बाढ़ पीड़ितों के खाते में पहुंची 7-7 हज़ार की राशि, सीएम ने किया ट्रांसफर, 8.27 लाख परिवारों को मिला लाभ
बिहार में 8.27 लाख बाढ़ पीड़ित परिवारों के खाते में पहुंची राहत राशि
निष्कर्ष भारत, संवाददाता (पटना)। बिहार बाढ़ पीड़ितों को 7000 रुपये की आर्थिक सहायता मंगलवार को राज्य सरकार ने सीधे उनके बैंक खातों में भेज दी। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने डीबीटी के माध्यम से राज्य के 8 लाख 27 हजार 472 बाढ़ प्रभावित परिवारों के खाते में 7-7 हजार रुपये की अनुग्रह सहायता राशि ट्रांसफर की। इस मद में सरकार की ओर से कुल 579.23 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। इस दौरान उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी भी मौजूद रहे।
सरकार की इस पहल से बाढ़ प्रभावित परिवारों को तत्काल आर्थिक मदद मिलने की उम्मीद है। राहत राशि ऐसे समय भेजी गई है, जब राज्य के कई हिस्सों में बाढ़ का असर अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है और कई नदियां अब भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं।
डीबीटी से सीधे खाते में पहुंची रकम
बाढ़ प्रभावित परिवारों की पहचान और पात्र लाभुकों की सूची तैयार करने के लिए आपदा प्रबंधन विभाग ने जिलों से रिपोर्ट मंगाई थी। अंचल अधिकारियों की रिपोर्ट के आधार पर प्रभावित परिवारों की सूची तैयार की गई। इसी सूची के अनुसार पात्र परिवारों के बैंक खातों में सहायता राशि भेजी गई।
सरकार का कहना है कि डीबीटी के जरिए भुगतान का उद्देश्य राहत राशि को सीधे लाभुकों तक पहुंचाना है। इससे बाढ़ के कारण आर्थिक संकट से जूझ रहे परिवारों को तत्काल सहायता मिल सकेगी। 7 हजार रुपये की यह राशि बाढ़ से प्रभावित परिवारों के लिए सरकार की ओर से दी जा रही अनुग्रह सहायता के तौर पर ट्रांसफर की गई है।
15 जिलों में बाढ़ का असर
इस साल गंगा, गंडक, कोसी, पुनपुन समेत कई नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी के कारण बिहार के 15 जिलों में बाढ़ की स्थिति बनी। सरकारी आंकड़ों के अनुसार इन जिलों के 88 प्रखंडों की 575 ग्राम पंचायतें प्रभावित हुई हैं। करीब 49.46 लाख की आबादी पर बाढ़ का असर पड़ा है। प्रभावित जिलों में पटना, भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, बेगूसराय, बक्सर, समस्तीपुर, मुंगेर, कटिहार, लखीसराय, खगड़िया, पूर्णिया, मधेपुरा और अरवल शामिल हैं।

इन इलाकों में कई परिवारों को घर, रोजगार, खेती और पशुधन से जुड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ा है। ऐसे में आर्थिक सहायता के साथ-साथ भोजन, आवास और स्वास्थ्य सुविधाओं की जरूरत भी बनी हुई है।
बाढ़ प्रभावित इलाकों में चल रहीं 1260 सामुदायिक रसोई
आर्थिक सहायता के अलावा सरकार की ओर से बाढ़ प्रभावित इलाकों में सामुदायिक रसोई भी संचालित की जा रही हैं। फिलहाल राज्य के अलग-अलग प्रभावित क्षेत्रों में 1260 सामुदायिक रसोई चल रही हैं।
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इन सामुदायिक रसोई के जरिए अब तक करीब 1 करोड़ 19 लाख 33 हजार लोगों को सुबह और शाम भोजन कराया जा चुका है। हाल ही में सामुदायिक रसोई की संख्या 1257 से बढ़ाकर 1260 की गई है। बाढ़ की स्थिति में सबसे बड़ी चुनौती प्रभावित परिवारों तक नियमित भोजन पहुंचाना होती है। ऐसे में सामुदायिक रसोई के जरिए प्रशासन लोगों को तत्काल खाद्य सहायता उपलब्ध कराने में जुटा है।
13 राहत शिविरों में 11 हजार से ज्यादा लोग
बाढ़ प्रभावित परिवारों के लिए राहत शिविर भी चलाए जा रहे हैं। वर्तमान में राज्य में 13 राहत शिविर संचालित हैं। इन शिविरों में 11,060 लोगों के रहने, भोजन, चिकित्सा और अन्य जरूरी सुविधाओं की व्यवस्था की गई है।
