पटना में ऑनलाइन ट्रेडिंग के नाम पर युवती से 92 हजार की ठगी, साइबर अपराधियों ने इंस्टाग्राम से बनाया निशाना
ऑनलाइन ट्रेडिंग के नाम पर पटना में युवती से 92 हजार की ठगी
निष्कर्ष भारत, संवाददाता पटना। ऑनलाइन ट्रेडिंग और निवेश में कम समय में बड़ा मुनाफा कमाने का लालच पटना की एक युवती को भारी पड़ गया। सोमवार देर रात को इंस्टाग्राम पर दिखे निवेश संबंधी विज्ञापन के जरिए संपर्क में आए कथित साइबर ठगों ने पहले महज 750 रुपये निवेश कराकर भरोसा जीता और बाद में अलग-अलग चरणों में 92 हजार 285 रुपये जमा करा लिए। रकम वापस मांगने पर संपर्क बंद कर दिया गया। शिकायत के बाद पटना साइबर थाना पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
ऑनलाइन विज्ञापन से शुरू हुआ ठगी का खेल
जानकारी के अनुसार वैशाली जिले के गोरौल थाना क्षेत्र की मूल निवासी आकांक्षा राज को इंस्टाग्राम पर ऑनलाइन ट्रेडिंग जो शेयर बाजार और ऑनलाइन निवेश से संबंधित एक विज्ञापन दिखाई दिया था। विज्ञापन में कम समय में निवेश की रकम पर काफी अधिक मुनाफे का दावा किया गया था।
विज्ञापन में दिए गए प्रस्ताव में रुचि दिखाने के बाद कुछ लोगों ने ऑनलाइन ट्रेडिंग का व्हाट्सऐप के जरिए युवती से संपर्क किया। पीड़िता के मुताबिक संपर्क करने वालों ने अपना नाम साक्षी शर्मा और सुशांत बताया। दोनों ने घर बैठे शेयर बाजार में निवेश करने और बेहतर रिटर्न मिलने का भरोसा दिया।
बातचीत के दौरान कथित आरोपितों ने निवेश से जुड़े दस्तावेज, भुगतान की पर्चियां और मुनाफे के स्क्रीनशॉट भी भेजे। ऑनलाइन ट्रेडिंग की इन डिजिटल तस्वीरों और आंकड़ों के जरिए युवती को यह भरोसा दिलाने की कोशिश की गई कि निवेश के बाद उसके खाते में लगातार लाभ बढ़ रहा है।
ऑनलाइन ठगी में पहले 750 रुपये का निवेश
कथित जालसाजों ने युवती से शुरुआत में केवल 750 रुपये निवेश कराए। छोटी रकम होने के कारण उसे इस प्रक्रिया पर तत्काल संदेह नहीं हुआ। इसके बाद उसे कथित तौर पर निवेश पर मुनाफा दिखाया गया और बड़ी रकम लगाने के लिए प्रोत्साहित किया गया। जालसाजों ने उसे बताया कि अगर वह अधिक पैसा निवेश करेगी तो उसे उसी अनुपात में ज्यादा मुनाफा मिलेगा। शुरुआती स्तर पर दिखाए गए कथित लाभ के कारण युवती का भरोसा बढ़ता गया। इसके बाद निवेश की रकम धीरे-धीरे बढ़ाई जाती रही। अलग-अलग चरणों में भुगतान कराने के दौरान उसे यह विश्वास दिलाया गया कि उसकी रकम सुरक्षित है और जल्द ही मुनाफे के साथ वापस मिल जाएगी।
92 हजार 285 रुपये जमा कराने के बाद बदला रवैया
पीड़िता के अनुसार उसने कथित जालसाजों के बताए बैंक खातों और अन्य भुगतान माध्यमों के जरिए कुल 92 हजार 285 रुपये ट्रांसफर कर दिए। रकम जमा करने के बाद जब उसने अपने निवेश और मुनाफे की राशि वापस मांगनी शुरू की तो मामला बदल गया।
आरोप है कि कथित ठगों ने पहले भुगतान में देरी के अलग-अलग कारण बताए। युवती लगातार अपनी मूल राशि वापस मांगती रही। इसके बाद अचानक उससे संपर्क कम कर दिया गया और बाद में मोबाइल नंबर ब्लॉक कर दिया गया।
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व्हाट्सऐप समेत संपर्क के अन्य माध्यमों से भी बातचीत बंद होने के बाद युवती को ठगी का एहसास हुआ। इसके बाद उसने साइबर अपराध की शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू की।
साइबर थाना पहुंची पीड़िता, प्राथमिकी दर्ज
