केतन अग्रवाल हत्याकांड: सिया गोयल के वकील को लेकर विवाद, भाई को 10 करोड़ का नोटिस
देशभर में सुर्खियां बटोर रहे केतन अग्रवाल हत्याकांड में अब एक नया कानूनी विवाद सामने आया है।
देशभर में सुर्खियां बटोर रहे केतन अग्रवाल हत्याकांड में अब एक नया कानूनी विवाद सामने आया है। अब तक यह मामला हत्या की साजिश, पुलिस जांच और आरोपियों की भूमिका तक सीमित था, लेकिन अब इस केस में आरोपी सिया गोयल का प्रतिनिधित्व करने वाले वकील को लेकर भी विवाद गहरा गया है।
मुख्य सवाल यह है कि सिया गोयल का वास्तविक वकील कौन है? इसी मुद्दे पर पुणे के अधिवक्ता आशुतोष श्रीवास्तव और अधिवक्ता विपुल दुशिंग के बीच कानूनी टकराव की स्थिति बन गई है। इतना ही नहीं, आशुतोष श्रीवास्तव ने सिया के भाई साहिल गोयल को 10 करोड़ रुपये का मानहानि नोटिस भी भेज दिया है।
क्या है केतन अग्रवाल हत्याकांड?
पुलिस के अनुसार, 18 जून को पुणे के लोहागढ़ किले के पास हुई घटना में सिया गोयल और उसके कथित प्रेमी चेतन चौधरी पर आरोप है कि दोनों ने मिलकर सिया के मंगेतर केतन अग्रवाल को गहरी खाई में धक्का देकर उसकी हत्या कर दी।
घटना सामने आने के बाद पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। शुरुआती जांच में कई ऐसे तथ्य सामने आए, जिनके आधार पर पुलिस ने इसे पूर्व नियोजित हत्या की आशंका के तहत जांचना शुरू किया। फिलहाल दोनों आरोपी पुलिस हिरासत में हैं और मामले की जांच जारी है।
सिया गोयल की पैरवी को लेकर क्यों खड़ा हुआ विवाद?
इस हाई-प्रोफाइल मामले में नया मोड़ तब आया जब सिया गोयल की ओर से अदालत में पेश होने वाले वकील को लेकर विवाद शुरू हो गया।
अधिवक्ता आशुतोष श्रीवास्तव का दावा है कि सिया गोयल ने स्वयं उन्हें अपना अधिवक्ता नियुक्त किया है। उनके अनुसार, सिया ने विधिवत कानूनी दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कर उन्हें अपनी ओर से अदालत में पैरवी करने का अधिकार दिया था।
दूसरी ओर, सिया के भाई साहिल गोयल का कहना है कि परिवार ने अधिवक्ता विपुल दुशिंग को सिया की ओर से मुकदमा लड़ने के लिए नियुक्त किया है। उनका दावा है कि आशुतोष श्रीवास्तव को परिवार ने कभी अधिकृत नहीं किया।
यही विवाद अब कानूनी संघर्ष का रूप ले चुका है।
अदालत में सिया गोयल ने क्या कहा?
मामले ने उस समय और तूल पकड़ लिया जब अदालत में पेशी के दौरान स्वयं सिया गोयल ने कहा कि आशुतोष श्रीवास्तव उनके वकील नहीं हैं।
सिया ने अदालत में स्पष्ट रूप से कहा कि उनकी ओर से अधिवक्ता विपुल दुशिंग पेश हो रहे हैं और वही उनके अधिकृत वकील हैं।
सिया के इस बयान के बाद यह विवाद और गहरा गया कि यदि पहले किसी दस्तावेज के माध्यम से अधिवक्ता नियुक्त किए गए थे, तो अब उनकी वैधता क्या है और अदालत किसे अधिकृत प्रतिनिधि मानेगी।
10 करोड़ रुपये का मानहानि नोटिस क्यों भेजा गया?