सरकारी स्तर पर राहत शिविरों की संख्या पहले 15 थी, जिसे अब घटाकर 13 कर दिया गया है। इससे संकेत मिलता है कि कुछ इलाकों में स्थिति में सुधार हुआ है और लोगों की वापसी शुरू हुई है। हालांकि, जिन क्षेत्रों में पानी और आवागमन की समस्या बनी हुई है, वहां प्रशासन की निगरानी जारी है।
नीतीश के बाद अब सम्राट सरकार की बाढ़ राहत पर फोकस
बिहार में बाढ़ राहत हमेशा से सरकारों के लिए बड़ी प्रशासनिक चुनौती रही है। मौजूदा समय में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली सरकार प्रभावित परिवारों तक आर्थिक सहायता पहुंचाने के साथ राहत व्यवस्था को जारी रखे हुए है।
इस बार सरकार ने पात्र परिवारों के खातों में सीधे 7 हजार रुपये भेजने का फैसला किया है। इसके साथ सामुदायिक रसोई, राहत शिविर और पशुचारे की व्यवस्था भी जारी है। यानी राहत अभियान केवल नकद सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रभावित लोगों की रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने पर भी जोर दिया जा रहा है।
पशुओं के लिए भी जारी है राहत अभियान
बाढ़ का असर केवल इंसानों तक सीमित नहीं रहता। ग्रामीण इलाकों में बड़ी संख्या में परिवार पशुपालन पर निर्भर हैं। ऐसे में पशुओं के लिए चारा उपलब्ध कराना भी राहत अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
सरकार के आंकड़ों के अनुसार अब तक 13,121 क्विंटल पशुचारा वितरित किया जा चुका है। बाढ़ प्रभावित इलाकों में पशुपालकों को अपने मवेशियों के लिए चारा उपलब्ध कराने में परेशानी न हो, इसके लिए प्रशासन की ओर से यह व्यवस्था की जा रही है।
कई नदियां अब भी खतरे के निशान से ऊपर
बाढ़ की स्थिति में सुधार के संकेत जरूर हैं, लेकिन खतरा पूरी तरह टला नहीं है। केंद्रीय जल आयोग और मौसम विभाग की रिपोर्ट के अनुसार भागलपुर के सुल्तानगंज में गंगा का जलस्तर घट रहा है। इसके बावजूद राज्य की कई प्रमुख नदियां अभी भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं।

कोसी का जलस्तर बलतारा और कुरसेला में, बूढ़ी गंडक खगड़िया में और गंगा पटना के दीघा घाट, गांधी घाट और हाथीदह में खतरे के निशान से ऊपर दर्ज किया गया है। इसके अलावा भागलपुर के कहलगांव, मुंगेर और श्रीपालपुर में पुनपुन, बेनीबाद में बागमती और दरौली में घाघरा का जलस्तर भी खतरे के निशान से ऊपर है। इस वजह से प्रशासन को राहत कार्य के साथ जलस्तर पर लगातार नजर रखनी पड़ रही है।
आर्थिक मदद के साथ राहत व्यवस्था भी जारी
बिहार बाढ़ पीड़ितों को 7000 रुपये की सहायता मिलने से प्रभावित परिवारों को तत्काल आर्थिक राहत मिलेगी। हालांकि, जिन क्षेत्रों में जलस्तर अभी सामान्य नहीं हुआ है, वहां लोगों की जरूरतें केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं हैं।
प्रशासन के सामने प्रभावित लोगों तक भोजन, सुरक्षित आवास, चिकित्सा सुविधा और पशुचारा पहुंचाने की चुनौती भी बनी हुई है। सरकार की ओर से सामुदायिक रसोई और राहत शिविरों के जरिए इन जरूरतों को पूरा करने का दावा किया जा रहा है।
अब नजर नदियों के जलस्तर पर
सरकार की ओर से राहत राशि का हस्तांतरण पूरा होने के बाद अब प्रशासन की नजर उन इलाकों पर है, जहां नदियां अभी भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। जलस्तर घटने के साथ राहत अभियान के अगले चरण में प्रभावित परिवारों की स्थिति का आकलन भी महत्वपूर्ण होगा।
8.27 लाख से अधिक परिवारों को 7 हजार रुपये की सहायता पहुंचाई गई है और करोड़ों रुपये की राहत राशि जारी की गई है। वहीं, लाखों लोगों को सामुदायिक रसोई के जरिए भोजन और हजारों लोगों को राहत शिविरों में सुविधाएं दी जा रही हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में बाढ़ की स्थिति कितनी तेजी से सामान्य होती है, इस पर पूरे राज्य की नजर बनी हुई है।
राजकुमार सिंह की रिपोर्ट