पीड़िता ने राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराने के बाद पटना साइबर थाना में भी लिखित आवेदन दिया। उसने कथित आरोपितों के खिलाफ कार्रवाई करने और ठगी गई रकम वापस दिलाने की मांग की।

पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर मामले की तकनीकी जांच शुरू कर दी है। जांच में उन बैंक खातों और भुगतान माध्यमों की जानकारी जुटाई जा रही है, जिनके जरिए रकम ट्रांसफर की गई थी। पुलिस मोबाइल नंबर, बैंक लेन-देन, डिजिटल भुगतान और बातचीत से जुड़े इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की भी जांच कर रही है। इन जानकारियों के आधार पर पुलिस कथित ठगों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।
ऑनलाइन ट्रेडिंग के नाम पर ठगी का तरीका
ऑनलाइन निवेश के नाम पर होने वाली साइबर ठगी में जालसाज अक्सर भरोसा बनाने से शुरुआत करते हैं। पहले छोटी रकम निवेश कराने के बाद कथित मुनाफा दिखाया जाता है। इसके बाद पीड़ित को यह भरोसा दिलाया जाता है कि अधिक पैसा लगाने पर बड़ा रिटर्न हासिल किया जा सकता है।
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इस तरीके में फर्जी स्क्रीनशॉट, लाभ का आंकड़ा, भुगतान रसीद और निवेश से जुड़े दस्तावेज दिखाकर पीड़ित को प्रभावित किया जा सकता है। जब पीड़ित अधिक रकम जमा कर देता है और पैसे निकालने की कोशिश करता है, तब कथित ठग अलग-अलग शुल्क या अन्य बहानों का सहारा ले सकते हैं।
पटना के इस मामले में भी पुलिस इसी तरह की कार्यप्रणाली की आशंका को ध्यान में रखकर जांच कर रही है। हालांकि जांच पूरी होने के बाद ही पूरे घटनाक्रम और आरोपितों की भूमिका स्पष्ट होगी।
ऑनलाइन भुगतान की कड़ियां खंगाल रही पुलिस
पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती रकम के लेन-देन की पूरी कड़ी तक पहुंचना है। जिन खातों में पैसा गया, उनके बैंक विवरण और संबंधित पहचान की जांच की जा रही है। इसके साथ ही मोबाइल नंबरों और डिजिटल संपर्कों के आधार पर यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि कथित आरोपित कहां से काम कर रहे थे।

जांच एजेंसी यह भी देख रही है कि इस मामले के पीछे केवल कुछ लोग हैं या किसी बड़े साइबर नेटवर्क की भूमिका है। यदि अन्य पीड़ितों या समान लेन-देन से जुड़े मामले सामने आते हैं तो जांच का दायरा और बढ़ सकता है। पर्याप्त डिजिटल और वित्तीय साक्ष्य मिलने के बाद पुलिस आरोपितों की पहचान और गिरफ्तारी की दिशा में आगे बढ़ेगी।
ऑनलाइन निवेश से पहले इन बातों का रखें ध्यान
सोशल मीडिया पर कम समय में रकम दोगुनी या कई गुना करने का दावा करने वाले निवेश प्रस्तावों से सावधान रहना जरूरी है। किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर बैंक खाते में पैसा भेजने से पहले कंपनी, निवेश प्लेटफॉर्म और उसके नियामकीय विवरण की जांच करनी चाहिए।
सिर्फ स्क्रीनशॉट, फर्जी लाभ दिखाने वाले आंकड़े या व्हाट्सऐप पर भेजे गए दस्तावेज किसी निवेश की विश्वसनीयता साबित नहीं करते। किसी भी संदिग्ध लेन-देन में आगे पैसा भेजने के बजाय तुरंत बैंक और संबंधित साइबर अपराध अधिकारियों से संपर्क करना बेहतर है। पटना साइबर थाना फिलहाल मामले की जांच में जुटा है। पुलिस की तकनीकी जांच से आने वाले दिनों में कथित ठगी के नेटवर्क और रकम के प्रवाह से जुड़ी तस्वीर साफ होने की उम्मीद है।
राजकुमार सिंह की रिपोर्ट