सिया के भाई साहिल गोयल द्वारा मीडिया में दिए गए बयान के बाद अधिवक्ता आशुतोष श्रीवास्तव ने उनके खिलाफ कड़ा रुख अपनाया।
श्रीवास्तव का आरोप है कि साहिल ने सार्वजनिक रूप से यह कहकर उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाया कि उन्हें परिवार ने वकील नियुक्त नहीं किया और वह बिना अधिकार के इस मामले में पैरवी कर रहे हैं।
इसी आधार पर उन्होंने साहिल गोयल को 10 पन्नों का कानूनी नोटिस भेजा है।
नोटिस में कहा गया है कि चूंकि सिया गोयल बालिग हैं, इसलिए उन्हें अपनी पसंद का अधिवक्ता नियुक्त करने का पूरा कानूनी अधिकार है। यदि उन्होंने स्वयं आशुतोष श्रीवास्तव को अधिकृत किया था, तो परिवार का इस नियुक्ति पर आपत्ति जताना उचित नहीं माना जा सकता।
नोटिस में रखी गईं ये प्रमुख मांगें
आशुतोष श्रीवास्तव की ओर से भेजे गए कानूनी नोटिस में कई शर्तें रखी गई हैं। इनमें प्रमुख रूप से कहा गया है कि—
- साहिल गोयल 48 घंटे के भीतर लिखित रूप से बिना शर्त माफी मांगें।
- मीडिया, सोशल मीडिया और यूट्यूब पर दिए गए कथित आपत्तिजनक बयान वाले वीडियो हटाए जाएं।
- सात दिनों के भीतर 10 करोड़ रुपये का मानहानि हर्जाना अदा किया जाए।
- भविष्य में इस प्रकार के बयान देने से परहेज किया जाए।
यदि इन शर्तों का पालन नहीं किया जाता है तो आगे कानूनी कार्रवाई किए जाने की बात भी नोटिस में कही गई है।
हत्या की जांच में पुलिस को क्या-क्या मिला?
इस बीच पुलिस हत्या की जांच को तेजी से आगे बढ़ा रही है। हाल ही में अदालत ने सिया गोयल और चेतन चौधरी की पुलिस हिरासत पांच दिन के लिए और बढ़ा दी है।
पुलिस ने अदालत को बताया कि जांच अभी अधूरी है और कई महत्वपूर्ण सबूत जुटाने बाकी हैं।
जांच अधिकारियों के अनुसार, सिया गोयल पर आरोप है कि उन्होंने केतन अग्रवाल का पासपोर्ट फाड़कर जला दिया था। पुलिस अब उसके अवशेष बरामद करने का प्रयास कर रही है ताकि संभावित साक्ष्य सुरक्षित किए जा सकें।
इसके अलावा पुलिस यह भी जांच रही है कि घटना के बाद चेतन चौधरी ने अपने कपड़े कहां बदले और वे कपड़े फिलहाल कहां हैं। जांच दल घटनास्थल से लेकर आरोपियों की गतिविधियों तक पूरे घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ने में जुटा है।
कॉल रिकॉर्ड और डिजिटल साक्ष्यों की भी हो रही जांच
जांच एजेंसियां अब डिजिटल साक्ष्यों पर भी विशेष ध्यान दे रही हैं। पुलिस घटना के बाद सिया गोयल और चेतन चौधरी के बीच हुई कथित फोन बातचीत, मोबाइल लोकेशन, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच कर रही है।
अधिकारियों का मानना है कि इन डिजिटल रिकॉर्ड से घटना की योजना, आरोपियों की गतिविधियों और हत्या के बाद की परिस्थितियों को समझने में महत्वपूर्ण मदद मिल सकती है।
कानूनी विशेषज्ञ क्या मानते हैं?
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यदि कोई आरोपी बालिग है और मानसिक रूप से सक्षम है, तो उसे अपनी पसंद का अधिवक्ता चुनने का अधिकार प्राप्त होता है। हालांकि यदि एक से अधिक वकील अपनी नियुक्ति का दावा करते हैं, तो अंतिम निर्णय अदालत में प्रस्तुत वैध दस्तावेजों और आरोपी की स्पष्ट सहमति के आधार पर होता है।
ऐसे मामलों में अदालत यह सुनिश्चित करती है कि आरोपी की कानूनी सहायता का अधिकार सुरक्षित रहे और किसी प्रकार की प्रक्रिया संबंधी त्रुटि न हो।
केतन अग्रवाल हत्याकांड अब केवल हत्या की जांच तक सीमित नहीं रह गया है। एक ओर पुलिस वैज्ञानिक और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर पूरे घटनाक्रम की तह तक पहुंचने की कोशिश कर रही है, वहीं दूसरी ओर आरोपी सिया गोयल की कानूनी पैरवी को लेकर नया विवाद भी चर्चा का विषय बन गया है।
आने वाले दिनों में अदालत के समक्ष यह स्पष्ट हो सकता है कि सिया गोयल का अधिकृत अधिवक्ता कौन होगा। वहीं पुलिस की जांच और फोरेंसिक रिपोर्ट इस बहुचर्चित मामले की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकती है।
भूमि आर्या की रिपोर्ट
