प्रदेश में बारिश का येलो अलर्ट, वज्रपात की चेतावनी, कई जिलों में बाढ़ का खतरा
बिहार में बारिश तेज, नदियां उफान पर; कई जिलों में बाढ़ का खतरा बढ़ा।
निष्कर्ष भारत संवाददाता पटना। बिहार मौसम अलर्ट के बीच प्रदेश में मानसून एक बार फिर सक्रिय हो गया है। मौसम विभाग ने पटना समेत 14 जिलों में मंगलवार को बारिश को लेकर ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। इन जिलों में तेज बारिश के साथ आकाशीय बिजली गिरने की भी अलर्ट जारी किया गया है। वहीं, राज्य के कई हिस्सों में लगातार बारिश और नदियों के बढ़ते जलस्तर ने बाढ़ का खतरा बढ़ा दिया है।
मौसम विभाग के अनुसार, 31 अगस्त से 4 सितंबर तक बिहार के अलग-अलग हिस्सों में बारिश का दौर जारी रह सकता है। राजधानी पटना में भी बादल छाए रहने और कुछ इलाकों में तेज बारिश की संभावना जताई गई है। तापमान 32 से 34 डिग्री के आसपास रह सकता है। वही कई जिलों में बारिश का येलो अलर्ट की भी चेतावनी भी जारी किया गया है।
बारिश के साथ बढ़ी बाढ़ की चिंता
लगातार बारिश का असर बिहार की नदियों पर साफ दिखाई दे रहा है। गंगा, कोसी, कर्मनाशा, पुनपुन और अदरी समेत कई नदियों का जलस्तर बढ़ने से निचले इलाकों में पानी पहुंचने लगा है। कई जगह सड़क और पुल के ऊपर से पानी बह रहा है, जिससे आवागमन प्रभावित हुआ है।
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जहानाबाद में दरधा और जमुने नदी का जलस्तर बढ़ने से निचले इलाकों में पानी घुस गया है। जाफरगंज पुल के ऊपर से करीब दो फीट पानी बहने की सूचना है। इसके बावजूद कुछ लोग जोखिम उठाकर पुल पार करते नजर आए।
येलो अलर्ट के बीच निचले इलाकों पर नजर
बारिश के येलो अलर्ट के बीच प्रशासन और स्थानीय लोगों को निचले इलाकों में विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत है। नदी किनारे बसे गांवों में पानी बढ़ने की स्थिति लगातार बदल रही है। भागलपुर के नवगछिया में गंगा के कटाव से करीब सौ साल पुराना चैती दुर्गा मंदिर नदी में समा गया। इससे आसपास की आबादी और रेलवे लाइन पर भी खतरा बढ़ गया है।
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भागलपुर के मदरौनी गांव में कोसी का जलस्तर बढ़ने से कई घरों में पानी पहुंच गया है। नेपाल के बराह क्षेत्र में जलस्तर बढ़ने का असर कोसी पर भी पड़ रहा है। मंगलवार सुबह कोसी बैराज से करीब 1.85 लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने की जानकारी सामने आई है।
किशनगंज में नदी पार कर ले जाना पड़ा जनाजा
किशनगंज के बहादुरगंज प्रखंड में बाढ़ और जलभराव की गंभीर स्थिति का एक मार्मिक मामला सामने आया है। नोदिया टोली-बैसा घाट पर पुल नहीं होने के कारण ग्रामीणों को खकवा नदी पार करने में परेशानी हो रही है।

