तेजप्रताप को जान का खतरा, कहा- मुझे धमकी मिली, जयचंद मेरी हत्या करवा देंगे

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तेजप्रताप को धमकी का दावा, बोले- जयचंद हत्या करवा देंगे

निष्कर्ष भारत, संवाददाता पटना। तेजप्रताप यादव ने खुद को धमकी मिलने और अपनी जान को खतरा होने का दावा किया है। जनशक्ति जनता दल के प्रमुख तेजप्रताप यादव इन दिनों ‘भोजपुरी बवाल’ शो में नजर आ रहे हैं। शो के दौरान उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन, परिवार और भाई तेजस्वी यादव के साथ रिश्ते को लेकर खुलकर बात की। इसी दौरान उन्होंने दावा किया कि उन्हें कई बार धमकियां मिल चुकी हैं और ‘जयचंद’ उनकी हत्या करवा सकते हैं। तेजप्रताप ने राजद के भीतर कथित साजिश और अपने परिवार में आए राजनीतिक मतभेदों को लेकर भी कई गंभीर आरोप लगाए। हालांकि, उनके इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

धमकी को लेकर तेजप्रताप का बड़ा दावा

तेजप्रताप यादव ने बातचीत के दौरान कहा कि उन्हें धमकी मिली है और उन्हें आशंका है कि जयचंद उनकी हत्या करवा देंगे। उन्होंने राजद के भीतर कुछ लोगों पर परिवार को एकजुट नहीं रहने देने का आरोप लगाया।

तेजप्रताप ने कहा कि राजद में ‘असुरी मानसिकता’ के लोग आ गए हैं। उनके मुताबिक, ऐसे लोगों ने भाई-भाई के बीच बंटवारा कर दोनों को दूर कर दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग लगातार षड्यंत्र कर रहे हैं और नहीं चाहते कि वह और तेजस्वी यादव एक साथ आएं।

हालांकि, तेजप्रताप ने जिस ‘जयचंद’ का जिक्र किया, उसकी पहचान उन्होंने स्पष्ट रूप से नहीं बताई। उनके बयान में यह नाम राजद के भीतर कथित रूप से प्रभाव रखने वाले व्यक्ति या समूह के संदर्भ में आया।

तेजस्वी को लेकर भी बोले तेजप्रताप

तेजप्रताप यादव ने अपने छोटे भाई तेजस्वी यादव के साथ रिश्ते को लेकर भी कई बातें साझा कीं। उन्होंने कहा कि दोनों भाइयों की उम्र में करीब एक साल का अंतर है। बचपन में दोनों भाई से ज्यादा दोस्त की तरह रहते थे और एक-दूसरे को सलाह भी देते थे।

उन्होंने कहा कि पहले दोनों एक-दूसरे की सलाह मानते थे, लेकिन अब परिस्थितियां बदल गई हैं। तेजप्रताप ने दावा किया कि तेजस्वी को सत्ता और संगठन में पावर मिला हुआ है, इसलिए वह कुछ बातों को समझ नहीं पा रहे हैं।

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तेजप्रताप ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें कई बार पार्टी की बैठकों में नहीं बुलाया जाता था। उनके मुताबिक, संगठन में ऐसे लोग सक्रिय हो गए थे जो दोनों भाइयों को एक नहीं होने देना चाहते थे।

धमकी और ‘जयचंद’ पर फिर साधा निशाना

जब तेजप्रताप से पूछा गया कि अगर वह कथित ‘जयचंद’ को पहचान पा रहे थे तो तेजस्वी उन्हें क्यों नहीं पहचान पाए, इस पर उन्होंने कहा कि तेजस्वी को पावर मिला हुआ था। उनका दावा था कि इसी वजह से वह चीजों को ठीक से समझ नहीं पा रहे थे।

तेजप्रताप ने कहा कि लालू प्रसाद यादव के सामने भी ‘जयचंद’ पैर पर पैर चढ़ाकर बैठता है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इस व्यक्ति ने कई नए लोगों को पार्टी में एंट्री दिलाई और इसके लिए उनके पिता लालू प्रसाद यादव से सलाह नहीं ली गई।

तेजप्रताप के मुताबिक, जनता भी पार्टी में हुए इन बदलावों और कथित गतिविधियों से नाराज है। हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित लोगों या राजद की ओर से प्रतिक्रिया का उल्लेख उनके दिए गए बयान में नहीं है।

