‘पुलिस गोली नहीं चलाएगी तो ट्रेनिंग किस काम की?’ भरत तिवारी एनकाउंटर पर DGP विनय कुमार का बयान

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एनकाउंटर पर DGP का बयान- ‘आत्मरक्षा में गोली चला सकती है पुलिस

निष्कर्ष भारत संवाददाता: भोजपुर के चर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर मामले को लेकर बिहार में जारी सियासी और कानूनी बहस के बीच DGP विनय कुमार का बयान सामने आया है। डीजीपी ने स्पष्ट किया है कि मुश्किल परिस्थितियों में पुलिसकर्मियों को आत्मरक्षा में गोली चलाने का अधिकार है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस को तय नियमों और SOP के तहत ही बल का इस्तेमाल करना होता है और जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई का प्रावधान है।

DGP के इस बयान के बाद करीब दो महीने पुराने भरत तिवारी एनकाउंटर मामले को लेकर बहस एक बार फिर तेज हो गई है। एक तरफ पुलिस कार्रवाई को आत्मरक्षा से जोड़कर देखा जा रहा है, तो दूसरी तरफ भरत तिवारी के परिवार और समर्थकों की ओर से कार्रवाई की परिस्थितियों पर लगातार सवाल उठाए जाते रहे हैं। मामले की न्यायिक जांच भी जारी है।

‘पुलिस को गोली चलाने की अनुमति नहीं होगी तो ट्रेनिंग का क्या मतलब?’

DGP विनय कुमार ने पुलिस की भूमिका और आत्मरक्षा के अधिकार पर बात करते हुए कहा कि यदि पुलिस को किसी भी परिस्थिति में गोली चलाने की अनुमति नहीं होगी तो गंभीर और जानलेवा परिस्थितियों में पुलिसकर्मी अपनी सुरक्षा कैसे करेंगे।

उनके मुताबिक पुलिसकर्मियों को हथियार और उसका प्रशिक्षण इसलिए दिया जाता है ताकि जरूरत पड़ने पर कानून के दायरे में उसका इस्तेमाल किया जा सके। लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि पुलिस को मनमाने तरीके से गोली चलाने की छूट मिल गई है।

DGP ने बल प्रयोग के मामले में नियमों और SOP के पालन पर जोर दिया। उन्होंने संकेत दिया कि आत्मरक्षा और जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग के बीच स्पष्ट अंतर है। यदि कोई अधिकारी निर्धारित नियमों का उल्लंघन करते हुए जरूरत से ज्यादा बल का इस्तेमाल करता है तो उसके खिलाफ कानूनी और विभागीय कार्रवाई की जा सकती है।

17 जून को क्या हुआ था?

भरत तिवारी एनकाउंटर की घटना 17 जून 2026 को भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में हुई थी। पुलिस के अनुसार, भरत भूषण तिवारी के पास हथियार होने और गोली चलाने की सूचना मिलने के बाद पुलिस और STF की टीम मौके पर पहुंची थी।

पुलिस का दावा था कि टीम ने भरत को आत्मसमर्पण करने के लिए कहा, लेकिन उसने कथित तौर पर पुलिस पर गोलीबारी जारी रखी। इसके बाद पुलिस ने आत्मरक्षा और आम लोगों की सुरक्षा के लिए जवाबी कार्रवाई की। गोली लगने के बाद भरत को इलाज के लिए ले जाया गया, जहां बाद में उनकी मौत हो गई।

घटना के बाद पुलिस ने हथियार बरामद किए जाने की भी बात कही थी। पुलिस के आधिकारिक पक्ष के मुताबिक, कार्रवाई का आधार खतरे की स्थिति और आत्मरक्षा था।

परिवार ने उठाए थे एनकाउंटर पर गंभीर सवाल

पुलिस के दावे के विपरीत भरत तिवारी के परिवार ने घटना को लेकर अलग कहानी सामने रखी। परिवार का आरोप है कि भरत ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया था और इसके बावजूद उस पर गोली चलाई गई।

परिवार और स्थानीय लोगों की ओर से एनकाउंटर को फर्जी बताते हुए स्वतंत्र जांच की मांग की गई थी। इसी विवाद के कारण मामले ने राजनीतिक रूप ले लिया और सरकार को न्यायिक जांच का आदेश देना पड़ा।

मामले की जांच से जुड़े आयोग ने भरत के परिवार से भी बातचीत की है। न्यायिक जांच का उद्देश्य घटना के सभी पहलुओं की निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से पड़ताल करना है।

न्यायिक जांच में क्या सामने आएगा?

