बिहार में कुलपति पद के लिए क्यों मची होड़? एक सीट पर आए सैकड़ों आवेदन, जानें पूरा मामला
बिहार में कुलपति की 10 सीटों के लिए 600-800 आवेदन आए
निष्कर्ष भारत, संवाददाता (पटना)। बिहार कुलपति नियुक्ति की प्रक्रिया इस बार खास चर्चा में है। राज्य के 10 विश्वविद्यालयों में कुलपति की एक-एक सीट के लिए देशभर से बड़ी संख्या में आवेदन पहुंचे हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, अलग-अलग विश्वविद्यालयों में प्रत्येक कुलपति पद के लिए करीब 600 से 800 आवेदन प्राप्त हुए हैं। अब इन आवेदनों की स्क्रीनिंग की जाएगी और योग्यता के आधार पर उम्मीदवारों को आगे की प्रक्रिया के लिए शॉर्टलिस्ट किया जाएगा।
लोकभवन की ओर से 10 विश्वविद्यालयों में कुलपति नियुक्ति के लिए पांच सर्च कमेटियां बनाई गई हैं। अब इन कमेटियों की ऑनलाइन बैठक में स्क्रीनिंग की प्रक्रिया और आगे की रणनीति तय होगी। इसके बाद शॉर्टलिस्ट उम्मीदवारों के साथ बातचीत और चयन प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा।
एक कुलपति पद के लिए सैकड़ों दावेदार
कुलपति की एक सीट के लिए 600 से 800 आवेदन मिलने से इस बार प्रतिस्पर्धा काफी व्यापक हो गई है। राज्यपाल के अतिरिक्त मुख्य सचिव दीपक कुमार सिंह के मुताबिक आवेदकों की संख्या बड़ी है, लेकिन आवेदन कर देना और अंतिम रूप से पात्र होना दो अलग-अलग बातें हैं।
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स्क्रीनिंग के दौरान उम्मीदवारों की शैक्षणिक योग्यता, अनुभव और उपलब्धियों समेत निर्धारित मानकों की जांच होगी। इसके बाद ही यह स्पष्ट होगा कि प्राप्त आवेदनों में से कितने उम्मीदवार वास्तव में चयन प्रक्रिया के अगले चरण में पहुंचते हैं।
कुलपति पद के लिए IIT-NIT फैकल्टी भी मैदान में
इस बार आवेदन करने वालों में देश के प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थानों के फैकल्टी सदस्यों की भी बड़ी संख्या होने की जानकारी सामने आई है। IIT और NIT से जुड़े शिक्षाविदों की रुचि ने इस नियुक्ति प्रक्रिया को और महत्वपूर्ण बना दिया है।
दरअसल, कुलपति किसी विश्वविद्यालय के शीर्ष अकादमिक और प्रशासनिक पदों में से एक होता है। ऐसे में इस पद के लिए अलग-अलग विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों से अनुभवी शिक्षाविदों का आवेदन करना प्रक्रिया के दायरे को व्यापक बनाता है।
UPI नहीं, Samarth Portal से बदली आवेदन की तस्वीर
इस बार कुलपति नियुक्ति के लिए आवेदन की प्रक्रिया में भी बदलाव किया गया। आवेदन केंद्रीकृत Samarth Portal के माध्यम से मंगाए गए। इसका उद्देश्य देश के अलग-अलग हिस्सों में मौजूद योग्य उम्मीदवारों को एक साझा ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए आवेदन का अवसर देना था।
Samarth Portal के इस्तेमाल से उम्मीदवारों को अलग-अलग विश्वविद्यालयों के लिए आवेदन प्रक्रिया में बार-बार अलग व्यवस्था से गुजरने की जरूरत कम हुई। लोकभवन के अधिकारियों के अनुसार, व्यापक पहुंच और अधिक पारदर्शी आवेदन व्यवस्था भी बड़ी संख्या में आवेदन आने की एक वजह मानी जा रही है।
2013 की तुलना में इस बार कई गुना आवेदन
बिहार में कुलपति नियुक्ति के लिए इस बार मिले आवेदनों की संख्या पिछली बड़ी नियुक्ति प्रक्रिया के मुकाबले काफी अधिक बताई जा रही है। 2013 में 11 विश्वविद्यालयों में कुलपति नियुक्ति के लिए करीब 1,200 आवेदन प्राप्त हुए थे।

इसके मुकाबले इस बार केवल 10 विश्वविद्यालयों के लिए ही 6,000 से अधिक आवेदन मिलने की जानकारी सामने आई है। यानी विश्वविद्यालयों की संख्या कम होने के बावजूद आवेदन की संख्या में बड़ा अंतर दिखाई दे रहा है। हालांकि, मौजूदा आंकड़े आवेदन संख्या को दर्शाते हैं; अंतिम रूप से पात्र उम्मीदवारों की संख्या स्क्रीनिंग के बाद ही सामने आएगी।
पांच सर्च कमेटियां करेंगी कुलपति आवेदनों की स्क्रीनिंग
10 विश्वविद्यालयों के लिए कुल पांच सर्च कमेटियां गठित की गई हैं। इन कमेटियों के जरिए आवेदनों की स्क्रीनिंग और उम्मीदवारों की योग्यता का आकलन किया जाएगा। इस बार एक और बदलाव यह है कि अलग-अलग सर्च कमेटियों में राज्य सरकार की ओर से नामित सदस्य अलग-अलग होंगे।
वहीं, कुलाधिपति या UGC की ओर से नामित सदस्य राज्य के बाहर से होंगे। अधिकारियों के अनुसार, इन सदस्यों को शॉर्टलिस्ट उम्मीदवारों के साथ बातचीत के चरण में बुलाया जाएगा।
कुलपति चयन में अब आगे क्या होगा?
