नवादा में सस्ते लोन का झांसा, 5 साइबर ठग गिरफ्तार, पुलिस ने लोगों को किया सावधान

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नवादा में सस्ते लोन का झांसा देकर ठगी, 5 साइबर अपराधी गिरफ्तार

निष्कर्ष भारत, संवाददाता (नवादा)। नवादा जिले में साइबर ठगी के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। वारिसलीगंज थाना क्षेत्र के मीरचक चमर टोली में गुप्त सूचना के आधार पर छापेमारी कर पुलिस ने सस्ते लोन का झांसा देकर लोगों से ऑनलाइन ठगी करने वाले गिरोह का खुलासा किया। पुलिस ने मौके से आरोपियों के पास से आठ एंड्रॉयड मोबाइल फोन और कई फर्जी सिम कार्ड बरामद किए हैं।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान मीरचक चमर टोली निवासी जोगिंदर दास, गौतम कुमार, टुनटुन रविदास, प्रकाश रविदास और धर्मेंद्र रविदास के रूप में हुई है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह गिरोह कथित तौर पर देश के अलग-अलग हिस्सों में लोगों को फोन कर सस्ते लोन का लालच देता था और बाद में विभिन्न शुल्क के नाम पर पैसे वसूलता था।

नवादा में गुप्त सूचना पर पुलिस की छापेमारी

नवादा मामले का खुलासा करते हुए एसडीपीओ सुजय विद्यार्थी और वारिसलीगंज थानाध्यक्ष पंकज कुमार सैनी ने बताया कि वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर विशेष पुलिस टीम का गठन किया गया था। टीम को मीरचक चमर टोली में साइबर ठगी से जुड़े गिरोह के सक्रिय होने की सूचना मिली थी।

सूचना के आधार पर नवादा पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए बताए गए स्थान पर छापेमारी की। इस दौरान पांच संदिग्धों को पकड़ा गया। तलाशी के दौरान उनके कब्जे से आठ एंड्रॉयड मोबाइल फोन और कई फर्जी सिम कार्ड बरामद किए गए। बरामद सामान को पुलिस ने जांच के लिए अपने कब्जे में ले लिया है।

सस्ते लोन का ऑफर देकर बनाते थे शिकार

नवादा पुलिस की पूछताछ में आरोपियों ने कथित तौर पर बताया कि वे बजाज फाइनेंस और रिलायंस फाइनेंस जैसी प्रतिष्ठित कंपनियों के नाम का इस्तेमाल कर लोगों को ऑनलाइन सस्ता लोन दिलाने का झांसा देते थे।

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नवादा गिरोह के सदस्य फोन पर खुद को बैंक मैनेजर या किसी वित्तीय कंपनी का वरिष्ठ अधिकारी बताते थे। बातचीत के दौरान वे लोगों को कम ब्याज और आसान प्रक्रिया पर लोन दिलाने का भरोसा देते थे। आर्थिक जरूरत वाले लोग जब उनके झांसे में आ जाते थे, तब ठगी का अगला चरण शुरू होता था।

सोशल मीडिया से जुटाते थे मोबाइल नंबर

नवादा गिरोह के सदस्य संभावित पीड़ितों तक पहुंचने के लिए कस्टमर डेटा और फेसबुक जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करते थे। वहां से मोबाइल नंबर हासिल करने के बाद लोगों को फोन किया जाता था।

नवादा पुलिस के अनुसार, बातचीत के दौरान आरोपियों का मकसद पहले व्यक्ति का विश्वास जीतना होता था। इसके लिए वे खुद को किसी बैंक या वित्तीय कंपनी का अधिकारी बताकर लोन स्वीकृति की प्रक्रिया शुरू करने का दावा करते थे।

