बख्तियारपुर का बदलेगा नाम? सीएम सम्राट के बयान से हलचल, सियासी चर्चाओं का बाजार गर्म
बख्तियारपुर का नाम बदलने पर सम्राट चौधरी के बयान से सियासी हलचल
निष्कर्ष भारत, संवाददाता (पटना)। बख्तियारपुर का नाम बदलने को लेकर बिहार की सियासत में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के एक बयान के बाद पटना जिले के इस शहर के नाम परिवर्तन का पुराना मुद्दा फिर चर्चा के केंद्र में आ गया है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि फिलहाल सरकार के स्तर पर नाम बदलने का कोई तत्काल प्रस्ताव नहीं है, लेकिन वह व्यक्तिगत तौर पर बख्तियारपुर का नाम बदले जाने के पक्ष में हैं।
उन्होंने यह भी संकेत दिया कि एक दिन शहर का नाम बदला जा सकता है। मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। सवाल उठ रहा है कि क्या आने वाले समय में बख्तियारपुर का नाम बदलकर कोई नया नाम रखा जाएगा या यह मुद्दा फिलहाल बयान और राजनीतिक बहस तक ही सीमित रहेगा।
बख्तियारपुर पर सम्राट चौधरी का क्या बयान?
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने स्पष्ट किया कि बख्तियारपुर का नाम बदलने को लेकर अभी सरकार के स्तर पर कोई तत्काल प्रस्ताव नहीं है। हालांकि, उन्होंने अपनी व्यक्तिगत राय जाहिर करते हुए कहा कि वह नाम बदले जाने के पक्ष में हैं। उनके इस बयान को इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि बख्तियारपुर का संबंध बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से भी बेहद गहरा है।
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नीतीश कुमार का जन्म बख्तियारपुर में 1 मार्च 1951 को हुआ था। उनका पैतृक गांव कल्याण बिगहा है, जबकि बख्तियारपुर उनके राजनीतिक और व्यक्तिगत जीवन से लंबे समय से जुड़ा रहा है। पुराने चुनावी दस्तावेजों में भी बख्तियारपुर का पता दर्ज होने का उल्लेख मिलता है।
नीतीश के दौर में नहीं बदला बख्तियारपुर का नाम
बख्तियारपुर का नाम बदलने की मांग कई वर्षों से समय-समय पर उठती रही है। खास बात यह है कि बिहार की राजनीति में लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहे नीतीश कुमार के कार्यकाल में भी इस शहर का नाम नहीं बदला।
साल 2021 में जब नीतीश कुमार से बख्तियारपुर का नाम बदलने की मांग को लेकर सवाल किया गया था, तब उन्होंने इस विचार को खारिज कर दिया था। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा था कि नाम क्यों बदलेगा, क्योंकि बख्तियारपुर उनका जन्मस्थान है।
इस तरह एक तरफ नाम परिवर्तन की मांग लगातार उठती रही, वहीं दूसरी तरफ नीतीश कुमार खुद मुख्यमंत्री रहते हुए इस मुद्दे को आगे बढ़ाने के पक्ष में नहीं दिखे। अब सत्ता परिवर्तन के बाद सम्राट चौधरी के बयान ने इस पुराने विवाद को फिर राजनीतिक बहस में ला दिया है।
‘मगध द्वार’ नाम रखने का प्रस्ताव
बख्तियारपुर के नाम परिवर्तन की मांग को इस साल मई में नया जोर मिला था। उस समय बख्तियारपुर नगर परिषद की ओर से शहर का नाम बदलकर ‘मगध द्वार’ किए जाने का प्रस्ताव मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को भेजा गया था।
नगर परिषद की ओर से नाम बदलने के पीछे ऐतिहासिक तर्क दिया गया था। मौजूदा नाम को मुहम्मद बख्तियार खिलजी से जोड़ते हुए नए नाम की मांग की गई थी। हालांकि, इस प्रस्ताव पर सरकार की ओर से अभी तक नाम परिवर्तन की कोई औपचारिक घोषणा नहीं हुई है।