आवेदन प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब सबसे पहले स्क्रीनिंग का चरण आएगा। सर्च कमेटियां आवेदकों की योग्यता और उपलब्ध रिकॉर्ड की जांच करेंगी। इसके बाद निर्धारित मानकों पर खरे उतरने वाले उम्मीदवारों की सूची तैयार की जाएगी।
हर विश्वविद्यालय के लिए सर्च कमेटी तीन से पांच नामों का पैनल तैयार कर कुलाधिपति को भेजती है। इसके बाद नियुक्ति की प्रक्रिया आगे बढ़ती है। इसलिए अभी प्राप्त हजारों आवेदनों में से अंतिम चयन तक पहुंचने वाले नामों की संख्या काफी कम होगी।
20 मई से शुरू हुई थी नियुक्ति प्रक्रिया
राज्यपाल सचिवालय की ओर से इस नियुक्ति प्रक्रिया को चरणबद्ध तरीके से शुरू किया गया था। छह विश्वविद्यालयों में कुलपति नियुक्ति के लिए 20 मई को अधिसूचना जारी की गई थी। इसके बाद चार अन्य विश्वविद्यालयों के लिए 3 जून को आवेदन आमंत्रित किए गए। ऑनलाइन आवेदन जमा करने की अंतिम तारीख 30 जून निर्धारित की गई थी। आवेदन प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब पूरा फोकस स्क्रीनिंग और शॉर्टलिस्टिंग पर है।
14 विश्वविद्यालयों में प्रो-वीसी की भी तैयारी
कुलपति नियुक्ति के बाद बिहार के राज्य विश्वविद्यालयों में प्रो-वाइस चांसलर यानी प्रो-वीसी की नियुक्ति प्रक्रिया भी आगे बढ़नी है। राज्य के 14 विश्वविद्यालयों में प्रो-वीसी नियुक्ति के लिए जून में अधिसूचना जारी की गई थी।

हालांकि, फिलहाल प्रो-वीसी पदों के लिए आवेदन की प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है। लोकभवन के अधिकारियों का कहना है कि जब इन पदों के लिए आवेदन मांगे जाएंगे तो बड़ी संख्या में आवेदन आने की संभावना है।
कुलपति चयन में सर्च कमेटी की अहम भूमिका
बिहार राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम में किए गए संशोधनों के तहत कुलपति नियुक्ति के लिए सर्च कमेटी की व्यवस्था है। यही कमेटी प्राप्त आवेदनों की जांच के बाद योग्य उम्मीदवारों का पैनल तैयार करती है।
प्रक्रिया के अगले चरण में प्रत्येक विश्वविद्यालय के लिए तीन से पांच नामों का पैनल कुलाधिपति को भेजा जाता है। इसके बाद कुलाधिपति नियुक्ति की प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हैं।
अब नजर स्क्रीनिंग के नतीजों पर
बिहार के 10 राज्य विश्वविद्यालयों में कुलपति पदों के लिए हजारों आवेदन आने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि स्क्रीनिंग में कितने उम्मीदवार योग्य पाए जाते हैं और किन नामों को अंतिम पैनल के लिए चुना जाता है।
करीब 600 से 800 आवेदन प्रति विश्वविद्यालय की संख्या ने इस प्रक्रिया को बड़ा बना दिया है। लेकिन आवेदन की संख्या को अंतिम प्रतिस्पर्धा नहीं माना जा सकता। वास्तविक तस्वीर स्क्रीनिंग के बाद ही साफ होगी। अब सर्च कमेटियों की बैठक, आवेदनों की जांच और शॉर्टलिस्ट उम्मीदवारों के साथ बातचीत के बाद ही कुलपति नियुक्ति की प्रक्रिया अगले चरण में पहुंचेगी।
राजकुमार सिंह की रिपोर्ट
