कांग्रेस का संगठन में बड़ा बदलाव, कई राज्यों में नए प्रभारी, सचिन पायलट को पंजाब की कमान
कांग्रेस में बड़ा बदलाव, सचिन पायलट को पंजाब का प्रभारी बनाया गया
निष्कर्ष भारत संवाददाता, नई दिल्ली। कांग्रेस संगठन में बड़े बदलाव के तहत कई राज्यों के प्रभारी बदले गए हैं। सचिन पायलट को पंजाब का नया प्रभारी बनाया गया है, जबकि रणदीप सुरजेवाला को गुजरात का प्रभारी नियुक्त किया गया है। भूपेश बघेल को पंजाब से हटाकर असम की जिम्मेदारी दी गई है। सुखदेव भगत को छत्तीसगढ़, श्रीवेल्ला प्रसाद को महाराष्ट्र और पीवी मोहन को आंध्र प्रदेश का प्रभारी बनाया गया है। सुरजेवाला को गुजरात के साथ कर्नाटक की अतिरिक्त जिम्मेदारी भी सौंपी गई है।
वहीं, मुकुल वासनिक महासचिव के पद पर बने रहेंगे। कांग्रेस में यह संगठनात्मक बदलाव ऐसे समय हुआ है, जब पंजाब में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। पार्टी के लिए राज्य में संगठन को एकजुट रखना और चुनावी तैयारी को गति देना बड़ी चुनौती है। ऐसे में सचिन पायलट को पंजाब का प्रभारी बनाए जाने को पार्टी की चुनावी रणनीति में महत्वपूर्ण बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है।
पंजाब प्रभारी की जिम्मेदारी अब सचिन पायलट के पास
सचिन पायलट के सामने सबसे पहली चुनौती पंजाब कांग्रेस के भीतर चल रही गुटबाजी को संभालने की होगी। पंजाब में कांग्रेस लंबे समय से आंतरिक खींचतान का सामना करती रही है। अलग-अलग नेताओं और गुटों के बीच मतभेद कई मौकों पर सार्वजनिक रूप से सामने आए हैं।
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पार्टी नेतृत्व की कोशिश है कि विधानसभा चुनाव से पहले संगठन के नेताओं और कार्यकर्ताओं को एक मंच पर लाया जाए। पायलट को पंजाब का प्रभारी बनाए जाने के पीछे भी यही रणनीति मानी जा रही है कि वह विभिन्न गुटों के बीच समन्वय स्थापित कर पार्टी को चुनावी मोर्चे पर एकजुट कर सकें।
राहुल गांधी के दौरे से पहले हुआ बदलाव
पंजाब कांग्रेस में यह बदलाव सांसद राहुल गांधी के प्रस्तावित पंजाब दौरे से पहले हुआ है। इससे पहले भूपेश बघेल राज्य के प्रभारी के तौर पर संगठन को चुनाव के लिए तैयार करने में जुटे थे।
बघेल ने पंजाब का दौरा कर जिला स्तर के नेताओं और संगठन के पदाधिकारियों के साथ बैठकें भी की थीं। इस दौरान पार्टी की जमीनी स्थिति और चुनावी तैयारियों का जायजा लिया गया था। हालांकि, संगठन के भीतर मतभेद और गुटबाजी का मुद्दा लगातार पार्टी नेतृत्व के सामने बना रहा।
भूपेश बघेल अब असम के प्रभारी
पंजाब के प्रभारी पद से हटाए जाने के बाद भूपेश बघेल को असम की जिम्मेदारी दी गई है। बघेल के पास पंजाब संगठन का अच्छा अनुभव हो चुका था और उन्होंने राज्य के कई जिलों में पार्टी संगठन के साथ काम किया था।

उनके कार्यकाल में संगठन के कई नेताओं के साथ संपर्क मजबूत हुआ था। ऐसे में चुनाव से कुछ महीने पहले प्रभारी बदलने का फैसला पार्टी के लिए जोखिम भरा भी माना जा सकता है। नए प्रभारी को संगठन की अंदरूनी स्थिति समझने और नेताओं के बीच तालमेल बनाने में समय लग सकता है।
प्रभारी बदलने के पीछे गुटबाजी बड़ी वजह?
