सम्राट चौधरी ने कहीं बड़ी, बोले- नीतीश आदरणीय, लेकिन उन्होंने मुझे सीएम नहीं बनाया, ये शीर्ष नेतृत्व का फैसला

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नीतीश कुमार को सम्राट चौधरी ने बताया आदरणीय, CM चयन पर कही बड़ी बात

निष्कर्ष भारत, संवाददाता (पटना)। नीतीश कुमार सम्राट चौधरी के राजनीतिक रिश्तों को लेकर बिहार की सियासत में अक्सर चर्चा होती रही है। अब मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने खुद दोनों नेताओं के संबंधों और उन्हें मुख्यमंत्री बनाए जाने को लेकर चल रही अटकलों पर स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार एनडीए के सम्मानित और आदरणीय नेता हैं, लेकिन भाजपा का मुख्यमंत्री कौन होगा, इसका फैसला पार्टी का शीर्ष नेतृत्व करता है।

उन्होंने इस धारणा को खारिज किया कि नीतीश कुमार या किसी सहयोगी दल के कहने पर उन्हें मुख्यमंत्री बनाया गया। सम्राट चौधरी ने एक पॉडकास्ट में यह बात कही। मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के करीब पौने पांच महीने बाद उनका यह बयान बिहार में एनडीए के भीतर नेतृत्व को लेकर चलने वाली चर्चाओं के बीच आया है।

नीतीश ने नहीं, BJP नेतृत्व ने चुना

सम्राट चौधरी ने साफ किया कि नीतीश कुमार के संबंध एनडीए से हैं और वह गठबंधन के सम्मानित नेता हैं। लेकिन भाजपा का मुख्यमंत्री कौन बनेगा, यह पार्टी का आंतरिक विषय है। इसका निर्णय भाजपा का शीर्ष नेतृत्व ही करता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि नीतीश कुमार का विशेष आशीर्वाद उन पर रहा है और आज भी है, लेकिन उनके मुख्यमंत्री बनने का निर्णय शीर्ष नेतृत्व का था। इस बयान के जरिए उन्होंने उन अटकलों पर विराम लगाने की कोशिश की, जिनमें कहा जाता रहा था कि बिहार में भाजपा की ओर से मुख्यमंत्री पद के लिए उनका चयन नीतीश कुमार की सहमति या पसंद के आधार पर हुआ।

सम्राट बोले- कभी नहीं सोचा था CM बनूंगा

मुख्यमंत्री पद तक पहुंचने को लेकर सम्राट चौधरी ने कहा कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि वह बिहार के मुख्यमंत्री बनेंगे। उनके मुताबिक, भाजपा ने उन्हें राजनीतिक जीवन में लगातार जिम्मेदारियां दी हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी ने उन्हें विधायक, विधान परिषद सदस्य, मंत्री और उपमुख्यमंत्री बनने का अवसर दिया। इसके अलावा वह भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और विधान परिषद में नेता की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं।

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सम्राट के मुताबिक, मुख्यमंत्री पद भी उनके लिए पार्टी की ओर से मिली एक बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने इस पद को व्यक्तिगत उपलब्धि के बजाय संगठन की ओर से दिए गए दायित्व के तौर पर पेश किया।

नीतीश के साथ 30 साल पुराना रिश्ता

नीतीश कुमार के साथ अपने संबंधों का जिक्र करते हुए सम्राट चौधरी ने कहा कि वह पिछले करीब 30 वर्षों से उन्हें जानते और उनके साथ राजनीतिक रूप से जुड़े रहे हैं। इस लंबे राजनीतिक सफर में दोनों के रिश्तों में उतार-चढ़ाव भी आए।

उन्होंने माना कि उनके संबंध हमेशा एक जैसे नहीं रहे और इनमें खट्टे-मीठे दौर भी आए हैं। इसके बावजूद सम्राट ने नीतीश कुमार के साथ अपने रिश्ते को व्यक्तिगत दुश्मनी से अलग रखा।

नीतीश की NDA में वापसी पर क्या बोले सम्राट

साल 2024 में नीतीश कुमार के एक बार फिर एनडीए में लौटने के फैसले पर भी सम्राट चौधरी ने अपनी भूमिका स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि जब भाजपा ने तय किया कि जेडीयू के साथ गठबंधन करना है और बिहार के विकास के लिए मिलकर काम करना है, तब वह नीतीश कुमार के साथ मजबूती से खड़े हो गए।

