहायता को लेकर भी सरकार पर दबाव बनाया जा रहा है।

Nishkarsh Bharat

अमन कुमार की रिपोर्ट