बचपन की यादों में लौटे तेजप्रताप

राजनीतिक आरोपों के बीच तेजप्रताप यादव ने अपने बचपन की कई यादें भी साझा कीं। उन्होंने बताया कि बचपन में उन्हें राजनीति की कोई समझ नहीं थी। वह मुख्यमंत्री आवास में दूसरे बच्चों की तरह खेलते और शरारत करते थे।

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उन्होंने बताया कि वह मुख्यमंत्री आवास में कीचड़ में लोटकर खेला करते थे और अपने बचपन को पूरी तरह जिया है। तेजप्रताप ने कहा कि वह बचपन में तीर-धनुष बनाकर खेलते थे और पेड़ों पर निशाना लगाने की प्रैक्टिस करते थे।

अपने बचपन के खेलों का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि वह राम बनते थे, जबकि तेजस्वी लक्ष्मण की भूमिका निभाते थे। दोनों भाइयों के बचपन की यह तस्वीर उनके मौजूदा राजनीतिक रिश्ते से बिल्कुल अलग नजर आती है।

मां राबड़ी देवी को लेकर कही भावुक बात

तेजप्रताप ने अपनी मां राबड़ी देवी को लेकर भी भावुक बातें कहीं। उन्होंने बताया कि बचपन में उनकी मां की चिंता रहती थी कि वह स्कूल जाएं और अच्छी तरह पढ़ाई करें, क्योंकि वह अक्सर स्कूल बंक कर देते थे।

तेजप्रताप के अनुसार, अब परिस्थितियां बदल गई हैं। उन्होंने अपना अलग संगठन बना लिया है, इसलिए उनकी मां को इस बात की चिंता रहती है कि वह अकेले सब कुछ कैसे संभालेंगे।

उन्होंने कहा कि उनकी मां उन्हें अकेला देख रही हैं और कोई उनके साथ नहीं है। इसी वजह से राबड़ी देवी कभी-कभी उनके लिए खाना भी भिजवा देती हैं। तेजप्रताप ने खुद को परिवार का सबसे पसंदीदा बच्चा बताते हुए कहा कि उनके पिता उन्हें प्यार से ‘तेजू’ बुलाते थे।

कभी दोस्त जैसे थे तेजप्रताप और तेजस्वी

तेजप्रताप ने तेजस्वी यादव के साथ पुराने रिश्ते को याद करते हुए कहा कि दोनों भाइयों के बीच हमेशा दोस्ताना संबंध रहा है। उम्र में मामूली अंतर होने के कारण दोनों साथ-साथ बड़े हुए और एक-दूसरे के साथ अपनी बातें साझा करते थे।

उन्होंने कहा कि दोनों भाई एक-दूसरे को सलाह देते थे और जहां सलाह उचित लगती थी, वहां उसे मानते भी थे। तेजप्रताप का कहना है कि राजनीतिक परिस्थितियों ने दोनों भाइयों के बीच दूरी बढ़ा दी।

अब तेजप्रताप ने एक अलग संगठन बना लिया है और लगातार राजद के भीतर की कथित गतिविधियों पर सवाल उठा रहे हैं। उनके हालिया बयान से एक बार फिर लालू परिवार और बिहार की राजनीति में दोनों भाइयों के रिश्ते को लेकर चर्चा तेज हो सकती है।

जान का खतरा कितना गंभीर, यह जांच का विषय

तेजप्रताप यादव द्वारा जान को खतरा और धमकी मिलने का दावा गंभीर है। उन्होंने सार्वजनिक बातचीत में हत्या की आशंका जताई है, लेकिन उनके बयान के आधार पर यह स्पष्ट नहीं है कि धमकी किसने दी, कब दी गई और इस संबंध में कोई आधिकारिक शिकायत या सुरक्षा संबंधी कार्रवाई हुई है या नहीं।

फिलहाल उनके बयान ने राजनीतिक हलकों में चर्चा जरूर बढ़ा दी है। एक तरफ उन्होंने अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है, वहीं दूसरी ओर राजद के भीतर कथित साजिश, तेजस्वी यादव से दूरी और ‘जयचंद’ को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। इन दावों की वास्तविकता संबंधित जांच और पक्षों की प्रतिक्रिया सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगी।

Nishkarsh Bharat

राजकुमार सिंह की रिपोर्ट

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