सोमवार को शहनसवी बेगम के शव को अंतिम संस्कार के लिए परिजन और ग्रामीण नदी के पानी से होकर ले गए। बरसात में नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद यह रास्ता बेहद खतरनाक हो जाता है। दर्जनों गांवों के हजारों लोगों के लिए पुल का अभाव लंबे समय से बड़ी समस्या बना हुआ है।
बक्सर में कर्मनाशा नदी उफान पर
बक्सर में गंगा का जलस्तर बढ़ने के साथ सहायक नदियों पर भी दबाव बढ़ गया है। कर्मनाशा नदी का पानी सिकरौल गांव के रास्ते पर करीब तीन फीट तक चढ़ गया है। बनारपुर समेत आसपास के इलाकों में भी पानी बढ़ने से लोगों की आवाजाही मुश्किल हो गई है।
ग्रामीणों के मुताबिक, नदी का जलस्तर इसी गति से बढ़ता रहा तो घरों में पानी प्रवेश करने का खतरा पैदा हो सकता है। इसके बावजूद कई लोग जरूरी काम के लिए जलमग्न रास्तों से आने-जाने को मजबूर हैं।
येलो अलर्ट में कैमूर पहाड़ी क्षेत्र बंद
कैमूर पहाड़ी इलाके में पिछले दो दिनों से हुई भारी बारिश के कारण पहाड़ी नदियां और झरने उफान पर हैं। दुर्गावती, सुगवा, नौहट्टा के अवसानी, तिलौथू की तुतलाही और सासाराम की काव नदी में पानी का बहाव तेज हो गया है।
सुगवा नदी का पानी गुप्ता धाम के मुख्य द्वार तक पहुंच गया। धाम के सामने लगी करीब दर्जन भर दुकानें बाढ़ के पानी में बह गईं। सुरक्षा को देखते हुए वन विभाग ने गुप्ता धाम आने-जाने वाले मार्ग को फिलहाल बंद कर दिया है। पर्यटकों और श्रद्धालुओं को पहाड़ी नदियों तथा झरनों के पास नहीं जाने की सलाह दी गई है।
बेगूसराय में 50 हजार लोग बाढ़ से घिरे
बेगूसराय में गंगा के जलस्तर में फिलहाल कमी दर्ज की जा रही है, लेकिन इलाहाबाद, बनारस और बक्सर में पानी बढ़ने का असर आने वाले दिनों में यहां दिखाई दे सकता है। केंद्रीय जल आयोग के अनुसार करीब दो दिनों बाद जलस्तर फिर बढ़ने की संभावना है।

बछवाड़ा, तेघड़ा, बरौनी, मटिहानी, बलिया और साहेबपुर कमाल के दियारा इलाकों में बाढ़ का असर है। शाम्हो प्रखंड पूरी तरह प्रभावित बताया जा रहा है। बेगूसराय नगर निगम क्षेत्र के कुछ हिस्सों में भी बाढ़ का आंशिक प्रभाव है। फिलहाल करीब 50 हजार लोग बाढ़ के पानी से घिरे हुए हैं।
औरंगाबाद में 145 मिमी बारिश
पिछले 24 घंटे में औरंगाबाद में सबसे ज्यादा 145 मिमी बारिश दर्ज की गई। इसके अलावा बक्सर में 67 मिमी, भोजपुर और रोहतास में 57-57 मिमी तथा गया में 48 मिमी बारिश हुई।
औरंगाबाद में लगातार दो दिनों की बारिश और झारखंड के पहाड़ी इलाकों से आने वाले पानी के कारण अदरी और पुनपुन समेत कई नदियां उफान पर हैं। शहर के बिरतपुर, जरमाखाप, चौधरी नगर और नवाडीह के कुछ हिस्सों में पानी पहुंच गया है। कई पुलों के ऊपर से पानी बहने के कारण मोहल्लों के बीच संपर्क प्रभावित हुआ है।
बंगाल की खाड़ी के सिस्टम से सक्रिय हुआ मानसून
मौसम विभाग के मुताबिक उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी और आसपास बना मौसमी सिस्टम पूर्वी भारत में बारिश की गतिविधियों को बढ़ा रहा है। इसी के प्रभाव से बिहार में मानसून फिर सक्रिय हुआ है।
प्रदेश में मानसून की स्थिति देखते हुए प्रदेश के 14 जिलों में बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। इस अलर्ट के बाद मौसम विभाग ने भी लोगों को अपनी रिपोर्ट में सावधान रहने की सलाह दी है। वहीं कई जिलों में बारिश का येलो अलर्ट होने से बाढ़ की संभावनाएं बढ़ गई है।

हालांकि, पूरे मानसून सीजन में बिहार में अब तक सामान्य से करीब 40 प्रतिशत कम बारिश हुई है। सामान्य तौर पर अब तक 775.7 मिमी बारिश होनी चाहिए थी, जबकि 469.5 मिमी बारिश ही दर्ज की गई है।
आने वाले दिनों में बारिश की गतिविधि अलर्ट से जहां सूखे की स्थिति में कुछ राहत मिल सकती है, वहीं नदियों के बढ़ते जलस्तर के कारण बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। प्रशासन और लोगों को मौसम विभाग की अलर्ट पर नजर रखते हुए नदी, पुल और तेज बहाव वाले रास्तों पर जोखिम लेने से बचने की जरूरत है।
राज कुमार की रिपोर्ट