दस्तावेज मिलते ही शुरू होती थी ठगी

भरोसा कायम होने के बाद पीड़ितों से महत्वपूर्ण व्यक्तिगत दस्तावेज मांगे जाते थे। इनमें पहचान पत्र, पैन कार्ड, बैंक पासबुक की फोटोकॉपी, पासपोर्ट साइज फोटो और ईमेल आईडी शामिल थे। दस्तावेज हासिल करने के बाद आरोपियों की ओर से लोन स्वीकृति, प्रोसेसिंग फीस और अन्य शुल्क के नाम पर अलग-अलग रकम मांगी जाती थी। पुलिस के मुताबिक, इसी प्रक्रिया के जरिए लोगों को ऑनलाइन पैसे भेजने के लिए तैयार किया जाता था।

नवादा पुलिस खंगाल रही साइबर नेटवर्क

पूछताछ के दौरान पांचों आरोपियों ने कथित तौर पर लंबे समय से इस तरह की ठगी करने की बात स्वीकार की है। पुलिस के अनुसार, फर्जी सिम कार्ड का इस्तेमाल कर गिरोह देश के विभिन्न हिस्सों में लोगों से संपर्क करता था। आरोपियों ने दर्जनों लोगों से लाखों रुपये की ठगी किए जाने की जानकारी दी है। हालांकि, पुलिस अभी ठगी की कुल रकम का सटीक आकलन कर रही है। इसके लिए गिरफ्तार आरोपियों के बैंक खातों और बरामद मोबाइल फोन की गहन जांच की जा रही है।

मोबाइल और CDR से खुलेगा पूरा राज

वारिसलीगंज पुलिस अब बरामद मोबाइल फोन के कॉल डिटेल रिकॉर्ड यानी CDR की जांच कर रही है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपियों ने किन-किन लोगों से संपर्क किया था और गिरोह के नेटवर्क में कौन-कौन लोग शामिल हैं।

बैंक खातों की जांच से ठगी की रकम के लेन-देन का भी पता लगाने की कोशिश की जा रही है। पुलिस को उम्मीद है कि इन तकनीकी जांचों के आधार पर साइबर ठगी के पूरे नेटवर्क की कड़ियां सामने आ सकती हैं।

नवादा में अन्य सहयोगियों की तलाश जारी

एसपी अभिनव धीमान के निर्देश पर पुलिस गिरोह से जुड़े अन्य संभावित सहयोगियों की तलाश कर रही है। पुलिस टीम आरोपियों से पूछताछ के आधार पर अलग-अलग स्थानों पर छापेमारी कर रही है। जांच का दायरा केवल गिरफ्तार पांच आरोपियों तक सीमित नहीं है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि फर्जी सिम कार्ड कहां से हासिल किए जाते थे, लोगों का डेटा किस माध्यम से मिलता था और ठगी की रकम किन खातों में पहुंचाई जाती थी।

पुलिस ने लोगों से की सावधानी बरतने की अपील

मामले के बाद जिला पुलिस प्रशासन ने आम लोगों से साइबर ठगी को लेकर सतर्क रहने की अपील की है। पुलिस ने कहा है कि फोन पर किसी अज्ञात व्यक्ति को निजी दस्तावेज, बैंक संबंधी जानकारी या अन्य वित्तीय विवरण साझा नहीं करना चाहिए। सस्ते लोन के नाम पर आने वाले फोन कॉल और ऑनलाइन विज्ञापनों को लेकर भी सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

किसी कंपनी के नाम पर लोन का ऑफर मिलने पर उसकी आधिकारिक जानकारी की पुष्टि करना जरूरी है। वारिसलीगंज में हुई इस कार्रवाई से एक सक्रिय साइबर ठगी नेटवर्क का खुलासा हुआ है। पुलिस की आगे की जांच में यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि गिरोह ने अब तक कितने लोगों को अपना शिकार बनाया और इसके पीछे कितने अन्य लोग सक्रिय हैं।

Nishkarsh Bharat

राजकुमार सिंह की रिपोर्ट

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