बख्तियारपुर के नाम पर इतिहास में मतभेद
बख्तियारपुर के नाम को लेकर सबसे अहम सवाल इसके ऐतिहासिक संबंध से जुड़ा है। यह दावा किया जाता रहा है कि शहर का नाम मुहम्मद बख्तियार खिलजी के नाम पर रखा गया था। हालांकि, उपलब्ध ऐतिहासिक स्रोत इस संबंध को पूरी तरह निर्णायक रूप से साबित नहीं करते।
कुछ ऐतिहासिक अध्ययनों में बख्तियारपुर के नाम को बख्तियार खिलजी के बिहार अभियान से जोड़ा गया है, जबकि कुछ इतिहासकार इस दावे को लेकर सावधानी बरतते हैं। यही वजह है कि शहर के नाम परिवर्तन की बहस में इतिहास का पहलू भी महत्वपूर्ण हो जाता है।

बख्तियार खिलजी का बिहार के इतिहास में जरूर महत्वपूर्ण और विवादित स्थान रहा है। उसके बिहार अभियान को 12वीं और 13वीं शताब्दी के संक्रमण काल से जोड़ा जाता है। नालंदा और ओदंतपुरी जैसे बौद्ध शिक्षा केंद्रों पर उसके हमलों का उल्लेख भी ऐतिहासिक स्रोतों में मिलता है।
पहले भी उठती रही है नाम बदलने की मांग
बख्तियारपुर का नाम बदलने की मांग कोई नई राजनीतिक पहल नहीं है। वर्ष 2018 में केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने भी इस मुद्दे को उठाया था। इसके बाद 2019 में तत्कालीन भाजपा सांसद गोपाल नारायण सिंह ने राज्यसभा में बख्तियारपुर रेलवे स्टेशन का नाम बदलकर नालंदा या राजगीर जैसे ऐतिहासिक नाम से करने की मांग की थी।
इससे पहले 2006 में भी बख्तियारपुर रेलवे स्टेशन के नाम परिवर्तन को लेकर केंद्र सरकार को पत्र भेजे जाने का उल्लेख मिलता है। हालांकि, इन प्रयासों के बावजूद नाम परिवर्तन का फैसला आगे नहीं बढ़ सका।
अब नए बयान से फिर बढ़ी चर्चा
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के ताजा बयान के बाद बख्तियारपुर के नाम परिवर्तन का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक चर्चा में है। एक ओर नगर परिषद पहले ही ‘मगध द्वार’ नाम का प्रस्ताव दे चुकी है, तो दूसरी ओर मुख्यमंत्री ने व्यक्तिगत रूप से नाम बदलने के समर्थन की बात कही है।

हालांकि, सरकार के स्तर पर अभी कोई तत्काल प्रस्ताव नहीं होने की बात भी मुख्यमंत्री ने साफ की है। इसलिए फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि शहर का नाम वास्तव में कब और किस नाम से बदला जाएगा।
बख्तियारपुर के नाम को लेकर आगे क्या?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या ‘मगध द्वार’ के प्रस्ताव को सरकार आगे बढ़ाएगी? क्या नाम परिवर्तन के लिए औपचारिक प्रक्रिया शुरू होगी? या फिर यह मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक बहस तक सीमित रह जाएगा?
सरकार की ओर से नाम बदलने की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। लेकिन मुख्यमंत्री के बयान ने वर्षों पुराने मुद्दे को नई राजनीतिक ऊर्जा जरूर दे दी है। बख्तियारपुर का मामला इसलिए भी संवेदनशील और चर्चित है क्योंकि यह शहर नीतीश कुमार के जन्मस्थान और उनके लंबे राजनीतिक सफर से गहराई से जुड़ा हुआ है। ऐसे में आने वाले दिनों में सरकार की ओर से इस मुद्दे पर क्या कदम उठाया जाता है, इस पर बिहार की राजनीति के साथ-साथ बख्तियारपुर के स्थानीय लोगों की भी नजर रहेगी।
राजकुमार सिंह की रिपोर्ट