सम्राट के मुताबिक, नीतीश कुमार के साथ उनकी कोई व्यक्तिगत दुश्मनी नहीं थी। राजनीतिक परिस्थितियों के कारण अलग-अलग समय में मतभेद रहे, लेकिन गठबंधन का फैसला होने के बाद उन्होंने उसे स्वीकार किया और एनडीए के साथ काम किया।

नीतीश को बताया अभिभावक और पिता समान

सम्राट चौधरी ने नीतीश कुमार के साथ अपने व्यक्तिगत रिश्ते को लेकर भी खुलकर बात की। उन्होंने उन्हें अभिभावक और पिता समान बताया। हालांकि, जब उनसे पूछा गया कि क्या वह नीतीश कुमार को अपना राजनीतिक गुरु मानते हैं, तो उन्होंने इससे अलग जवाब दिया। सम्राट ने कहा कि नीतीश कुमार उनके लिए पिता तुल्य जरूर हैं, लेकिन उनके गुरु उनके अपने पिता शकुनी चौधरी रहे हैं। इस बयान से उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन में पिता की भूमिका को भी प्रमुखता से रेखांकित किया।

सम्राट के बयान के राजनीतिक मायने

सम्राट चौधरी का यह बयान इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि बिहार में लंबे समय तक नीतीश कुमार और भाजपा के बीच सत्ता-संतुलन को लेकर राजनीतिक चर्चाएं होती रही हैं। एनडीए सरकार में नेतृत्व को लेकर अलग-अलग दौर में कई तरह की अटकलें भी सामने आती रही हैं। मुख्यमंत्री ने अपने बयान में एक तरफ नीतीश कुमार के प्रति सम्मान और व्यक्तिगत संबंधों को स्पष्ट किया, तो दूसरी तरफ भाजपा के भीतर मुख्यमंत्री चयन की प्रक्रिया को पार्टी के शीर्ष नेतृत्व का निर्णय बताया। इससे उन्होंने दोनों पक्षों के बीच भूमिका और अधिकार के अंतर को भी साफ करने की कोशिश की।

BJP नेतृत्व के फैसले पर सम्राट का भरोसा

सम्राट चौधरी के बयान का एक अहम पहलू यह भी है कि उन्होंने मुख्यमंत्री पद मिलने का श्रेय किसी सहयोगी दल या नेता को देने के बजाय भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व के फैसले को प्रमुखता दी। उन्होंने अपने राजनीतिक सफर में पार्टी की ओर से मिली अलग-अलग जिम्मेदारियों का उल्लेख करते हुए कहा कि भाजपा ने उन्हें लगातार आगे बढ़ने के अवसर दिए।

उनका कहना है कि मुख्यमंत्री बनना भी इसी राजनीतिक सफर का हिस्सा है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि बिहार में एनडीए के भीतर उनकी प्राथमिकता गठबंधन के साथ मिलकर काम करना और राज्य के विकास पर ध्यान देना है।

रिश्ते व्यक्तिगत, फैसला संगठन का

सम्राट चौधरी के पूरे बयान का सार यही है कि नीतीश कुमार के साथ उनके संबंध सम्मान और पारिवारिक भावनाओं से जुड़े हैं, लेकिन भाजपा के संगठनात्मक फैसलों को अलग नजरिए से देखा जाना चाहिए। नीतीश कुमार को उन्होंने आदरणीय और पिता समान बताया, जबकि मुख्यमंत्री पद पर उनकी नियुक्ति को भाजपा के शीर्ष नेतृत्व का फैसला बताया।

बिहार की राजनीति में यह बयान आने वाले समय में एनडीए के भीतर नेतृत्व और आपसी रिश्तों को लेकर होने वाली चर्चाओं में अहम संदर्भ बन सकता है। खासकर इसलिए कि सम्राट चौधरी ने पहली बार इतने स्पष्ट शब्दों में बताया है कि उनके मुख्यमंत्री बनने के पीछे किसे निर्णायक माना जाना चाहिए और नीतीश कुमार के साथ उनके रिश्ते की वास्तविक प्रकृति क्या है।

Nishkarsh Bharat

राजकुमार सिंह की रिपोर्ट

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