पंजाब कांग्रेस में भूपेश बघेल के नेतृत्व को लेकर पार्टी के भीतर मतभेद की खबरें सामने आती रही थीं। पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी से जुड़े गुट की ओर से बघेल की कार्यशैली पर सवाल उठाए जाने की चर्चा थी।
ऐसे में विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी नेतृत्व ने संगठन के भीतर अलग-अलग धड़ों को साधने की कोशिश के तहत यह बदलाव किया है। सचिन पायलट की नियुक्ति को इसी राजनीतिक समीकरण से जोड़कर देखा जा रहा है।
हालांकि, प्रभारी बदलने से पार्टी की अंदरूनी समस्या अपने आप खत्म होगी, यह तय नहीं है। पायलट को नेताओं के बीच मतभेद दूर करने के साथ-साथ संगठन को चुनावी मुद्दों पर एकजुट करना होगा।
सचिन पायलट के सामने कई चुनौतियां
पंजाब के नए प्रभारी के तौर पर सचिन पायलट के सामने सबसे बड़ी चुनौती पार्टी के भीतर चल रही अंतर्कलह को खत्म करना होगी। इसके अलावा उन्हें जिला और बूथ स्तर तक संगठन को सक्रिय करना होगा।
विधानसभा चुनाव से पहले उम्मीदवारों के चयन, चुनावी मुद्दों और स्थानीय नेतृत्व के बीच तालमेल जैसे विषय भी महत्वपूर्ण होंगे। यदि पार्टी के भीतर टिकट को लेकर खींचतान बढ़ती है तो इसका सीधा असर चुनावी तैयारी पर पड़ सकता है।
पायलट के लिए एक और चुनौती यह होगी कि वह पुराने और नए नेताओं के बीच संतुलन कैसे बनाते हैं। पंजाब कांग्रेस में कई नेता अपने-अपने राजनीतिक प्रभाव वाले क्षेत्रों में मजबूत पकड़ रखते हैं। इन सभी को एक साथ लेकर चलना नए प्रभारी के लिए आसान नहीं होगा।
कई राज्यों में बदले गए प्रभारी
कांग्रेस ने केवल पंजाब में ही बदलाव नहीं किया है। पार्टी ने गुजरात, असम, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश में भी नए प्रभारी नियुक्त किए हैं। रणदीप सुरजेवाला को गुजरात की जिम्मेदारी दी गई है और उन्हें कर्नाटक का अतिरिक्त प्रभार भी मिला है।
सुखदेव भगत को छत्तीसगढ़, श्रीवेल्ला प्रसाद को महाराष्ट्र और पीवी मोहन को आंध्र प्रदेश का प्रभारी बनाया गया है। इन नियुक्तियों के जरिए कांग्रेस ने अलग-अलग राज्यों में संगठन को मजबूत करने और आगामी चुनावी चुनौतियों के लिए अपनी टीम को नए सिरे से तैयार करने का संकेत दिया है।
कांग्रेस की नजर विधानसभा चुनावों पर
पंजाब में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव को देखते हुए पार्टी के लिए यह बदलाव खास महत्व रखता है। कांग्रेस को आम आदमी पार्टी और अन्य राजनीतिक दलों से मुकाबला करना होगा। ऐसे में संगठन की एकजुटता चुनावी रणनीति का अहम हिस्सा होगी।
पार्टी नेतृत्व के सामने अब यह साबित करने की चुनौती है कि नए प्रभारी के जरिए संगठन के भीतर चल रही खींचतान को कम किया जा सकता है। सचिन पायलट को स्थानीय नेताओं की नाराजगी दूर करने और कार्यकर्ताओं में चुनावी उत्साह पैदा करने पर भी ध्यान देना होगा।
बदलाव कितना असरदार होगा, यह आगे दिखेगा
कांग्रेस का यह संगठनात्मक बदलाव पार्टी की चुनावी रणनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण है। पंजाब में प्रभारी बदलने का फैसला जहां गुटबाजी को साधने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है, वहीं इससे पार्टी के सामने नई चुनौतियां भी खड़ी हो सकती हैं।

भूपेश बघेल के पास पहले से राज्य संगठन की जानकारी थी, जबकि सचिन पायलट को अब कम समय में पंजाब की राजनीतिक परिस्थितियों और संगठन की अंदरूनी स्थिति को समझना होगा। आने वाले महीनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पायलट अलग-अलग गुटों को साथ लाकर कांग्रेस को चुनावी मुकाबले के लिए कितनी मजबूती से तैयार कर पाते हैं।
राज कुमार की रिपोर्ट