भरत तिवारी एनकाउंटर की जांच सेवानिवृत्त पटना हाईकोर्ट जज विनोद कुमार सिन्हा की अध्यक्षता में की जा रही है। जांच में घटना की परिस्थितियों, पुलिस कार्रवाई और बल प्रयोग के तरीके समेत अलग-अलग पहलुओं को देखा जा रहा है।

यही वजह है कि DGP का ताजा बयान भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पुलिस की ओर से आत्मरक्षा के अधिकार को स्पष्ट किए जाने के बाद अब सवाल यह है कि 17 जून की घटना में वास्तव में किस स्तर का खतरा मौजूद था और पुलिस की जवाबी कार्रवाई तय नियमों के अनुरूप थी या नहीं।

इन सवालों का अंतिम जवाब न्यायिक जांच की रिपोर्ट से मिलने की उम्मीद है।

STF जवान की गिरफ्तारी से बढ़ी थी हलचल

मामले में जुलाई के अंत में STF के जवान अक्षय कुमार की गिरफ्तारी ने भी काफी हलचल पैदा की थी। रिपोर्टों के मुताबिक, उन पर घटना में पहली गोली चलाने का आरोप लगाया गया है।

इससे जांच का दायरा और गंभीर हो गया। इससे पहले भी मामले में पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई और प्राथमिकी की खबरें सामने आई थीं। जून में सरकार ने न्यायिक जांच का आदेश देने के साथ मामले की निष्पक्ष जांच का भरोसा दिया था।

परिवार को सरकारी नौकरी और आर्थिक सहायता का ऐलान

एनकाउंटर विवाद के बीच बिहार सरकार ने भरत तिवारी के परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी और आर्थिक सहायता देने की घोषणा भी की है। यह फैसला परिवार की मांगों और मामले को लेकर बनी स्थिति के बीच सामने आया।

हालांकि, परिवार की ओर से न्यायिक जांच और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग जारी रहने की खबरें सामने आती रही हैं। ऐसे में आर्थिक मदद और नौकरी की घोषणा के बावजूद मामले को लेकर कानूनी सवाल पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं।

DGP के बयान के बाद फिर गरमाई बहस

भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में अब बहस का केंद्र पुलिस के आत्मरक्षा के अधिकार बनाम बल प्रयोग की सीमा बन गया है। DGP विनय कुमार ने जहां पुलिसकर्मियों के आत्मरक्षा के अधिकार को जरूरी बताया है, वहीं यह भी स्पष्ट किया है कि नियमों से बाहर जाकर बल प्रयोग करने पर कार्रवाई हो सकती है।

यही अंतर इस पूरे मामले की जांच में अहम होगा। यदि पुलिस कार्रवाई आत्मरक्षा में और निर्धारित SOP के अनुसार हुई थी, तो उसका आकलन उसी आधार पर होगा। वहीं यदि जांच में जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग या नियमों के उल्लंघन की बात सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय हो सकती है।

फिलहाल सभी की नजर न्यायिक जांच की रिपोर्ट पर है। रिपोर्ट में 17 जून की घटना की परिस्थितियों और पुलिस कार्रवाई को लेकर क्या निष्कर्ष सामने आते हैं, इससे भरत तिवारी एनकाउंटर विवाद की आगे की दिशा तय होगी।

Nishkarsh Bharat

पटना से भूमि आर्या की रिपोर्ट